Roman Krznaric
वो काम खोजना सीखो जो जिसमे आपको मज़ा आए
दो लफ्जों में
हाउ टू फाइंड फुलफिलिंग वर्क ( How to Find Fulfilling Work ) में हम देखेंगे कि किस तरह से आप वो काम खोज सकते हैं जिसे करने में आपको मजा आए। यह किताब हमें बताती है कि किस वजह से बहुत से लोग अपने काम से खुश नहीं हैं और ना खुश हो ने के बावजूद भी वे क्यों उस काम को किए जा रहे हैं। यह किताब हमें बताती है कि किस तरह से आप इस जाल से खुद को निकाल सकते हैं और अपना मनपसंद काम खोज सकते हैं।
यह किसके लिए है
-वे जो अपने काम से खुश नहीं हैं।
-वे जो अपना मनपसंद काम खोजना चाहते हैं।
-वे जो अपना कैरियर नहीं तय कर पा रहे हैं।
लेखक के बारे में
रोमन क्रज़नेरिक ( Roman Krznaric ) एक फिलासफर हैं जो कि समाज को बदल कर रख देने वाले आइडियाज़ के बारे में बात करते हैं। वे एक लेखक हैं जो कि अपनी किताबों के लिए जानें जाते हैं। उनकी कुछ फेमस किताबों के नाम हैं - एंपैथी, द वंडरबाक्स और हाउ टू फाइंड फुलफिलिंग वर्क जिन्हें अब तक 20 से ज्यादा भाषाओं में ट्रांस्लेट किया गया है।
यह किताब आपको क्यों पढ़नी चाहिए
बचपन में हम सभी का ख्वाब होता है कि हम बड़े होकर कुछ महान काम करें। लेकिन जैसे जैसे हम बड़े होते हैं, हम असलीयत को पहचानने लगते हैं और अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनी ख्वाहिशें कुर्बान कर देते हैं। आज बहुत से लोग अपने काम से खुश नहीं हैं लेकिन फिर भी मजबूरी में उन्हें वो काम करना पड़ रहा है।
लेकिन क्या जरूरी है हम सारी उम्र इसी तरह से जरूरतों को पूरा करने में बिताएँ? क्या कुछ ऐसा नहीं हो सकता जिससे आप अपनी जरूरतों के साथ साथ अपने सपने और अपनी ख्वाहिशें भी पूरी कर सकें? यह किताब हमें बताती है कि किस तरह से आप ऐसा कर सकते हैं। यह किताब हमें वो सारी बातें बताती है जिस वजह से कुछ लोग खुद को एक ही नौकरी में फँसा हुआ पाते हैं और उससे निकल नहीं पाते। साथ ही यह किताब हमें बताती है कि किस तरह से आप अपने मनचाहे काम को खोज सकते हैं।
-क्यों हम आज अपनी नौकरियों से खुश नहीं हैं।
-किस वजह से बहुत से लोग अपने काम को चाह कर भी नहीं छोड़ पा रहे हैं।
-किस तरह से आप यह पता कर सकते हैं कि आपको क्या अच्छा लगता है।
आज के वक्त में हम अपने काम से कुछ ज्यादा उम्मीदें रखते हैं जिस वजह से हम उससे असंतुष्ट हैं।
आज लगभग 50% लोग यह कहते हैं कि वे अपने काम से खुश नहीं हैं। यहाँ तक कि आप इस समय जो काम कर रहे हैं, अगर आपको फिर से शुरुआत करने का मौका मिले तो आप उस काम को नहीं चुनेंगे। इसके पीछे की वजह यह है कि आज के वक्त में हम सिर्फ यह नहीं चाहते कि हमें हमारे काम से पैसे मिले, बल्कि हम यह चाहते हैं कि हमारा काम हमारी जिन्दगी को मतलब दे।
