The Dragonfly Effect

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The Dragonfly Effect

Jennifer Aaker, Andy Smith with Carlye Adler
समाज में बदलाव लाने के लिए सोशल मीडिया का सही इस्तेमाल करना सीखें

दो लफ्जों में
सोशल मीडिया बहुत ताकतवर टूल है। इससे पल भर में किसी की इमेज बन और बिगड़ सकती है। आज जिंदगी के लगभग काम के लिए हम सोशल मीडिया की तरफ देखते हैं। अगर आप किसी अच्छे मकसद को लेकर आगे बढ़ना चाहते हैं तो सोशल मीडिया आपके बहुत काम आ सकता है। आपको बस इसके लिए सही तरीका अपनाने की जरूरत है जो कि ये किताब आपको समझाती है।

  ये किताब किनको पढ़नी चाहिए
- ऐसे लोग जो सोशल मीडिया से जुड़े हैं
- जो लोग दुनिया में अच्छे बदलाव लाना चाहते हैं
- जो लोग दुनिया तक अपनी बात पहुंचाना चाहते हैं 


लेखकों के बारे में
जेनिफर एकर, सोशल साइकोलॉजिस्ट और मार्केटर हैं। वे स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस में मार्केटिंग की प्रोफेसर हैं। उनका काम द इकोनॉमिस्ट और द न्यूयॉर्क टाइम्स जैसी कई नामचीन मैग्जीनों में जगह बनाता रहता है। एंडी स्मिथ एक अनुभवी टेक्निकल मार्केटिंग एक्सपर्ट और जेनिफर के पति हैं। कार्ली एडलर एक जानी मानी लेखिका और अवॉर्ड विनिंग जर्नलिस्ट हैं।

ड्रैगनफ्लाई इफेक्ट की मदद से आप सोशल मीडिया को बहुत अच्छी तरह अपने फेवर में इस्तेमाल कर सकते हैं।
आप चाहें या न चाहें पर सोशल मीडिया आपकी जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। ट्विटर और फेसबुक जैसे प्लेटफार्म की मदद से आप कुछ ही पलों में पूरी दुनिया से जुड़ सकते हैं। इससे एक फायदा ये भी होता है कि आपको नई-नई जानकारी मिलती रहती है। रोजाना लाखों लोग फेसबुक पर लॉग इन करते हैं। दूसरों के साथ अपनी फोटो, स्टेटस, अपनी बातें शेयर करते हैं। YouTube पर हर मिनट इतने वीडियो अपलोड होते हैं जिनको देखने के लिए बीस घंटे चाहिए। हर एक सेकंड में सैकड़ों ट्वीट किए जाते हैं। ये डेटा दिन ब दिन बढ़ता ही जा रहा है। ऐसा समझ लीजिए कि सोशल मीडिया पर जानकारी की बाढ़ सी आ गई है। इसलिए अगर आप किसी खास मकसद से सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो आपको बहुत ध्यान से अपनी बात रखनी होगी वरना आप समुद्र में एक बूंद बनकर रह जाएंगे। ऐसा नहीं है कि लोग आपकी बातें नहीं सुनेंगे पर उनका ध्यान आकर्षित करना मुश्किल टास्क है। ये किताब आपको सिखाती है कि सोशल मीडिया के लिए कैसी स्ट्रैटेजी होनी चाहिए ताकि इस मुश्किल को आसान किया जा सके। 

तो चलिए शुरू करते हैं!

