Walter Isaccson
सबसे सम्मानित अमेरिकन की ज़िंदगी
दो लफ़्ज़ों में
बेंजमिन फ़्रेंकलिन (2004) नामक यह किताब अमेरिका की सबसे सम्मानित और चहेती हस्तियों में से एक बेंजमिन फ़्रेंकलिन की ज़िंदगी और उनके पैशन के बारे में हमें बताती है। इस किताब में हम उनके लेखन और वैज्ञानिक करियर के साथ ही साथ अमेरिकन रैवल्यूशन में उनके द्वारा दिये गए योगदान के बारे में भी जानने वाले हैं।
यह किताब किसके लिए है?
- अमेरिकी इतिहास की पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स के लिए
- उन लोगों के लिए जो अमेरिकन पॉलिटिक्स को जानने में रुचि रखते हैं
- हर उस व्यक्ति के लिए जो जानना चाहता है कि कैसे कोई व्यक्ति समाज को गहराई से प्रभावित कर सकता है
लेखक के बारे में
CNN के पूर्व चेयरमैन वाल्टर आइसेकसन ने कई बेस्टसेलिंग किताबें लिखी हैं जिनमें से Einstein: His Life & Universe; Kissinger: A Biography; और Steve Jobs: A Man Who Thought Different प्रमुख हैं। लेखक होने के साथ ही आइसेक्सन एक एजुकेशनल ऑर्गेनिजेशन 'ऐस्पन इंस्टिट्यूट' के प्रेसीडेंट और CEO भी हैं।
एक बच्चे के रूप में बेंजामिन के तेवर काफी बगावती थे और ज्यादा स्कूल ना जाने के बावजूद भी वे काफी इंटेलिजेंट थे।
इतिहास में ऐसे बहुत ही कम लोग हुए हैं जिन्हैं अपनी फील्ड ऑफ एक्स्पर्टीज़ बदलने में कामयाबी हासिल हुई हो। हेनरी फोर्ड ने औद्योगिक क्रांति की रफ्तार को बढ़ाया; अल्बर्ट आइन्स्टाइन ने फिज़िक्स के तिलिस्मों से पर्दा उठाया; वहीं टेड टर्नर ने मॉडर्न मीडिया को बनाने में अपना योगदान दिया है।
इन सब लोगों ने अपने-अपने फील्ड को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दिया है। हालांकि ऐसे बहुत ही कम लोग हुए हैं जिन्होंने एक नहीं बल्कि कई सारी अलग-अलग फील्ड्स में अपना योगदान दिया है और उन्हें आगे बढ़ाने में मदद की है। ऐसी ही एक शख्सियत हैं अमेरिकन लेजेंड- "बेंजमिन फ़्रेंकलिन।"
अपने लंबे और महान करियर में बेंजमिन ने बिजली के नेचर से जुड़ी अपनी कुछ खोजों के जरिए विज्ञान की दुनिया को काफी हैरान किया है। वे अमेरिकन प्रिंटिंग इंडस्ट्री के अर्ली पाइनीयर्स में से एक थे। इसके अलावा उन्होंने यूनाइटेड स्टेट्स की पोलिटिकल फाउंडेशन को बनाने में भी अपना बहुमूल्य योगदान दिया है।
बेंजामिन का जन्म 17 जनवरी सन 1705 को अमेरिका के बोस्टन में हुआ था। फ़्रेंकलिन में बचपन से ही कुछ ऐसे लक्षण मौजूद थे जो आजादी और आविष्कारों के प्रति उन्हें प्रेरित करते थे। स्विमिंग सीखने का उनका तरीका इस बात का एक अच्छा उदाहरण है।