पहले के वक्त के लोग सिर्फ यह चाहते थे कि वे अपने बिल को समय पर भर पाएं और अपने परिवार के लिए खाने और अच्छे कपड़ों का इंतजाम कर सकें। लेकिन आज के वक्त में हम इन चीजों को इंतजाम कर ले रहे हैं और अब हमें कुछ ज्यादा चाहिए।
आज हम चाहते हैं कि हमारे काम के लिए हमें इज्जत मिले, लोग हमारे हुनर को समझें और हमारा काम हमारी जिन्दगी को एक अर्थ दे। क्योंकि हर कोई इन चीज़ों को नहीं पा पा रहा, हर कोई अपने काम से खुश नहीं हैं।
इस समस्या में अगर आप भी फँसे हैं, तो आपके पास दो रास्ते हैं। या तो आप अपनी उम्मीदों को कम कर दें या फिर अपना काम छोड़कर कोई दूसरा काम खोज लें जो कि आपको अच्छा लगता है।
पहले आप्शन को चुनने वाले लोगों का कहना है कि काम हमेशा से ही उबाऊ हुआ करता था। इसलिए हमें अपने काम में खुशी ना खोजकर उसके बाहर खुशी खोजने की कोशिश करनी चाहिए। लेकिन दूसरे आप्शन को चुनने वाले इस तरह से जिन्दगी नहीं जीना चाहते। वे नहीं चाहते कि मरते वक्त वे इस बात का अफसोस मनाएं कि उन्होंने अपनी जिन्दगी एक बकवास काम करने में बिता दी और कभी कुछ अलग करने की कोशिश नहीं की।
इस किताब में हम दूसरे आप्शन को चुन रहे हैं और उसके हिसाब से बात करने वाले हैं कि किस तरह से आप अपना मनपसंद काम खोज सकते हैं।
आज के वक्त में हमले पास इतने सारे आप्शन हैं कि हम उनमें से किसी एक का चुनाव नहीं कर पाते।
पहले के वक्त में हमारे पास कुछ ज्यादा आप्शन नहीं थे। और यह हमारे लिए एक तरह से अच्छा था क्योंकि हमारा दिमाग बहुत सारे आप्शन को एक साथ प्रासेस नहीं कर पाता। इस वजह से जब हमारे पास बहुत से आप्शन होते हैं, तो हम एक तरह से पैरालाइज़ हो जाते हैं और उसमें से एक को नहीं चुन पाते।
आज अगर आप किसी कैरियर की वेबसाइट पर जाइए तो आपको 12,000 से ज्यादा कैरियर के नाम मिलेंगे। अब अगर आप इतने सारे आप्शन में से किसी एक को चुनने के लिए निकलेंगे, तो आप शायद ही किसी एक काम को खोज पाएंगे जिससे आपकी सारी जरूरतें पूरी हो सकें।
ज्यादा आप्शन होना एक बार के लिए अच्छा लग सकता है। लोग सोचते हैं कि ज्यादा आप्शन होने से वे एक चीज़ के साथ बंधे न रहकर कुछ दूसरा चुन सकते हैं। लेकिन जब यह आप्शन कुछ ज्यादा ही ज्यादा हो जाते हैं, तो यह हमें पैरालाइज़ कर देता है। इसमें से हम अपने लिए बेस्ट आप्शन को नहीं चुन पाते। हमें यह डर लगता रहता है कि क्या होगा अगर हमने गलत आप्शन चुन लिया तो। इसलिए यह सारे आप्शन एक तरह से हमारे लिए नुकसानदायक हैं।
अगर आप वाकई अपने काम से खुश नहीं हैं, तो आपको उसे बदलने के बारे में सोचना चाहिए।
