Give And Take

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Give And Take

Adam Grant
Why Helping Others Drives Our Success

दो लफ्जों में
यह एक न्यूयार्क टाइम्स और वॉल स्ट्रीट जरनल बेस्ट सेलर किताब है, जिसको 30 से ज्यादा लैंग्वेजेज में ट्रांसलेट किया गया है. इस किताब में बहुत अच्छी तरह से यह समझाया गया है कि जब हम अपने एटीट्यूड्स और एक्शन्स के साथ में मोटिवेशन, एबिलिटी और अपॉर्चुनिटी को कंबाइंड करके दूसरे लोगों के लिए एक देने वाले शख्स बन जाते हैं तो, यह एक्शन किस तरह से लॉन्ग-टर्म के लिए हमारी पर्सनल सक्सेस के साथ-साथ हमारे कैरियर में भी सक्सेस को बढ़ावा दे सकता है.

  लेखक के बारे में
Adam Grant एक अमेरिकन इंस्टीट्यूशनल साइकोलॉजिस्ट और बेस्ट सेलिंग ऑथर हैं. जो साइंस ऑफ मोटिवेशन, generosity, थिंकिंग और रीथिंकिंग के बारे में पता लगाते हैं. उनको दुनिया के 10 सबसे ज्यादा प्रभावशाली मैनेजमेंट थिंकर्स मे से एक रिकॉग्नाइज किया गया है. वह एक अवॉर्ड विनिंग रिसर्चर हैं और पेंसिलवेनिया के Wharton’s स्कूल में एक highest-rated प्रोफेसर हैं. उनकी किताब Give And Take 2013 में पब्लिश हुई है, जो आप के वर्क, इंटरेक्शंस और प्रोडक्टिविटी को बेहतर बनाने में मदद करती है. इसके अलावा उन्होंने यह 4 किताबें लिखी हैं : Think Again,, Originals, Option B और Power moves. उनकी सभी किताबों को "Year's best by Amazon, Apple, The Financial Times, और द वॉल स्ट्रीट जरनल" के नाम से जाना जाता है. 


यह किनके लिए है
- जो बातचीत में अपना इनफ्लुएंस बढ़ाने के लिए इफेक्टिव तरीकों के बारे में जानना चाहते हैं. 
- जो गिवर, टेकर या मैचर की कैटेगरीज के बीच के डिफरेंस को समझना चाहते हैं.  
- जो दूसरे लोगों के साथ अपनी रिलेशनशिप्स को बेहतर बनाने के लिए गिव एंड टेक के बेसिक सिस्टम को समझना चाहते हैं. - जो इस किताब को एक यूनिक टूल- किट की तरह यूज़ करके, कोलैबोरेशन और रिसिप्रोसिटी के थ्रू, यानी दूसरी ऑर्गेनाइजेशंस के साथ मिलकर और आपसी सहयोग बनाकर, अपने गोल्स को सक्सेसफुली अचीव करना चाहते हैं


Give And Take
ऑथर कहते हैं कि "Being a giver is not good for 100-yard dash, but it's valuable in marathon." इसका मतलब है कि सिर्फ शॉर्ट- टर्म के लिए एक giver  बनना अच्छा नहीं है, लेकिन यह लॉन्ग- टर्म के लिए वैल्युएबल होता है.  
किसी भी फील्ड में आपकी सक्सेस के लिए, आपके पैशन, टैलेंट, हार्ड वर्क और गुड लक को इसकी वजह माना जा सकता है. लेकिन  इसमें एक मिसिंग एलिमेंट भी मौजूद होता है. इस बारे में ऑथर अपनी रिसर्च के बेस पर यह कहते हैं कि आपकी सक्सेस इस बात पर भी डिपेंड करती है कि आप दूसरों के साथ किस तरह से इंटरऐक्ट, यानी बात-चीत करते हैं. 
ग्रांट यह दिखाते हैं कि लोगों का अपने काम पर " takers matchers, या givers ", की तरह ऑपरेट करने का रुझान रहता है. takers वह लोग होते हैं, जो दूसरे लोगों से ज्यादा से ज्यादा लेने की कोशिश करते हैं. जबकि matchers का इरादा बराबरी से काम करने का होता है और givers बहुत कम ऐसे लोग होते हैं जो बदले में किसी भी चीज की उम्मीद किए बिना ही कंट्रीब्यूट करते हैं. हमारे वर्कप्लेस में इन तीनों रिसिप्रोसिटी स्टाइल्स में से givers स्टाइल को , सबसे ज्यादा सक्सेस देने वाली स्टाइल माना जाता है. जबकि कुछ givers को उनके काम पर exploit और burnt out किया जा सकता है. यानी उनका शोषण करके और उनको बुरी तरह से थकाकर कमजोर बनाया जा सकता है. लेकिन वह लोग, तमाम इंडस्ट्रीज की एक वाइड रेंज में मैचर्स और टेकर्स के कंपैरिजन में कहीं ज्यादा एक्स्ट्राऑर्डिनरी सक्सेस भी अचीव कर सकते हैं. ग्रांट य़ह कनक्ल्यूड करते हैं कि आखिरकार givers को ही सक्सेस मिलती है. हालांकि यह सिर्फ किसी भी givers के लिए नहीं होती है बल्कि कुछ स्ट्रैटेजिक givers को ही सक्सेस मिल पाती है. 
इसलिए अगर आपका रुझान एक गिवर की तरह ऑपरेट करने की तरफ है, लेकिन आप इस रिसिप्रोसिटी स्टाइल को सही तरीके से रिप्रेजेंट नहीं कर पा रहे हैं, तो यह किताब आपको सिखाएगी कि आप देने के बाद भी अपने काम में आगे बढ़ सकते हैं. 
इस किताब में ऑथर Grant, अपनी साइंस- बेस्ड अप्रोच के बारे में बताने के साथ- साथ आपके अंदर भी इस एप्रोच को डेवेलप करने के लिए एक प्रैक्टिकल एडवाइस ऑफर करते हैं. 
इस किताब में इन तीनों रिसिप्रोसिटी स्टाइल्स: गिवर्स, मैचर्स और टेकर्स के बारे में पता लगाया जाएगा. इसके अलावा हम अपने खुद के हिसाब से भी गिविंग की इंपोर्टेंस के बारे में जांच-पड़ताल करेंगे. और  इस बारे में पता लगाएंगे कि गिवर्स किस वजह से या तो दूसरों से पिछड़ जाते हैं या फिर उनसे आगे निकल जाते हैं. इस बारे में कहा जाता है, " Nice guys finish last." इसका मतलब है  कि भले ही कुछ सीधे-साधे लोग एक कंपटीटिव सिचुएशन में सक्सेसफुल हो पाते हैं या फिर वह फेल हो जाते हैं . यह बात मायने नहीं रखती है. बल्कि इसकी जगह उनकी Generosity, यानी उदारता मायने रखती है. लेकिन Generous होने का मतलब सेल्फलेस होना भी नहीं है. स्ट्रैटेजिक गिवर्स इस बारे में बहुत सोच- विचार करते हैं, कि उन्हें कब, कैसे और किन लोगों को देना है. इस किताब के अलग-अलग चैप्टर्स में यह समझाने पर फोकस किया जाएगा कि किन वजहों से  गिविंग, पावरफुल और डेंजरस दोनों होती है. और आपको ऐसे प्रिंसिपल्स के बारे में बताया जाएगा कि कैसे और क्यों givers अपनी फील्ड में टॉप पर पहुंच जाते हैं. और आप यह भी देखेंगे कि सक्सेसफुल givers अपनी यूनिक अप्रोचेज की मदद से 4 तरह के इंपॉर्टेंट domains यानी नॉलेज की फील्ड में किस तरह से इंटरेक्शंस करते हैं: जैसे, नेटवर्किंग, कोलैबोरेटिंग, इवेल्यूएटिंग, और इन्फ्लुएंसिंग. 
नेटवर्किंग पर फोकस करके इस तरह की फ्रेश अप्रोचेज को हाइलाइट किया जाएगा, जिनकी मदद से आप नए कॉन्टैक्ट्स के साथ अपने कनेक्शंस को डेवेलप करेंगे और पुराने कॉन्टैक्ट्स के साथ अपने संबंधों को मजबूत बनाएंगे. 
कोलैबोरेशन की जांच-पड़ताल करके आपको यह पता चलेगा कि आप कैसे अपने कलीग्स के साथ प्रोडक्टिवली वर्क कर सकते हैं. और उनका रिस्पेक्ट जीत सकते हैं. 
दूसरे लोगों को एवैल्युएट करके हम ऐसी काउन्टर-इंट्यूटिव टेक्निक्स के बारे में पता लगाएंगे, जिनकी मदद से उनके अंदर के टैलेंट को जज किया जा सके और उनको डेवलप करके बाहर निकाला जा सके. और इनफ्लुएंस की एनालिसिस करके हम अपने आइडियाज और इंटरेस्ट्स के बारे में दूसरे लोगों को कन्वींस करना सीखेंगे. जिसकी मदद से हम अपनी  प्रेजेंटिंग, सेलिंग, परसूएडिंग यानी समझा- बुझाकर राजी करना, और नेगोशिएटिंग को और बेहतर बना सकते हैं. इन चार domains में आप देखेंगे कि सक्सेसफुल givers, क्या अलग करते हैं. और टेकर्स और मैचर्स इस एप्रोच से क्या सीख सकते हैं? इस किताब के अगले चैप्टर्स में हम यह पता लगाएंगे कि गिविंग के बेनिफिट्स लेने के लिए हमें क्या कीमत चुकानी पड़ती है. और इसे कैसे मैनेज किया जा सकता है. हम यह भी सीखेंगे कि कैसे  गिवर्स," पुशओवर्स और डोरमैट्स," यानी एक कमजोर कैरेक्टर वाला शख्स बनने से और खुद को बर्नआउट होने से बचा सकते हैं. हम इस बात का भी पता लगाएंगे कि हम एक गिवर और टेकर को जज करने में गलती क्यों करते हैं. और बारगेनिंग टेबल पर गिवर्स खुद को प्रोटेक्ट कैसे करते हैं? यहां पर आपको इस बारे में भी नॉलेज मिलेगी कि आप कैसे, टेकिंग से गिविंग की तरफ जा कर दूसरे लोगों की इंपोर्टेंस को  कम कर सकते हैं. और फिर  सफलता की सीढ़ी पर टॉप की तरफ ऊपर उठ जाते हैं. इसी तरह की तमाम अहम चीजों के बारे में डिटेल में समझाने के लिए ऑथर ने इस किताब को 9 चैप्टर्स में डिवाइड किया है :CHAPTER ONE : Good Returns
इस चैप्टर में गिवर्स को मिलने वाले गुड रिटर्न्स और इस तरह की रिसिप्रोसिटी स्टाइल के साथ जुड़े हुए डेंजर्स और रिवार्ड्स के बारे में बताया गया है. 

Good Returns

The Dangers and Rewards of Giving More Than You Get. 

यहां पर ऑथर दो लोगों का एग्जांपल देते हैं. जिनमें से एक का नाम Danny Shader और दूसरे का नाम David Hornik है. यह दोनों लोग एक ही फील्ड में बिजनेस करते हैं.  शेडर, इंटरनेट की फील्ड में एक सक्सेसफुल इंटरप्रेन्योर है. वह ऑलरेडी कई कंपनीज बनाकर बहुत मोटी रकम कमा चुका है, और एक नया स्टार्टअप शुरू करना चाहता है. उसे इसके लिए फंडिंग करने वाले एक इन्वेस्टर की जरूरत है. इसलिए वह हॉर्निक से मिलकर इस बारे में बात करता है. वहीं दूसरी तरफ हॉर्निक एक रेपुटेड वेंचर कैपिटल फर्म में पार्टनर है, जो पिछले 10 सालों से इंटरनेट की फील्ड में नए स्टार्ट-अप्स को फंडिंग करने और उन्हें एक्सपर्ट एडवाइस देने का काम कर रहा है . उसका पिछला ट्रैक रिकॉर्ड  बहुत अच्छा है . 

हॉर्निक , शेडर की अच्छी रेपुटेशन, और उसके आइडिया की क्वालिटी से बहुत इनफ्लुएंस्ड था. और जल्दी से जल्दी उसके साथ अपनी इन्वेस्टमेंट की डील को फाइनल करना चाहता था. क्योंकि वह जानता था कि शेडर का स्टार्टअप बहुत स्ट्रांग पोजीशन में था और बहुत से दूसरे इन्वेस्टर्स भी उसमें इनवेस्ट करने के लिए आसानी से तैयार हो जाने वाले थे. लेकिन इसके बावजूद वह इस डील को साइन करने के लिए कोई डेड लाइन फिक्स नहीं करता है. और उसे आराम से सोच विचार करने के बाद ही कोई डिसीजन लेने के लिए कहता है. उसे पूरा यकीन था कि शेडर उसी के साथ डील फाइनल करेगा, क्योंकि उसने उसे दूसरे ऑप्शन्स का पता लगाने के लिए एक मौका देकर, अपनी जगह उसके बेस्ट इंटरेस्ट्स को आगे रखा था. इसके अलावा हॉर्निक ने अपनी पोजीशन मजबूत करने के लिए शेडर के पास ऐसे 40 रिफरेन्सेज की लिस्ट भी भिजवाई थी, जो एक इन्वेस्टर के तौर पर उसके हाई कैलीबर के बारे में गवाही दे सकते थे. 

लेकिन फिर कुछ हफ्तों बाद  हॉर्निक को यह पता चला कि शेडर ने किसी दूसरे इन्वेस्टर के साथ डील साइन करने का डिसीजन ले लिया था. बाद में शेडर ने हॉर्निक को इस बारे में कॉल करके बताया कि हॉर्निक और दूसरे इन्वेस्टर के फाइनेंशियल टर्म्स करीब-करीब एक जैसे ही थे, और हॉर्निक ने जो 40 लोगों की लिस्ट उसके पास भेजी थी, उन लोगों से बात करने पर उसे यह भी पता चला, कि हॉर्निक एक बहुत अच्छा आदमी है . लेकिन फिर भी उसकी Generosity of spirit, यानी उसकी आत्मा की उदारता की वजह से उसने हॉर्निक के अगेंस्ट डिसीजन लिया है. 

दरअसल शेडर को यह चिंता हो रही थी कि हॉर्निक ज्यादातर टाइम उसको चैलेंज करने की जगह एनकरेज करने वाला था. और वह एक सक्सेसफुल बिजनेस स्टार्ट करने में उसकी मदद करने के लिए टफ नहीं हो सकता था. जबकि दूसरे इन्वेस्टर की रेपुटेशन एक ऐसे ब्रिलियंट एडवाइजर की थी, जो एंटरप्रेन्योर से सवाल जवाब करता था और उन्हें पुश भी करता रहता था. और इस तरह से डेविड हॉर्निक ने यह लेसन सीखा : " good guys finish last." यानी अच्छे लोगों को कामयाबी मुश्किल से मिलती है. 

ऐसा माना जाता है कि हाईली सक्सेसफुल लोगों के अंदर तीन चीजें कॉमन होती हैं : जैसेकि मोटिवेशन, एबिलिटी और अपॉर्चुनिटी. और अगर हम सक्सेसफुल होना चाहते हैं तो हमें हार्ड वर्क, टैलेंट और लक के कॉम्बिनेशन की जरूरत होगी. शेडर और हॉर्निक की स्टोरी में एक चौथे और अहम एलिमेंट को भी हाईलाइट किया गया है जिसको कि अक्सर इग्नोर कर दिया जाता है : जैसे, हमारी सक्सेस इस बात पर बहुत ज्यादा डिपेंड करती है कि हम दूसरे लोगों के साथ अपनी बातचीत को कैसे देखते हैं. क्योंकि हर बार जब भी हम अपने काम पर दूसरे लोगों के साथ बातचीत करते हैं, तो हमारे पास एक चॉइस होती है : कि क्या हम इस बातचीत के थ्रू ज्यादा से ज्यादा वैल्यू क्लेम करना चाहते हैं यानी कि क्या हम एक टेकर की तरह ऑपरेट करना चाहते हैं या फिर यह सोचे बिना कि बदले में हमें क्या मिलने वाला है, हम इसमें वैल्यू को कंट्रीब्यूट करते हैं. और एक गिवर की तरह ऑपरेट करना चाहते हैं. 

दरअसल गिवर्स  सफलता की सीढ़ी पर नीचे से ऊपर की तरफ ऊपर उठते चले जाते हैं. अगर आप रेसिप्रोसिटी स्टाइल्स और सक्सेस के बीच में संबंध को एग्जामिन करेंगे तो यह पाएंगे कि गिवर्स के लिए सिर्फ  "chumps" यानी आसानी से धोखा खाने वाले शख्स बने रहने की जगह उनके "Champs" यानी चैंपियंस बन जाने की संभावना काफी ज्यादा होती है. 

शेडर और हॉर्निक के केस में जब शेडर ने एक एक्सेप्शनली ब्राइट और टैलेंटेड, दूसरे इन्वेस्टर के साथ अपनी डील साइन कर ली तो उसे हॉर्निक के साथ काम करने की अपॉर्चुनिटी को मिस करने का अफसोस होने लगा. और फिर उसने फाइनेंसिंग मैटर क्लोज होने से पहले हॉर्निक को भी कंपनी में इन्वेस्ट करने के लिए ऑफर किया. हॉर्निक ने उसके ऑफर को एक्सेप्ट कर लिया और कंपनी में इन्वेस्ट करके कंपनी ओनरशिप का एक हिस्सा earn कर लिया. इसके बाद जब हॉर्निक ने कंपनी की बोर्ड मीटिंग्स में जाना शुरू किया तो शेडर यह देखकर बहुत इंप्रेस हुआ कि हॉर्निक  उसे बहुत महारत के साथ तमाम नए डायरेक्शन्स पर विचार करने के लिए पुश कर रहा था. और फिर शेडर का स्टार्टअप " Pay Near Me " के नाम से बहुत जल्दी पॉपुलर हो गया. यह स्टार्टअप ऐसे अमेरिकंस की मदद करने के लिए लॉन्च किया गया था जिनके पास एक बैंक अकाउंट या बारकोड या कार्ड के थ्रू ऑनलाइन शॉपिंग  करने के लिए एक क्रेडिट कार्ड नहीं था. और इस वजह से उन्हें कैश पेमेंट करना पड़ता था. 

हॉर्निक ने  शेडर को जो रिफरेन्सेज की लिस्ट दी थी, वह शायद उसकी इन्वेस्टमेंट डील से भी ज्यादा वैल्युएबल थी. 

हॉर्निक को मिलने वाला इनाम " Pay Near Me" की एक सिंगल डील तक ही सीमित रहने वाला नहीं था. इसके बाद शेडर ने हॉर्निक को एक्शन में देखकर, और तमाम एंटरप्रेन्योर्स के बेस्ट इंटरेस्ट के लिए उसके कमिटमेंट को देखकर, उसको और दूसरी इन्वेस्टमेंट अपॉर्चुनिटीज के साथ भी सेट करना शुरू कर दिया. 

हॉर्निक के गुड लक की वजह से उसकी शेडर से मुलाकात हुई थी. और फिर उसके हार्ड वर्क और टैलेंट ने शेडर के साथ डील फाइनल करने में एक बड़ा पार्ट प्ले किया था. लेकिन इस सबके बावजूद यह उसकी रिसिप्रोसिटी स्टाइल ही थी, जिसने उसे अल्टीमेट विनर बनाया था. और सिर्फ वही एक अकेला विनर नहीं था, बल्कि उसके साथ- साथ शेडर भी एक विनर बन गया था. हॉर्निक ने एक गिवर की तरह से ऑपरेट करके अपने लिए एक वैल्यू क्रिएट की थी. जिससे कि वह उस वैल्यू की मदद से दूसरे लोगों को बेनिफिट पहुंचाने के लिए ज्यादा से ज्यादा अपॉर्चुनिटीज तैयार कर सके. 

एक स्टडी के मुताबिक गिवर्स के लिए खास तौर पर टेकर्स के साथ डील करना रिस्की होता है. और डेविड हॉर्निक इस बात पर बिलीव करता है कि दुनिया के ज्यादातर वेंचर कैपिटलिस्ट्स यानी उद्योगपति, टेकर्स की तरह ऑपरेट करते हैं. क्योंकि जब उनके इन्वेस्टमेंट्स सक्सेसफुल हो जाते हैं, तो वह एक अनरीजनेबल तरीके से स्टार्टअप्स के इंटरप्रेन्योर्स के एक बड़े शेयर पर, अपना undue क्रेडिट क्लेम करने की ज़िद करते हैं. हालांकि हॉर्निक इस तरह के नॉर्म्स को चेंज करने के लिए फर्मली डिसाइड करता है. वह इस बारे में यह दिखाना चाहता है कि सक्सेस के लिए किसी दूसरे शख्स के पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं होती है. 

हॉर्निक अपनी बात को प्रूव करने के लिए 2004 में एक ब्लॉग स्टार्ट करता है. और वह ऐसा करने वाला पहला वेंचर केपीटलिस्ट बन जाता है. वह अपने ब्लॉग के जरिए एंटरप्रेन्योर्स की बिजनेस एक्टिविटीज को  वेंचर केपीटलिस्ट्स की सोच के मुताबिक इंप्रूव करने की कोशिश करता है. और वह इसके लिए ओपनली ऑनलाइन इंफॉर्मेशन शेयर करना शुरू करता है. हालांकि हॉर्निक के पार्टनर्स और उसकी फर्म का जनरल काउंसिल भी उसे यह कहकर ऐसा करने से रोकते हैं, कि  उसे अपने ट्रेड सीक्रेट्स को सबके सामने लीक नहीं करना चाहिए था. क्योंकि अगर दूसरे इन्वेस्टर्स उसके ब्लॉग को पढ़ते हैं तो वह बदले में कुछ दिए बिना ही उसके आइडियाज को चुरा सकते थे. हालांकि इस बारे में उन लोगों की चिंता भी जस्टिफाइड थी. क्योंकि बहुत से वेंचर केपीटलिस्ट्स भी उसके ब्लॉग को पढ़ने लगे थे जिसकी वजह से उनके साथ कंपटीशन करना मुश्किल हो गया था. लेकिन इसके बावजूद हॉर्निक बहुत से एंटरप्रेन्योर्स की मदद करने के लिए यह कीमत चुकाने के लिए भी तैयार था. क्योंकि उसका फोकस पूरी तरह से एंटरप्रेन्योर्स के लिए वैल्यू क्रिएट करना था. और इसके बाद भी उसने पिछले 8 सालों से ब्लॉग्स लिखना जारी रखा है. 