पूरी दुनिया में ड्रैगनफ्लाई इकलौता ऐसा पतंगा है जो बहती हवा के बीच किसी भी दिशा में उड़ सकता है। इसके लिए वो अपने खूबसूरती से अपने पंखों का तालमेल बनाता है। इसी तरह अगर आप चाहते हैं कि आप सोशल मीडिया में ऐसे ही खूबसूरती से जम जाएं तो आपके पास भी चार पंख हैं। लेकिन इनका मनचाहा फायदा तभी मिल सकता है जब आप सही तरह से इनका तालमेल बिठाएं। इस बात को अच्छी तरह समझने के लिए देखते हैं कि कीनिया की एक संस्था Samasource कैसे इसे फॉलो करती है। ये संस्था गरीब देशों में बेरोजगार महिलाओं और युवाओं के लिए डिजिटल वर्क ढूंढती है। अब सबसे पहले नंबर पर आता है फोकस विंग। आपको एक पक्के लक्ष्य की पहचान करनी है जिसके लिए आप दूसरों को मोटिवेट करना चाहते हैं। Samasource का फोकस सिर्फ महिलाओं, युवाओं और शरणार्थियों को काम दिलवाना है ताकि वो अपने पैरों पर खड़े होकर सम्मान से जी सकें। अगले नंबर पर आता है ग्रैब अटेंशन विंग। अगर आप लोगों तक अपनी बात रखना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले उनका ध्यान आकर्षित करना होगा। अपनी पब्लिसिटी में Samasource इस बात पर जोर देती है कि बेरोजगारी सामाजिक बुराइयों को जन्म दे सकती है जैसे कि लूटपाट, अपराध और आतंकवाद। ये  बातें निश्चित रूप से सुनने वालों का ध्यान खींचती हैं। तीसरा है एंगेज विंग। अगर आप चाहते हैं कि लोग आपके मकसद में बढ़ चढ़कर भागीदारी निभाएं तो आपको अपने काम और उनकी जरूरत के बीच एक कनेक्शन का एहसास दिलाना होगा। Samasource इसके लिए उन लोगों की स्टोरी बताती है जो जरूरतमंद हैं। लेकिन इसके साथ उनको काम देने वालों की कहानियां भी बताई जाती हैं। इस तरह लोगों का भावनात्मक जुड़ाव बनता है। आखिरी नंबर पर आता है टेक एक्शन विंग। आपको दूसरों को तरह-तरह के ऑप्शन देने होंगे।  जिससे वो सबसे सूटेबल रास्ता चुन सकें। इस तरह आप अपने काम को अच्छी तरह आगे बढ़ा पाएंगे। यहां Samasource के पास तीन ऑप्शन होते हैं। डोनर अपने हिसाब से कोई भी चुन सकते हैं। पहला ये कि डोनर Samasource को काम आउटसोर्स करे। दूसरा है कि वो पैसे डोनेट करें। तीसरे नंबर पर है कि वो ऑर्गनाइजेशन को प्रमोट करें। इस तरह से ज्यादा से ज्यादा लोग इनसे जुड़ पाते हैं क्योंकि उनको बहुत फ्लेक्सिबिलिटी मिलती है।