कभी कभी हम चाह कर भी अपने काम को नहीं छोड़ पाते हैं। इसके पीछे बहुत सी वजह हो सकती है। सबसे पहली वजह यह है कि हम छोटी उम्र से ही एक खास तरह के काम को करने के लिए पढ़ाई करते रहते हैं। बाद में कालेज की पढ़ाई पर बहुत सारा पैसा खर्च करने के बाद हम उस नौकरी को हासिल कर पाते हैं। लेकिन अब जब हमें वो काम पसंद नहीं आता, तो हम उसे छोड़ नहीं सकते, क्योंकि हमने उसके पीछे बहुत मेहनत की है।
समस्या यह है कि हमें छोटी उम्र में ही अपने कैरियर का चुनाव करने के लिए कहा जाता है। एक 15 साल के बच्चे को यह नहीं पता होता कि उसका इंट्रेस्ट और पैशन क्या है और वो किस काम में माहिर है। बचपन में वे अपने माता पिता के कहने पर एक कैरियर को चुन लेते हैं। बाद में चलकर उसे यह एहसास होता है कि वो यह नहीं पढ़ना चाहता। लेकिन उसे यह एहसास तब होता है जब वो बहुत सारा पैसा खर्च कर चुका होता है।
इस वजह से हम उस काम को नहीं छोड़ना चाहते जो हम इस समय कर रहे हैं। अब जब हमारे अंदर यह खयाल आता है कि हमें कुछ मजेदार काम खोजने के लिए निकलना चाहिए, तो हमें इस बात का पछतावा होने लगता है कि हमारा वे सारा पैसा और मेहनत बेकार हो जाएगा।
लेकिन साथ ही एक दूसरा पछतावा भी हमें आगे परेशान कर सकता है। जब आपकी उम्र बीत जाएगी, तो आपको यह पछतावा होगा कि आपने कभी अपने हालात को बदलने के लिए कदम नहीं उठाए। आपको यह पछतावा होगा कि आपने एक बार मिली जिन्दगी को एक बकवास सा काम करने में बिता दिया।
रीसर्च में यह बात सामने आई कि मरने से पहले लोगों को जो सबसे बड़ा पछतावा होता है वो उस काम को ना करने का होता है जो वे कर सकते थे। मरने से पहले हर कोई यही दुख साथ लेकर मरता है कि काश जब उनके पास समय था तो उन्होंने वो काम कर लिया होता जो वे करना चाहते थे। अगर आप चाहते हैं कि आपको यह पछतावा ना हो, तो आप अपने काम को छोड़कर वो काम खोजने की कोशिश कीजिए जो आपको पसंद आए।
पैसा और स्टेटस आपको वो खुशी नहीं दे सकते जिसकी आप तलाश कर रहे हैं।
शायद आप ने यह बात बहुत बार सुनी होगी कि पैसे से आप खुशियाँ नहीं खरीद सकते। हाँ, इसका मतलब यह नहीं है कि पैसा जरूरी नहीं होता। आपको हर दिन के खर्चे के लिए इसकी जरूरत होगी, लेकिन एक बार जब आपके पास वो चीज़ें आ जाएंगी जो आप चाहते हैं, तो पैसे का कुछ खास महत्व नहीं रह जाएगा।
जब हम अपनी जरूरत से ज्यादा पैसा कमाते हैं, तो हमें उससे खुशी नहीं मिलती। इसके पीछे की वजह को हेडानिक ट्रेडमिल कहा जाता है। एक्साम्पल के लिए आप जब एक नई गाड़ी लेते हैं, तो एक वक्त आता है जब आप उससे बोर हो जाते हैं और आपको एक नई और बेहतर गाड़ी खरीदने का मन करने लगता है। लेकिन जब आप उस नई गाड़ी को ले लेते हैं, जो फिर से आप उससे बोर हो जाते हैं। इस तरह से आप एक के बाद एक अलग अलग चीज़ों के पीछे भागते रहते हैं और यह कभी खत्म नहीं होता।