2007 में हॉर्निक ने अपनी पहली एनुअल कॉन्फ्रेंस को प्लान किया. जिसको लॉबी कहा गया. इस लॉबी यानी कॉन्फ्रेंस का गोल, तमाम एंटरप्रेन्योर्स को एक साथ लाने का था. जिससे कि वह लोग आपस में अपने आइडियाज को शेयर कर सकें. हॉर्निक इस कॉन्फ्रेंस पर करीब चार लाख डॉलर खर्च कर रहा था. जबकि उसके कलीग्स उसे ऐसा करने से रोक रहे थे क्योंकि उनका कहना था कि अगर यह कॉन्फ्रेंस फेल हो जाती है तो इसकी वजह से उसकी फर्म की रेपुटेशन के साथ-साथ उसका कैरियर भी तबाह हो सकता था. लेकिन हॉर्निक ऐसे लोगों को इग्नोर करते हुए आगे बढ़ गया. और उसने तमाम एंटरप्रेन्योर्स के साथ-साथ वेंचर केपीटलिस्ट्स की  Rival firms को भी कॉन्फ्रेंस अटेन्ड  करने  के लिए इन्वाइट कर लिया. और फिर बहुत से लोगों ने उसके डिसीजन को गलत मानते हुए उससे पूछा कि वह दूसरे वेंचर केपीटलिस्ट्स को इस कॉन्फ्रेंस में क्यों आने दे रहा था जबकि अगर वह "लॉबी" में किसी एंटरप्रेन्योर के साथ एक हॉट न्यू आईडिया के साथ मुलाकात करता, तो वह नए स्टार्टअप्स के साथ इन्वेस्टमेंट डील साइन करने के लिए दूसरे लोगों से  एक कदम आगे हो सकता था. तो फिर वह क्यों इस एडवांटेज को छोड़कर अपने कंपीटीटर्स को ऐसी अपॉर्चुनिटी का फायदा उठाने का मौका दे रहा था? इसके बाद हॉर्निक ने एक बार फिर उन सब को इग्नोर करते हुए यह क्लियर कर दिया कि वह सिर्फ खुद के लिए नहीं, बल्कि सभी लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए एक एक्सपीरियंस क्रिएट कर रहा था. 

और फिर कॉन्फ्रेंस अटेंड करने के बाद हॉर्निक के राइवल वेंचर केपीटलिस्ट्स में से एक ने इस फॉर्मेट को इतना ज्यादा पसंद किया कि उसने अपना खुद का लॉबी- स्टाइल कॉन्फ्रेंस क्रिएट कर लिया . लेकिन उसने हॉर्निक या किसी दूसरे वेंचर केपीटलिस्ट को इसके लिए इनवाइट नहीं किया. फिर भी हॉर्निक ने दूसरे वेंचर केपीटलिस्ट्स को लॉबी करने के लिए इनवाइट करना जारी रखा. 

डेविड हॉर्निक इस बात को एक्सेप्ट करता है कि एक गिवर की तरह ऑपरेट करने के लिए कुछ कीमत भी चुकानी पड़ती है. जबकि कुछ लोगों का ऐसा लगता है कि चीजों को अचीव करने के लिए एक टेकर बनना सही रास्ता है. लेकिन अगर हॉर्निक का रुझान एक टेकर की तरह ऑपरेट करने की तरफ ज्यादा होता तो वह शायद कभी भी ई-मेल्स को पर्सनली रिस्पॉन्ड ना करता, या अपने ब्लॉग पर कंपीटीटर्स के साथ इंफॉर्मेशन शेयर ना करता, या अपने राइवल्स को फायदा पहुंचाने के लिए लॉबी कॉन्फ्रेंस में इनवाइट ना करता. और यह सब करने की जगह वह अपना टाइम प्रोटेक्ट कर सकता था, अपनी नॉलेज को दूसरों से छुपा कर रख सकता था , और वह  बहुत केयरफुली अपने कनेक्शन्स से फायदा भी उठा सकता था. और अगर उस का रुझान एक मैचर की तरह ऑपरेट करने की तरफ ज्यादा होता, तो वह ऐसे वेंचर केपीटलिस्ट्स से लॉबी अटेंड करने के लिए इसके बदले में कुछ दूसरी चीजें मांग सकता था, जिन्होंने हॉर्निक को अपनी खुद की कॉन्फ्रेंस में इनवाइट नहीं किया था. 

लेकिन हॉर्निक दूसरे लोगों से चीजें लेने की जगह उन लोगों की जरूरतों पर ध्यान देना ज्यादा पसंद करता है. हॉर्निक एक वेंचर केपीटलिस्ट के तौर पर अपनी वैल्यूज के साथ काम करके  बहुत सक्सेसफुल रहा है. और उसकी generosity के लिए उसका दूर-दूर तक सम्मान किया जाता है. हॉर्निक का अपना विचार यह है कि उसको एक ऐसा एनवायरमेंट क्रिएट करना है जहां पर लोग इजीली अपनी डील्स कर सकते हैं , रिलेशनशिप्स बना सकते हैं, और एक ऐसी दुनिया में रह सकते हैं जहां वह रहना चाहते हैं.

CHAPTER TWO : The Peacock and the Panda
इस चैप्टर में यह एग्जामिन किया जाएगा की गिवर्स, टेकर्स और मैचर्स किस तरह से बुनियादी तौर पर अलग-अलग तरह के नेटवर्क्स डेवेलप करते हैं.  क्यों उनके नेटवर्क्स के अंदर उनके इंटरेक्शन्स में अलग-अलग तरह के कैरेक्टर्स होते हैं. उन इंटरेक्शन्स के रिजल्ट्स भी अलग-अलग तरह के होते हैं. आप यह देखेंगे कि किस तरह से गिवर्स और टेकर्स अलग-अलग तरह से अपने नेटवर्क्स को बनाते हैं. और उन्हें मैनेज करते हैं. यहां पर इस बारे में भी डिस्कशन किया जाएगा कि हालांकि गिवर्स और टेकर्स दोनों एक बराबर के बड़े नेटवर्क्स हैं, लेकिन फिर भी गिवर्स अपने नेटवर्क्स के थ्रू, टेकर्स के मुकाबले कहीं ज्यादा टाइम तक चलने वाली वैल्यू को प्रोड्यूस कर सकते हैं. 

The Peacock and the Panda

दशकों पहले अमेरिका के एक बहुत गरीब परिवार से आने वाले लेकिन बहुत हाईली एजुकेटेड Kenneth Lay नाम के एक टैलेंटेड शख्स ने " Enron" नाम से एक एनर्जी, कमोडिटीज और सिक्योरिटी फर्म शुरू करी थी. जिसमें उसने 15 साल तक एक चेयरमैन और सीईओ की तरह से काम किया था . लेकिन इसके बाद उसको तमाम इलीगल कामों का दोषी मानते हुए उस कंपनी से हटा दिया गया था. उस टाइम तक कंपनी की नेट वर्थ 11,000 करोड़ डालर तक पहुंच गई थी और दुनिया भर के 40 देशों में उसके 20, 000 से ज्यादा एंप्लाइज काम करते थे. Fortune मैगजीन में इस कंपनी को लगातार 5 सालों तक अमेरिका की मोस्ट इन्नोवेटिव कंपनी के तौर पर बताया जाता था. उसमें एक चैरिटेबल फैमिली फाउंडेशन का सेट किया गया था, जिसके जरिए 250 ऑर्गेनाइजेशंस को हर साल 25 लाख डॉलर्स दिए जाते थे और कंपनी के एनुअल प्रॉफिट का एक परसेंट अमाउंट चैरिटी के कामों के लिए डोनेट किया जाता था. केनेथ ले की गिविंग ने फॉर्मर अमेरिकन प्रेसिडेंट जॉर्ज डब्ल्यू बुश का अटेंशन अपनी तरफ खींच लिया था. जो उसे एक " good guy" और एक " generous guy" कह कर उसकी तारीफ करते थे. 

अक्टूबर 2001 में एनरॉन स्कैंडल का पता चलने के बाद इस केस में केनेथ ले को एक प्राइमरी विलन की तरह से याद किया जाता है. जिसमें थर्ड-क्वार्टर में करीब 62 करोड़ के लॉसेज रिपोर्ट किए जाने के बाद शेयरहोल्डर इक्विटी में 120 करोड़ डॉलर डूब गए थे. और फिर दिसंबर 2001 में एनरॉन कंपनी bankrupt यानी दिवालिया हो गई थी. 

इस केस के इन्वेस्टिगेटर्स ने अपनी जांच रिपोर्ट में बताया कि एनरॉन ने इनवेस्टर्स को प्रॉफिट्स के बारे में गलत जानकारी दी थी और उसके ऊपर 100 करोड डॉलर से ज्यादा का कर्जा होने की बात भी छुपाई थी. इसके अलावा इस कंपनी ने टेक्सास और कैलिफोर्निया में एनर्जी और पावर मार्केट्स को अपने फायदे के लिए गलत तरीके से मैनिपुलेट किया था और इंटरनेशनल कॉन्ट्रैक्ट्स हासिल करने के लिए फॉरेन गवर्नमेंट्स को रिश्वत दी थी. केनेथ ले को कॉन्सपिरेसी और फ्रॉड करने के 6 मामलों में सजा सुनाई गई थी. 

इस केस में केनेथ ने एक टेकर की तरह से ऑपरेट किया था. हालांकि बहुत से लोग उसे एक गिवर की तरह से ऑब्ज़र्व कर सकते हैं लेकिन असल में वह एक टेकर था जो एक गिवर की पहचान बनाने का दिखावा कर रहा था. उसने यह मान लिया था कि  वह एनरॉन के रिसोर्सेज को अपने पर्सनल गेन के लिए इस्तेमाल करने का entitled यानी हकदार था. 

और वह इस तरह का फ्रॉड करने में इसलिए सक्सेसफुल हो गया था क्योंकि वह बहुत से लोगों को जानता था. उसने अपने इनफ्लुएंशियल कांटेक्ट्स का एक नेटवर्क तैयार किया था. और अपने खुद के बेनिफिट के लिए उनका इस्तेमाल किया था. वह शुरू से ही एक मास्टर नेटवर्कर था. 

 

How Givers,Takers and Matchers Build Networks

सदियों से नेटवर्किंग की इंपोर्टेंस को स्वीकार किया जाता रहा है. अमेरिकन प्रोफेसर Brian Uzzi के मुताबिक नेटवर्क के 3 बड़े फायदे होते हैं: जैसेकि प्राइवेट इनफार्मेशन, डायवर्स स्किल्स, और पावर. एक स्ट्रांग नेटवर्क को डेवलप करके  अनमोल नॉलेज, एक्सपर्टीज और इन्फ्लुएंस को हासिल किया जा सकता है. नेटवर्क्स, इंटरेक्शन्स और रिलेशनशिप्स पर बेस्ड होते हैं, इसलिए इनकी मदद से बहुत पावरफुल तरीके से यह समझा जा सकता है कि सक्सेस पर रिसिप्रोसिटी स्टाइल, यानी गिवर, टेकर, और मैचर की तरह से ऑपरेट करने का प्रभाव किस तरह से पड़ता है और तमाम लोग अपने नेटवर्क्स में दूसरे लोगों से किस तरह से रिलेट होते हैं या वह लोग नेटवर्क्स के परपज को किस तरह से देखते हैं. एक रिसर्च से यह पता चलता है कि लोग बड़े नेटवर्क्स के साथ ज्यादा हाई परफॉर्मेंस हासिल करते हैं, वह ज्यादा जल्दी प्रमोट होते हैं और ज्यादा पैसा कमाते हैं. 

2011 में " fortune"  मैगजीन ने अमेरिका में सबसे अच्छे नेटवर्कर की पहचान करने के लिए एक एक्सटेंसिव रिसर्च कराई थी. जिसका परपज ऑनलाइन सोशल नेटवर्क को यूज़ करके यह पता लगाना था कि किस नेटवर्क के साथ अमेरिका के मोस्ट पावरफुल लोग सबसे ज्यादा संख्या में जुड़े हुए थे. फॉर्च्यून ने LinkedIn के 9 करोड़ कनेक्शन्स के टोटल डेटाबेस को क्रॉस चेक करके उनमें से दुनिया भर से सिर्फ 640 मोस्ट पावरफुल लोगों को चुना था. 

LinkedIn के फाउंडर, Reid Hoffman कहते हैं कि यह नेटवर्क एक आउटस्टैंडिंग गिवर है. जिसमें आप अपने एटीट्यूड को जितना ज्यादा दूसरों की भलाई करने वाला रखेंगे, आपको अपनी रिलेशनशिप से उतना ही ज्यादा फायदा भी मिलेगा. और आप तेजी से अपनी रेपुटेशन को मजबूत बनाएंगे और फिर आपके लिए तमाम अपॉर्चुनिटीज की संभावना बहुत बढ़ जाएगी. 

 

Spotting The Taker In a Giver's Clothes 

कभी-कभी हम किसी टेकर को आता हुआ देखकर उसे अपना भरोसा और मदद देने से इनकार करना चाहते हैं. इसीलिए उस वक्त हम अपने नेटवर्क का दरवाजा बंद करके खुद को प्रोटेक्ट कर लेते हैं. लेकिन बहुत से टेकर्स इस सिचुएशन को अवॉयड करने के लिए, एक जेनरस पर्सन की एक्टिंग करके आपको धोखा देने की कोशिश करते हैं. जिससे कि वह अपनी पहचान को गिवर्स या मैचर्स की तरह से बनाकर आपके नेटवर्क्स में एंट्री कर सकें. 

लेकिन टेकर्स के लिए पूरे इंटरेक्शन के दौरान अपने नकली चेहरे की पहचान को बनाए रखना बहुत मुश्किल होता है. इस बारे में एक मशहूर Dutch phrase का एग्जांपल दिया जाता है : " kissing up, kicking down". जिसका मतलब है कि एक ऑर्गेनाइजेशन में मिडिल- लेवल के एम्पलाईज अपने सुपीरियर्स के सामने पोलाइट और चापलूसी करने वाले होते हैं. लेकिन साथ ही साथ वह अपने अंडर एम्पलाईज का अपमान भी करते हैं. 

जब टेकर्स, पावरफुल लोगों के साथ डील करते हैं तो वह कन्विंसिंग फ़ेकर्स बन जाते हैं. यानी कि वह अपनी नकली पहचान को भी असली होने का यकीन दिला सकते हैं. टेकर्स अपने प्रभावशाली सुपीरियर्स से अपनी तारीफ करवाना चाहते हैं. इसलिए वह उन्हें अपनी तरफ अट्रैक्ट करने के लिए और उनकी चापलूसी करने के लिए नए- नए रास्ते तलाश करते हैं. जिसके नतीजे में पावरफुल लोगों की नजरों में, टेकर्स के लिए उनका फर्स्ट इंप्रेशन तारीफ के काबिल बन जाता है. 

टेकर्स " किसिंग अप " के जरिए rise कर सकते हैं. लेकिन वह " किकिंग डाउन " के जरिए अक्सर नीचे गिर जाते हैं. 

एक रिसर्च से यह पता चलता है कि जब गिवर्स को पावर हासिल होती है तो वह पूरे कॉन्फिडेंस के साथ सिचुएशन को अपने कंट्रोल में फील करते हैं. यानी कि वह खुद को कम दबाव में महसूस करते हैं और ज्यादा फ्री होकर अपनी नेचुरल टेन्डेन्सीज़ को एक्सप्रेस करते हैं. और जब टेकर्स को पावर हासिल होती है तो वह इस बात पर कम ध्यान देते हैं कि उनके नीचे वाले लोग उनके बारे में क्या सोचते हैं . वह सिर्फ अपने self-serving गोल को फॉलो करते हैं और ज्यादा से ज्यादा वैल्यू क्लेम करने की कोशिश करते हैं. और ज्यादातर मौकों पर अपने साथियों और सबोर्डिनेट्स के साथ बहुत खराब व्यवहार करने की वजह से उनकी रिलेशनशिप्स और रेपुटेशंस खतरे में पड़ जाती हैं. और आखिर में, ज्यादातर लोग मैचर्स होते हैं. उनकी कोर वैल्यूज, खास तौर पर भेदभाव के बिना, बराबरी के बेस पर और mutual benefits के लिए आपस में चीजों को एक्सचेंज करने  पर जोर देती हैं. 

 

The Transparent Network 

2002 में जोनाथन अब्राहम नाम के कंप्यूटर साइंटिस्ट ने " फ्रैंडस्टर" के नाम से सबसे पहले ऑनलाइन सोशल नेटवर्क की शुरुआत की थी. फ्रैंडस्टर ने लोगों के लिए अपने प्रोफाइल को ऑनलाइन पोस्ट करना और अपने कनेक्शन्स को पूरी दुनिया में ब्रॉडकास्ट करना पॉसिबल कर दिया था. इसके बाद के 2 सालों में एंटरप्रेन्योर्स ने " LinkedIn, MySpace और Facebook" को लॉन्च कर दिया . और फिर इन सोशल ट्रांसपेरेंट नेटवर्क्स पर दुनिया भर में एक दूसरे से अनजान लोगों ने दूसरे लोगों के साथ उनके आपसी रिश्तों और रेपुटेशन्स तक अपनी पहुंच बना ली . 2012 तक दुनिया की आबादी 700 करोड़ तक पहुंच गई . और इसी दौरान फेसबुक के एक्टिव यूजर्स की संख्या 100 करोड़ तक पहुंच गई . इसीलिए यह कहा जाता है कि नेटवर्क संबंधों से लोगों के बीच इंफॉर्मेशन और रिसोर्सेज का फैलाव होता है. 

ऑनलाइन कनेक्शंस बनाने से पहले लोग अपने कुछ गिनती के सोशल संबंधों को ज्यादा अच्छी तरह से मैनेज कर लेते थे. और वह अपने नेटवर्क के अंदर लोगों की रेपुटेशन के बारे में आसानी से जानकारी निकाल लेते थे. लेकिन जैसे-जैसे कम्युनिकेशन और ट्रांसपोर्टेशन के साधन आसान होते गए, और लोगों की आबादी बढ़ती गई वैसे- वैसे लोगों की रेपुटेशन के बारे में जानकारी मिलना मुश्किल होने लगा. इसी वजह से एनरॉन का सीईओ कैनेथ ली अपनी टेकिंग के बारे में बहुत सी चीजों को छुपाने में कामयाब हो गया था. और उसके एक ऑर्गनाइजेशन से दूसरी ऑर्गनाइजेशन में और एक पोजीशन से दूसरी पोजीशन पर मूव करने की वजह से भी किसी दूसरे

शख्स के लिए उसके कांटेक्ट्स तक पहुंचना आसान नहीं  था. उसके नेटवर्क में दाखिल होने वाले नए लोगों को उसकी पास्ट रेपुटेशन के बारे में कोई इंफॉर्मेशन नहीं मिल सकी थी. और एनरॉन के अंदर उसके एक्शन्स को यूट्यूब पर रिकॉर्ड नहीं किया गया था, या ट्विटर पर ब्रॉडकास्ट नहीं किया गया था, या गूगल पर आसानी से सर्च करने के लिए इंडेक्स नहीं किया गया था, या किसी अनजान शख्स की तरफ से इस बारे में इंटरनेट कोई ब्लॉग पोस्ट नहीं किया गया था. 

आजकल टेकर्स के लिए गिवर्स की नकली पहचान का दिखावा करके लोगों को धोखा देना बहुत मुश्किल हो गया है. क्योंकि अब ऑर्डिनरी लोग  भी फेसबुक प्रोफाइल को देखकर ही आसानी से टेकर्स की पहचान कर सकते हैं. 

 

What Goes Around Comes Around 

सोशल नेटवर्क्स में और ज्यादा ट्रांसपेरेंसी लाने के लिए Adam Rifkin नाम का एक कंप्युटर एक्सपर्ट ट्रांसपेरेंट नेटवर्क को नेक्स्ट लेवल पर लेकर गया था. उसने " Panda Whale" के नाम से एक स्टार्टअप लांच किया था जिसको क्रिएट करने का यह परपज यह था कि ऐसी इंफॉर्मेशन को परमानेंटली रिकॉर्ड करके पब्लिक के सामने लाया जाए जिनको तमाम लोग आपस में एक्सचेंज करते हैं. एडम रिफकिन को नेटवर्क प्रोग्रामिंग का " जायंट पांडा " कहा गया है. 

2011 में एडम रिफकिन , फॉर्च्यून के मुताबिक चुने गए 640 पावरफुल लोगों में से, दुनिया के किसी भी शख्स के मुकाबले, सबसे ज्यादा लोगों के साथ LinkedIn पर कनेक्टेड था. और उसके पास 3000 से ज्यादा लिंकडइन कनेक्शन्स थे. 

फार्च्यून के मुताबिक एडम रिफकिन को बेस्ट नेटवर्कर माना गया था .

 रिफकिन की नेटवर्किंग स्टाइल में एहम पॉइंट यह है कि वह जितना रिसीव करता है उसके मुकाबले वह कहीं ज्यादा देता है : हालांकि टेकर्स और मैचर्स भी नेटवर्क के कॉन्टेक्स्ट में देते हैं लेकिन उनका रुझान स्ट्रेटजिकली देने का होता है, जोकि वह अपने कंट्रीब्यूशन के बराबर या उससे ज्यादा पर्सनल रिटर्न हासिल करने की उम्मीद के साथ देते हैं. जब टेकर्स और मैचर्स नेटवर्क करते हैं तो उनका रुझान इस बात पर फोकस करने का होता है कि नियर फ्यूचर में कौन उनको हेल्प कर सकता था. और इसी सोच के मुताबिक वह तय करते हैं कि उन्हें क्या, कब, और कैसे देना है. 

 

Walking the Sleeping Giant 

1993 में ग्राहम स्पेंसर नाम के एक कॉलेज स्टूडेंट ने पांच दोस्तों के साथ मिलकर एक इंटरनेट स्टार्टअप की शुरुआत करी थी.  इस स्टार्टअप का नाम " एक्साइट " था. और यह एक शुरुआती वेब पोर्टल और एक सर्च इंजन था. जो कि जल्दी ही इंटरनेट पर मोस्ट पॉपुलर साइट बन गया था. 1998 में एक्साइट को 670 करोड़ डालर में खरीद लिया गया था. और उस वक्त स्पेंसर इसका लार्जेस्ट शेयरहोल्डर और चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर बन कर बहुत हाई पोजीशन पर पहुंच गया था. 1999 में रिफकिन ने स्पेंसर से मुलाकात करके उसको अपने एक स्टार्टअप ने मदद और एडवाइस देने के लिए रिक्वेस्ट करी. 