अपने टार्गेट ग्रुप को ध्यान में रखते हुए ऐसी प्लानिंग करें जो प्रेक्टिकल और क्लीयर हो।
ड्रैगनफ्लाई अप्रोच के पहले विंग पर काम करने के लिए आपको बस किसी एक लक्ष्य पर ध्यान रखने की जरूरत है। इसके लिए आपको एक शब्द याद रखना है HATCH. यानि Humanistic, Actionable, Testable, Clear and Happy. अब इनको समझते हैं। सबसे पहले तो आपका गोल ह्यूमनिस्टिक होना चाहिए। इसमें आपको अपने टार्गेट ग्रुप को अच्छी तरह समझने पर ध्यान लगाना होता है। जिन लोगों के साथ या जिनके लिए आप काम करना चाहते हैं उनके संपर्क में रहना शुरू करें। ये जानने की कोशिश करें कि उनकी जरूरतें क्या हैं? कौन सी बातें हैं जो उनको प्रभावित करती हैं। वो आपके टार्गेट से क्या समानता रखते हैं। इसका एक बढ़िया उदाहरण प्रॉक्टर एंड गैंबल जैसी बड़ी कंपनियां हैं। वे अपने प्रोडक्ट्स एंड यूजर को ध्यान में रखकर डेवलप करते हैं। दूसरी बात है कि आपका गोल एक्शनेबल होना चाहिए। यानि ऐसा कुछ जिसे पाना संभव हो। आप भले ही लांग टर्म गोल पर काम कर रहे हों पर आसानी के लिए आपको इसे छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर काम करना होगा। अगली बात ये कि आपका टार्गेट ऐसा हो जिसकी तरक्की आप माप सकें। यानि आप इस बात का रिकॉर्ड रख सकें कि आप कितने समय में क्या हासिल करते रहे हैं। ये डेटा आपको तो मोटिवेट करता ही है आडियंस को भी आपकी तरफ और मजबूती से जोड़ता है। क्योंकि आपसे जुड़े लोगों के लिए भी ये एक जीत होती है जिसकी वो खुशियां मनाते हैं। इस तरह से आपके काम में एक clearity बनती जाती है। अब HATCH की आखिरी बात ये है कि आपका टार्गेट ऐसा होना चाहिए जिस पर काम करके लोग खुश हो सकें। ये सिर्फ आपके लिए नहीं बल्कि दूसरों के लिए भी मीनिंगफुल हो। ऐसा तभी होगा जब आप एक कलेक्टिव अप्रोच और विजन पर काम करेंगे। आपको लोगों को ये समझाना होगा कि वो भला आपके सपोर्ट में क्यों आएं। 

ग्रैब अटेंशन विंग को मजबूत करने के लिए आपको दूसरों से हटकर कुछ करना होगा ताकि लोग आपको नजरअंदाज न कर सकें।

सोशल मीडिया पर हर मिनट नए कंटेंट की भरमार हो जाती है। इसलिए इस बात के बहुत चांस हैं कि लोग आपकी मौजूदगी को जल्द ही भूल जाएंगे। अगर आप चाहते हैं कि लोग आपको न भूलें तो उनकी नजरों में बने रहिए। कहा भी जाता है ना आउट ऑफ साइट, आउट ऑफ माइंड। पर ये इतना भी आसान नहीं है। तो क्या किया जाए? इसका जवाब है क्रिएटिविटी। वो मत करिए जो सब करते हैं। दूसरों से अलग बनिए। लोगों को अहमियत दीजिए। मान लीजिए आप फेसबुक पर कोई प्रोग्राम कर रहे हैं तो एक कॉमन इनवाइट की जगह सबको पर्सनल मैसेज भेजिए। पढ़ने वाले को महसूस होगा कि उसका शामिल होना मायने रखता है। वो आपके प्रोग्राम में ज्यादा रुचि लेगा। इसी तरह अगर आप इनवाइट के साथ प्रोग्राम की वजह भी बताएं तो सामने वाला और खुले मन से शामिल होगा। आम जिंदगी से जुड़ा एक उदाहरण ले लीजिए। "कल शाम मेरे घर पार्टी है आप सब आना।"या फिर "मेरा प्रमोशन हुआ है इसलिए मैं कल शाम कुछ करीबी और खास लोगों के साथ सेलीब्रेट करना चाहता हूँ। आप समय निकालकर अपने परिवार के साथ जरूर आइए, मुझे अच्छा लगेगा। मैं आपका इंतजार करूँगा।"अब बताइए आप इन दोनों में से कहां जाना पसंद करेंगे? 