कुछ ऐसा ही होता है जब आप नाम कमाने के पीछे भागते हैं। हम सभी चाहते हैं कि लोग हमें अच्छी नजर से देखें और हमें पसंद करें। लेकिन जब हम एक खास पोजिशन पर पहुंच जाते हैं, तो हम चाहते हैं कि हम और ऊपर की पोजिशन पर जाएं। उसके ऊपर की पोजिशन पा लेने के बाद हम यह चाहते हैं कि हम उससे भी ऊपर की पोजिशन पर जाएं। इस तरह से यह भी कभी खत्म नहीं होता और हम ज्यादा पाने के पीछे भागते रह जाते हैं।
इस तरह से अगर आप यह सोच रहे हैं कि पैसा और नाम मिलने से आप अपने काम से खुश रहेंगे, तो आपको एक बार फिर से सोच लेना चाहिए।
हमें उस काम को करने से खुशी मिलती है जिससे हम कुछ बदलाव ला पाते हैं।
जब छोटे बच्चों से यह पूछा जाता है कि वे आगे चलकर किस तरह का काम करना पसंद करेंगे, तो उनका जवाब हमेशा होता है कि वे कुछ ऐसा करना चाहेंगे जिससे दुनिया में कुछ अच्छा बदलाव आए। हम सभी यह चाहते हैं कि हम जो काम कर रहे हैं उससे हमारे लोगों का, हमारे प्लैनेट का और हमारे समाज का फायदा हो। रीसर्च यह बताते हैं कि जब हमें असल में इस तरह का काम करने के लिए दिया जाता है, तो हमारी खुशी सच में बढ़ जाती है।
साथ ही जब हमें लगता है कि हमारा काम एक्सपर्ट क्वालिटी का है, तो भी हमें खुशी होती है। हम चाहते हैं कि हम पूरी नैतिकता के साथ काम करें और दुनिया को एक बेहतर जगह बनाएं। लेकिन यहां पर बहुत से लोग यह कहेंगे कि बिजनेस और नैतिकता आपस में कुछ मिलते नहीं है। बहुत से लोगों का यह भी कहना है कि बिजनेस करने वाले सिर्फ अपना फायदा कमाने के बारे में सोचते हैं। लेकिन फिर भी हम बिजनेस के साथ नैतिकता को जोड़ सकते हैं और उससे दुनिया के लिए कुछ अच्छा काम कर सकते हैं।
एक्साम्पल के लिए अनीता रोडिक को ले लीजिए जो कि द बाडी शाप की फाउंडर हैं। वे द बाडी शाप को कुछ इस तरह से डिफाइन करती हैं - एक हेयर एन्ड स्किन कंपनी जो कि समाज में बेहतर बदलाव लाने के लिए काम करती है।
उन्होंने इस लाइन को साबित करने के लिए बहुत से नैतिक कदम भी उठाए हैं। उन्होंने द बाडी शाप के ट्रक पर गुमशुदा लोगों की फोटो चिपकाई और एक मैगज़ीन लाँच भी किया जिसे बेचने का काम बेघर लोग किया करते हैं। साथ ही वे ब्रैज़िल जैसे गरीब देशों से सामान खरीदने का काम करती हैं जिससे वहां के लोगों को फायदा हो।
इसी तरह से आप भी नैतिकता को अपने बिजनेस के साथ जोड़ सकते हैं। इससे आप समाज के लिए कुछ बेहतर कर पाएंगे जिससे आपको और आपके कर्मचारियों को खुशी मिलेगी।
उस काम को खोजिए जिसे करने में आप फ्लो को महसूस करते हों।
अक्सर जब हमारे परिवार में यह बात हो रही होती है कि हमें किस कैरियर को चुनना चाहिए, तो कोई न कोई यह जरूर कहता है - वो करो जो तुम्हें पसंद है। लेकिन सवाल यहाँ पर यह है कि आपको पसंद क्या है?