दरअसल 1994 में रिफकिन एक नए-नए शुरू हुए बैंड का फैन बन गया था. और वह उसको पॉपुलर करने के लिए उसकी मदद करना चाहता था. इसलिए उसने अपने कंप्यूटर पर उस बैंड के लिए एक फैन वेबसाइट क्रिएट करी. और उस बैंड का नाम " ग्रीन डे" रख दिया.  जल्दी ही उसकी फैन साइट, कमर्शियल इंटरनेट पर बहुत पॉपुलर हो गई. और लाखों लोगों ने उसको विजिट किया. उन्हीं में से एक विजिटर ग्राहम स्पेंसर भी था. जिसने ग्रीन डे को रियल रॉक म्यूजिक की तरह से महसूस किया. इसके बाद उसने सुझाव दिया  कि जब लोग इंटरनेट पर रॉक म्यूजिक के बारे में सर्च करते हैं तो उन्हें इस बारे में ग्रीन डे के अलावा उससे भी ज्यादा चीजें मिलनी चाहिए. जब रिफकिन ने उस ई-मेल को पढ़ा तो उसे यह आईडिया नहीं था कि स्पेंसर भी कभी उसकी हेल्प कर सकता था. लेकिन फिर बहुत बाद में उसे पता चला कि स्पेंसर ने एक्साइट नाम से एक स्टार्टअप शुरू किया था. 

इस केस में एक टेकर या मैचर स्पेंसर के ई-मेल को इग्नोर कर सकता था. लेकिन एक गिवर की तरह से रिफकिन का कुदरती रुझान रॉक म्यूजिक को पूरी दुनिया में फैलाने के लिए  स्पेंसर की मदद करने और एक स्ट्रगलिंग बैंड की मदद करने के लिए उसका फैन बेस बनाने की तरफ था. इसलिए रिफकिन ने ग्रीन डे की फैन साइट पर एक सेपरेट पेज का सेटअप तैयार किया. और फिर उसके साथ स्पेंसर के सुझाव के मुताबिक रॉक बैंड को लिंक कर दिया. 

रिफकिन एक मैचर नहीं था. जब उसने शुरू में स्पेंसर की मदद की थी तो उस का इंटेंशन कभी भी इसके बदले में कोई फ़ेवर लेने का नहीं था. लेकिन सालों बाद जब उसको मदद लेने की जरूरत हुई तो वह एक जेनुइन रिक्वेस्ट के साथ स्पेंसर के पास पहुंच गया. और वह भी खुशी-खुशी उसकी मदद करने के लिए तैयार हो गया. 

 

Dormant Ties 

डॉर्मेंट टाइज़ ऐसे कनेक्शन्स को कहते हैं जो अब  ऐक्टिव नहीं  हैं, और उनकी वैल्यू को हमारे नेटवर्क में नेगलेक्ट कर दिया जाता है. लेकिन गिवर्स, डॉर्मेंट टाइज़ की वैल्यू को टेकर्स और मैचर्स के मुकाबले ज्यादा बेहतर तरीके से अपने फेवर में इस्तेमाल कर सकते हैं. टेकर्स के लिए डॉर्मेंट टाइज़ को दोबारा से एक्टिवेट करना बहुत मुश्किल होता है. क्योंकि अगर डॉर्मेंट टाइज़, उन्हीं के साथ के टेकर्स हैं, तो वह खुद को रीएक्टिवेट किए को शक की नजर से देखते हैं और अपना बचाव करने के लिए नई इंफॉर्मेशन को छुपा लेते हैं. अगर वह मैचर्स हैं, तो वह टेकर्स को सजा देने के लिए मोटिवेट हो सकते हैं. और अगर वह स्मार्ट गिवर्स हैं, तो वह टेकर्स की मदद करने के लिए तैयार नहीं होंगे. और अगर टेकर्स के डॉर्मेंट टाइज़ होने की वजह उनका अपना खुद का भला करने के एक्शन्स हैं, तो फिर उनकी रिलेशनशिप्स का दोबारा से एक्टिवेट हो पाना नामुमकिन हो सकता है. 

मैचर्स के लिए आमतौर पर डॉर्मेंट टाइज़ के साथ फिर से कनेक्ट होना  आसान होता है. लेकिन वह अक्सर खुद के लिए मदद मांगने में अनकंफरटेबल होते हैं. क्योंकि जब वह किसी दूसरे शख्स से कोई फ़ेवर मांगते हैं, तो वह ऐसा महसूस करते हैं कि उन्हें भी इसके बदले में उन्हें कुछ वापस देना होगा. और अगर वह ऑलरेडी डॉर्मेंट टाइज़ के कर्जदार हैं, और उन्होंने अभी तक उनसे अपना हिसाब बराबर नहीं किया है तो फिर ऐसी सिचुएशन में उनके लिए कुछ मांगना और भी मुश्किल हो जाता है. और बहुत से मैचर्स के लिए डॉर्मेंट टाइज़ एक गहरा भरोसा नहीं बना पाते हैं क्योंकि वह उनके साथ उपयोगी रिलेशनशिप्स बनाने के मुकाबले आपस में चीजों को एक्सचेंज करने में ज्यादा इंटरेस्ट होते हैं. 

नेटवर्क एक्सपर्ट्स के मुताबिक गिवर्स के लिए डॉर्मेंट टाइज़ से कनेक्ट करना एक बिल्कुल अलग तरह का एक्सपीरियंस होता है. गिवर्स का एक ट्रक रिकॉर्ड है कि वह बहुत उदारता से नॉलेज शेयर करते हैं, हमें अपनी स्किल्स के बारे में बताते हैं, और जॉब्स तलाश करने में हमारी मदद करते हैं. और वह इस बात की चिंता नहीं करते हैं कि इसके बदले में उन्हें क्या मिलेगा. इसलिए जब गिवर्स डॉर्मेंट टाइज़ के साथ दोबारा से कनेक्ट करते हैं तो वह लोग बहुत खुशी के साथ उनकी हेल्प करने को तैयार हो जाते हैं. 

 

The Five-Minute Favor

2005 में रिफकिन और जॉयस पार्क नाम के शख्स ने " 106 Miles" के नाम से एक प्रोफेशनल नेटवर्क की शुरुआत करी थी. जिसका पर्पज एक सोशल मिशन के तहत इंजीनियरिंग की फील्ड में तमाम एंटरप्रेन्योर्स को एजुकेट करना था. यह नेटवर्क 5000 से ज्यादा एंटरप्रेन्योर्स को एक साथ ले आया था . वह लोग सीखने और सफल होने में एक दूसरे की मदद करने के लिए महीने में दो बार मिलते थे. जहां पर रिफकिन, एंटरप्रेन्योर्स को फ्री एडवाइस किया करते थे. 

2012 में एक बार स्टेफनी नाम की एक महिला से ऐसे 3 लोगों की लिस्ट बनाने के लिए कहा गया जिन्होंने उसके कैरियर पर सबसे ज्यादा प्रभाव डाला था. लेकिन रिफकिन यह देखकर हैरान रह गए कि उस लिस्ट में स्टेफनी ने उनका भी नाम लिखा था. जबकि वह स्टेफनी से सिर्फ एक ही बार उस वक्त मिले थे जब वह अपने लिए जॉब ढूंढ रही थी. और उन्होंने उसे एडवाइज देकर जॉब ढूंढने में उसकी मदद की थी. वह इसके बदले में अपना ग्रिटीट्यूड एक्सप्रेस करने के लिए रिफकिन की मदद करना चाहती थी. इसलिए उसने सिलीकान वैली की " 106 miles" नेटवर्क की मीटिंग अटेंड करने के लिए खुद को वालंटियर किया. उस मीटिंग में उसने एंटरप्रेन्योर्स के आईडियाज के ऊपर अपना फीडबैक दिया, उनके प्रोडक्ट प्रोटोटाइप को टेस्ट करने का ऑफर दिया, और प्रभावशाली कोलैबोरेटर्स और इन्वेस्टर्स के साथ कनेक्शन बनाने की सुविधा प्रोवाइड की. 

इसी तरह से रिफकिन ने और भी जिन बहुत से लोगों की मदद की थी कि उन्होंने भी 106 माइल्स नेटवर्क की मीटिंग में वालंटियर कर के तमाम एंटरप्रेन्योर्स को सीखने और आगे बढ़ने में अपना पूरा योगदान दिया. यह रिसिप्रोसिटी, यानी आपसी सहयोग की एक नई फॉर्म थी. 

हालांकि ट्रडिशनल ओल्ड-स्कूल रिसिप्रोसिटी में लोग मैचर्स की तरह से ऑपरेट करते थे. और एक दूसरे के साथ वैल्यू का लेन-देन करते थे. उस वक्त हम उन्हीं लोगों की मदद करते थे जो हमारी मदद करते थे. और हम उन्हीं लोगों को देते थे, जिनसे हम बदले में कुछ मिलने की उम्मीद करते थे. 

लेकिन आजकल रिफकिन जैसे गिवर्स, रिसिप्रोसिटी को और ज्यादा पावरफुल तरीके से ऑपरेट करते हैं. रिफकिन का aim, वैल्यू की ट्रेडिंग करने की जगह वैल्यू को ऐड करना होता है. और वह इसके लिए एक सिंपल रूल को फॉलो करता है: " the Five-Minute Favor". इसका मतलब है कि आपको किसी की मदद करने के लिए ऐसी चीजों को करने के लिए तैयार रहना चाहिए जिसमें आपका सिर्फ 5 मिनट या उससे कम टाइम खर्च होता है.

CHAPTER THREE : The Ripple Effect
इस चैप्टर में यह बताया जाएगा कि कैसे कुछ लोग रिसिप्रोसिटी स्टाइल्स की मदद से अपने सहयोगियों के साथ या टीम्स में काम करके सक्सेसफुल हो जाते हैं. यहां पर जीनियस और जीनियस मेकर्स के बीच के डिफरेंस को भी क्लियर किया जाएगा : जैसे कि कैसे  एक जीनियस शख्स का झुकाव, टेकर्स की तरह से ऑपरेट करने का होता है. यानी कि वह कैसे अपने खुद के इंटरेस्ट्स को प्रमोट करने के लिए, दूसरे लोगों के इंटेलिजेंस, एनर्जी और कैपेबिलिटी को कम कर देता है . और कैसे  जीनियस मेकर्स का झुकाव गिवर्स की तरह से ऑपरेट करने का होता है : यानी कि वह कैसे अपनी इंटेलिजेंस का इस्तेमाल दूसरे लोगों की स्मार्टनेस और कैपेबिलिटीज को बढ़ाने के लिए करते हैं. और हम इस बारे में भी पता लगाएंगे कि गिवर्स और टेकर्स के बीच के डिफरेंसेज किस तरह से किसी इंडिविजुअल शख्स और ग्रुप की सक्सेस पर इफेक्ट डालते हैं.

 

The Ripple Effect

Collaboration and The Dynamics of Giving and Taking Credits 

यहां पर जॉर्ज मेयर नाम के एक शख्स का एग्जांपल दिया गया है. वह 1978 में एक कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के बाद तेजी से पैसा कमाने के तरीके तलाश करने लगा. लेकिन वह अगले 3 साल तक भी किसी काम में सक्सेसफुल नहीं हो सका. इसी बीच उसने सामाजिक सिस्टम का मुकाबला करने के लिए एक लाइब्रेरी में जाकर साइन्टिफिक स्ट्रेटेजीज को ऐनलाइज़ करना  शुरू किया. और फिर उसने अमेरिका में टेलीविजन पर दिखाए जाने वाले तमाम लाइव शोज के लिए एनिमेटेड कॉमेडी की स्क्रिप्ट लिखना शुरू किया. और वह इस फील्ड में बहुत पापुलर हो गया. 

1989 में उसको " द सिंपसंस " नाम से एक कॉमेडी शो  की स्क्रिप्ट को लिखने के लिए हायर किया गया. जोकि अमेरिका में longest- running, " sitcom" यानी सिचुएशन कॉमेडी और एनिमेटेड प्रोग्राम बन गया था. और इस शो ने 27 बार प्राइम- टाइम  एमी अवॉर्ड्स जीते थे. जिनमें से छह अवॉर्ड्स जॉर्ज मेयर ने जीते थे. 

और फिर 3 दशक के बाद जॉर्ज मेयर शो बिजनेस में मोस्ट सक्सेसफुल लोगों में से एक बन गया था . 

 

Collaboration and Creative Character 

टेकर्स की आदत क्रिएटिव आईडियाज जनरेट करने की होती है. जिसे वह बड़ी महारत के साथ अपने सामने वाले के सामने पेश करते हैं. क्योंकि उन्हें अपनी ऑपिनियंस पर बहुत ज्यादा कॉन्फिडेंस होता है.  वह खुद को सोशल अप्रूवल के ऐसे बंधन से आजाद समझते हैं, जो बहुत से लोगों के इमैजिनेशन को एक सीमित दायरे से आगे नहीं बढ़ने देता है. जॉर्ज मेयर की कॉमेडी में यही स्पेशल क्वालिटी दिखाई पड़ती  है. मेयर ने अपनी कॉमेडी के टैलेंट को सोशल और एनवायरमेंटल रिस्पांसिबिलिटी को प्रमोट करने के लिए इस्तेमाल किया है. जॉर्ज मेयर की सक्सेस इस बात को हाईलाइट करती है कि गिवर्स भी हर तरीके से  टेकर्स के जैसे ही क्रिएटिव हो सकते हैं. और उसकी एक कोलैबोरेशन में काम करने, यानी दूसरे लोगों के साथ मिलकर जॉइंटली काम करने की आदतों की स्टडी करके हम यह पता लगा सकते हैं कि गिवर्स किस तरीके से काम करके अपनी सक्सेस के साथ-साथ अपने आसपास के लोगों की सक्सेस में भी कंट्रीब्यूट कर सकते हैं. लेकिन इस बारे में एक कंपलीट अंडरस्टैंडिंग डेवेलप करने के लिए कि असल में गिवर्स एक कोलैबोरेशन में कौन सा काम इफेक्टिवली करते हैं, उनको टेकर्स के साथ कंपेयर किए जाने की जरूरत होती है. क्रिएटिव आर्किटेक्ट्स पर की गई एक रिसर्च से यह पता चलता है कि अक्सर टेकर्स के अंदर ऐसे ओरिजिनल आइडियाज जनरेट करने का कॉन्फिडेंस होता है. जिनके सपोर्ट में या बचाव में वह लोग ट्रेडीशन्स और अनफेवरेबल सरकमस्टेंसस के खिलाफ जाकर भी इसके लिए संघर्ष कर सकते हैं. लेकिन इस आजादी के लिए उन्हें कुछ कीमत भी चुकानी पड़ती है. 

 

Flying Solo

यहां पर Frank Lloyd Wright नाम के एक मशहूर अमेरिकन आर्किटेक्ट, और डिजाइनर का एग्जांपल दिया गया है जिन्होंने अपने 70 साल के क्रिएटिव पीरियड में 1000 से ज्यादा स्ट्रक्चर्स को डिजाइन किया था. हालांकि उन्होंने हर दशक में औसतन 140 डिजाइंस और 70 स्ट्रक्चर्स को कंप्लीट किया था. लेकिन 1924 से लेकर 1933 तक के 9 साल के पीरियड में उनकी प्रोडक्टिविटी 35 गुना तक घट गई थी और उन्होंने उस दौरान सिर्फ दो प्रोजेक्ट ही कंप्लीट किए थे. और इसी बीच वह 2 साल तक बिल्कुल बेरोजगार भी हो गए थे. 

1911 में उन्होंने एक दूरदराज के इलाके में " Teliesin" नाम की एक इस्टेट को डिजाइन किया और फिर वहीं जाकर रहने लगे. उनका विचार था कि वह किसी स्टाफ या असिस्टेंट के बिना अकेले ही अपने काम को बेहतर तरीके से कर सकते थे. लेकिन फिर लंबे समय के लिए उनका काम कम होता चला गया. 

आखिरकार 1933 में उन्होंने आजादी के साथ काम करना छोड़ कर टैलेंटेड कोलैबोरेटर्स के साथ काम करना शुरू किया. और फिर उसके बाद उनकी प्रोडक्टिविटी बहुत बढ़ गई. 

Wright की स्टोरी से यह पता चलता है कि हमारी नेचुरल टेंडेंसीज, इस मामले में कॉन्फिडेंट नहीं हैं कि क्रिएटिव सक्सेस का क्रेडिट किसी इंडिविजुअल शख्स को दिया जाना चाहिए या फिर यह एक कोलैबोरेटिव रियलिटी है. यानी कि कई लोगों के साथ मिलकर काम करने का रिजल्ट है. बल्कि सच्चाई तो यह है कि इंडिपेंडेंट नजर आने वाले जॉब्स में भी हमारी सक्सेस दूसरे लोगों पर ज्यादा डिपेंड करती है. 

 

I Wish I Could Hate You 

जॉर्ज मेयर और फ्रैंक लॉयड राइट का कंपैरिजन करने से यह पता चलता है कि गिवर्स और टेकर्स सक्सेस के बारे में बिल्कुल अलग-अलग तरीके से सोचते हैं. राइट का रुझान टेकर्स की तरह से ऑपरेट करने का था. और वह यह सोचता था कि वह शिकागो में जहां एक्सपर्ट लोगों की एक टीम के साथ काम करता था, वहां से विस्कंसिन के दूरदराज के इलाके में, जहां वो अकेला रहकर इंडिपेंडेंटली काम करता था, वहां पर अपनी आर्किटेक्चरल जीनियस को ले जा सकता था. और सक्सेस हासिल कर सकता था. एक रिसर्च के मुताबिक अमेरिकन अपनी इंडिपेंडेंस  को एक स्ट्रैंथ के सिंबल के तौर पर देखते हैं . और इंटरडिपेंडेंस यानी एक दूसरे पर डिपेंड होने को एक वीकनेस की निशानी के तौर पर देखते हैं . 

गिवर्स इंटरडिपेंडेंस को कमजोर नहीं मानते हैं. बल्कि उनके लिए इंटरडिपेंडेंस, स्ट्रैंथ के एक सोर्स की तरह होता है जो बहुत से लोगों की स्किल्स को बहुत से लोगों के लिए यूटिलाइज करने का एक तरीका होता है. मेयर का रुझान गिवर्स की तरह से ऑपरेट करने का था. इसी वजह से मेयर एक ग्रुप कोलैबोरेशन में काम करके बहुत पॉपुलर हो गया था. 

 

Claiming the Lion's Share of the Credit

जब हम शो बिजनेस में जॉर्ज मेयर के कॉमेडी टेक्स्ट राइटिंग के एक्सपीरियंस और एक आर्किटेक्ट के तौर पर लॉयड राइट की सक्सेस पर विचार करते हैं तो हम देखते हैं कि राइट अपनी सक्सेस के लिए खुद को क्रेडिट देता था, इसके बावजूद इसका क्रेडिट उसके  कोलैबोरेशन में काम करने वाले लोगों के कंबाइंड एफर्ट को जाता था. दूसरी तरफ मेयर अपनी सक्सेस के लिए खुद को क्रेडिट देने की कोशिश नहीं करता था. इस वजह से एक शॉर्ट टाइम के लिए उसकी शोहरत कुछ कम हो सकती थी. लेकिन वह इस बारे में चिंता नहीं करता था. बाद में यह साबित हो गया कि मेयर सही था. क्योंकि उसके शॉर्ट- टर्म सैक्रिफाइस के बावजूद उसको उसके काम का पूरा क्रेडिट दिया गया था. उसने एक एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर के तौर पर, और अपने शानदार काम के  लिए 6 ग्रैमी अवॉर्ड्स जीत कर अपने लिए बिना मांगे ही क्रेडिट earn किया था. 

 

The Responsibility Bias

LinkedIn के फाउंडर रीड हॉफमैन कहते हैं कि ज्यादातर लोग अपने अच्छे इंटेंशन के बावजूद अपने खुद के कंट्रीब्यूशन को ज्यादा वैल्यूएबिल और दूसरों के कंट्रीब्यूशन को कम वैल्यूएबिल मानते हैं. यह रिस्पांसिबिलिटी बॉयस, यानी जिम्मेदारी लेने के मामले में इस तरह का भेदभाव वाला रवैया, कोलैबोरेशन के फेल होने में काफी हद तक जिम्मेदार होता है. जॉर्ज मेयर ने अपने रिस्पांसिबिलिटी बॉयस पर पूरा कंट्रोल किया हुआ था. एक गिवर की तरह उसका पूरा फोकस एक ऐसे कलेक्टिव रिजल्ट को हासिल करना होता था जो दूसरे लोगों को इंटरटेन कर सके. लेकिन वह ऐसे रिजल्ट को हासिल करने के लिए अपनी पर्सनल रिस्पांसिबिलिटी को क्लेम नहीं करता था. मेयर जैसे गिवर्स दूसरे लोगों के कंट्रीब्यूशन को रिकॉग्नाइज करने में पूरा ध्यान देते हैं. जिसकी वजह से कोलैबोरेशंस को सक्सेसफुली काम करने में मदद मिलती है. 

 

The Perspective Gap

रिस्पांसिबिलिटी बॉयस को कंट्रोल करके हम दूसरे लोगों के कंट्रीब्यूशन को क्लीयरली समझ सकते हैं. इसके साथ ही साथ हम एक कोलैबोरेशन में अपने कलीग्स को सपोर्ट ऑफर करने के लिए  उनके योगदान को भी श्रेय देकर पूरे ग्रुप वर्क को सक्सेसफुल बना सकते हैं. मेयर के अंदर भी ऐसी एबिलिटीज मौजूद थीं , जिनकी मदद से वह गिवर्स की तरह एक कोलैबोरेशन में टीम की सक्सेस के लिए जरूरी स्टेप्स लिया करते थे. और अपनी टीम के साथ जुड़े हुए सभी लोगों के अच्छे कामों के लिए उनको प्रॉपर क्रेडिट देकर उनका रिस्पेक्ट करते थे. वह पर्सपेक्टिव गैप को समझते थे. इसलिए वह अपने साथ काम करने वाले लोगों के दुख और तकलीफ में उनको पूरी हमदर्दी के साथ मोरल सपोर्ट देते थे, उनके कॉन्फिडेंस को बढ़ाने की कोशिश करते थे और उनके अंदर निराशा की फीलिंग को कम करने के लिए हर तरह से उनकी पूरी मदद करते थे : जैसेकि जब कभी उनके साथ काम करने वाले दूसरे राइटरर्स के काम को कट कर दिया जाता था तो उस वक्त मेयर उन लोगों के साथ नरमी से पेश आ कर उन्हें तसल्ली दिया करते थे . जिसकी वजह से उनके अंदर कॉन्फिडेंस काफी बढ़ जाता था और वह पूरे जोश के साथ दूसरे तरीकों से टीम को सपोर्ट करते थे. ग्रांट कहते हैं कि जब हम साइकोलॉजिकली या शारीरिक तौर पर बाहरी दुनिया में एक इंटेंस सिचुएशन को महसूस नहीं कर पाते हैं तो हम इसके इफेक्ट को बहुत कम मान लेते हैं : जैसे मरीज का इलाज करते वक्त डॉक्टर्स लगातार यही सोचते हैं कि उनके मरीज कम दर्द महसूस कर रहे हैं. जबकि असल में उन्हें उनके दर्द की तेजी का अंदाजा नहीं होता है. इसी को पर्सपेक्टिव गैप कहते हैं.