एक नौसिखिये तैराक के रूप में बेंजमिन चाहते थे कि वे और तेजी से तैरें। हालांकि ऐसा करने में उनके पैर के अंगूठे और उँगलियाँ उनका साथ नहीं दे रहे थे। अपने तैरने की गति बढ़ाने के लिए फ़्रेंकलिन ने अपने स्विमिंग इकिपमेंट्स से छेड़छाड़ करनी शुरू कर दी। आखिरकार उन्हे ऐसा करने में सफलता मिल ही गई। उन्होंने अपने हाथों के लिए पैडल्स बनाए और पैरों के लिए फ्लिपर्स।
फ़्रेंकलिन के पेरेंट्स ने उन्हें शिक्षा दिलाने की योजना बनाई जिसके लिए उन्होंने फ़्रेंकलिन को चर्च में भेजा। हालांकि उनके पिता जोशीआ (Joshiah) को जल्द ही एहसास हो गया कि उनके सबसे छोटे बेटे यानि बेंजमिन में क्लर्जी बनने का कोई लक्षण मौजूद नहीं है और उसमे धर्म को लेकर कोई गहरी निष्ठा उपस्थित नहीं है।
बेंजमीन के पिता खाना खाने से पहले हर बार ऊपर वाले का शुक्रिया अदा किया करते थे जिसने उन्हें भोजन उपलब्ध कराया है। हालांकि बेंजमिन को अपने पिता का यह रिचूअल काफी बोरिंग लगता था। एक बार फ़्रेंकलिन परिवार सर्दियों के लिए मीट को अपने गोदाम में स्टोर और उसे प्रीवेन्ट कर रहा था तभी बेंजमीन ने अपने पिता से कहा, यहीं पर सारे भोजन के लिए भगवान का शुक्रिया अदा कर लीजिए ताकि आपको रोज-रोज ये रिचूअल न दोहराना पड़े और इससे आपका कीमती समय भी बचेगा।
फ़्रेंकलिन दो साल तक एक लोकल स्कूल में गए जहाँ उन्होंने राइटिंग और कुछ अंकगणित यानि Arithmetic से जुड़ी कुछ बेसिक चीजें सीखीं। इसके बाद जब वे 10 साल के हुए तो उन्होंने एक अप्रेंटिस के रूप में काम करना शुरू कर दिया। पहले उन्होंने अपने पिता के अंडर में काम किया और बाद में अपने भाई जेम्स के साथ, जो बोस्टन का पहला स्वतंत्र अखबार "New England Courant" निकाला करते थे।
आखिरकार फ़्रेंकलिन को अपने भाई के साथ काम करते हुए बोरियत महसूस होने लगी और एक अप्रेंटिस के तौर पर अपने सबॉर्डनेट रोल से उन्हें चिड होने लगी। खासकर तब वे बहुत छिड़चड़े हो जाते थे जबकि उनका भाई जेम्स किसी काम से इंग्लैंड गया होता और उन्हें कई महीनों तक सारा अखबार अपने बलबूते पर संभालना होता।
और शायद यही वजह थी कि एक टीनेजर होने के बावजूद भी फ़्रेंकलिन ने खुद के दम पर कुछ नया करने का फैसला किया।
बेंजमिन फ़्रेंकलिन की यात्रा ने उन्हें अमेरिका से इंग्लैंड और इंग्लैंड से वापस अमेरिका ले गई लेकिन उनका सपना सिर्फ और सिर्फ लिखना था।
1723 में जब फ़्रेंकलिन सिर्फ 17 साल के थे तो वे फिलाडेल्फिया जाने के लिए एक छोटी सी नाव में सवार हो गए। फिलाडेल्फिया में उन्हें सैमुअल कीमर नाम के एक आदमी के यहाँ काम मिल गया जो कि एक प्रिंटर था। बेंजमिन के अनुसार, वह एक "Odd Fish" यानि सनकी आदमी था। बेंजमीन को सैमुएल के फिलासफी से जुड़े लंबे-लंबे डिस्कशन को सुनने में बड़ा मज़ा आता था जिसकी वजह से वे उसके यहाँ काम करते रहे। सैमुएल के यहाँ रहते हुए ही बेंजमिन ने अपनी बहस करने के कौशल यानि डिबेटिंग स्किल्स को धार देना शुरू किया जो बाद की ज़िंदगी में उनके बहुत काम आयी।