अगर आपको यह पता करना है कि क्या करना आपको पसंद है, तो आप यह देखिए कि किस काम को करने में आपको फ्लो महसूस होता है। फ्लो का मतलब है एक ऐसा स्टेट जिसमें आप अपने काम में इतना डूब जाते हैं कि आपको यह पता है नहीं लगता कि समय कब बीत गया। कुछ लोगों को म्यूजिक में फ्लो महसूस होता है, प्रोग्रामिंग में फ्लो महसूस होता है या फिर खाना पकाने में फ्लो महसूस होता है।
जब हम अपने काम में फ्लो को महसूस करते हैं, तो हम उस काम को बहुत अच्छे से कर पाते हैं। हम उससे ऊबते नहीं हैं और हमें समय बीतने का पता भी नहीं लगता। हम अपनी पूरी काबिलियत का इस्तेमाल करते हैं। अगर आप अपनी नौकरी में फ्लो को कभी महसूस नहीं करते, तो यह सिग्नल है कि आपको दूसरा काम खोज लेना चाहिए।
अब सवाल यह आता है कि किस तरह से आप उस काम को खोजेंगे जिसमें आपको फ्लो मिले। इसके लिए आप दो तरीके अपना सकते हैं। सबसे पहले आप दूसरे लोगों से यह पूछिए कि उन्हें किस काम में फ्लो महसूस होता है और फिर यह देखिए कि वो काम आपको मजेदार लग रहा है या नहीं।
दूसरा तरीका यह है कि आप खुद को परखिए। आप यह देखिए कि किस काम को करते वक्त आप घड़ी देखना भूल जाते हैं। नए कामों को ट्राइ करते रहिए और यह देखते रहिए कि किस काम में आपको फ्लो मिल रहा है। इस तरह से आप उस काम को खोज पाएंगे।
जब आप काम करने के लिए आजाद होते हैं, तो आप उस काम से संतुष्ट रहते हैं।
बहुत से लोग घर पर काम कर के देर से पहुंचते हैं और फिर उनके पास वो काम करने के लिए एनर्जी ही नहीं बचती जिसे करना वे पसंद करते हैं। अगले दिन फिर वे कुछ इसी तरह का दिन बिताने के लिए चले जाते हैं। इस वजह से उन्हें वो काम करना पड़ता है जो उन्हें पसंद नहीं है और उस काम से दूर रहना पड़ता है जिसे वे पसंद करते हैं।
अगर आप चाहते हैं कि आपको अपने काम से खुशी मिले, तो आपको ऐसा काम करना होगा जिसमें आजादी हो। जब आपको लगता है कि आप कोई काम करने के लिए मजबूर हैं, तो आपको उसमें मजा नहीं आता। काम में आजादी खोजने के दो तरीके हैं।
पहला तो यह है कि आप नौकरी ना कर के सेल्फ एंप्लायमेंट कर लें, जहाँ पर आप खुद के हिसाब से आ जा सकते हैं और अपने हिसाब से काम कर सकते हैं। रीसर्च यह बताते हैं कि सेल्फ एंप्लाएड लोग ज्यादा खुश रहते हैं और अपने काम को पसंद करते हैं। लेकिन इसके नुकसान यह हैं कि यहाँ पर आपको छुट्टी लेने के पैसे नहीं मिलते। इसमें आपको ज्यादा काम करना पड़ सकता है और एक नौकरी करने से कंपनी की तरफ से आपको जो फायदे मिलते हैं, वो नहीं मिलेंगे।
दूसरा आप्शन यह है कि आप कम काम कीजिए ताकि आप उस काम के लिए समय निकाल सकें जिसे आप पसंद करते हैं। हो सके तो हफ्ते में सिर्फ 4 दिन के लिए काम पर जाइए। इससे आपको कम पैसे मिलेंगे, लेकिन आप अपने बेकार के खर्च कर के कम पैसों में भी अपना घर अच्छे से चला सकते हैं।