CHAPTER FOUR : Finding the Diamond in the Rough
इस चैप्टर में यह बताया जाएगा कि कैसे गिवर्स, दूसरे लोगों के अंदर के पोटेंशियल को पहचान कर सक्सेस हासिल करते हैं. और साथ ही साथ हम एकाउंटिंग के एक मशहूर टीचर "Skender " की टेक्निक्स के बारे में पता लगाएंगे. 

Finding the Diamond in the Rough 

The Fact and Fiction of Recognizing Potential 

Star Search

यहां पर अमेरिका में नॉर्थ कैरोलिना स्टेट के ड्यूक शहर के स्टार एथलीट " Reggie Love" के बारे में बताया गया है. जहां पर वह फुटबॉल और बास्केटबॉल दोनों टीम्स में  अहम रोल्स प्ले करते थे. वह पॉलिटिकल साइंस और पब्लिक ड्यूटी में ग्रेजुएशन करने के बाद 2 साल तक (NFL) यानी नेशनल फुटबॉल लीग में अपने सिलेक्शन के लिए कोशिश करने के बाद भी इसमें कामयाब नहीं हो सके थे. लेकिन फिर वह 26 साल की उम्र में अमेरिका के प्रेसिडेंट बराक ओबामा का पर्सनल असिस्टेंट बनने में कामयाब हो गए. जहां पर वह रोज 18 घंटे तक बड़ी मेहनत से अपनी बहुत सी जिम्मेदारियों को निभाने के साथ-साथ व्हाइट हाउस के मेल-रूम में रिसीव किए गए पब्लिक के सभी लेटर्स को पढ़कर उनका जवाब भी दिया करते थे. बराक ओबामा भी रेगी लव की मेहनत और लगन से बहुत प्रभावित थे. 

यहां पर दशकों पहले रेगी लव के होम स्टेट, नॉर्थ कैरोलिना में रहने वाली " Beth Traynham" नाम की एक महिला के बारे में बताया गया है. जो पढ़ाई में कमजोर थीं . लेकिन उन्होंने 30 साल की उम्र में एक बार फिर स्कूल जाकर एकाउंटिंग की पढ़ाई करने का डिसाइड किया. और उन्होंने अगस्त 1992 में (CPA) यानी सर्टिफाइड पब्लिक अकाउंटेंट के एग्जाम को गोल्ड मेडल के साथ पास कर लिया. इसके बाद वह " Hughes, Pittman and Gupton, LLC" की एक रिस्पेक्टटेड पार्टनर बन गईं . 

हालांकि बेथ ट्रेनहम और रेगी लव, अलग-अलग तरह की जिंदगी को जीते हैं, लेकिन उनकी एक जैसी प्रोफेशनल सक्सेस, और उनका होमस्टेट नॉर्थ कैरोलिना होने के अलावा वह दोनों एक कॉमन कांटेक्ट, 58 साल के एकाउंटिंग प्रोफेसर, C J Skender  के जरिए भी एक दूसरे से जुड़े हुए हैं. 2004 में रेगी लव ने ड्यूक यूनिवर्सिटी में स्कैंडर की अकाउंटिंग क्लास में एडमिशन लिया था. यह एक समर कोर्स था. लव को अपने ग्रेजुएशन के लिए इस कोर्स की जरूरत थी. हालांकि बहुत से दूसरे प्रोफेसर्स, उनकी फुटबॉल और बास्केटबॉल की बैकग्राउंड की वजह से उन्हें पढ़ाई के मामले में सीरियसली नहीं लेते थे. और रेगी लव से पहले स्कैंडर की क्लास में भी कोई फुटबॉल प्लेयर पढ़ने के लिए नहीं आया था, लेकिन इसके बाद भी स्कैंडर ने उनकी एथलेटिक्स में कैपेबिलिटीज के अलावा उनके पोटेंशियल को पहचान लिया था. इसलिए उन्होंने लव को क्लास में इंगेज करने के लिए अपने स्पेशल एफर्ट्स लगा दिए थे. और इस मामले में उनकी इनट्यूशन बिल्कुल सही साबित हुई थी कि उनके एफर्ट्स लव की सक्सेस में फायदेमंद साबित होंगे. क्योंकि बाद में रेगी लव ने उनके पढ़ाए हुए कोर्स से जो नॉलेज हासिल करी थी. उसी का इस्तेमाल उन्होंने व्हाइट हाउस में ओबामा के मेल-रूम में जमा हो रही चिट्ठियों को अच्छी तरह से मैनेज करने के लिए किया था. इसके लिए उन्होंने चिट्ठियों  के बहुत बड़े बैकलॉग को ऑर्गेनाइज और डिजिटाइज करने के प्रोसेस को ज्यादा एफिशिएंट तरीके से डेवलप किया था. 2011 में लव ने Wharton में एग्जीक्यूटिव एमबीए की पढ़ाई करने के लिए व्हाइट हाउस को छोड़ दिया था . 

दूसरी तरफ 1992 में बेथ ट्रेनहम को CPA का exam देने के बाद ऐसा लग रहा था जैसे उनकी तैयारी अच्छी नहीं थी और वह शायद इस एग्जाम में फेल हो जाएंगी. जब उन्होंने इस बारे में स्कैंडर से अपनी चिंता जाहिर की तो उन्होंने पूरे यकीन के साथ उनको तसल्ली देते हुए कहा कि वह दावे के साथ कह सकते हैं वह इस एग्जाम में बहुत अच्छे से पास हो जाएंगी. और उन्होंने यह भी प्रॉमिस किया कि अगर वह इस एग्जाम में पास नहीं होती हैं तो वह उनकी पढ़ाई का पूरा खर्चा उठाएंगे. और उस साल सीपीए के एग्जाम में बेथ ट्रेनहम के गोल्ड मेडल जीतने के अलावा, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल्स भी स्केन्डर के स्टूडेंट्स ने ही जीते थे. 

हो सकता है कि स्कैंडर अपनी इनट्यूशन की वजह से लोगों के अंदर के पोटेंशियल की पहचान करते हैं. लेकिन असल में उनकी स्किल के पीछे rigorous science हाथ है. 

rigorous science का मतलब किसी रिजल्ट को हासिल करने के लिए स्ट्रिक्ट साइंटिफिक मेथड्स का इस्तेमाल करना होता है. 

 

Star Search

मैनेजमेंट रिसर्चर Brian Natt ने तमाम आर्गेनाईजेशन्स के करीब 3000 इम्प्लॉइज पर कई तरह की स्टडीज के बारे में हर तरह की पॉसिबिलिटीज को एनालाइज किया. इसी दौरान उन्होंने उन आर्गेनाईजेशन्स के मैनेजर्स को अपने एंप्लाइज को " ब्लूमर्स" यानी सक्सेसफुल तरीके से डेवेलप करने वाले एंप्लाइज की तरह से देखने का काम सौंप दिया. और उन्हें एंप्लाइज की पॉसिबल पावर और इनफ्लुएंस को दो स्टेप्स में रिकॉग्नाइज करने के लिए इनकरेज किया : जैसेकि पहला स्टेप था, उन्हें वाकई में अपने एंप्लाइज के पोटेंशियल में भरोसा और इंटरेस्ट रखना चाहिए था. और दूसरा स्टेप था, उन्हें दूसरे लोगों के मोटिवेशन और एफर्ट को बढ़ाकर उस पोटेंशियल को हासिल करने के लिए उन्हें ऐसे एक्शंस में एंगेज करना चाहिए था जो उन्हें इसके लिए सपोर्ट कर सकते हों. और उनके भरोसे को कम्युनिकेट भी कर सकते हों. 

बहुत से मैनेजर्स और टीचर्स ऑलरेडी इस मैसेज पर यकीन करते हैं. और वह लोगों को कुदरती तौर पर ब्लूमर्स की तरह से ही देखते हैं. 

हालांकि टेकर्स इस केस में दूसरे लोगों पर बहुत कम भरोसा करते हैं. क्योंकि टेकर्स के अंदर दूसरे लोगों के इंटेंशन्स के बारे में doubts, और suspicions छुपे होते हैं. और अपने इसी डर की वजह से वह दूसरे लोगों के डेवलपमेंट और मोटिवेशन में रुकावट डालने की कोशिश करते है. 

मैचर्स रिसिप्रोसिटी की वैल्यू को समझते हैं. इसलिए जब उनके साथी और सबोर्डिनेट्स हाई पोटेंशियल का प्रदर्शन करते हैं तो मैचर्स अपने आगे बढ़ने वाले कलीग्स को सपोर्ट, एनकरेज, और डेवेलप करने के लिए खुशी-खुशी अपना स्पेशल एफर्ट लगाते हैं. 

गिवर्स, लोगों में पोटेंशियल दिखाई देने का इंतजार नहीं करते हैं. क्योंकि दूसरे लोगों के इंटेंशन्स के बारे में उनका रुझान भरोसेमंद और उम्मीद से भरा होता है. वह सभी लोगों में पोटेंशियल देखना चाहते हैं और वह ऑलरेडी सभी लोगों को ब्लूमर्स की तरह से ही देखते हैं.

 

Polishing the Diamond in the Rough 

स्कैंडर अपनी अकाउंटिंग की क्लास में पढ़ाई के साथ- साथ कई तरह के म्यूजिक और एंटरटेनमेंट को भी शामिल करते हैं . क्योंकि उनको यह भरोसा होता है कि इस तरह से उनके स्टूडेंट्स अपनी पढ़ाई के डिसिप्लिन में महारत हासिल करने के लिए और ज्यादा टाइम और एनर्जी लगाएंगे. 

उनके बारे में रेगी लव कहते हैं कि स्कैंडर म्यूजिक के बारे में किसी भी दूसरे शख्स से ज्यादा जानते हैं . और वह हमेशा म्यूजिक को अपने लेक्चर के साथ बड़े इंटरेस्टिंग तरीके से मिक्स करके स्टडी मटेरियल के साथ स्टूडेंट्स को कनेक्ट करने में मदद करते हैं . जब आप एक मुश्किल कोर्स करने के बारे में सोचते हैं, जोकि आमतौर पर बहुत इंटरेस्टिंग नहीं है, तो ऐसे में इसके साथ बने रहना बहुत चैलेंजिंग होता है. लेकिन स्कैंडर ने इस कोर्स को बहुत इंटरेस्टिंग बना दिया था . आखिरकार इसी वजह से रेगी लव इसमें कड़ी मेहनत करके उनकी क्लास में A ग्रेड हासिल कर पाए थे. 

स्कैंडर के एक फॉर्मर स्टूडेंट David Moltz, जो गूगल में काम करते हैं, उनका कहना है कि स्कैंडर अपने पास आने वाले हर स्टूडेंट के साथ-साथ हर एक शख्स की भी हेल्प करते हैं, चाहे वह किसी भी तरीके से उनके पास आया हो. वह अपनी लाइफ के सैकड़ों घंटे का समय सिर्फ इसलिए सैक्रिफाइस कर देते हैं, जिससे कि वह स्टूडेंट्स के फ्यूचर को बेहतर बनाने की तरफ कुछ कंट्रीब्यूट कर सकें. और जहां तक पॉसिबल हो सके वह ज्यादा से ज्यादा लोगों को पढ़ाने की कोशिश करते हैं. और वह उन्हें एन्गेज करने के लिए अपने स्पेशल एफर्ट्स लगाते हैं जिससे कि वह खुद को स्पेशल फील कर सकें. 

 

Throwing Good Money After Bad Talent 

गिवर्स को अपने चारों तरफ पोटेंशियल नजर आता है, इसलिए वह लोगों में इस पोटेंशियल को इनकरेज और डेवेलप करने के लिए अपना बहुत सारा टाइम लगा देते हैं. लेकिन वह हर बार इसमें सफल नहीं होते हैं. क्योंकि कभी-कभी वह ऐसे लोगों को मोटिवेट करने की कोशिश करते हैं जिनमें जरूरी टैलेंट, या लगन या फिर पेशेंस की कमी होती है. 

स्कैंडर ने एक बार एक ऐसी स्टूडेंट के लिए 100 से भी ज्यादा बार रिकमेंडेशन लेटर्स लिखे थे, जो एकाउंटिंग से बाहर के ग्रेजुएशन प्रोग्राम के लिए अप्लाई कर रही थी. लेकिन उसको सभी प्रोग्राम्स के लिए रिजेक्ट कर दिया गया था. उस स्टूडेंट ने दूसरे साल फिर से अप्लाई करने का डिसाइड किया. और स्कैंडर ने भी अपनी ड्यूटी समझते हुए एक बार फिर से उसके लिए रिकमेंडेशन लेटर्स लिख  दिए. और जब तमाम स्कूलों ने एक बार फिर से उसके लिए मना कर दिया तो स्कैंडर ने लगातार तीसरे साल के लिए अपने रिकमेंडेशन लेटर्स को रिवाइज किया था. फाइनली तीन बार कोशिश करने के बाद उन्होंने उस स्टूडेंट को कोई अलग रास्ता अपनाने का सुझाव दे दिया. 

अगर स्कैंडर का ज्यादा रुझान टेकर्स या मैचर्स की तरह से ऑपरेट करने का होता, तो उन्होंने अपना टाइम बचाने के लिए बहुत पहले ही उसका साथ छोड़ दिया होता 

 

Facing the Mirror : Looking Good or Doing Good? 

जब एंटरप्रेन्योर्स मुश्किल हालातों से गुजर रहे होते हैं तो वह यह सोचते हैं कि वह अपने स्टार्टअप्स के साथ थोड़ी सी और मेहनत करके उसकी स्थिति को बेहतर बना सकते हैं. जब एक इन्वेस्टमेंट करने पर उम्मीद के मुताबिक सक्सेस नहीं मिलती है तो, आप अपनी स्थिति सुधारने के लिए इसमें और ज्यादा इन्वेस्टमेंट करने का रिस्क लेते हैं. इस एक्शन को " Escalation of commitment" कहते हैं. और इकोनॉमिस्ट्स इस बिहेवियर को " Sunk cost fallacy", यानी डूबी लागत का भ्रम कहते हैं. इसका मतलब है कि जब हम एक फ्यूचर इन्वेस्टमेंट की वैल्यू को एस्टीमेट करते हैं, तो हमें ऑलरेडी पास्ट में किए गए इन्वेस्टमेंट को इग्नोर करने में बहुत तकलीफ होती है. 

टेकर्स के लिए अक्सर एस्केलेशन सिचुएशंस में, यानी इन्वेस्टमेंट की वैल्यू बढ़ने की स्थिति में इस रियलिटी को फेस करना बहुत मुश्किल होता है कि पहले उन्होंने एक गलत चॉइस को सिलेक्ट कर लिया था. जबकि गिवर्स इस बात पर फोकस करते हैं कि उनके डिसीजंस की वजह से दूसरे लोगों के साथ संबंधों और ऑर्गेनाइजेशंस की एक्टिविटीज पर किस तरह का इफेक्ट पड़ता है . और फिर वह उसी के मुताबिक लॉन्ग टर्म के लिए बेहतर चॉइसेज बनाते हैं.

CHAPTER FIVE : The power of Powerless Communication
इस चैप्टर में यह बताया गया है कि दूसरों को प्रभावित करने वाले clues यानी सुराग का पता कैसे लगाया जा सकता है. और यह समझाया गया है कि जब गिवर्स अपना इनफ्लुएंस चाहते हैं, तो वह इसके लिए दूसरों से अलग क्या करते हैं? 

और कैसे गिवर्स, इनफ्लुएंस हासिल करने के लिए, " पावरलेस कम्युनिकेशन" स्टाइल को आसानी  से अपना कर बहुत इफेक्टिव तरीके से प्रेस्टीज बिल्डिंग कर लेते हैं. 

 

The power of Powerless Communication 

How to Be Modest and Influence People :

Daniel Pink ने अपनी किताब  " To Sell Is Human" में यह डिस्कस किया है कि हमारी सक्सेस काफी हद तक इनफ्लुएंस स्किल्स पर डिपेंड करती है. दूसरे लोगों को बहुत सी चीजों के लिए कन्वींस करने के लिए हमें ऐसे तरीकों की जरूरत होती है जो उन्हें हमारी बातें मानने के लिए राजी करने के साथ-साथ मोटिवेट भी करते हों: जैसे कि प्रोडक्ट्स को खरीदने के लिए, सर्विस को इस्तेमाल करने के लिए, आईडियाज को एक्सेप्ट करने के लिए, और हमारे बिजनेस में इन्वेस्ट करने के लिए. 

रिसर्च से पता चलता है कि इनफ्लुएंस हासिल करने के लिए बुनियादी तौर पर दो रास्ते होते हैं : जैसे Dominance और Prestige. 

हम डोमिनेंस establish करके इनफ्लुएंस हासिल करते हैं. क्योंकि उस केस में दूसरे लोग हमें एक स्ट्रांग, पावरफुल और अथॉरिटी वाले शख्स की तरह देखते हैं. 

और जब हम प्रेस्टीज earn करते हैं तो हम इनफ्लुएंशल यानी प्रभावशाली बन जाते हैं. क्योंकि उस वक्त दूसरे लोग हमारा रिस्पेक्ट और तारीफ करते हैं. 

इनफ्लुएंस के यह दोनों रास्ते हमारी रिसिप्रोसिटी स्टाइल्स के साथ बहुत करीब से जुड़े होते हैं. टेकर्स डोमिनेंस हासिल करने में बहुत तेज होते हैं. वह ज्यादा से ज्यादा वैल्यू क्लेम करने की कोशिश में खुद को दूसरों से सुपीरियर बनाने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं. वह डोमिनेंस इस्टैबलिश  करने के लिए " पावरफुल कम्युनिकेशन " में स्पेशलाइज्ड होते हैं : जैसे वह अपनी अथॉरिटी को प्रूव करने के लिए फोर्सफुली ऊंची आवाज में बोलते हैं, अपना कॉन्फिडेंस दिखाने के लिए एक श्योरिटी को जाहिर करते हैं, अपने अकांप्लिशमेंट्स यानी अपनी उपलब्धियों को प्रमोट करते हैं, और उन्हें बहुत यकीन और गर्व के साथ दूसरों के सामने पेश करते हैं. जब टेकर्स ज्यादा डोमिनेंट बनकर दूसरों से मिलते हैं तो इसमें उनके इनफ्लुएंस के खोने का रिस्क रहता है. जबकि दूसरी तरफ प्रेस्टीज कभी पूरी तरह से खत्म नहीं हो सकती है. क्योंकि इसमें रिस्पेक्ट और तारीफ किए जाने की ऐसी कोई लिमिट नहीं होती है जिसे निकाल कर बाहर किया जा सकता है. इसका मतलब है कि प्रेस्टीज ज्यादा टाइम तक टिकने वाली वैल्यू होती है. 

एक टेकर की " पावरफुल कम्युनिकेशन " स्टाइल के ऑपोजिट स्टाइल को " पावरलेस कम्युनिकेशन " स्टाइल कहते हैं. जिसमें बातचीत करने वाले लोग ज्यादा स्ट्रांग्ली नहीं बोल पाते हैं, बल्कि वह अपनी बातों में तमाम तरह के डाउट्स जाहिर करते हैं, और वह काफी हद तक दूसरों की एडवाइस पर डिपेंड होते हैं. उनकी बातों से उनकी कमजोरियों और हिचकिचाहट के बारे में पता चलता है. टेकर्स इन्फ्लुएंस के मामले में पावरलेस कम्युनिकेशन के इस्तेमाल को एक डिसएडवांटेज के तौर पर देखते हैं. 

 

Presenting : The Value of Vulnerability 

पावरलेस कम्युनिकेशन स्टाइल का इस्तेमाल करके भी आप एक अलग तरीके से इनफ्लुएंस हासिल कर सकते हैं. इसके लिए आपको अपनी क्वालिटीज और एक्सपीरियंस को इस्टैबलिश करने की जगह खुद को Vulnerable, यानी एक ऐसे कमजोर और नाजुक शख्स की तरह बनाकर प्रजेंट करना होगा जिसको आसानी से चोट पहुंचाया सकती है. 

टेकर्स यह चिंता करते हैं कि उनकी कमजोरियों का पता लग जाने पर दूसरे लोगों के बीच उनका dominance और अथॉरिटी दोनों बहुत कम हो जाएंगे. जबकि गिवर्स बहुत आसानी से दूसरों के सामने अपनी कमजोरियों को जाहिर कर देते हैं. क्योंकि वह दूसरों को अपनी पावर दिखाने की जगह उनकी हेल्प करने में इंटरेस्टेड होते हैं. दरअसल गिवर्स खुद को कमजोर बना कर अपनी प्रेस्टीज बनाते हैं. 

लेकिन यहां पर यह भी ध्यान रखना चाहिए कि यह तरीका तभी सही तरीके से काम करता है, जब ऑडियंस को स्पीकर के बारे में कुछ स्पेशल एबिलिटीज और क्वालिटीज के बारे में दूसरे सिग्नल्स भी मिलते हैं. जिनसे उन्हें यह लगता है कि उनको इनफ्लुएंस करने वाला शख्स भी एक आम इंसान जैसा है. और वह लोग भी उसके जैसी स्पेशल क्वालिटीज हासिल करके उसकी तरह इनफ्लुएंसिव बन सकते हैं.

 

Selling : Separating the Swindlers From the Samaritans 

बहुत से लोगों का यह मानना है कि परसूएडिंग स्किल्स यानी लोगों को अपनी बात मानने के लिए राजी करने वाली स्किल्स का मतलब है कि आप अपनी स्पीच में एक कॉन्फिडेंट और क्लियर ओपिनियन को  मजबूती के साथ रख सकते हैं. लेकिन रोजमर्रा की जिंदगी में ऐसा नहीं है. क्योंकि यहां पर एडवरटाइजर्स, टेलीमार्केटर्स, सेल्स के लोग, फंड-रेजर्स और पॉलीटिशियंस हमें हर समय यह कन्वींस करने की कोशिश में लगे रहते हैं कि हम उनके प्रोडक्ट्स को खरीदना चाहते हैं, उनकी सर्विसेज को यूज़ करना चाहते हैं, और उनकी मुहिम को सपोर्ट करना चाहते हैं. इसलिए जब हम एक पावरफुल, परसूएसिव मैसेज को सुनते हैं तो हम उस पर शक करते हैं. कि कहीं इसमें कोई धोखा तो नहीं है. और दूसरी तरफ हम नहीं चाहते हैं कि हमारे डिसीजंस दूसरे लोग कंट्रोल करें, बल्कि हम खुद अपनी फ्री चॉइस बनाना चाहते हैं. इसीलिए अगर आप से कहा जाए कि बाहर निकलिए और वोट कीजिए. तो शायद आप इसका विरोध कर सकते हैं. लेकिन अगर आपसे यह कहा जाए कि क्या आप वोट देने के लिए प्लान कर रहे हैं? तो आप ऐसा फील नहीं करेंगे कि आपको इनफ्लुएंस करने की कोशिश की जा रही है. क्योंकि यह एक इनोसेंट क्वेरी है. इसलिए आप इसका विरोध करने की जगह अपनी राय जाहिर करेंगे : जैसे आप यह कह सकते हैं कि ठीक है, आप  भी एक अच्छे सिटीजन की तरह अपने कैंडिडेट को सपोर्ट करना चाहते हैं. इस तरह से आप यह महसूस नहीं करेंगे कि आपको किसी तरह से इनफ्लुएंस करके किसी काम को करने के लिए राजी किया जा रहा है.