पेंनिसिलवेनिया के गवर्नर सर विलियम कीथ से दोस्ती हो जाने के बाद बेंजमीन को लंदन जाने का मौका मिला; जहाँ उन्होंने एक प्रिंटर के असिस्टन्ट की हैसियत से काम करते हुए 2 साल बिताए। इसके बाद फिलाडेल्फिया में एक क्वेकर मर्चन्ट ने बेंजमिन को अपने जनरल स्टोर में एक क्लर्क की नौकरी ऑफर की, जिसको उन्होंने स्वीकार किया और वापस अमेरिका आ गए। बेजमिन को बिजनेस की काफी अच्छी परख थी हालांकि उनका असल इन्टरस्ट किसी और ही चीज में था और वो चीज थी- "राइटिंग।"
फ्रैंकलिन राइटिंग के प्रति अपने प्रेम से अच्छी तरह वाकिफ थे। अपने भाई की प्रिंटिंग प्रेस मे काम करने के दौरान वे बहुत सारी किताबें और अखबार पढ़ा करते थे। ब्रिटिश लेखक जॉन बनियन की किताब "Piligrims' Progress" ने उन्हें काफी गहराई से प्रभावित किया। और तरक्की और सेल्फ-इमप्रूवमेंट के बारे में इस किताब में मौजूद विचारों ने इस हद तक प्रभावित किया कि उनकी छाप बेंजमिन के बाद के जीवन में भी देखी जा सकती है।
फ़्रेंकलिन की दूसरी सबसे पसंदीदा किताब थी- डेनियल डिफ़ो (Daniel Defoe) की "An Essay Upon Projects." डिफ़ो का मानना था कि महिलाओं को शिक्षा के उस अधिकार से वंचित रखना अमानवीय है जिसका आनंद पुरुष स्वतंत्र रूप से ले रहे हैं।
फ़्रेंकलिन हमेशा अपना ज्ञान बढ़ाने और अपनी राइटिंग स्किल्स को सुधारने का प्रयास करते रहते थे जिसके लिए वे नियमित तौर पर ब्रिटिश अखबार "The Spectator" में छपने वाले Essays पढ़ा करते थे। कुछ समय बाद जिन Essays को वे अखबार में पढ़ा करते थे उन्हें अपने शब्दों में लिखने लगे और फिर वे अपने वर्क की तुलना ऑरीजिनल वर्क से करते थे।
फ़्रेंकलिन के शुरुआती Essays उनके भाई के अखबार "The England Courant" में पब्लिश हुए थे। इन मजेदार ऐसेज को फ़्रेंकलिन अपने नाम से पब्लिश नहीं करते थे बल्कि वे इन्हें एक काल्पनिक महिला "Mrs. Silence Dagood" के नाम से पब्लिश करते थे। एक टीनेजर के हिसाब से फ़्रेंकलिन का शुरुआती काम बहुत ज्यादा कल्पनाओं से भरा हुआ था।
एक जैसी सोच रखने वाले विचारकों का ग्रुप बना लेने के बाद कम्यूनिटी और सरकार से जुड़े फ़्रेंकलिन के विचारों को बल मिलने लगा। पेंसिलवेनिया की एक दुकान में क्लर्क के तौर पर काम करते हुए फ़्रेंकलिन ज्यादा दिन नहीं टिक पाए और वे वापस इंग्लैंड चले गए, जहाँ उन्होंने एक बार फिर सैमुएल कीमर की प्रिंटिंग शॉप में काम करना शुरू कर दिया। हालांकि यह उनकी जिज्ञासा और ऐम्बिशन को शांत करने के लिए काफी नहीं था।
1727 में फ़्रेंकलिन ने लेदर ऐप्रन क्लब के नाम से एक क्लब बनाया जिसे बाद में Junto के नाम से जाना गया। उस वक्त मौजूद एक अन्य क्लब "ओल्डर मैन्स क्लब" के उलट Junto के ज्यादातर मेम्बर्स युवा व्यापारी और कारीगर थे जो वहाँ पर हाल-फिलहाल में हुए इवेंट्स पर चर्चा करने के लिए इकट्ठे होते थे।