कम काम करने से और अपने खर्च को कम कर के भी आप कुछ हद तक आजादी पा सकते हैं। इससे आपको वो काम नहीं करना होगा जो आप नापसंद करते हैं और साथ ही आप उस काम के लिए समय निकाल पाएंगे जो आपको अच्छा लगता है। अगर आपको लगता है कि कम पैसे में भी आपका घर आसानी से चल सकता है, तो यह रास्ता आपके लिए है।
अपने पसंद का काम पाने के लिए आपको रिस्क लेना होगा और अपने डर को पीछे छोड़ना होगा।
बहुत से लोग अपने इस समय के काम को नहीं छोड़ना चाहते क्योंकि वे रिस्क लेने से डरते हैं। उन्हें अपना कैरियर बदलने से डर लगता है। इसके पीछे की साइकोलाजी यह है कि हमारे अंदर कुछ पाने की ख्वाहिश से ज्यादा कुछ खोने का डर ज्यादा होता है जिस वजह से हम उस चीज़ को नहीं छोड़ना चाहते जो हमारे पास पहले से है।
एक्साम्पल के लिए अगर आपका 100 रुपया कहीं खो जाए तो आपको बहुत तकलीफ होगी। लेकिन 100 रुपया कहीं पर गिरा हुआ मिल जाए तो उतनी खुशी नहीं होगी। हमारा दिमाग ज्यादातर नेगेटिव चीज़ों पर फोकस करता है। इसलिए जब कुछ नया करने की बारी आती है, तो वो सबसे पहले यह सोचता है कि इसमें क्या गलत हो सकता है, ना कि यह कि क्या सही हो सकता है।
इसलिए आप इन भावनाओं को खुद पर हावी मत होने दीजिए। आप यह समझिए कि अगर आप रिस्क लेकर अपने डर का सामना नहीं करेंगे, तो आप सारी उम्र इसी तरह बिताएंगे। इससे निकलने के लिए आप 3 स्टेप्स का इस्तेमाल कर सकते हैं।
सबसे पहले अपने अब तक के कैरियर को देखिए। यह देखिए कि आपने अब तक कितने स्किल्स सीखे हैं। आपको इस समय क्या क्या आता है?
इसके बाद यह सोचिए कि अगर आप अपनी जिन्दगी को 5 बार फिर से जी सकते, तो आप कौन से 5 कैरियर को आज़माना चाहते। यह पता कीजिए कि आप इस समय किस काम में दिलचस्पी रखते हैं। अगर हो सके तो उस काम को करने की कोशिश कीजिए।
अंत में आप अपने रिश्तेदारों से या फिर अपने दोस्तों से पूछिए कि उनके हिसाब से आपके लिए कौन सा काम अच्छा होगा। कभी कभी हमारे आस पास के लोग हमारे बारे में कुछ ऐसा जानते हैं जिसपर हम कभी नहीं ध्यान देते। हो सकता है वे आपको एक ऐसा काम बता दें जो कि आपके लिए पर्फेक्ट हो।
साथ ही कुछ ऐसा काम खोजने की कोशिश कीजिए जो कि स्पेसिफिक हो। इसका मतलब यह है कि आप यह मत कहिए कि मैंने दुनिया के लिए कुछ अच्छा काम करना चाहता हूँ, क्योंकि अच्छे काम में बहुत कुछ आता है। आप यह कहिए कि मैं गरीब बच्चों को पढ़ा कर उन्हें काबिल बनाना चाहता हूँ। इस तरह से आपको यह पता रहेगा कि आपको असल में करना क्या है।
अपने मनचाहे काम को खोजने के लिए प्लान करना छोड़कर उसे खोजने के काम में लग जाइए।
बहुत से लोग यह कहते हैं कि आपको प्लान करना चाहिए। लेकिन इसमें समस्या यह है कि यह तरीका काम नहीं करता। आपका सामना हमेशा किसी ऐसी चीज़ से हो जाएगा जिसके बारे में आपने सोचा नहीं था और आपका प्लान फेल हो जाएगा। इसलिए प्लान करना बंद कर के अपने मनचाहे काम को खोजने में अपना समय बिताइए।