साइकोलॉजिस्ट इलियट एरॉनसन एक्सप्लेन करते हैं कि आप ऑलरेडी किसी ऐसे शख्स से कन्वींस्ड हैं जिसको आप पसंद करते हैं और उस पर भरोसा करते हैं और वह शख्स आप खुद हैं. 

 

Persuading : The Technique of Tentative Talk 

जब गिवर्स पावरलेस स्पीच का इस्तेमाल करते हैं तो वह यह दिखाते हैं कि उन्हें हमारी चिंता है. और वह दिल से हमारी हेल्प करना चाहते हैं. लेकिन लोग लीडरशिप के रोल में पावरलेस स्पीच यानी काम चलाऊ बातचीत को अवायड करते हैं. मिसाल के तौर पर कुछ साल पहले Barton Hill नाम के एक मार्केटिंग मैनेजर एक फाइनेंशियल सर्विसेज फर्म में एक बिजनेस यूनिट को लीड कर रहे थे. और उन्हें एक हायर-लेवल की पोजीशन पर एक मेजर प्रमोशन के लिए इंटरव्यू देने के लिए इनवाइट किया गया. जहां पर उनसे एक आसान सा सवाल पूछ कर इंटरव्यू की शुरुआत की गई: जैसे कि " अपनी सक्सेस के बारे में बताइए". इसके जवाब में उन्होंने अपनी टीम की अचीवमेंट्स के बारे में बताना शुरू किया जो कि बहुत इंप्रेसिव थी. हालांकि Barton Hill इस पोजीशन के लिए मुकाबले में सबसे आगे थे, लेकिन वह इस क्वेश्चन को सही ढंग से नहीं समझ सके थे. इंटरव्यूअर ने उन्हें बताया कि वह एक लीडर की तरह नहीं लग रहे थे. इसलिए उन्होंने उनको प्रमोशन के लिए रिजेक्ट कर दिया था. दरअसल हिल, टीम की सक्सेस में अपनी लीडरशिप के कंट्रीब्यूशन के बारे में क्लीयरली, बोल्ड और कॉन्फिडेंट ढंग से नहीं बता पाए और खुद को भी टीम का एक हिस्सा मानकर टीम की अचीवमेंट्स के बारे में बताया था.  इस वजह से इंटरव्यूअर को ऐसा महसूस हुआ जैसे हिल ने टीम की सक्सेस को आगे नहीं बढ़ाया था और उन्हें कोई ऐसा शख्स चाहिए था जो इस काम को कर सके . इस तरह से उन्हें अपने पावरलेस कम्युनिकेशन की वजह से अपने जॉब में प्रमोशन का एक बहुत बड़ा मौका खोना पड़ा. 

Barton Hill अपने इंटरव्यू में पावरफुल स्पीच को यूज करने में फेल हो गए थे. इस वजह से वह डोमिनेंस का इंप्रेशन क्रिएट करने में भी फेल हो गए थे. फिर भी, जिस पावरलेस कम्युनिकेशन की वजह से उन्होंने अपना प्रमोशन खो दिया था, आखिर में उसी की वजह से उन्होंने अपने लिए प्रेस्टीज भी कमाया था, क्योंकि उन्होंने अपनी टीम की सक्सेस के लिए खुद को क्रेडिट ना देकर पूरी टीम को इस का क्रेडिट दिया था . हालांकि पावरफुल कम्युनिकेशन्स, किसी इंटरव्यू में या किसी  टीम में या फिर किसी सर्विस रिलेशनशिप में  तो इफेक्टिव हो सकते हैं, लेकिन इसकी वजह से आप अपने लिए दूसरों की रिस्पेक्ट और तारीफ खो देते हैं. 

 

Negotiating : Seeking advice in the Shadow of Doubt 

2007 में एक फॉर्च्यून 500 कंपनी ने अमेरिका में, मिडवेस्ट में अपने एक प्लांट को बंद कर दिया. और वहां जॉब करने वाली एनी नाम की रिसर्च स्कॉलर को ईस्ट कोस्ट में ट्रांसफर करने का ऑफर दिया. लेकिन उसकी प्रॉब्लम यह थी कि वह कंपनी में फुल टाइम जॉब करने के बाद रात में पार्ट टाइम एमबीए प्रोग्राम की पढ़ाई कर रही थी. और वह एमबीए के लिए अपना जॉब नहीं छोड़ सकती थी. क्योंकि ऐसा करने पर कंपनी उसकी डिग्री के लिए कोई पेमेंट नहीं करने वाली थी. फिर भी अगर वह ट्रांसफर को एक्सेप्ट करती थी तो फिर वह अपनी पढ़ाई कंटिन्यू नहीं कर सकती थी. 

और फिर 2 हफ्ते बाद उसके लिए चीजें बेहतर होना शुरू हो गईं : जैसे, उसको एमबीए कंप्लीट कर लेने तक, कंपनी के प्राइवेट जेट में अनलिमिटेड ट्रैवल करने के लिए एक सीट ऑफर की गई, जबकि यह फैसिलिटी सिर्फ कंपनी के टॉप एग्जीक्यूटिव्स को ही हासिल थी. उसने ट्रांसफर ऑफर को एक्सेप्ट कर लिया और अगले 9 महीनों तक कारपोरेट जेट में ट्रैवल करते हुए हफ्ते में दो बार ईस्ट कोस्ट से मिडवेस्ट तक आना-जाना कंटिन्यू रखा, जब तक कि उसने अपना एमबीए कंप्लीट नहीं कर लिया. कंपनी ने उसको हर हफ्ते रेंटल कार के लिए और कमर्शियल प्लेन की टिकट के लिए भी उस वक्त पेमेंट किया, जब प्राइवेट जेट उड़ान पर नहीं होता था. 

आखिर उसने कंपनी को अपने लिए इतना बड़ा इन्वेस्टमेंट करने के लिए कैसे तैयार किया था? हालांकि एनी ने यह सारे "Perks" यानी सुविधाएं, कंपनी से किसी तरह का निगोशीएशन किए बिना ही हासिल किए थे. क्योंकि आमतौर पर टेकर्स, नेगोशिएशंस के जरिए यानी किसी इशू को सॉल्व करने के लिए एक स्ट्रैटेजिक डिस्कशन के जरिए डोमिनेंट पोजीशन एस्टाब्लिश करने के लिए काम करते हैं. लेकिन उसने इसके लिए कंपनी से बारगेन करने की जगह पावरलेस कम्युनिकेशन की स्टाइल को इस्तेमाल किया था. और अगर एनी एक टेकर की तरह ऑपरेट करने वाली होती तो उसने अपनी सारी खूबियों की एक लिस्ट तैयार कर दी होती. और अपनी पोजीशन को मजबूत करने के लिए इसके बदले में कंपनी से अपने बेनिफिट की चीजों के लिए डिमांड किया होता. मैचर्स भी नेगोशिएशन्स को एक ऐसी अपॉर्चुनिटी के तौर पर देखते हैं जिसके जरिए वह कुछ चीजों के बदले में अपने लिए कुछ एडवांटेज ले सकें. अगर एनी एक मैचर होती तो वह कंपनी में  किसी ऐसे सीनियर लीडर के पास गई होती, जो उसका एहसान मानता और रेसिप्रोसिटी, यानी आपस में चीजों का लेनदेन करने के लिए कहता. लेकिन एनी एक गिवर है : जैसे कि वह अपने दर्जनों कलीग्स को गाइड करती है, यूनाइटेड वे नाम से एक non-profit इंटरनेशनल नेटवर्क के लिए वालंटियर करती है, और साइंस में छोटे बच्चों का इंटरेस्ट डेवेलप करने के लिए एलिमेंट्री स्कूल की क्लासेस में विजिट करती है. और जब उसके कलीग्स कोई गलती करते हैं तो वह उनको ब्लेम से बचाने के लिए उसकी जिम्मेदारी अपने ऊपर ले लेती है. एक बार उसने एक जॉब के लिए अपनी एप्लीकेशन को उस वक्त वापस ले लिया था, जब उसे पता चला था कि उसके एक दोस्त ने भी उसी पोजीशन के लिए अप्लाई किया था. 

इसी वजह से एनी एक गिवर के तौर पर कभी भी एक टेकर या मैचर की तरह से बारगेनिंग करने में कंफर्टेबल नहीं थी. इसलिए उसने अपने लिए एक बिल्कुल अलग तरह की स्ट्रेटेजी को चुना था. उसने एक ह्यूमन रिसोर्स मैनेजर से कांटेक्ट करके उसे इस मामले में एडवाइस देने के लिए कहा. उस मैनेजर ने एनी के डिपार्टमेंट हेड से कांटेक्ट किया और डिपार्टमेंट के तमाम एंप्लाइज को एनी के फेवर में एकजुट करना शुरू किया. इसके बाद डिपार्टमेंट हेड ने एनी को बुलाकर उससे पूछा कि वह उसे डिपार्टमेंट में बनाए रखने के लिए क्या कर सकता था? एनी ने उसे बताया कि वह अपना एमबीए फिनिश करना चाहती थी. लेकिन वह इसके लिए हवाई जहाज में ट्रेवल करने का खर्च नहीं उठा सकती थी. और फिर इसके  रिस्पांस में उसके डिपार्टमेंट हेड ने उसको प्राइवेट जेट में एक सीट ऑफर कर दी थी. 

एक रिसर्च से यह पता चलता है कि जब आपकी अथॉरिटी कम हो जाए तो इनफ्लुएंस हासिल करने के लिए सलाह मांगना भी एक बहुत इफेक्टिव स्ट्रेटजी है.

CHAPTER SIX : The Art of Motivation Maintenance
अब तक हमने इस किताब के पिछले चैप्टर्स में इन चीजों पर फोकस किया है कि गिवर्स कैसे अपने यूनिक तरीकों से नेटवर्क बनाकर, और कोलैबोरेट, कम्युनिकेट, इनफ्लुएंस करके यानी दूसरे लोगों के साथ मिलकर काम करके और उनको उनका पोटेंशियल हासिल करने में मदद करके सफलता की सीढ़ी के टॉप पर पहुंच जाते हैं. लेकिन कभी कभी आखिर में उनके सफलता की सीढ़ी के  बॉटम में पहुंच जाने की भी काफी ज्यादा संभावना रहती है. सक्सेस का मतलब सिर्फ गिवर्स की स्ट्रेंग्थ्स का एडवांटेज लेना ही नहीं होता है, बल्कि उनकी वीकनेसेज को भी अवायड करने की जरूरत होती है. 

अगर लोग अपने सहयोगियों और नेटवर्क के लिए सैक्रिफाइसेज करने में जरूरत से ज्यादा टाइम लगाते हैं, तो उन्हें इसके लिए अपनी बहुत सारी एनर्जी खर्च करनी पड़ती है. और अगर लोग पावरलेस कम्युनिकेशन को बहुत ज्यादा क्रेडिट देते हैं और उसमें जरूरत से ज्यादा एन्गेज हो जाते हैं तो भी वह बड़ी आसानी से दूसरों के लिए पुशोवर और डोर मैट्स बन जाते हैं. इसका मतलब है कि वह दूसरे लोगों के लिए एक कमजोर और आसान शिकार बन जाते हैं, जिन्हें वह अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करते हैं. और जिसकी वजह से वह खुद अपने इंटरेस्ट के लिए आगे बढ़ने में फेल हो जाते हैं. और इन सब की वजह से आखिर में गिवर्स exhausted यानी बुरी तरह से थक कर कमजोर और अनप्रॉडक्टिव  बन जाते हैं. 

अगले 3 चैप्टर्स में हम यह एग्जामिन करेंगे कि क्यों कुछ गिवर्स बर्नआउट हो जाते हैं. यानी अपनी पूरी एनर्जी खर्च कर देते हैं. जबकि दूसरे लोग अपनी पूरी एनर्जी के साथ जोश से भरे होते हैं, गिवर्स कैसे, टेकर्स के हाथों अपने शोषण को अवायड करते हैं, कैसे इंडिविजुअल्स, ग्रुप्स और ऑर्गेनाइजेशंस, गिवर्स को प्रोटेक्ट कर सकते हैं. और उनकी सक्सेस को दूर तक फैला सकते हैं. 

The Art of Motivation Maintenance 

Why Some Givers Burnt Out but Others are on Fire 

कनाडियन साईकोलॉजिस्ट्स Jeremy Frimer और Larry Walker ने 50 हाईली सक्सेसफुल गिवर्स के ऊपर स्टडी और रिसर्च करके यह पता लगाया है कि यह लोग भी बिल्कुल टेकर्स और मैचर्स की तरह से ही सेल्फ-इंटरेस्टेड होते हैं और  इनफ्लुएंस, रिकॉग्निशन यानी मान्यता, और अपनी इंडिविजुअल एक्सीलेंस हासिल करने के लिए एंबिशियस होते हैं. यानी वह लोग इन सब चीजों की चाहत रखते हैं.

सेल्फ-इंटरेस्ट और अदर्स-इंटरेस्ट पूरी तरह से इंडिपेंडेंट मोटिवेशन होते हैं. आपके अंदर एक ही वक्त में एक साथ दोनों मोटिवेशन्स भी हो सकते हैं : जैसे कि अगर टेकर्स सेल्फिश होते हैं तो फेल होने वाले गिवर्स सेल्फलेस और सक्सेसफुल गिवर्स " Otherish" होते हैं. इसका मतलब है कि वह दूसरों के फायदे के बारे में केयर करते हैं. लेकिन उनके पास अपने खुद के इंटरेस्ट में आगे बढ़ने के लिए भी एंबिशियस गोल्स होते हैं. इस तरह से जब दूसरों के लिए चिंता के साथ अपनी खुद की चिंता भी जुड़ जाती है तो गिवर्स को बर्नआउट होने का खतरा कम हो जाता है. 

जॉब के दौरान होने वाले बर्नआउट पर एक रिसर्च के मुताबिक तमाम प्रोफेशनल सेक्टर्स में से टीचिंग के जॉब में सबसे ज्यादा इमोशनल exhaustion यानी थकावट होती है : मिसाल के तौर पर अमेरिका में एजुकेशनल इक्विटी को प्रमोट करने के लिए ( TFA) यानी टीच फॉर अमेरिका नाम से एक एजुकेशनल प्रोग्राम शुरू किया गया था. जिसमें पिछले 20 सालों में 25000 से भी ज्यादा टीचर्स ने टीचिंग का जॉब किया है. 

एजुकेशनल इक्विटी का मतलब, हर एक बच्चे के फुल एकेडमिक और सोशल डेवलपमेंट के लिए उनको सभी जरूरी चीजें  मिलना होता है. 

24 साल की उम्र में Corney Callahan नाम की एक लेडी टीचर ने अपने बहुत ज्यादा टीचिंग वर्कलोड को मेंटेन करने के साथ-साथ अपने टाइम को एक TFA alumni mentor के तौर पर वालंटियर करना शुरू किया. वह एक कंटेंट सपोर्ट स्पेशलिस्ट के तौर पर, हर दूसरे हफ्ते अलग-अलग 10 टीचर्स को हेल्प करती थी, जिससे कि वह तमाम तरह के टेस्ट्स क्रिएट कर सकें और नए लेसन्स के प्लान डिजाइन कर सकें. इसके अलावा उसने दो दोस्तों के साथ मिलकर गरीब, मेहनती और सक्सेसफुल स्टूडेंट्स को उनकी पढ़ाई में मदद करने के लिए  Mind Matters के नाम से एक NGO को लॉन्च किया और फिर उसने एक साल बाद हाई स्कूल स्टूडेंट्स को उस NGO मे मेंटर करना शुरू किया. और वीकली सेशन्स के लिए प्लान्स क्रिएट किए. और उसके बाद Corney ने उन स्टूडेंट्स को कॉलेज की पढ़ाई के लिए तैयार करने के लिए भी उनको हर हफ्ते 5 घंटे एक्स्ट्रा मेंटर करना  शुरू कर दिया. 

 गिवर्स का रुझान दूसरों के इंटरेस्ट्स को अपने इंटरेस्ट्स से आगे रखने का होता है, और वह अक्सर दूसरों की भलाई के लिए अपनी खुद की भलाई के बारे में नहीं सोचते हैं. इस वजह से उनके लिए बर्नआउट होने का खतरा पैदा हो जाता है. 

हालांकि Corney हर हफ्ते 10 घंटे एक्स्ट्रा गिविंग कर रही थी. जिसकी वजह से उसके लिए अपने काम के दौरान रिलैक्सेशन करने की कोई गुंजाइश नहीं थी. बल्कि दूसरों के लिए उसकी जिम्मेदारियां और ज्यादा बढ़ गई थीं, लेकिन फिर भी जब उसने ज्यादा गिविंग करना शुरू किया तो उसका बर्नआउट का एहसास कम होने लगा और उसकी एनर्जी वापस लौट आई. और जबकि उसके साथ की एक दर्जन TFA टीचर्स ने बर्नआउट होकर 2 साल के अंदर ही टीचिंग का जॉब छोड़ दिया था, लेकिन फिर भी Corney ऐसी बहुत कम TFA टीचर्स में से एक थी, जिसने कम से कम 4 साल तक टीचिंग का जॉब कंटिन्यू रखा था. और उसको एक नेशनल टीचिंग अवार्ड के लिए नॉमिनेट किया गया था. 

 

The Impact Vacuum : Givers Without a Cause 

एक स्टडी के मुताबिक गिवर्स के बर्नआउट के बारे में यह पाया गया है कि गिविंग के अमाउंट का बर्नआउट पर बहुत कम असर होता है. जबकि गिविंग के प्रभाव के बारे में मिलने वाले फीडबैक का अमाउंट बर्नआउट पर ज्यादा असर डालता है. और यही बात हेल्थकेयर की फील्ड में भी लागू होती है. जहां पर अक्सर बर्नआउट को compassion Fatigue कहते हैं. इसका मतलब  दूसरों की केयर करने की चिंता, स्ट्रेस और थकान होते हैं. शुरुआत में एक्सपर्ट्स का यह मानना था कि बहुत ज्यादा दया के इमोशन्स जाहिर  करने की वजह से कम्पैशन फटीग यानी दया की थकान हो जाती है. लेकिन नई रिसर्च से यह क्लियर हो गया है कि केयरगिविंग के दौरान केयरगिवर्स जो तकलीफ महसूस करते हैं, उसकी वजह से उनके अंदर डिप्रेशन के लक्षण पैदा हो जाते हैं. दरअसल गिवर्स उस वक्त बर्नआउट नहीं होते हैं, जब वह गिविंग में बहुत-सा टाइम और एनर्जी लगाते हैं. बल्कि वह उस वक्त बर्नआउट होते हैं, जब वह जरूरतमंद लोगों के साथ काम कर रहे होते हैं. लेकिन वह उनकी तकलीफ महसूस करने के बावजूद, इफेक्टिव्ली उनकी  मदद नहीं  कर पाते हैं. 

 जब Corney ने एक मेंटर के तौर पर टीएफए टीचर्स को वालंटियर किया था, तो उसके इस एक्शन ने गिविंग  की सिचुएशन को फ्रेश फीलिंग में बदल दिया था. क्योंकि उसको समाज की भलाई के लिए टीचिंग जैसे काम में एडल्ट टीचर्स की मदद करने की वजह से बर्नआउट नहीं हुआ था, बल्कि उसके अंदर और ज्यादा एनर्जी भर गई थी. अगर आप एक ही फील्ड में और एक ही तरीके से बार-बार ज्यादा से ज्यादा गिविंग करेंगे तो यह आदत आपकी एनर्जी को पूरी तरह से खत्म करके आप को बहुत कमजोर बना सकती है. 

इसी वजह से जब Corney ने अपने माइंड मैटर्स नाम के एनजीओ में हाई स्कूल स्टूडेंट्स को मेंटर करना शुरू किया, तो उसके पास एक नए ग्रुप के लोगों की नई सेटिंग बन गई थी. और वह उन लोगों को कोई बोरिंग सब्जेक्ट पढ़ाने की जगह उन्हें कॉलेज में जाने के लिए रेडी कर रही थी. इस तरीके से  वह अपनी गिविंग को एक नए डोमेन यानी फील्ड में शिफ्ट करके अपनी एनर्जी को रिचार्ज करने में कामयाब हो गई थी. 

 

Otherish Choice : Chunking, Sprinkling and the 100 - Hour Rule of Volunteering

जब लोग ज्यादातर अपने हाल-चाल की चिंता किए बिना यानी एक सेल्फलैस फैशन में लगातार देते रहते हैं तो उनको मेंटल और फिजिकल हेल्थ खराब होने का रिस्क रहता है. और जब वह ज्यादातर खुद के लिए काफी चिंता दिखाने के साथ-साथ दूसरों के लिए भी चिंता दिखाते हुए यानी "Otherish" फैशन में देते हैं तो गिविंग की वजह से उनकी हेल्थ खराब होने की संभावना बहुत कम होती है. 

एक स्टडी से यह पता चलता है कि जो लोग अपनी खुद की भलाई के साथ-साथ दूसरों की भलाई करने में एक बैलेंस बना कर चलते हैं आमतौर पर उनकी जिंदगी में सेटिस्फेक्शन और खुशी काफी बढ़ जाते हैं. सेल्फलैस और Otherish गिवर्स के बारे में और ज्यादा गहराई से समझने के लिए उनको बहुत करीब से वॉच करने की जरूरत होगी कि वह किस सिचुएशन और कितनी क्वांटिटी में गिविंग करने के लिए डिसाइड करते हैं. जैसे कि हमें यह पता है कि लेडी टीचर Corney की गिविंग में वैरायटी होने की वजह से उसे बर्नआउट को अवायड करने में मदद नहीं मिली थी बल्कि वह गिविंग को सही तरीके से प्लान करके ही बर्नआउट को अवायड कर पाई थी. इस बात को समझने के लिए मान लीजिए कि आप हर हफ्ते दूसरों के लिए पांच तरह के दया दिखाने वाले काम करने जा रहे हैं. आप इस काम को दो अलग-अलग तरीकों से कर सकते हैं : जैसे Chunking या Sprinkling करके. इसका मतलब है कि अगर आप एक चंकर हैं तो आप अपने " एक्ट ऑफ गिविंग" यानी देने वाले पांचों कामों को हर हफ्ते एक ही दिन में फिनिश कर देंगे. और अगर आप एक स्प्रिंकलर हैं, तो आप अपनी गिविंग को पांच अलग-अलग दिनों में बराबरी से बांट देंगे. जिससे कि आप रोज थोड़ा थोड़ा देते रहें. 