समाजिक सुधारों को लेकर फ़्रेंकलिन के ज्यादातर महान विचारों का आधार जून्टो ही था। जून्टो ही वह जगह थी जहाँ पर फ़्रेंकलिन के मन में सब्स्क्रिप्शन लाइब्रेरी, मित्र (Neighbourhood) पुलिस, एक वालन्टीर फायर डिपार्ट्मन्ट के साथ ही साथ एक अकेडमी बनाने का आइडिया आया। फ़्रेंकलिन के द्वारा शुरू की गई अकेडेमी को ही आज हम "यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्नसिलवेनिया" के नाम से जानते हैं।
सरकार और सुरक्षा को लेकर फ़्रेंकलिन के विचार उस वक्त नवजात थे। 1747 में उनके मन में पेनसिलवेनिया की कोलोनीयल सरकार से स्वतंत्र एक जनसेवा (Voluntary Military) बनाने का विचार आया। उनका मानना था कि कालोनी फ्रांस और इंडियन (नेटिव अमेरिकन) दुश्मनों से मिल रही धमकियों पर सही एक्शन नहीं ले पा रही है इसलिए इस तरह की एक मिलिटरी की काफी जरूरत है।
बहुत बड़ी संख्या में, करीब 10 हजार, लोगों ने इस जनसेना को जॉइन करने के लिए हस्ताक्षर किये और फ़्रेंकलिन को अपना कर्नल (colonel) चुनने पर मुहर लगाई; हालांकि फ़्रेंकलिन ने कर्नल बनने से इनकार कर दिया। इसके बजाय फ़्रेंकलिन ने सेना और इसके डिविजंस के लिए मोटो और बैज बनाने का जिम्मा संभाला। एक साल बाद ही यानि 1748 में यह सेना भंग (disband) हो गई हालांकि तब तक युद्ध का खतरा भी टल चुका था।
हो सकता है कि उस वक्त फ़्रेंकलिन को इस बात का अंदाजा न रहा हो कि सरकार के काम को एक प्राइवेट ग्रुप के जरिए करना कितना कठिन हो सकता है; हालांकि कालोनी के मालिक, थॉमस पेन्न, इस बात से काफी अच्छी तरह वाकिफ थे। पेंन ने फ़्रेंकलिन के कामों को कलोनियल सरकार के लिए अपमानजनक बताया और फ़्रेंकलिन को एक खतरनाक व्यक्ति करार दिया। हालांकि सत्ता की असली लड़ाई अभी भी करीब 20 साल दूर थी। इस दौरान फ़्रेंकलिन की रुचि राजनीति से हटकर नैचुरल वर्ल्ड की तरफ शिफ्ट हो गई और उन्होंने प्रकृति में खुद को पूरी तरह से डूबा दिया।
फ़्रेंकलिन की जिज्ञासा ने उन्हें कुछ शानदार वैज्ञानिक खोजों, खासकर बिजली से जुड़ी खोजों के लिए प्रेरित किया।
ग्रीक दार्शनिक प्लेटो ने कहा है- "जब तक आप अपनी ज़िंदगी पर सवाल नहीं उठाते; तब तक आपकी ज़िंदगी जीने लायक नहीं है।" बेंजामिन फ़्रेंकलिन ने इस स्टैट्मन्ट को पूरी तरह साकार किया है।
फ़्रेंकलिन की 'कभी न संतुष्ट होने वाली जिज्ञासा' ही वह चीज थी जिसने उन्होंने फेमस बनाया। 1743 में बोस्टन की एक विज़िट के दौरान फ़्रेंकलिन ने एक प्रदर्शन देखा जिसमें बिजली पर कुछ ट्रिक्स दिखाई जा रही थी। ये वो वक्त था जब कोई ठीक से नहीं जानता था कि बिजली कैसे काम करती है।