आपका कम्युनिकेशन अलग हटकर होना चाहिए। क्योंकि अब लोग अपना ज्यादातर समय ऑटोपायलट मोड में रहते हैं। यानि मशीन की तरह मैसेज पढ़ा फिर डिलीट और कई बार तो पढ़ा भी नहीं। कोई पोस्ट scroll की और सरसरी निगाह डाल ली। उन्हें जगाने के लिए एक झटके की जरूरत पड़ेगी। मार्केटिंग गुरु सेथ गोडिन ने कहा है कि लोगों को "बैंगनी गाय"दिखाइए। क्योंकि सफेद और काली तो सबने देखी है। फिर इसमें नया क्या रह गया? यानि कुछ ऐसा कीजिए जो दूसरों से हटकर हो ताकि लोगों का ध्यान खींचे। 

आपको हमेशा कानों की जगह आंखों पर फोकस करना चाहिए। यानि अपनी बात कहने की जगह दिखाने की ज्यादा से ज्यादा कोशिश करें। लंबे आर्टिकल की जगह फोटो और वीडियो ज्यादा असर डालते हैं। स्टडी भी ये कहती है कि सुनी हुई चीज से ज्यादा देखी हुई चीज याद रहती है। एक जापानी संस्था है जो मोटापे और भूख के खिलाफ काम करती है। इन्होंने बहुत आकर्षक लोगो बनाकर लोगों का ध्यान खींचा था। दो लंच टेबल जिनमें एक भरा हुआ था और दूसरा खाली और इसे एक क्रिएटिव नाम दिया "टेबल फॉर टू।"यही बात अगर किसी आर्टिकल से या बोलकर लोगों तक पहुंचाई जाती तो क्या इतना असर होता? अगर आप सच में अपने कैंपेन को मेमोरेबल बनाना चाहते हैं तो सेंस ऑर्गन को भरपूर टार्गेट करें। उदाहरण के लिए किसी वीडियो में relevant बैकग्राउंड म्यूजिक डालकर आप उसे बहुत प्रभावशाली बना सकते हैं।