सोनिया नाम की साइकोलॉजिस्ट ने अपनी एक स्टडी को परर्फॉर्म  करने के लिए लोगों के दो ग्रुप बनाए और उन्हें 6 हफ्तों तक, हर हफ्ते 5 तरह के " रेंडम एक्ट्स आफ काइंडनेस" यानी अपनी मर्जी के दया दिखाने वाले 5 काम पूरा करने के लिए कहा. उनमें से एक ग्रुप ने Chunking करते हुए  हर हफ्ते पांचों कामों को एक साथ, एक ही दिन पूरा करते हुए गिविंग करना जारी रखा. और दूसरे ग्रुप ने स्प्रिंकलिंग करते हुए अपने कामों को एक-एक करके हर हफ्ते पूरे पांच दिनों में पूरा किया. हालांकि दोनों ग्रुप्स ने एक बराबर हेल्पिंग ऐक्ट्स को पूरा किया था, इसके बावजूद Chunkers की खुशी में बढ़ोतरी हुई थी लेकिन स्प्रिंकलर्स को ज्यादा खुशी नहीं हुई. 

Corney के बर्नआउट न होने और खुश रहने की वजह भी यही थी कि वह एक Chunker थी : जैसेकि उसने माइंड मैटर्स एनजीओ में अपनी वॉलिंटियरिंग को हर हफ्ते सिर्फ एक दिन के हिसाब से मैनेज किया था. जिसमें उसने हाई स्कूल स्टूडेंट्स को मेंटर करने के लिए 5 वीकली आवर्स को सैटरडे को ही देने के लिए प्लान किया था. 

Chunking गिविंग एक Otherish स्ट्रेटजी है, जिसके मुताबिक जब Corney ऑलरेडी थक के चूर हो जाती थी, तो वो स्कूल के बाद स्टूडेंट्स को मेंटर करने की जगह, इस काम को वीकेंड में करने के लिए रिजर्व रखती थी, जब उसकी एनर्जी वापस रिचार्ज हो जाती थी और उसका शेड्यूल और ज्यादा आसान हो जाता था. 

जबकि दूसरी तरफ सेल्फलैस गिवर्स का ज्यादातर रुझान लोगों की जरूरत के मुताबिक दिन भर के दौरान उनकी हेल्प करने के लिए स्प्रिंकलिंग गिविंग करने का होता है. इसकी वजह से उन्हें जरूरत से ज्यादा थकान हो जाती है और उनके अंदर अपना खुद का काम पूरा करने के लिए भी जरूरी अटेंशन और एनर्जी की कमी हो जाती है. 

रीसर्चर्स ने एक स्टडी में यह पता लगाया है कि जो लोग साल में 100 घंटे से लेकर 800 घंटे तक दूसरों की भलाई के कामों के लिए वॉलिंटियर करते हैं, वह लोग आमतौर अपनी जिंदगी में ज्यादा खुश और सेटिस्फाइड रहते हैं . इसे हंड्रेड-आवर रूल ऑफ़ वॉलिंटियरिंग कहते हैं. क्योंकि इस रेंज में की गई गिविंग उनके अंदर ज्यादा से ज्यादा एनर्जी  को रिचार्ज करती है. 

जब Corney ने  TFA के लिए एक एलुमनी मेंटर के तौर पर वालंटियर करना शुरू किया था तो वह अपने करीब 75 घंटे सालाना दे रही थी. और जब उसने हाई स्कूल स्टूडेंट्स के लिए माइंड मेंटर एनजीओ को लांच किया तो उसने 100 घंटे सालाना के मार्क को पार कर लिया. और हंड्रेड-आवर रूल ऑफ़ वॉलिंटियरिंग की वजह से उसकी एनर्जी रीस्टोर होने लगी. और उसके लिए ज्यादा गिविंग करना भी आसान हो गया था. 

 

The Myth of Giver Burnout 

Otherish गिवर्स के अंदर तमाम तरह के एनर्जी देने वाले इफेक्ट्स पैदा होते हैं जो उनको बर्नआउट होने से बचाते हैं. यह लोग अपने लिए खुशियों का एक ऐसा भंडार बनाते हैं, जहां तक टेकर्स और मैचर्स के लिए पहुंच पाना बहुत मुश्किल होता है. सेल्फलेस गिवर्स खुशियों के पूरे भंडार को इस्तेमाल कर लेते हैं, और खुद को पूरी तरह से थकाकर बर्नआउट हो जाते हैं.  वह अक्सर सफलता की सीढ़ी के बॉटम तक गिर जाते हैं. यानी फेल हो जाते हैं. दूसरी तरफ Otherish गिवर्स इस तरीके से अपनी गिविंग को प्लान करते हैं कि वह थकान से बेहाल होने की जगह एनर्जी से भर जाते हैं. इसी वजह से Otherish गिवर्स के लिए सफलता की सीढ़ी के टॉप पर पहुंचने की संभावना बहुत ज्यादा होती है. 

साइकोलॉजिस्ट डेविड मिलर ने अपनी स्टडी में यह पता लगाया है कि Otherish एंप्लाइज, सेल्फलेस गिवर्स, टेकर्स और मैचर्स के मुकाबले कहीं ज्यादा देर तक टिकने वाले कंट्रीब्यूशंस करते हैं. और ऐसा देखा गया है कि जो एंप्लाइज दूसरों की भलाई के बारे में काफी ज्यादा चिंता करते हैं और खुद अपने लिए एक पॉजिटिव इमेज क्रिएट करते हैं, उनको उनके सुपरवाइजर्स मोस्ट हेल्पफुल और मोस्ट इनीशिएटिव लेने वाले वर्कर्स के तौर पर उनका रिस्पेक्ट करते हैं. 

हालांकि Otherish गिवर्स अपने खुद के इंटरेस्ट्स की भी चिंता करते हैं, इसलिए वह अपनी एनर्जी को बचाकर चलते हैं. लेकिन फिर भी वह असल में सेल्फलेस गिवर्स के मुकाबले कहीं ज्यादा देते हैं.

इस बारे में इकोनॉमिक्स में नोबेल प्राइज विनर Herbert Simon के मुताबिक यह हो सकता है कि Otherish गिवर्स, सेल्फलेस गिवर्स के मुकाबले में थोड़े कम परोपकारी नजर आते हों, लेकिन बर्नआउट के खिलाफ खुद को संभालने की उनकी काबिलियत उन्हें और ज्यादा कंट्रीब्यूट करने वाला बनाती है.

CHAPTER SEVEN : Chump Change
इस चैप्टर में यह दिखाया गया है कि कैसे Jason Giller जैसे सक्सेसफुल गिवर्स अपनी सक्सेस के रास्ते में आने वाले तमाम रिस्क फैक्टर्स को अवॉयाड करते हैं. और कैसे Lillian Baure जैसी गिवर्स इस तरह के रिस्क फैक्टर्स को काबू में करने के लिए अपनी सेल्फलेस गिविंग को कम करती हैं और Otherish गिविंग को और ज्यादा बढ़ा देती हैं. यहां पर यह दिखाया गया है कि जब लोग किसी गिवर को एक डोरमैट की तरह इस्तेमाल करने लगते हैं तो यह किस तरह से उनके लिए सबसे खराब सिचुएशन बन जाती है . और ऐसे गिवर्स के बारे में  डिस्कस किया जाएगा, जो अपनी रिसिप्रोसिटी स्टाइल्स मे जरूरत से ज्यादा दूसरों पर भरोसा करने और फ्लैक्सिबल और एडेप्टेबल बनने की वजह से यानी दूसरों की मर्जी के मुताबिक आसानी से खुद को चेंज करने वाला बन जाने की वजह से खतरनाक सिचुएशन्स में फ़ंस जाते हैं. इसके अलावा यह भी बताया जाएगा कि कैसे एक Otherish स्टाइल की मदद से आप इन सिचुएशंस में फ़ंसने से खुद को बचा सकते हैं. 

 

Chump Change 

Overcoming the Doormat Effect 

लिलियन बाउरे नाम की एक टैलेंटेड और हार्ड वर्किंग मैनेजर एक रिप्यूटेड कंसलटिंग फर्म में जॉब करती थी. और वह जल्दी ही फर्म की पार्टनर भी बनने वाली थी. लेकिन वह अपने क्लाइंट्स के साथ बहुत ज्यादा नरमी से पेश आती थी. इस वजह से उसके प्रमोशन को 6 महीने के लिए आगे बढ़ा दिया गया. और उसे यह फीडबैक दिया गया कि उसे क्लाइंट की हर बात मानने की जगह कभी-कभी कुछ बातों के लिए मना भी कर देना चाहिए था. लेकिन वह ऐसा नहीं कर सकती थी. उसने अपने बहुत से साल एक ऐसे एनजीओ में समर्पित किए थे जिसके थ्रू  बिजनेस को लॉन्च और ग्रो करने में तमाम एंटरप्रेन्योर लेडीज की मदद की जाती थी. वहां पर उसने लो - इनकम वाली औरतों के लिए उनकी खुद की कंपनियां स्टार्ट करने के लिए एक माइक्रो लोन प्रोग्राम को इंट्रोड्यूस किया. एक कंसल्टेंट के तौर पर लिलियन नए एंप्लाइज को करिअर एडवाइस देने  के लिए मेंटर करने में अपने अनगिनत घंटे खर्च करती थी. वह अपने काम में बहुत टैलेंटेड थी और लोगों की मदद करने के लिए बहुत इंस्पायर्ड थी. लेकिन उसकी जरूरत से ज्यादा गिविंग करने की आदत ने उसकी रेपुटेशन और प्रोडक्टिविटी को भी खतरे में डाल दिया था. उसने कभी भी किसी को किसी बात के लिए ना नहीं कहा था. लिलियन को एक परफारमेंस रिव्यू में अपने प्रोफेशन में और ज्यादा सेल्फिश  बनने का सुझाव भी दिया गया. क्योंकि उसके पास एक कंसलटिंग पार्टनर के लिए जरूरी " Assertive Edge" की कमी थी. इसका मतलब है कि वह अपने क्लाइंट्स के साथ बहुत सी अहम बातें खुलकर नहीं कर पाती थी : जैसेकि उसके अंदर इन 7 चीजों की कमी थी : 1, हाई सेल्फ रेस्पेक्ट- जिससे कि आप दूसरों को प्रभावित करने के लिए कार्रवाई करते हैं और बिना डरे जिम्मेदारी लेते हैं. 2, बेहतर कॉन्फिडेंस - जिससे कि आप बाहरी रवैया चेंज करके अपना सेल्फ कॉन्फिडेंस बढ़ा सकते हैं. 3, शार्प इमेज - बेहतर लीडरशिप स्किल्स के लिए आपको खुद को दूसरों से ज्यादा कॉन्फिडेंट महसूस कराना होता है. तभी दूसरे लोग भी आपको कांफिडेंट मानेंगे. 4, एडवान्स्ड कम्युनिकेशन - जिससे कि आप दूसरों के साथ मजबूत संबंध बनाने के लिए उनको अपने विचार और फीलिंग्स खुलकर बता सकें. 5, बढ़ा- चढ़ाकर रिजल्ट्स हासिल करना - जिससे कि आप एडवान्स्ड स्ट्रेटजीज के साथ-साथ बेहतर इनोवेशन्स की मदद से बहुत अच्छे रिजल्ट्स हासिल कर सकते हैं. 6, अपने इमोशन्स की समझ में बढ़ोतरी करना - जिससे कि आप अपनी इच्छाओं की लगातार जांच, शेयरिंग और उनको फॉलो करके, अपने बारे में बेहतर समझ हासिल करते हैं. 7, बेहतर निगोशीएशन स्किल्स - जिससे कि आप अपनी नॉलेज की कमियों को स्वीकार करके अपनी ओपिनियन को आगे बढ़ाते हैं. और खुले तौर पर ईमानदार डिस्कशन के बेस पर प्रॉपर एक्शन ले सकते हैं. 

लेकिन लिलियन अपनी Assertive Edge को इनफ्लुएंसिव बनाने की जगह, अपने आसपास के लोगों को डेवेलप करने में जरूरत से ज्यादा टाइम खर्च करती थी. और वह क्लाइंट्स को हेल्प करने के लिए हद से ज्यादा कोशिश करती थी. 

दूसरी तरफ न्यूयॉर्क सिटी में Deloitte Consulting firm में 

Jason Geller नाम के कंसल्टेंट मैनेजर को भी फर्म में पार्टनर बनाया जाने वाला था. जब शुरू में उसने कंसलटिंग करना स्टार्ट किया था तो उस वक्त डेलॉइट फर्म सिर्फ ई-मेल के जरिए काम कर रही थी. और उसके पास कोई प्रॉपर तरीके का नॉलेज मैनेजमेंट प्रोसेस नहीं था : जैसेकि उनके पास ऐसी इनफॉरमेशंस को स्टोर करने  और उन्हें फिर से हासिल करने के लिए कोई सिस्टम नहीं था, जिनको फर्म के कंसलटेन्ट्स तमाम इन्डस्ट्रीज और क्लाइंट के जरिए इकट्ठा करते थे. और फिर जेसन ने इनफार्मेशन को कलेक्ट करने और शेयर करने की  पहल शुरू कर दी है. जब उसे एक प्रोजेक्ट के बारे में पता लगा तो उसने टीम से इस का आउटपुट देने के लिए कहा. और वह इस बारे में बहुत से आर्टिकल्स को पढ़कर इनमें से इंटरेस्टिंग आर्टिकल्स को अलग से फाइल करने लगा. उसने डेलॉइट के कॉम्पिटिटर्स के इंपॉर्टेंट कामों को फॉलो किया और उन पर रिसर्च शुरू कर दी. इसके बाद डेलॉइट नॉलेज मैनेजमेंट सिस्टम, जेसन का नेटवर्क बन गया. और वहां के सभी लोग उसे जे-नेट कहने लगे. क्योंकि सभी लोगों को जेसन के पास उनके सभी सवालों के जवाब मिल जाते थे. 

जेसन ने कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद अपना पूरा कैरियर डेलॉइट में काम करने में बिताया था और इसी दौरान उसने कोलंबिया यूनिवर्सिटी से MBA का एक कोर्स भी किया था. उसके मेंटर्स ने उसको जो सपोर्ट  प्रोवाइड किया था, वह उसके लिए उनका बहुत शुक्रगुजार था. हालांकि अगर वह एक मैचर होता, तो वह अपने मेंटर्स को फ़ेवर करने के लिए इसका बदला चुकाने के रास्ते तलाश करता . लेकिन जेसन, लिलियन बाउरे की तरह एक गिवर के तौर पर अपने मेंटर की kindness यानी दया की भावना को 

दुनिया में आगे बढ़ाना चाहता था . इसलिए उसने सभी नए एंप्लाइज को एक खुली ऑफर दी थी कि वह उनकी हर तरह से हेल्प करने के लिए और उनको मेंटर करने के लिए अपनी पूरी कोशिश करेगा. 

आमतौर पर किसी भी एम्प्लॉई के लिए डेलॉइट में फर्म का पार्टनर बनने के लिए 12 से 15 साल का वक्त लगता था. लेकिन जेसन 9 साल में ही डेलॉइट की हिस्ट्री में सबसे कम उम्र का पार्टनर बन गया था. और उस वक्त उसकी उम्र सिर्फ 30 साल थी. 

बाद में वो डेलॉइट की ह्यूमैन कैपिटल कन्सल्टिंग प्रैक्टिस में एक पार्टनर बन गया. जहां पर वह जिस बिजनेस को यूनाइटेड स्टेट्स में और वर्ल्ड लेवल पर लीड करता है, उसको मार्केटप्लेस में नंबर वन की रैंक दी गई है. हालांकि जेसन अपने काम में काफी ज्यादा बिजी रहता है लेकिन फिर भी वह एनालिस्ट्स के साथ रेगुलर मीटिंग्स होल्ड करता है. जिससे कि वह किसी भी इंपॉर्टेंट इशु को फेस करते टाइम उनकी मदद कर सके. 

हालांकि लिलियन बाउर और जेसन दोनों ही शख्स गिवर्स हैं, फिर भी उन दोनों के रास्ते एक दूसरे से बिल्कुल अलग हैं. क्योंकि गिविंग करके लिलियन के कैरियर में रुकावट आ रही हैं. जबकि जेसन का कैरियर तेजी से ग्रो कर रहा है. 

 

Sincerity Screening : Trusting Most of the People Most of the Time 

तमाम साइकोलॉजिस्ट्स ने अपनी रिसर्च की मदद से लोगों की पर्सनालिटी में एक बुनियादी खासियत का पता लगाया है, जिसकी वजह से वह अपने सोशल इंटरेक्शन में दूसरों से अलग नजर आते हैं. उनकी इस खासियत को "Agreeableness" यानी आपसी रजामंदी कहते हैं. 

सोशल इंटरेक्शन का मतलब, आपस में लेन-देन करना, एक दूसरे से कंपटीशन करना, आपस में संघर्ष करना, आपसी सहयोग करना और एक दूसरे के साथ रहना होता है.

Agreeable लोग आमतौर पर कॉपरेटिव और पोलाइट नजर आते हैं : जैसे कि वह दूसरों के साथ अच्छे संबंध रखना चाहते हैं, और वह लोगों के साथ बहुत अच्छी तरह से, फ्रेंडली होकर और उनका वेलकम करके मिलते हैं. दूसरी तरफ Disagreeable लोग ज्यादा कंपटीटिव और दूसरों की बुराई करने वाले होते हैं. उनके साथ डील करना मुश्किल होता है : जैसे कि वह अक्सर लड़ाई झगड़े के लिए तैयार रहते हैं. और वह एक डाउटफुल तरीके से दूसरों को चैलेंज करते नजर आते हैं. 

हम आमतौर पर Agreeable लोगों को गिवर्स की तरह और Disagreeable लोगों को टेकर्स की तरह मान लेते हैं. और जब हमें कोई मिलनसार नया कांटेक्ट नजर आता है, तो हम फौरन यह नतीजा निकाल लेते हैं कि उसकी इंटेंशंस अच्छी हैं. और अगर वह एक टकराव के मूड में नजर आता है तो हमें लगता है कि उसको हमारे आपसी इंटरेस्ट्स की कोई परवाह नहीं है. लेकिन हम किसी शख्स के बारे में अपनी राय बनाते समय सिर्फ उसके कैरेक्टर पर ही ध्यान देते हैं: जैसे वह कैसा दिखता है, कैसे बोलता है, किस तरह के कपड़े पहनता है, और उसका व्यवहार कैसा है, वगैरह -वगैरह. 

 गिविंग और टेकिंग हमारे मकसद और वैल्यू पर बेस्ड होते हैं. और लोगों के अंदर " Sincerity Screening" यानी ईमानदारी की जांच करने के मामले में मैचर्स और टेकर्स के मुकाबले गिवर्स एक नेचुरल तरीके से ज्यादा एक्यूरेट जज होते हैं. क्योंकि गिवर्स दूसरों के बिहेवियर पर ज्यादा ध्यान देते हैं और वह उनकी थिंकिंग और फीलिंग से ज्यादा अवेयर होते हैं. 

इसलिए जब गिवर्स, पोटेंशियल टेकर्स की पहचान करने के लिए सिन्सेरिटी स्क्रीनिंग करने में अपनी स्किल्स को इस्तेमाल करना शुरू करते हैं तो वह यह जानते हैं कि उन्हें कब खुद को टेकर्स से प्रोटेक्ट करना है. लेकिन कभी-कभी उनकी अवेयरनेस बहुत देर से सेट होती है. क्योंकि वह ऑलरेडी टेकर्स के वफादार बन चुके होते हैं. और फिर वह लोग गिवर्स को एक डोरमैट की तरह इस्तेमाल करने लगते हैं. 

 

Generous Tit for Tat : The Adaptable Giver

एक बार जब सक्सेसफुल गिवर्स सिन्सेरिटी स्क्रीनिंग की वैल्यू को रियलाइज कर लेते हैं, और agreeable टेकर्स को पोटेंशियल फ़ेकर्स यानी झूठ बोलकर चीट करने वाले शख्स के तौर पर पहचानना शुरू करते हैं, तो वह भी उसी के मुताबिक अपने बिहेवियर को एडजस्ट करके मैचर्स की तरह से अपने self-interest की चीजों को उनके साथ एक्सचेंज करने लगते हैं. और इस तरीके से वह अपने बर्नआउट होने को अवॉइड करते हैं. 

कुछ सालों पहले साइकोलॉजिस्ट्स ने एक गेम थ्योरी के साथ एक्सपेरिमेंट किया. जिसमें कई लोगों को ऐसे पार्टनर्स के साथ काम करने का मौका दिया, जो या तो कॉम्पिटीटिव थे, या फिर वह कोआपरेटिव थे. टेकर्स ने इस बात की परवाह किए बिना कि उनके पार्टनर्स कौन थे, उनके साथ कंपीटीटर्स की तरह से काम किया. जबकि बाकी लोगों ने अपने पार्टनर्स के  मुताबिक काम किया : जैसे कि वह कोऑपरेटिव पार्टनर्स के साथ काम करते वक्त कोऑपरेटिव थे. लेकिन अगर उनके पार्टनर्स कॉम्पिटेटिव थे, तो उन्होंने खुद को भी उन्हीं लोगों के मुताबिक और ज्यादा कॉम्पिटीटिव तरीके से मैच कर लिया था. गेम थ्योरिस्ट्स इस को " टिट फॉर टैट " कहते हैं. और यह पूरी तरह से एक मैचर स्ट्रैटिजी है. 

मैथमेटिकल बायोलॉजिस्ट मार्टिन नोवाक के मुताबिक जब बारी- बारी से गिविंग और मैचिंग दोनों को साथ- साथ किया जाता है तो इस स्ट्रैटिजी को " जेनरस टिट फॉर टैट " कहते हैं. यह एक Otherish स्ट्रेटजी होती है. हालांकि सेल्फलेस गिवर्स हमेशा दूसरों पर भरोसा करने की गलती करते हैं, लेकिन Otherish गिवर्स शुरुआत में भरोसा करते हैं. लेकिन बाद में वह ऐसे लोगों के साथ लेन- देन करने में अपनी रिसिप्रोसिटी स्टाइल को एडजस्ट करने के लिए तैयार रहते हैं, जो अपने एक्शन या रेपुटेशन से टेकर्स नजर आने लगते हैं. टेकर्स के साथ डील करते वक्त गिवर्स एक सेल्फ- प्रोटेक्टिव स्ट्रेटजी को फॉलो करते हैं जिसमें वह खुद को एक मैचर मोड में शिफ्ट कर लेते हैं. लेकिन उनके लिए, हर तीन बार में से एक बार वापस से गिविंग मोड में शिफ्ट करना ज्यादा फायदेमंद होता है. जिससे कि वह टेकर्स को अपनी गलती सुधारने का मौका दे सकें. 