उस प्रदर्शन से आकर्षित होकर फ़्रेंकलिन ने बिजली को लेकर अपने खुद के प्रयोग करने शुरू कर दिये। उन्होंने जल्द ही पता लगाया कि आकाश में चमने वाली बिजली और इलेक्ट्रिसिटी के बीच एक कनेक्शन है- इस बात को बहुत सारे लोगों ने सूपर्नैचरल करार दिया।
उन्होंने एक एक्सपेरिमेंटल स्थिति पर विचार किया जिसमे एक आदमी आंधी-तूफान के दौरान हाथों में लोहे की एक रौड लिए पहाड़ की चोटी पर खड़ा है। उसने हाथ में लोहे की रॉड इसलिए पकड़ी है ताकि आसमानी बिजली उसकी तरफ आकर्षित हो। इस वैचारिक प्रयोग ने न सिर्फ यह साबित किया कि मटैलिक चीजें बिजली को आकर्षित करती हैं बल्कि इससे यह बात भी पुख्ता हो गई कि आसमानी बिजली भी एक तरह की इलेक्ट्रिसिटी ही होती है।
फ़्रेंकलिन ने इस शानदार प्रयोग की व्याख्या लंदन की रॉयल सोसाइटी को लिखे अपने लेटर में की। यह एक्सपेरिमेंट बहुत तेजी से फैला। मई 1752 में फ्रांस के एक वैज्ञानिक समूह ने भी फ़्रेंकलिन जैसा ही एक प्रयोग दोहराया जिसका नतीजा भी सेम रहा।
इसी बीच फ़्रेंकलिन ने अपने आप यह प्रयोग दोबारा दोहराने का प्रयास किया। इस बार उन्होंने रॉड नहीं बल्कि पतंग के माँजे के साथ लिपटी मेटल की वायर का इस्तेमाल किया। पतंग को हवा में उड़ाकर फ़्रेंकलिन ने यह साबित किया कि उनका प्रयोग सही था क्योंकि मेटल की पर बिजली गिरी। इसके बाद उन्होंने लाइटनिंग यानि बिजली गिरने से उत्पन्न चार्ज को एक स्पेशल जार में स्टोर किया जिसे Leyden Jar कहते हैं।
फ़्रेंकलिन की इस सफलता ने लाइट्निंग रॉड के आविष्कार को प्रेरित किया। फ़्रेंकलिन की आगे की खोजों ने उन्हें और ज्यादा प्रसिद्धि दिलाई। फ़्रेंकलिन ही वे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने आपस में कनेक्टेड Leyden Jar के ग्रुप को 'बैटरी' नाम दिया था।
फ़्रेंकलिन के काम के तारीफें भी हुईं और कई लोगों ने उनकी आलोचना भी की। अब्बे नॉलेट (Abbe Nollet) जैसे धर्मगुरुओं ने उनके काम को सीधे-तौर पर भगवान का अपमान करार दिया जबकि ग्रीक फिलासफर इम्मानुएल कान्त ने उन्हें भगवान की आग को चुराने वाले नया "न्यू प्रोमेथेसिस" घोषित किया। इसके बावजूद उनके काम को पूरे विज्ञान जगत ने सराहा। उन्हें हार्वर्ड और येल जैसी यूनिवर्सिटीस द्वारा डिग्री से सम्मानित किया गया।
विज्ञान जगत में अपनी शानदार सफलता के बाद फ़्रेंकलिन एक बार फिर राजनीति की तरफ वापस लौटे। हालांकि उन्हें जल्द ही इस बात का अंदाजा हो गया कि यह फील्ड यानि राजनीति लाइट के साथ खेलने से कई गुना ज्यादा रिस्की है। 1747 यानि जब से बेंजामिन ने जनसेवा बनाई थी तब से इस बात को लेकर काफी कन्फ़्युशन था कि फ्रांस और नेटिव अमेरिकन ट्राइब्स के साथ होने वाली लड़ाई में इस सेना को फाइनैन्शल सपोर्ट कौन देगा। इस बात को लेकर कालोनी के मालिकों और वहाँ के निवासियों के बीच तनाव की स्थिति बनी रही।