इसके लिए आप बहुत से तरीके अपना सकते हैं। इसमें से सबसे पहला तरीका यह है कि पहले अलग अलग काम कीजिए और बाद में यह देखिए कि वो आपको अच्छा लग रहा है या नहीं। एक्साम्पल के लिए लौरा वैन बोचेट को ले लीजिए जो कि अपने काम से बहुत परेशान थीं। इसके बाद उन्होंने एक साल में 30 अलग अलग तरह की नौकरी की।
उन्होंने उन लोगों को फोन लगाया जो कि उनके हिसाब से अपने काम से खुश थे और उनके साथ कुछ दिन के लिए काम पर गईं। इस तरह से वे यह पता कर पाईं कि उन्हें असल में कौन सा काम पसंद है।
लेकिन हो सकता है कि यह आपके लिए संभव ना हो। हो सकता है आपके पास एक परिवार हो और आप इस तरह से एक साल तक बिना काम के जिन्दगी ना बिता पाएं। ऐसे में आप कोई काम पार्ट टाइम में शुरू कर सकते हैं। एक्साम्पल के लिए अगर आप एक बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो आप वीकेंड के दिनों में उसपर काम कर सकते हैं। अगर वो काम आपको अच्छा लगता है, तो आप बाद में अपनी नौकरी छोड़कर फुल टाइम अपने बिजनेस पर ध्यान दे सकते हैं।
अंत में आप उन लोगों से बात कर सकते हैं जो कि अपने काम से खुश हैं। उनसे पूछिए कि एक दिन में किस किस तरह के काम उन्हें करने पड़ते हैं और खुद को वो काम करते हुए इमैजिन कीजिए। अगर आपको लगता है कि आप उस तरह से अपना दिन बिता कर खुश रहेंगे, तो वो काम कीजिए।
यह तरीके अपना कर आप वो काम खोज सकते हैं जिसे करने में आपको वाकई मजा आए।
अपने परिवार और अपने कैरियर को एक साथ लेकर चलने की कोशिश मत कीजिए।
पहले के जमाने में पुरुष और महिलाओं के रोल फेक्स पर दिए गए थे। लेकिन पिछले कुछ सालों में बहुत बदलाव आया है जिससे अब उनके काम फिक्स नहीं हैं। अब महिलाएं बाहर जाकर काम कर सकती हैं और पुरुष घर पर रहकर बच्चों की देखभाल कर सकते हैं। लेकिन ऐसा होता नहीं हैं।
आज के वक्त में बच्चे हो जाने के बाद अगर कोई अपने कैरियर के साथ समझौता करता है तो वो महिलाएं ही होती हैं। लोगों का कहना है कि इसी तरह वे अपना घर भी चला सकते हैं और अपने बच्चों का खयाल भी रख सकते हैं।
लेकिन अगर एक पति पत्नी आपस में बराबर का रोल निभाएं, तो इससे घर ज्यादा अच्छा चल सकता है। सिर्फ महिलाओं को ही घर की पूरी जिम्मेदारी नहीं देनी चाहिए, बल्कि दोनों लोगों को साथ मिलकर यह सारे काम करने चाहिए।
बहुत सी महिलाएं बच्चे हो जाने के बाद पार्ट टाइम में काम करने लगती हैं। लेकिन इस वजह से वे ना तो अपने बच्चों पर ही अच्छे से ध्यान दे पाती हैं और ना ही अपने कैरियर पर। इसलिए आपको सबसे पहले पूरी तरह से एक पैंरट का किरदार निभाना चाहिए और इसके बाद पूरी तरह से अपने कैरियर पर ध्यान देना चाहिए। इस तरह से आप एक बार में एक काम को अच्छे से कर पाएंगे।
ब्रायन नाम के एक व्यक्ति के चार बच्चे थे। इस वजह से उसने अपना कैरियर छोड़कर पूरा ध्यान अपने बच्चों को दे दिया। उन्हें प्रकृति के साथ जोड़ने के लिए उसने अपने बगीचे में मधुमक्खियों को पालना शुरू किया। समय के साथ उसके पास इतनी मधुमक्खियां हो गई कि वो लोगों को यह सिखाने लगा कि किस तरह से वे भी मधुमक्खियां पाल सकते हैं। इसके बाद उसने इसे अपना फुल टाइम कैरियर बना लिया। ब्रायन की तरह आप भी पहले पूरा ध्यान परिवार पर दीजिए और फिर पूरा ध्यान कैरियर पर।