जैसे Jason Giller ने शुरुआत में अपनी डेलॉइट फर्म में नए लोगों को हायर करके उनको मेंटर करने के लिए " जेनरस टिट फॉर टैट " के नियम को फॉलो किया था. उन्होंने अपनी पहली मीटिंग के खत्म होने पर एक नए एम्पलाई को एक ऑफर देते हुए कहा था कि अगर उनका कन्वर्सेशन उन लोगों के लिए मददगार था, तो वह इसी तरह की मीटिंग्स को मंथली बेसिस पर भी जारी रखने के लिए तैयार थे. और  फिर उस शख्स के एग्री करने पर उन्होंने बार-बार होने वाली एक मंथली मीटिंग को लंबे समय के लिए अपने शेड्यूल में सेट कर लिया था. यह मंथली मीटिंग उनके लिए गिविंग की अपॉर्चुनिटीज क्रिएट करती थी. और इसके अलावा इससे उनको यह समझने में मदद मिलती थी कि कौन से लोग टेकर हो सकते थे. 

इसी तरह से लिलियन बाउर ने जब तक सिंसेरिटी स्क्रीनिंग करना शुरू नहीं किया था, उस वक्त तक वो सभी लोगों के साथ बहुत जेनरस व्यवहार करती थी. लेकिन जब उसकी एक फ्रेंड ने एक कंसलटिंग फर्म में टॉप पोजीशन पर जॉब तलाश करने में मदद करने के लिए के लिए उसकी एडवाइस मांगी तो लिलियन ने अपने खास तौर से जेनरस फैशन में उसको रिस्पॉन्ड किया. उसने उसको कोचिंग देने के लिए रात में और वीकेंड्स  में उसके साथ 50 घंटे से ज्यादा का समय खर्च किया. और उसके लिए अपनी फर्म के अलावा तमाम दूसरी फर्म्स में कनेक्शंस बनाए. और फिर आखिर में उस कैंडिडेट को लिलियन की फर्म से जॉब ऑफर रिसीव हुआ और उसने फर्म को ज्वाइन कर लिया. हालांकि लिलियन और उसके कलीग्स ने लिलियन के फ्रेंड को जॉब दिलाने में अपना बहुत सारा टाइम और एनर्जी खर्च कर दिया था लेकिन इस फैक्ट के बावजूद उसने अपना ट्रांसफर एक दूसरे ऑफिस में और दूसरी कंट्री में करने के लिए रिक्वेस्ट किया था. जोकि फर्म की गाइडलाइन के खिलाफ था. इस तरह से एक agreeable टेकर ने लिलियन से झूठ बोलकर उसको चीट किया था. 

इसके बाद लिलियन, सिंसेरिटी स्क्रीनिंग और जेनरस टिट फॉर टैट के कॉन्बिनेशन की मदद से टेकर्स को एडवाइस देने और मेंटर करने के मामले में खुद को एक डोरमैट की तरह इस्तेमाल किए जाने से अवॉयड करने में कामयाब हो गई थी.

 

Assertiveness and the Advocacy Paradox

अमेरिकन इकोनॉमिस्ट Linda Babcock के मुताबिक एक जैसे क्वालिफाइड पुरुष एमबीए ग्रेजुएट्स, महिला एमबीए ग्रैजुएट्स के मुकाबले काफी ज्यादा पैसा कमा रहे हैं. इसकी वजह महिला और पुरुष के साथ भेदभाव किया जाना नहीं है, बल्कि यह डिफरेंस उनके बीच ज्यादा पैसे मांगने की इच्छा का है. एक स्टडी में यह पाया गया है कि पुरुषों के अंदर महिलाओं के मुकाबले 8.3% ज्यादा पैसे मांगने की ज्यादा संभावना रहती है.

हालांकि ज्यादातर केसज में महिलाएं खुद ही एक डोरमैट की तरह से टेकर्स को अपने ऊपर से चलकर आगे निकल जाने के लिए एलाऊ कर देती हैं. फिर भी सिर्फ महिलाओं के साथ ही ऐसा नहीं होता है कि वह डोरमैट इफेक्ट की वजह से अपनी सैलरी के बारे में सौदेबाजी करते वक्त आसानी से कम पैसों में मान जाती हैं. बल्कि डोरमैट इफेक्ट महिला और पुरुष दोनों जेंडर्स को तकलीफ पहुंचाता है. 

जब लिलियन बाउर ने भी अपने क्लाइंट्स को, उसे एक डोरमैट  की तरह इस्तेमाल नहीं करने देने के लिए डिसाइड कर लिया, तो इस बारे में उनका कहना था कि वह generous बनना चाहती थीं, इसलिए उन्होंने अपने क्लाइंट्स के साथ एक भरोसा बनाया था. लेकिन इसका यह मतलब नहीं था कि वह उन्हें एक डोरमैट की तरह इस्तेमाल करके उनके ऊपर से चलकर जाना शुरु कर दें. इसलिए उन्होंने क्लाइंट्स की ऐसी रिक्वेस्ट के लिए उन्हें नरमी से मना करना शुरू कर दिया जो उनके प्रोजेक्ट के दायरे से बाहर होती थीं. उन्होंने इसके लिए एडवोकेसी और रिलेशनल अकाउंट के एक कंबीनेशन को इस्तेमाल किया था. 

एडवोकेसी का मतलब है, किसी दूसरे को सपोर्ट करने के लिए उनकी की तरफ से उनके फ़ेवर की बातें करना. 

और रिलेशनल अकाउंट का मतलब है, एक ऐसी रिक्वेस्ट के बारे में एक्सप्लेनेशन देना जो दूसरों के इंटरेस्ट के लिए आपकी चिंता दिखाती हो. 

लिलियन ने एडवोकेसी के साथ शुरुआत करने के बाद एक एजेंट के तौर पर अपने बारे में और अपनी टीम के तमाम कंसल्टेंट्स के लिए सोचना शुरू कर दिया था. और वह एक क्लाइंट के साथ नेगोशिएशन करते वक्त अपनी टीम के लिए अपनी भी जिम्मेदारियों के बारे में भी बहुत ज्यादा ध्यान देने लगी थी. 

 

Pushing Past Pushover 

रिसर्चर्स ने अपनी स्टडी में यह पता लगाया है कि सक्सेसफुल निगोशीऐटर्स यानी आपसी समझौते के लिए बातचीत करने वाले लोग एक Otherish फैशन में ऑपरेट करते हैं. जबकि टेकर्स और सेल्फलैस गिवर्स बहुत अच्छे निगोशीऐटर्स नहीं होते हैं. क्योंकि टेकर्स वैल्यू क्लेम करने पर फोकस करते हैं : जैसेकि वह लोग नेगोशिएशन को नो-प्रॉफिट, नो-लॉस या एक हार-जीत के मुकाबले की तरह से देखते हैं. और अपने सामने वाले अपोनेंट पर भरोसा नहीं करते हैं. इसलिए वह एग्रेसिव नेगोशिएशन यानी हमलावर होकर सौदेबाजी करते हैं. और अपने अपोनेंट के साथ आपसी सहमति बनाने में फेल हो जाते हैं. इस वजह से वह अपने काउंटरपार्ट यानी अपनी बराबर की पोजीशन के शख्स के इंटरेस्ट में वैल्यू क्रिएट करने की अपॉर्चुनिटी को अनदेखा कर देते हैं. 

सेल्फलैस गिवर्स नेगोशिएशन के दौरान अपने काउंटरपार्ट के इंटरेस्ट्स को समझते हुए अपने अपोनेंट को  बहुत ज्यादा कंसेशंस प्रोवाइड कर देते हैं और वह इसका खर्चा भी खुद ही उठाते हैं. Otherish गिवर्स मोस्ट इफेक्टिव नेगोशिएटर्स होते हैं. क्योंकि वह अपने इंटरेस्ट्स के बारे में चिंता करने के साथ-साथ अपने एंपलॉयर के इंटरेस्ट्स के लिए भी काफी चिंता करते हैं. इसलिए वह सबसे पहले नेगोशिएशन में वैल्यू क्रिएट करते हैं. 

जेसन गिलर ने ज्यादातर Otherish अप्रोच को अपनाया था: जैसेकि उसने एक ऐसे तरीके का पता लगाया था जिसकी मदद से उसने अपने वक्त को ज्यादा खर्च किए बिना भी अपनी गिविंग के अमाउंट को बहुत ज्यादा बढ़ा दिया था . इसके लिए उसने अपने आप को काम के ओवरलोड से दूर रखने के लिए कई दूसरे लोगों को इंगेज किया था. और इस तरह से उसने उन लोगों के लिए भी गिवर्स बनने की अपॉर्चुनिटी को क्रिएट किया था. जब जूनियर एनालिस्ट्स उससे कोई मदद मांगते थे तो वह उनको अपने साथ लंच करने का सुझाव देता था. और वह उनके साथ दो नए मैनेजर्स को भी इनवाइट करता था. इस तरह से उसने मैनेजर्स के लिए अपने पास पहुंचना आसान कर दिया था . और फिर वह एक्स्ट्रा टाइम खर्च किए बिना ही जूनियर एनालिस्ट्स के साथ-साथ मैनेजर्स के साथ भी मीटिंग करके उनको जरूरी एडवाइज दिया करता था. इसी दौरान उसने ट्रेनिंग का एक ऐसा सिस्टम शुरू कर दिया था जिसमें उसने सारी गिविंग खुद करने की जगह, बहुत से मैनेजर्स को इस तरह से तैयार कर दिया कि वह लोग भी जूनियर एनालिस्ट से कनेक्ट होकर उनको काफी ज्यादा नॉलेज प्रोवाइड करने लगे थे. 

CHAPTER EIGHT : The Scrooge Shift
इस चैप्टर में मैचर्स और टेकर्स को गिविंग करने के लिए मोटिवेट करने में " Freecycle" की सक्सेस के बारे में बताया जाएगा. और हम यह समझेंगे कि उन ग्रुप्स के बारे में ऐसा क्या है जो अपने मेंबर्स को गिवर्स बनने की तरफ झुका सकते हैं, इसके अलावा यहां पर एक ऐसी पावरफुल 

एक्टिविटी के बारे में बताया जाएगा जिसको दुनिया भर में बहुत सी लीडिंग कंपनीज और  बिजनेस स्कूल्स ने टेकर्स और मैचर्स के साथ ही साथ गिवर्स को भी मोटिवेट करने के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है. और हम ऐसे इंडिविजुअल्स और ऑर्गेनाइजेशंस के बारे में भी एक गहरी समझ हासिल करेंगे जिससे यह पता चलेगा कि उनमें ऐसा क्या है जिसकी मदद से लोगों को एक बड़े स्तर पर गिविंग करने के लिए एनकरेज किया जा सकता है. 

 

The Scrooge Shift 

Why a Soccer Team, a Fingerprint and a Name Can Tilt Us In the Other Direction 

1996 में क्रेग न्यूमार्क नाम के एक अमेरिकन इंटरनेट इंटरप्रेन्योर ने " Craiglist " के नाम से एक वेबसाइट को लांच किया. जो ऑनलाइन कम्युनिटीज का एक सेंट्रल नेटवर्क है. यहां पर नौकरियों के लिए ऑफर , और रहने के लिए घर के साथ-साथ और भी तमाम तरह के आइटम्स को बिक्री के लिए एडवर्टाइज किया जाता है . 2011 के आखिर तक दुनिया भर में 700 से ज्यादा लोकेशन्स में क्रेगलिस्ट की साइट्स बन गईं थीं, जहां पर हर महीने करीब 5 करोड़ लोग विजिट करते थे. और यह साइट, मैचर्स को अट्रैक्ट करने की वजह से बहुत सक्सेसफुली रन कर रही थी. क्रेगलिस्ट की साइट्स लोगों के बीच ऐसे सामान और सर्विसेस का लेनदेन करने की सुविधा देती हैं, जिनके बारे में खरीदार और बिक्री करने वाले शख्स के बीच उनकी सही कीमत के बारे में आपसी सहमति बन जाती है. और यही बात मैचर्स के मनपसंद गिव एंड टेक करने की स्टाइल में एक बराबर बैलेंस को क्रिएट करती है. 

2003 में एक अमेरिकन इंजीनियर Deron Beal ने  "Freecycle" के नाम से एक नेटवर्क बनाया. और अपने 40 दोस्तों और कई नान प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन्स को ई-मेल भेजकर इस नेटवर्क को ज्वाइन करने के लिए इनवाइट किया. फ्रीसाइकिल का पर्पज इंटरनेट-बेस्ड लोकल कम्युनिटी ऑफ एक्सचेंज क्रिएट करने का था, जहां पर ऐसे लोगों को कनेक्ट किया जा सके जो अपनी इस्तेमाल की हुई चीजों को जरूरतमंद लोगों को देना चाहते थे. और जो लोग इन दी हुई चीजों को अपने इस्तेमाल के लिए लेना चाहते थे .जबकि सब चीजों का लेन-देन, पैसों के लेन-देन के बिना किया जाना था. यानी कि लोग यहां से फ्री में अपनी जरूरत की चीज ले सकते थे. डेरोन बील को यह यकीन था कि किसी एक शख्स का कचरा असल में दूसरे शख्स के लिए एक खजाना हो सकता था . 

कई सोशल साइंटिस्ट इस बात को मानते हैं कि असल में क्रेगलिस्ट जैसे सिस्टम में यह एडवांटेज होती है कि यहां पर ज्यादातर लोग मैचर्स होते हैं. लेकिन कई सोशल एक्सपर्ट्स का अंदाजा है कि फ्रीसाइकिल जैसे सिस्टम, क्रेगलिस्ट के मुकाबले में कहीं ज्यादा तेजी से डेवेलप कर सकते हैं.  क्योंकि यहां पर मेंबर्स एक शख्स को देते हैं और दूसरे शख्स से लेते हैं. इस तरह से वह कभी भी एक ही शख्स के साथ वैल्यू का लेन-देन नहीं  करते हैं. हालांकि यह रिसर्चर्सज इस बात को भी मानते हैं कि इस तरह का एक सिंपल तरीके का रिसिप्रोसिटी सिस्टम, लोगों के गिवर्स बनने पर डिपेंड करता है, और टेकर्स इस सिस्टम का शोषण भी कर सकते हैं. लेकिन फिर भी यह गुड्स और सर्विसेज के लेन-देन की सुविधा देने के मामले में डायरेक्ट मैचिंग सिस्टम जैसा ही काफी प्रोडक्टिव सिस्टम है. और यह बात भी सही है कि यह दोनों सिस्टम्स अलग-अलग तरह के लोगों को अट्रैक्ट करते हैं : जैसेकि मैचर्स क्रेगलिस्ट के लिए तैयार होते हैं. जबकि गिवर्स फ्रीसाइकिल के लिए जमा होते हैं. इस बारे में डेरोन बील  यह कहते हैं कि अगर सब लोग सिर्फ टेकर्स होते तो फ्रीसाइकिल सिस्टम नहीं बन सकता था. लेकिन असल में ऐसा नहीं है . क्योंकि बाद में किसी तरह से फ्रीसाइकिल सिस्टम में मैचर्स और टेकर्स को भी गिवर्स की तरह से ऑपरेट करने के लिए एन्करेज कर लिया गया था. 

एक स्टडी में यह पता लगा है कि लोग लेने के इरादे से एक ग्रुप में शामिल होते हैं, लेकिन वह आखिर में गिवर्स की तरह से ऑपरेट करने लगते हैं. ऐसा इस वजह से होता है क्योंकि गिवर्स सक्सेस की सीढ़ी पर बिल्कुल नीचे नहीं पहुंचना चाहते हैं. यानी कि वह फेल नहीं होना चाहते हैं. क्योंकि जब गिवर्स किसी इंडिविजुअल शख्स के साथ डील करते हैं तो उनके लिए इसी बात में समझदारी होती है कि उनको अपने प्रोटेक्शन के लिए टेकर्स के साथ लेन-देन करते वक्त  अपने आप को सिंसेरिटी स्क्रीनिंग और मैचर्स की तरह एक्टिंग करने में एंगेज कर लेना चाहिए. जबकि दूसरी तरफ ग्रुप सेटिंग्स में गिवर्स के लिए एक अलग तरह का रास्ता होता है जिससे कि वह यह श्योर कर सकते हैं कि उनका शोषण नहीं किया जा रहा है : जैसे कि आप ग्रुप में हर किसी को गिवर्स की तरह से ऑपरेट करने के लिए कह सकते हैं. 

इसी स्ट्रैटेजी को जेसन गेलर और लिलियन बाउर ने भी सक्सेसफुली इस्तेमाल किया था: जैसे कि उन दोनों ने अपने जूनियर एम्पलाइज़ को और ज्यादा जूनियर कलीग्स के ग्रुप्स में मेंटरिंग करने के लिए इनकरेज किया था. 

 

The Altruism Debate 

पिछले करीब 40 सालों से दुनिया के 2 मशहूर साईकोलॉजिस्ट्स Daniel Batson और Robert Cialdini के बीच इस मुद्दे पर एक जोरदार बहस चल रही है कि क्या गिविंग करने का डिसीजन पूरी तरह से परोपकारी यानी दूसरों की भलाई करने वाला हो सकता है या फिर आखिर में यह हमेशा सेल्फिश होता है. 

डेनियल बैटसन गिविंग को पूरी तरह से परोपकारी मानते हैं. इस बारे में उनको यकीन है कि जब हम किसी जरूरतमंद शख्स के लिए हमदर्दी महसूस करते हैं तो हम वाकई में सेल्फलेस गिविंग में इंगेज हो जाते हैं. क्योंकि उस वक्त हम अपनी एनर्जी और अटेंशन को उस शख्स की मदद करने पर इसलिए फोकस करते हैं, क्योंकि हम दिल से उसकी परवाह करते हैं, ना कि इसलिए कि ऐसा करने से हम अच्छा फील करते हैं. 

दूसरी तरफ रॉबर्ट चिआलदीनी गिविंग को परोपकारी नहीं मानते हैं. इस बारे में उनका मानना है कि इंसान अक्सर जेनरस, गिविंग और केयरिंग होते हैं. लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि उनके बिहेवियर्स पूरी तरह से परोपकारी होते हैं. उनको यकीन है कि जब दूसरे लोगों को चोट पहुंचती है तो हम उनकी तकलीफ को महसूस करते हैं. इस वजह से हम उनकी मदद करने के लिए मोटिवेट होते हैं. 

हालांकि दोनों साइकोलॉजिस्ट इस बात पर सहमत हैं कि दूसरों की मदद करने के पीछे हमारा अकेलापन और हमदर्दी की भावना इसकी एक अहम वजह हैं . लेकिन वह दोनों यह भी मानते हैं कि अकेलापन सेल्फिश या परोपकारी नहीं होता है. 

 

From Enemies to Allies 

जब लोग अपनी एक आईडेंटिटी को दूसरे शख्स के साथ शेयर करते हैं तो इसकी वजह से वह शख्स एक Otherish गिवर बन जाता है.  अगर हम अपने ग्रुप से जुड़े हुए लोगों की मदद करते हैं तो हम अपनी भी हेल्प कर रहे होते हैं. क्योंकि इस तरह से हम अपने ग्रुप को बेहतर बना रहे होते हैं. 

जब कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के साइकोलॉजी और फिलासफी के प्रोफेसर Robb Willer ने यह पता लगाने के लिए क्रेगलिस्ट और फ्रीसाइकिल के मेंबर्स को कंपेयर किया कि दोनों ग्रुप्स के मेंबर्स अपने-अपने ग्रुप में दूसरे मेंबर्स के साथ आपसी पहचान और जुड़ाव को कितना ज्यादा महसूस कर पाते थे. तो उन्होंने यह पाया कि क्रेगलिस्ट या फ्रीसाइकिल ग्रुप्स के जिन मेंबर्स ने बहुत कम आइटम्स खरीदे थे या हासिल किए थे, उनका अपने ग्रुप के मेंबर्स के साथ आपस में पहचान और जुड़ाव को महसूस करने के मामले में एक दूसरे के मुकाबले कोई अंतर नहीं था. लेकिन जिन मेंबर्स ने कई आइटम्स खरीदे या हासिल किए थे, उन मेंबर्स में से फ्रीसाइकिल के मेंबर्स, क्रेगलिस्ट के मेंबर्स के मुकाबले अपने ग्रुप के मेंबर्स के  साथ काफी ज्यादा आपसी पहचान और जुड़ाव को महसूस करते थे. जो मेंबर्स इस बात पर ध्यान दिए बगैर कि चाहे वो गिवर्स थे या गिवर्स नहीं भी थे, अक्सर सामानों का लेन-देन करने के लिए पार्टिसिपेट किया करते थे, वह अपने आप को क्रेगलिस्ट  के मुकाबले फ्रीसाइकिल के साथ ज्यादा जुड़ा हुआ महसूस करते थे. 

रॉब विलर के मुताबिक लोग एक ऐसी कम्युनिटी के साथ ज्यादा आईडेंटिफाइड और कनेक्टेड महसूस करते हैं जहां पर वह लेन-देन में बराबरी से मैचिंग करने की जगह आजादी के साथ दे सकते हैं. और इसकी यह वजह है कि डायरेक्ट मैचिंग सिस्टम में चीजों की अदला-बदली करने के लिए पैसों का लेन-देन करना पड़ता है. जब मेंबर्स क्रेगलिस्ट पर कोई आइटम खरीदते हैं तो वह यह जानते हैं कि आमतौर पर सेलर्स, अपने खुद के फायदे को ज्यादा से ज्यादा बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं और वह खरीदारों के इंटरेस्ट्स की जरा भी परवाह नहीं कर रहे हैं. और दूसरी तरफ जब मेंबर्स फ्रीसाइकिल पर कोई आइटम रिसीव करते हैं तो उन्हें गिवर की तरफ से एक ऐसा गिफ्ट मिलता है जिसके साथ कोई कंडीशन नहीं जुड़ी होती है. इस वजह से गिवर्स अपने खुद के इंटरेस्ट पर फोकस करने की जगह पाने वाले के इंटरेस्ट में काम करने के लिए ज्यादा मोटिवेट होते हैं. 

और दूसरी तरफ जब आप क्रेगलिस्ट पर खरीदारी करते हैं, और अगर आपको कोई चीज सस्ते दामो में मिल जाती है तो तो आप एक इंडिविजुअल सेलर के नेगोशिएटर के तौर पर अपने किसी जानकार के लिए भी इसकी सिफारिश कर सकते हैं. जबकि आपको ऐसा करने पर इसके बदले में क्रेगलिस्ट कम्युनिटी से कुछ भी हासिल नहीं होता है. और दूसरी तरफ एक सिंपल गिविंग की वजह से कम्युनिटी आपके लिए गिफ्ट्स हासिल करने का एक सोर्स बन जाती है. 