1753 में जॉर्ज वाशिंगटन ने फ्रांस को उखाड़ फेंकने का एक असफल प्रयास किया जिसके कारण उसी साल उन्हें ओहायो (Ohio) वाले जेल में भेज दिया गया। ब्रिटिश कलोनीअल अथॉरिटीस ने अपनी हरेक कालोनी के प्रतिनिधि (delegates) से अलबैनी (Albany) न्यूयॉर्क में होने वाली एक कान्फ्रैंस में शिरकत करने की अपील की।
कॉलोनियों के बीच क्वॉपरैशन बनाने का आइडिया आसानी से नहीं आया था। साल 1751 में फ़्रेंकलिन ने अपने दोस्त जेम्स पार्कर को एक लेटर लिखा था जिसमें उन्होंने लिखा था- "कितना अजीब है कि "Six Nations Of Savages" यानि नेटिव अमेरिकन ट्राइब्स के छ: राज्य एक हो गए हैं जबकि अंग्रेजों की एक दर्जन कॉलोनियाँ एक साथ नहीं आ पा रही हैं।"
दोस्त के नाम लिखे फ्रेंकलीन के इस खत में एक योजना का जिक्र था। फ़्रेंकलिन ने इस योजना में नैशनल काँग्रेस यानि राष्ट्रीय संसद के बारे में बताया था जिसका हरेक प्रतिनिधि कोलोनीस के माध्यम से चुना जाएगा। और इस काँग्रेस का हेड "प्रेसीडेंट जनरल" होगा जिसे किंग द्वारा अपॉइन्ट करा जाएगा।
इस लेटर में एक नए पोलिटिकल आइडीया की रूपरेखा भी तैयार की गई थी जिसे बाद में फेड्रलिज़म (Federalism) के नाम से जाना गया। इसके अनुसार, राष्ट्रीय सरकार (General Govt.) को सुरक्षा और पश्चिमी विस्तार जैसे बड़े मुद्दों पर फैसला करने का हक था जबकि प्रत्येक लोकल कालोनी के अपनी गवर्निंग पावर और नियम-कानूनों को अपने ढंग से चलाने की पर्याप्त छूट थी।
हालांकि फ़्रेंकलिन का अलबनी प्लान फेल हो गया क्योंकि कलोनीअल असेम्ब्लीस का मानना था कि यह एक तरह से उनकी सत्ता में दखलंदाज़ी है। फ़्रेंकलिन के मुताबिक, इंग्लैंड में इस प्लान को बहुत ज्यादा खुले डेमक्रैटिक नजरिए से देखा गया। उन्हें लगा कि इस प्लान का मकसद लोकतंत्र की स्थापना करना है। वे लोग जो कोलोनीस को चलाते थे फ़्रेंकलिन को शक की नजर से देखते थे। हालांकि यह जल्द ही बदलने वाला था।
फ़्रेंकलिन ने कॉलोनियों की आपसी लड़ाई को इंग्लैंड तक पहुंचाया मगर वे कालोनी के मालिकों को झुकने पर मजबूर नहीं कर पाए।
अलबनी की कान्फ्रन्स और फ़्रेंकलिन के Unification यानी एकीकरण प्लान के असफल होने के तीन साल बाद यानि 1757 में पेनसिलवेनिया असेंबली ने दोबारा इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने ताकतवर ब्रिटिश खानदानों से इस मुद्दे पर बातचीत करने के लिए फ़्रेंकलिन को लंदन भेजा जिन्हें कॉलोनियों का मालिकाना हक दिया गया था। हालांकि वे ऐसा नहीं कर पाए और फिर उन्हें सीधे ब्रिटिश सरकार से बात करनी पड़ी। इस तरह फ़्रेंकलिन ने अपने 5 साल समझौते में ही बिता दिए।