आपको अपना मकसद रातों रात नहीं मिलेगा, बल्कि आपको इसे समय के साथ अपने अंदर पैदा करना होगा।
जब हमारी जिन्दगी का एक मकसद होता है, तो हमें लगता है कि हमारे जिन्दा रहने का फायदा है। यह मकसद ही हर रोज हमें बेड से निकलता है और हमें कुछ पाने के लिए प्रेरित रखता है। अलग अलग लोगों के अलग अलग मकसद हो सकते हैं। एक लेखक का मकसद एक बेहतरीन किताब लिखना हो सकता है जिसे पीढ़ीयों तक याद रखा जाए और प्रकृति को पसंद करने वाले व्यक्ति का मकसद हो सकता है प्रदूषण को कम करना।
लेकिन यह मकसद खोजा कैसे जाता है? बहुत से लोगों का मानना है कि उनके लिए एक पर्फेक्ट काम बाहर इंतजार कर रहा है और वो अचानक से एक दिन उनके सामने कूद कर आ जाएगा। इसके बाद उन्हें उसे करने में इतना मजा आएगा कि वे उसे ही अपनी जिन्दगी का मकसद बना लेंगे।
लेकिन यह सोच गलत है। हमारा मकसद हमारे काम के हिसाब से धीरे धीरे हमारे अंदर पैदा होता है। हम ना तो इसे कहीं बाहर जाकर खोजते हैं और ना ही यह अचानक से हमारे सामने आता है।
एक्साम्पल के लिए मैरी क्यूरी को ले लीजिए। उनकी जिन्दगी का मकसद था रेडिएशन पर काम करना, लेकिन यह मकसद उन्हें अचानक से नहीं मिला। 24 साल की उम्र में खुद को संभालने के लिए उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई शुरू कर दी। इसके बाद वे केमिस्ट्री और फिजिक्स पढ़ने लगीं और हर रोज 12 घंटा उसपर काम करने लगीं। अंत में उन्होंने युरेनियम पर अपना काम करना शुरू कर दिया। यही उनकी जिन्दगी का मकसद था जो कि साइंस से संबंधित काम करने पर उन्हें मिला।
इसलिए अपने मकसद को तुरंत पाने की उम्मीद मत कीजिए, बल्कि आपको इस समय जो भी अच्छा लग रहा है उसे करते जाइए। इस तरह से आप समय के साथ उसे अपने अंदर पैदा कर पाएंगे।
कुल मिलाकर
बहुत से लोग छोटी उम्र में ही कैरियर का चुनाव करते हैं और उसके लिए पढ़ाई करने लगते हैं। लेकिन बाद में जब उन्हें वो काम पसंद नहीं आता है तो वे उसे छोड़ भी नहीं पाते क्योंकि उन्होंने उसे पाने के लिए बहुत मेहनत की है। जरूरी नहीं है कि आप भी खुद के साथ ऐसा करें। आप रीसर्च कर के, कोई दूसरा काम पार्ट टाइम में ट्राई कर के या फिर अपने आस पास के लोगों से सलाह लेकर अपने मनपसंद काम को खोज सकते हैं।
खुद के लिए एक जॅाब एडवर्टाइज़मेंट लिखिए।
सोचिए कि आपको खुद को एक न्यूज़पेपर में एडवर्टाइज़ करना है। अब आप अपनी क्वालिटी, पैशन और हुनर के बारे में अपने एंम्प्लायर को बताइए। आप उन्हें बताइए कि जब वे आपको काम पर रखेंगे तो उन्हें आपको क्या देना होगा।
इसके बाद इस ऐड को उन 10 लोगों को भेजिए जिन्हें आप जानते हैं। इन लोगों के पास अलग अलग अनुभव होना चाहिए। फिर इन लोगों से पूछिए कि उनके हिसाब से कौन सा ऐसा काम है जिससे आपकी यह सारी जरूरतें पूरी हो सकें। फिर उसमें से अपने मनपसंद काम को चुनिए।