 

The Search for Optimal Distinctiveness 

अमेरिकन साइकोलॉजिस्ट Brett Pelham ने एक स्टडी में पता लगाया है कि हम ऐसे लोगों, जगहों और चीजों को पसंद करने लगते हैं जो हमें हमारी याद दिलाते हैं. क्योंकि हम अपने नामों को अपनी पहचान के साथ इतनी मजबूती के साथ जोड़ लेते हैं कि इसी वजह से हम ऐसे बड़े फैसले ले लेते हैं जो हमें हमारे नाम की याद दिलाते हैं : जैसेकि जैक और फिलिप जैसे नाम एक बराबर से कॉमन होते हैं लेकिन फिर भी  " Jacksonville" नाम की जगह पर रहने वाले लोगों के नाम फिलिप के मुकाबले जैक होने की संभावना 4 गुना ज्यादा होती है. और इसी तरह से " Philadelphia" मे रहने वाले लोगों के नाम जैक के मुकाबले फिलिप ज्यादा होते हैं. और यही बात लोगों के कैरियर में भी लागू होती है : जैसे कि अमेरिका में 1990 के दशक में पुरुषों के सबसे ज्यादा एक बराबर कॉमन 'Jerry' ,' Dennis' और ' Walter ' जैसे नामों में से  Dennis  नाम के आदमी के एक डॉक्टर बनने की संभावना 2 गुना ज्यादा होती थी. 

इसी तरह से यह भी देखा गया है कि लोग उस वक्त जरा ज्यादा जोश में आ जाते हैं जब वह किसी ऐसे शख्स से मिलते हैं, जो उन्हें खुद अपनी याद दिलाते हैं. 

साइकोलॉजिस्ट Brett Pelham की रिसर्च यह दिखाती है कि आपका नाम जितना ज्यादा यूनिक होगा, आपके लिए अपने नाम जैसी जगहों की पहचान कर लेने की संभावना भी उतनी ही ज्यादा ज्यादा होती है. 

कॉमन आईडेंटिटी और यूनिक सेल्फ एक्सप्रेशंस को बढ़ावा देकर ही फ्रीसाइकिल एक  ऐसे गिविंग सिस्टम को तैयार कर पाया था जोकि एक नॉर्मल रिसिप्रोसिटी स्टाइल पर बेस्ड था : जैसेकि आप कम्युनिटी में दूसरों को हेल्प करने के लिए देते हैं. और आप यह जानते हैं कि कम्युनिटी में से कोई शख्स भी आपको देगा. लेकिन प्रोफेसर Robb Willer इस बात से पूरी तरह सहमत नहीं थे. उनका यह मानना है कि इस तरह का सिस्टम एक " क्रिटिकल मास ऑफ एक्सचेंज " पर डिपेंड करता है. क्योंकि इस तरह का लेन-देन ग्रुप के अंदर पॉजिटिव सेंटीमेंट्स क्रिएट करता है. और यही सेंटीमेंट्स आगे कंट्रीब्यूट करने में मदद करते हैं. इसका मतलब है कि जब लोग किसी ग्रुप से बहुत सारा फायदा लेने के बाद यह महसूस करते हैं कि वह ग्रुप उनकी मदद कर रहा है तो वह सिर्फ आमतौर पर देने वाले ग्रुप के साथ ही पहचान बनाते हैं. लेकिन फ्रीसाइकिल के साथ इस तरह के नतीजे की कोई गारंटी नहीं थी: जैसेकि टेकर्स के लिए उनकी मनचाही चीज का फ्री में मिल पाना जरूरी नहीं था. 

 

Why Superman Backfires and People 

Conserve Electricity 

जब बहुत से लोग किसी खास तरह के गिवर के कामों से इंस्पायर्ड होकर उसके एग्जांपल को फॉलो करते हैं तो साइकोलॉजिस्ट Jonathan Haidt लोगों की इस तरह की गर्मजोशी वाली फीलिंग को " Elevation" कहते हैं.

साइकोलॉजिस्ट Leif Nelson ने इसी तरह के एक

एलीवेटिंग रोल मॉडल की पहचान करने के लिए कई कम्युनिटी सर्विस वॉलिंटियर्स को एक सुपर हीरो या सुपरमैन के बारे में 10 फीचर्स की लिस्ट बनाने के लिए कहा. 

सुपर हीरो के बारे में लोगों ने लिखा कि सुपर हीरोज किस तरह से हेल्पफुल और रिस्पांसिबल होते हैं. और वह भी इन गिविंग वैल्यूज को एक्सप्रेस करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने वालंटियर किया था. लेकिन दूसरी तरफ जब कई लोगों ने सुपरमैन के बारे में सोच- विचार किया तो उनके माइंड में सुपरमैन के नामुमकिन स्टैंडर्ड्स के बारे में तमाम तरह के विचार आ रहे थे : जैसेकि टीवी सीरीज में दिखाया जाता था कि वह किस तरह से बंदूक की गोली से ज्यादा तेज रफ्तार से उड़ता था, वह किसी रेलवे इंजन से ज्यादा पावरफुल था, और pवह ऊंची-ऊंची बिल्डिंग्स को एक छलांग में पार कर जाता था. इसलिए लोगों ने सुपरमैन के  रोल मॉडल को वालंटियर करने के लिए ट्राई नहीं  किया. 

 फ्रीसाइकिल पर गिवर्स ने एक ऐसे स्टैंडर्ड का मॉडल तैयार किया था, जिसको हासिल करना पॉसिबल नजर आता था: जैसे कि जब मेंबर्स ने लोगों को इस्तेमाल किए हुए कपड़े और पुराने इलेक्ट्रॉनिक्स के समान वगैरह देते हुए देखा तो उन्होंने महसूस किया कि वह भी आसानी से ऐसा कर सकते थे. हालांकि बहुत से लोगों ने फ्री का सामान हासिल करने के लिए फ्रीसाइकिल को जॉइन किया था. लेकिन इसका यह मतलब नहीं था कि उनकी रिसिप्रोसिटी स्टाइल, टेकर्स की तरह थी. जब लोग किसी ग्रुप को ज्वाइन करते हैं तो वह वहां पर कम्युनिटी के मुताबिक सही बिहेवियर के बारे में इशारे तलाश करते हैं. 

2012 में फ्रीसाइकिल पर 110 देशों में करीब 90 लाख मेंबर्स पार्टिसिपेट कर रहे थे. बहुत से लोग इसके बाद भी एक टेकर की मेंटालिटी और ज्यादा से ज्यादा फ्री का सामान हासिल करने की उम्मीद के साथ इस साइट को ज्वाइन कर रहे हैं .लेकिन यहां पर लोकल सिटीजन्स के ग्रुप्स जरूरतमंद लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए छोटी-छोटी गिविंग्स कर रहे हैं और एक रोल मॉडल की तरह सर्व करके लगातार फ्रीसाइकिल कम्युनिटीज में एक कॉमन आईडेंटिटी क्रिएट करना जारी रखे हुए हैं. जिससे कि और कई मेंबर्स को गिवर्स की तरह ऑपरेट करने के लिए मोटिवेट किया जा सके. 

 

The Reciprocity Ring

साइकोलॉजिस्ट Wayne Baker ने " रिसिप्रोसिटी  रिंग" के नाम से एक ऐसी एक्सरसाइज को डेवलप किया है, जिसकी मदद से एक ग्रुप के लोग अपनी जरूरत की नॉलेज को आसानी से हासिल कर सकते हैं .  इस एक्सरसाइज में, ग्रुप में शामिल हर एक शख्स ग्रुप से एक रिक्वेस्ट करेगा. और बाकी सब लोग अपनी नॉलेज, रिसोर्सेज और कनेक्शंन्स की मदद से उसको पूरा करेंगे. यह रिक्वेस्ट उनकी पर्सनल या प्रोफेशनल लाइफ में, नौकरी की इंफॉर्मेशन से लेकर ट्रैवलिंग ट्रिप तक के बारे में पता लगाने जैसी किसी भी मीनिंगफुल चीज के लिए हो सकती है . 

रिसिप्रोसिटी रिंग में पार्टिसिपेट करने वाले लोग उसी तरीके से पोटेंशियल गिवर्स यानी फ्यूचर में गिवर्स बनने लायक लोगों को एक क्लियर आइडिया प्रोवाइड करते हैं कि वह किस तरह से इफेक्टिवली कंट्रीब्यूट कर सकते हैं, जैसे फ्रीसाइकिल में अक्सर रिसिप्रोसिटी रिंग एक रोल मॉडल के तौर पर गिवर्स के साथ शुरू होता है. लेकिन हर एक रिसिप्रोसिटी रिंग में बहुत से मैचर्स और कुछ ऐसे लोग होते हैं जो टेकर्स की तरह से ऑपरेट करना ज्यादा पसंद करते हैं. 

आमतौर पर फ्रीसाइकिल जैसे एक लिमिटेड गिविंग सिस्टम की इफेक्टिवेनेस को काफी लंबे टाइम तक बनाए रखने के लिए नेचर्स और टेकर्स को भी कंट्रीब्यूट करने की जरूरत होती है. क्योंकि ऐसा नहीं होने पर आखिर में गिवर्स सभी लोगों की मदद करके बदले में बहुत कम हासिल करेंगे. और इस वजह से उनके लिए बर्नआउट होने का खतरा पैदा हो जाएगा. 

एक रिसर्च से पता चलता है कि गिवर्स आमतौर कंट्रीब्यूट करते वक्त पब्लिक या प्राइवेट में कंट्रीब्यूट करने  की परवाह नहीं  करते हैं. लेकिन टेकर्स के लिए सिर्फ पब्लिक में ही कंट्रीब्यूट करने की ज्यादा संभावना होती है. क्योंकि वह यह जानते हैं कि वह एक पब्लिक सेटिंग में अपनी नॉलेज, रिसोर्सेज और कनेक्शंस को शेयर करके एक जेनरस शख्स बन जाने की रेपुटेशन हासिल करेंगे. 

 

Identity Shifts and Reciprocity Reversals 

जब हम किसी शख्स को इनफ्लुएंस करने की कोशिश करते हैं तो हम इस उम्मीद के साथ उनके एटीट्यूड्स को चेंज करने से शुरुआत करते हैं, क्योंकि उनके बिहेवियर्स के उसी डायरेक्शन में आगे बढ़ने की ज्यादा पॉसिबिलिटी होती है.

एक स्टडी से यह पता चलता है कि जब लोग अपने कैरियर में आगे बढ़ने के लिए किसी वालंटियर आर्गेनाईजेशन में भी शामिल होते हैं तो वह जितने ज्यादा टाइम तक दूसरों को सर्व करने के साथ-साथ देते रहते हैं, तो वह उसी के मुताबिक वॉलिंटियरिंग के रोल को अपनी पहचान के एक इंपॉर्टेंट पहलू के तौर पर और ज्यादा अच्छी तरह से देखने लगते हैं. एक बार ऐसा हो जाने पर वह जिन लोगों की मदद कर रहे होते हैं, उनके साथ एक कॉमन आईडेंटिटी महसूस करने लगते हैं. और वह उस रोल में गिवर्स बन जाते हैं. 

फ्रीसाइकिल और रिसिप्रोसिटी  रिंग के पीछे यही नॉलेज काम करती है कि दोनों लिमिटेड गिविंग देने वाले सिस्टम्स, फ्री चॉइस की भावना को बनाए रखते हुए और ज्यादा गिविंग करने के लिए बढ़ावा देते हैं. हालांकि इन सिस्टम्स में गिविंग करने के लिए बहुत स्ट्रांग स्टैण्डर्र्ड्स होते हैं. लेकिन इस बारे में हर एक पार्टिसिपेंट को यह डिसाइड करने की पूरी आजादी होती है कि वह किसी शख्स की हेल्प करने के लिए उसे क्या देना चाहते हैं.

CHAPTER NINE : Out of the Shadows
ऑथर ने इस चैप्टर में हमें इस किताब के बारे में अपने फाइनल थॉट्स को बताया है. जिससे कि हम इसमें डिसकस की गई  अहम जानकारियों को याद रख सकें. और उन्हें अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में आसानी से इस्तेमाल कर सकें. 

 

Out of the Shadows 

हालांकि हम में से बहुत से लोग स्ट्रांग वैल्यूज रखते हैं, लेकिन फिर भी हम अक्सर अपने काम पर उनको जाहिर नहीं करना चाहते हैं. लेकिन बेहतर टीम वर्क, सर्विस जॉब और सोशल मीडिया की मदद से गिवर्स के लिए अपने संबंधों और रेपुटेशन्स को डेवेलप करने के लिए तमाम तरह की अपॉर्चुनिटीज नजर आने लगी हैं, जो उनकी सक्सेस को तेजी से कई गुना ज्यादा बढ़ा सकती हैं. हमने इस किताब में कवर किए गए बहुत से एग्जांपल्स की मदद से यह समझा है कि गिवर्स अपने जॉब्स या प्रोफेशन्स मे इंजीनियरिंग से लेकर मेडिसिन तक और उससे आगे सेल्स के अलावा और भी बहुत सी दूसरी फील्ड्स में तमाम तरह की हैरान करने वाली रेंज के जरिए सफलता की सीढ़ी के टॉप पर पहुंच सकते हैं.

गिवर्स सक्सेस को किसी शख्स के एक ऐसे अचीवमेंट के तौर पर देखते हैं, जिसकी खास क्वालिटीज का दूसरों पर पॉजिटिव इफेक्ट पड़ता है. जबकि टेकर्स सक्सेस को ऐसे रिजल्ट्स हासिल करने के तौर पर देखते हैं जो उन्हें दूसरों के मुकाबले सुपीरियर बनाते हैं. और मैचर्स, सक्सेस को किसी इंडिविजुअल के अचीवमेंट्स को दूसरे लोगों के साथ ईमानदारी से बैलेंस करने के मुताबिक देखते हैं. 

अगर हम अपनी लाइफ में भी इसी तरह की सक्सेस को हासिल करना चाहते हैं तो हमें अपनी रिसिप्रोसिटी स्टाइल्स यानी दूसरे लोगों के साथ आपसी व्यवहार में भी कई बड़े बदलाव करने होंगे : जैसेकि ऑर्गेनाइजेशंस जिस तरीके से लोगों को हायर करती हैं, उनकी वैल्यू को जज करती हैं, उन्हें इनाम देती हैं, और उन्हें प्रमोट करती हैं. इन सब तरीकों को पूरी तरह से बदलने की जरूरत होगी. इसका मतलब है कि हमें ना सिर्फ इंडिविजुअल लोगों की प्रोडक्टिविटी पर ध्यान देना होगा बल्कि इसके साथ-साथ दूसरे लोगों पर इस प्रोडक्टिविटी के  Ripple Effect  पर भी ध्यान देना होगा : जैसेकि अगर हम अपनी सक्सेस की इमेज को बढ़ा कर इसमें दूसरों की कंट्रीब्यूशन के साथ-साथ इंडिविजुअल्स के अचीवमेंट्स को भी शामिल कर लें तो लोगों को उनकी प्रोफेशनल रिसिप्रोसिटी स्टाइल्स को गिविंग की तरफ मोड़ने के लिए मोटिवेट किया जा सकता है. अगर आपको लगता है कि सक्सेस के लिए दूसरों को भी फायदा पहुंचाना जरूरी है तो ऐसी सिचुएशन में टेकर्स और मैचर्स के रुझान को और ज्यादा Otherish गिविंग की तरफ मोड़ने की कोशिश करनी होगी. जिससे कि लोगों के पर्सनल और कलेक्टिव इंटरेस्ट्स साथ-साथ आगे बढ़ सकें. 

इस किताब में हर एक सक्सेसफुल गिवर की ऐसी स्टोरी को बताया गया है. जिसकी वजह से इंडिविजुअल और कलेक्टिव सक्सेस के बीच में  कनेक्शन के बारे में पता चलता है : जैसेकि एक इंटरप्रेन्योर के तौर पर Adam Rifkin  Panda ने अपने सभी मिलने वालों की मदद करने की कोशिश करके इनफ्लुएंशल लोगों अपना एक नेटवर्क बनाया था. उसने कई सक्सेसफुल कंपनियां लांच की थीं. और अपने हजारों कलीग्स को उनके लिए जॉब तलाश करने, उनकी स्किल्स को डेवेलप करने, और प्रोडक्टिव बिजनेस स्टार्ट करने लायक बना दिया था. 

एक वेंचर कैपिटलिस्ट के तौर पर David Hornik ने कई अट्रैक्टिव कंपनियों में इन्वेस्ट किया था. और बहुत से एंबिशियस एंटरप्रेन्योर्स के स्टार्ट-अप्स के लिए फंडिंग करके और उनको बेहतर तरीके से गाइड करके, अपनी रेपुटेशन को बहुत मजबूत बना लिया था. 

एक कॉमेडी राइटर के तौर पर, George Meyer ने Emmy Award जीता था. और हॉलीवुड में " The Funniest Writer" की एक रेपुटेशन एस्टेब्लिश कर ली थी. 

58 साल के एकाउंटिंग प्रोफेसर, C J Skender ने अपने क्लास रूम में नई जनरेशन के स्टूडेंट्स को अच्छे से पढ़ाई करने के लिए इन्स्पायर करते हुए दर्जनों टीचिंग अवॉर्ड्स जीते थे. उनके अपने पोटेंशियल को देखते हुए और दूसरे लोगों को उनका पोटेंशियल अचीव करने के लिए मोटिवेट करने की वजह से और इसके अलावा जिस तरह से उन्होंने Corney Callahan को कई सालों तक उसकी एनर्जी बचाए रखने में उसका साथ दिया, इन सब की वजह से उनको नेशनल टीचिंग अवार्ड के लिए नॉमिनेट किया गया. 

कंसलटिंग की फील्ड में Jason Geller और Lillian Baure, को अपनी-अपनी फर्म्स में आमतौर के मुकाबले काफी जल्दी प्रमोशन देकर फर्म का पार्टनर बनाया गया था. और ऐसा उनके उन कंट्रीब्यूशंस की वजह से हुआ था जो उन्होंने दूसरों को बहुत अच्छी तरह से मेंटर और डेवलप करने के जरिए किया था. और इस वजह से उनके जूनियर कलीग्स की नॉलेज काफी ज्यादा बढ़ गई थी. 

इसी तरह से और भी हजारों ऐसे एग्जांपल्स दिए जा सकते हैं  जिनसे यह पता चलता है कि सक्सेसफुल गिवर्स के साथ-साथ दूसरे लोग भी सक्सेसफुल हो जाते हैं. 

एक स्टडी में सक्सेसफुल गिवर्स के बारे में उनकी एक बहुत अहम क्वालिटी का पता चला है: जैसेकि वह अपने साथ ही साथ, अपने आसपास के लोगों  की भलाई को भी ध्यान में रखते हुए डिसीजन्स लेते हैं. और दूसरों को नीचा दिखाए बिना ही टॉप पर पहुंचते हैं. 

यह भी देखा गया है कि कुछ लोग अपनी सक्सेस को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी रिलेशनशिप्स और रेपुटेशन्स को डेवेलप करने की उम्मीद में दूसरों की मदद करने के लिए जरा ज्यादा ही स्ट्रैटेजिक मैचर बन जाते हैं.  

दरअसल गिविंग और क्लेवर मैचिंग के  बीच में बहुत मामूली डिफरेंस होता है. और यह डिफरेंस रिसिप्रोसिटी स्टाइल के तरीके पर डिपेंड करता है : जैसेकि क्या यह डिफरेंस रिसिप्रोसिटी स्टाइल के एक्शन की वजह से है, या उसके इरादों की वजह से है, या फिर दोनों के एक कंबीनेशन की वजह से है. अगर उनके इरादे मिक्स्ड टाइप के हैं, यानी अच्छे-बुरे दोनों हैं. फिर भी अक्सर हेल्पिंग बिहेवियर्स दूसरों की वैल्यू में बढ़ोतरी करते हैं. और इस तरह से एक सोशल सिस्टम में गिविंग के अमाउंट को बढ़ाते हैं. जबकि दूसरी तरफ हमारे बिहेवियर्स हमारे इरादों को जाहिर कर देते हैं. 

जब स्ट्रैटेजिक मैचर्स अपने पर्सनल फायदे के लिए दूसरों की मदद करना बंद कर देते हैं तो उन्हें इसका नुकसान उठाना पड़ता है : जैसे कि उनके साथ के दूसरे मैचर्स भी उनकी मदद रोक सकते हैं, उनकी रेपुटेशन के बारे में नेगेटिव इंफॉर्मेशन्स फैला सकते हैं, या उनके ऊपर दूसरे तरीके से पेनल्टी लगा सकते हैं. इस तरह के खराब नतीजों से बचने के लिए स्ट्रैटेजिक मैचर्स को ऐसे तरीके प्रोवाइड किए जाने चाहिएं, जिनकी मदद से वह  खुशी-खुशी ऐसे लोगों की मदद करने के लिए तैयार हो जाएं, जिनकी भलाई उनके लिए मायने रखती है. इस तरह से बार-बार दूसरों के इंटरेस्ट में काम करना उनकी चॉइस बन जाएगी. और मैचर्स के अंदर भी गिवर्स की आइडेंटिटी डेवेलप हो जाएगी.

कुल मिलाकर
इस किताब की मदद से हम 3 लेसन्स सीखते हैं :

1. हमारा किसी को कुछ देना या लेना एक स्पेसिफिक सिचुएशन पर डिपेंड करता है. 

2. दूसरों को अपने फेवर में  करने के लिए, आपको उनके साथ बातचीत में अपनी पूरी पावर लगानी होगी. 

3. अगर गिवर्स देखते हैं कि उनका प्रभाव कितना बड़ा है तो वह कभी बर्नआउट नहीं हो सकते . 

 

आपके लिए करने लायक काम

अगर आप इस किताब में बताए गए सिद्धांतों को अपने काम और जिंदगी में अप्लाई करना चाहते हैं तो आप नीचे दी गई लिस्ट के मुताबिक इनको प्रैक्टिकल तौर पर भी कर सकते हैं. इनमें से बहुत से एक्शन्स सक्सेसफुल गिवर्स की स्ट्रैटेजी और हैबिट्स के बेस पर तैयार किए गए हैं : 

1.Test Your Giver Quotient

2. Run a Reciprocity Ring 

3. Help Other People Craft Their Job

4. Start a Love Machine 

5. Embrace the Five-Minute Favor 

6. Practice Powerless Communication, but Become an Advocate 

7. Join a Community of Givers

8. Launch a Personal Generosity Experiment 

9. Help Fund a Project 

10. Seek Help. More Often

 

येबुक एप पर आप सुन रहे थे Give And Take by Adam Grant 

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