1757 में फ़्रेंकलिन और पेनसिलवेनिया के मालिक थॉमस पेन के बीच मीटिंग्स का दौर चला। कोलोनीस की मालिकों का कहना था कि फ्रेंच और दूसरी नेटिव ट्राइब्स से शूरक्षा देने के नाम पर जिस टैक्स का प्रावधान है उसे वापस ले लिया जाना चाहिए। हालांकि असेंबली का मानना था कि कालोनी के मालिकों की मांग पूरी तरह से अन्यायपूर्ण और क्रूर है। एक फॉर्मल कम्प्लैन्ट में फ़्रेंकलिन ने पेन फॅमिली की आलोचना की और उन्हें पेनसिलवेनिया कालोनी का "असली मालिक" मानने से इनकार कर दिया- हालांकि यह बात पेन परिवार को जरा भी रास नहीं आई।
इसके बाद बात राजनीतिक सत्ता की आई। असेंबली ने नेटिव ट्राइब्स का मुकाबला करने के लिए कमिसनर्स का एक ग्रुप बनाया हालांकि पेन ने असेंबली के फैसले पर अपने वीटो अधिकार का प्रयोग किया। इस पर असेंबली ने उन्हें जवाब दिया कि पेनसिलवेनिया के पूर्व मालिक विलियम पेन, जो कि थॉमस पेन के पिता थे, ने 1701 में असेंबली को Charter Of Privileges में कुछ खास अधिकार दिए थे। इस जवाब से गुस्सा होकर थॉमस ने फ़्रेंकलिन के साथ सारे कान्टैक्ट तोड़ दिए। फ़्रेंकलिन के साथ दोबारा एक होने में उन्हें एक साल का वक्त लगा।
हालांकि एक साल बाद भी पेन अपने पोलिटिकल डिसिशन को लेकर अडिग रहे। उनके मुताबिक पेनसिलवेनिया असेंबली सिर्फ और सिर्फ "Advice And Consent" यानि "सलाह और सांत्वना" ही दे सकती है। यह वो वक्त था जब फ़्रेंकलिन को इस बात का एहसास हो चुका था कि कोलोनीज़ के मालिकों को बदलने से उनका कोई भला नहीं होने वाला है। इस नाकामी के बाद फ़्रेंकलिन कई सारे ब्रिटिश फिलोसपर्स को एक साथ ले लाये; जिनमें कलोनीअल विषयों के प्रसिद्ध फिलोफर डेविड ह्यूम भी शामिल थे। 1762 में फ़्रेंकलिन वापस अमेरिका लौटे जहाँ उन्होंने राजनीतिक स्थिति को बुरी तरह से बिगड़ा हुआ पाया।
फिलाडेल्फिया वापस लौटकर फ़्रेंकलिन को बहुत हैरानी हुई। कलोनीअल रेज़िडन्ट्स और नेटिव ट्राइब्स के बीच का संघर्ष बद से बदतर होता जा रहा था। लड़ाकुओं का एक दल, जो खुद को Paxton Boys कहते थे, लगातार शहर में घुसने और वहाँ मौजूद नेटिव इंडियंस को मारने की धमकी दे रहे थे। उनका कहना था कि जो भी कलोनीअल रेज़िडन्ट नेटिव इंडियन को छिपाते हुए पकड़ा गया उसे भी मौत के घाट उतार दिया जाएगा। फ़्रेंकलिन इस बात से वाकिफ थे कि मौजूदा कलोनीअल सरकार इस स्थिति से ठीक से निपट नहीं पाएगी इसलिए फ़्रेंकलिन ने एक बार फिर लंदन वापस जाने का फैसला लिया। इस बार उनका सफर पूरे 10 साल का था। 1765 में जब फ़्रेंकलिन अपने सफर पर निकल चुके थे तो ब्रिटिश कॉलोनियों ने फ्रांस और नेटिव अमेरिकी दुश्मनों से लड़ने के लिए फंड इकट्ठा करने के लिए स्टाम्प पर टैक्स लगाना शुरू दिया। इस "स्टाम्प ऐक्ट" ने कॉलोनियों के साथ ही साथ फ़्रेंकलिन के राजनीतिक दृष्टिकोण को भी बेहद गहराई से प्रभावित किया।