एंगेज विंग को मजबूत करने के लिए किस्से और कहानियों की मदद लीजिए।
जब से इंसानों ने लैंग्वेज डेवलप की है तबसे किस्से कहानियां हमारी जिंदगी का एक हिस्सा बनी हुई हैं। पुराने जमाने में लोगों और पीढ़ियों तक जानकारी पंहुचाने के लिए हमने कहानियों का सहारा लिया है। आज भले ही हम अलाव जलाकर कहानियां कहते सुनते नहीं हैं फिर भी वो कम्युनिकेशन का एक महत्वपूर्ण माध्यम हैं। क्योंकि कहानियां लोगों का दिल छू लेती हैं। लोग कहानियों के किरदार में खुद को और अपने आसपास के लोगों को देखने लगते हैं। कोई भी फैक्ट इतना गहरा असर नहीं कर सकता जितना कहानी कर सकती है। KIVA नाम का एक नॉन प्रॉफिट ऑर्गनाइजेशन है। ये कम इन्कम वाले लोगों को स्टार्टअप के लिए माइक्रोलेंडिंग की सुविधा देता करता है। KIVA आपको किसी नोबल आइडिया के लिए दान करने को नहीं कहता है। बल्कि आपको ऐसी कहानियां बताता है जहां आम लोगों ने हौसला दिखाया, रिस्क लिया और अपना खुद का बिजनेस सेटअप किया। इस वजह से लोन लेने वाले लोगों के साथ अच्छी तरह कनेक्ट कर पाता है। KIVA की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वो अब तक दुनियाभर के हजारों लोगों को अपने साथ जोड़ चुका है। आप किस तरह लोगों को अपने साथ जोड़ सकते हैं? सबसे पहले अपनी बात इस तरह तैयार करें कि वे लोगों की जरूरतों और भावनाओं के साथ जुड़ सके। इसके लिए सबसे पहले आपको ये समझना होगा कि लोग क्या चाहते हैं। याद रखिए जब तक आप खुद पर भरोसा नहीं करते लोग आप पर भरोसा नहीं कर पाएंगे। और तो और जब तक कोई बात आपके दिल में जगह न बना पाए तो आप दूसरों ये उम्मीद कैसे करेंगे? कवि रॉबर्ट फ्रॉस्ट ने कहा है "जब तक लिखने वाले की आंखों में आंसू नहीं होंगे तो पढ़ने वाले की पलकें कैसे भीगेंगी।"आपको ये समझने की जरूरत है कि आप सबसे ज्यादा किस चीज की परवाह करते हैं। ऐसी कौन सी बात है जो आप पर सबसे ज्यादा असर डालती है। क्योंकि यही चीज आपके आडियंस पर भी असर डाल सकती है। आपको अपनी बात कहने के लिए सही माध्यम ढूंढना होगा। कुछ बातों के लिए एक ईमेल या टेक्स्ट मैसेज सबसे अच्छा हो सकता है जबकि कुछ बातों को ट्विटर जैसे पब्लिक प्लेटफार्म पर रखना ज्यादा असरदार होता है। क्योंकि इस तरह ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचा जा सकता है। अपने काम को आसान और मजेदार बनाइए ताकि लोगों को आपसे जुड़कर अच्छा लगता रहे। ड्रैगनफ्लाई इफेक्ट का चौथा और आखिरी विंग जहां आप सचमुच जादू कर सकते हैं। हालांकि कोई भी जादू चलाना मुश्किल होता है पर कुछ बातें ध्यान में रखकर आप इसे आसान जरूर बना सकते हैं। सबसे पहले लोगों के लिए आगे कदम बढ़ाना आसान बनाइए। "सेव एनर्जी"या "सेव द वर्ल्ड"कह देने भर से कुछ नहीं होगा। आप उनको दिखाइए कि एनर्जी एफिशिएंट बल्ब या अप्लाएंस कैसे काम करते हैं और इसमें पर्यावरण का फायदा तो है ही, इस्तेमाल करने वाले का भी फायदा है। आपको लोगों को ये एहसास दिलाना होगा कि उनकी भागीदारी मायने रखती है। अगर वो समय निकालकर आपकी बात सुन रहे हैं तो आप भी उनको एप्रिशिएट कर रहे हैं। जब लोगों को ये लगता है कि उनकी एक छोटी सी कोशिश भी बड़ा असर डाल सकती है तो वो और बढ़ चढ़कर आपका साथ देते हैं। आपको बस ये ध्यान रखना है कि लोगों की रुचि समझकर उनको ऑप्शन दीजिए। हर कोई कागज या पानी बचाने की बात उतनी गहराई से नहीं समझेगा। शाकाहार अपना लेना सबके लिए संभव नहीं है। इसलिए पहले ये पता करिए कि सुनने वाला आखिर क्या सुनना चाहता है और वो क्या कर सकने की स्थिति में है। 

आपको अपना कैंपेन मजेदार बनाने की कोशिश करनी चाहिए। हम सबको हँसी-मजाक, मनोरंजन और मन बहलाना अच्छा लगता है। आप भी ऐसी एक्टिविटी बनाइए। इसके अलावा रेफरेंस देने पर ईनाम जैसी बातें भी जोड़ी जा सकती हैं। अपने कैंपेन को पूरी तरह क्लीयर बनाएं। लोगों के साथ पूरी जानकारी साझा करें। उनके विचारों को महत्व दें। इस तरह आपको ज्यादा से ज्यादा आइडियाज तो मिलेंगे ही लोग भी आपके सपोर्ट में आगे आएंगे। क्योंकि आपसे जुड़कर उनको स्पेशल फील होगा।

अब एक केस स्टडी देखते हैं। जहां एक छोटी सी लड़की ने नींबू पानी का स्टैंड लगाया और सोशल मीडिया की मदद से अपना गोल पूरा किया।
साल 1996 में मैनचेस्टर में एलेक्जेंड्रा स्कॉट का जन्म हुआ। एक साल की उम्र पूरी करने से पहले ही उसे न्यूरोब्लास्टोमा हो गया। ये बच्चों को होने वाला एक तरह का कैंसर है। अपने इलाज के लिए पैसे इकट्ठे करने की कोशिश में चार साल की उम्र में एलेक्स ने अपना खुद का नींबू पानी स्टैंड शुरू किया। पहली ही गर्मियों में उसने और उसके भाई ने $2000 जुटा लिए। उसके बाद के सालों में एलेक्स और उसका परिवार हर गर्मियों में नींबू पानी का स्टैंड खोलता। ये बात दुनिया भर में फैलती गई और दूसरे लोगों को भी इसी तरह के स्टैंड खोलने की प्रेरणा मिली। लोग इस कमाई को डोनेट कर देते थे। आठ साल की उम्र में एलेक्स का निधन हो गया। पर जाने से पहले वो बच्चों के कैंसर रिसर्च के लिए एक मिलियन डॉलर से ज्यादा इकट्ठा कर गई। आज एलेक्स का लेमोनेड स्टैंड फाउंडेशन (ALSF) बच्चों को अपना नींबू पानी स्टैंड लगाकर कैंसर रिसर्च के लिए फंड इकट्ठा करने के लिए मोटिवेट करता है। अब तक 80 मिलियन डॉलर से ज्यादा डोनेशन आ चुकी है। ALSF की सफलता की एक वजह ये भी है कि उसने ड्रैगनफ्लाई इफेक्ट चारों विंग्स पर अच्छी तरह काम किया है। फोकस- ALSF अपने हर मैसेज में एलेक्स और ALSF के मकसद पर फोकस पर करता है। यानि बच्चों के कैंसर का जड़ से खात्मा। 

ग्रैब अटेंशन- अमेरिका में गर्मी के मौसम में लोग सालों से नींबू पानी का स्टैंड लगाते रहे हैं। लेकिन ALSF बिल्कुल अलग वजह से ऐसे स्टैंड लगाता है। बच्चों के कैंसर रिसर्च के लिए। ये एक बिल्कुल ही अलग बात है। 

एंगेजमेंट- ALSF, नन्ही एलेक्स की भावनात्मक कहानी सुनाकर लोगों के दिलों में जगह बनाता है। एक ऐसी बच्ची जो खुद मौत की कागार पर खड़ी थी पर उसने दूसरों की मदद करने का सोचा।  

टेक एक्शन- ALSF लोगों, स्कूलों और कंपनियों को उससे जुड़ने का एक आसान और मजेदार रास्ता देता है। नींबू पानी का स्टैंड लगाना बहुत आसान है और मजेदार भी।

कुल मिलाकर
समाज में बदलाव लाने के लिए बहुत अमीर या रुतबे वाला होना जरूरी नहीं है। सोशल मीडिया की पहुंच बहुत गहरी है और ये कम से कम कीमत पर सबको अवेलेबल है। इसकी मदद से आप दुनिया के सामने अपनी बात रख सकते हैं और लोगों को अपने साथ जोड़ सकते हैं। 

 

क्या करें

अपनी बात कहानी और विजुअल्स के माध्यम से रखें। ये टेक्स्ट और आर्टिकल से कहीं ज्यादा असरदार होते हैं। वीडियो, कहानी और तस्वीरों से अपनी बात कहें। इससे लोगों पर ज्यादा असर होता है। 

 

येबुक एप पर आप सुन रहे थे The Dragonfly Effect By Jennifer Aaker, Andy Smith with Carlye Adler.

 

ये समरी आप को कैसी लगी हमें yebook.in@gmail.com  पर ईमेल करके ज़रूर बताइये. 

आप और कौनसी समरी सुनना चाहते हैं ये भी बताएं. हम आप की बताई गई समरी एड करने की पूरी कोशिश करेंगे. 

अगर आप का कोई सवाल, सुझाव या समस्या हो तो वो भी हमें ईमेल करके ज़रूर बताएं. 

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Keep reading, keep learning, keep growing.


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