बहुत सारे कलोनीअल लीडर्स के लिए यह ऐक्ट ही एकमात्र रास्ता था। थॉमस जेफ़रमेन नाम के एक आदमी ने एक नया ग्रुप बनाया और उनका मकसद ब्रिटिश सत्ता को हमेशा-हमेशा के लिए उखाड़ फेंकना था। अक्टूबर 1765 में 9 ब्रिटिश कोलोनीस स्थिति पर चर्चा करने के लिए एक साथ आईं। अलबनी कान्फ्रन्स के बाद से यह पहला मौका था जब ब्रिटिश कलोनीअल पावर के एकीकरण की बात हुई। फ़्रेंकलिन ने शुरुआत में स्टाम्प ऐक्ट का समर्थन किया लेकिन जल्द-ही उन्हें पता चला कि कलोनीअल ऐटिटूड में कितना बदलाव आ चुका है और उनके सामने जो विकल्प मौजूद थे वे काफी भयंकर थे। फिलाडेल्फिया में एक गुस्सायी भीड़ ने फ़्रेंकलिन के घर पर हमला कर दिया जहाँ मौजूद उनकी पत्नी ने हाथ में राइफल लेकर अपनी जान बचाई।
फ़्रेंकलिन अभी भी कलोनीअल स्वतंत्रता के आइडिया पर टिके हुए थे। उन्होंने जल्द ही महसूस किया कि या तो ब्रिटिश पार्लियामेंट को कोलोनीस पर सारे नियम लागू करने पड़ेंगे या फिर कोई भी नियम नहीं। फ़्रेंकलिन के इस आइडिया में समझौते के लिए कोई जगह नहीं थी। 1775 में फ़्रेंकलिन अपने नए नजरिए के साथ वापस फिलाडेल्फिया लौटे जहाँ उनका स्वागत एक देशभक्त की तरह किया गया।
फ़्रेंकलिन के लेखन ने आजादी की बातें करनी शुरू की जिसने पूरे अमेरिका को आजादी का रास्ता दिखाया।
फ़्रेंकलिन जानते थे कि अगर कोलोनीस ब्रिटिश रूल से आजादी की मांग करती हैं तो उन्हें एक-दूसरे पर निर्भर रहना पड़ेगा। 21 जुलाई 1775 को फ़्रेंकलिन ने अपने विचार कॉन्टिनेन्टल काँग्रेस के साथ साझा किये जो ब्रिटेन में कॉलोनीस का प्रतिनिधित्व करती थी। फ़्रेंकलिन के ड्राफ्ट का टाइटल "Articles of confederation and perpetual union" था जिसे बहुत ही गहनता से और ध्यानपूर्वक पढ़ा गया।
फ़्रेंकलिन का विचार एक सिंगल-चैम्बर काँग्रेस बनाने का था जिसमें मेम्बर प्रत्येक कालोनी की जनसंख्या के हिसाब से एलेक्ट किये जाने थे। इसके अलावा काँग्रेस का कोई एक प्रेसीडेंट नहीं होगा; इसके बजाय 12 सदस्यों की एक इक्स्क्लूसिव काउन्सिल बैठाई जाएगी। इसके अलाला फ़्रेंकलिन का मानना था कि अगर ब्रिटेन कोलोनीस की मांग मानने और उन्हें आर्थिक सहायता देने के लिए तैयार हो जाता है तो कॉनफेडरेशन को भंग करने पर विचार किया जा सकता है। ज्यादातर कलोनीअल लीडर्स की तरह ही फ़्रेंकलिन भी अपनी लड़ाई कुछ खास ब्रिटिश मिनिस्टर के साथ देखा करते थे ना कि सीधे तौर पर ब्रिटिश क्राउन के साथ। लेकिन तभी 1776 में एक ऐसा पम्पलेट प्रकाशित हुआ जिसने बहुत सारे लोगों की सोच को बदला, खासकर कोलोनीस की आजादी की लड़ाई के प्रति सोच को।
इस पम्पलेट का नाम था- कॉमन सेन्स, जिसे थॉमस पेन ने लिखा था। हालांकि उस वक्त बहुत सारे लोगों का मानना था कि इसे फ़्रेंकलिन द्वारा लिखा गया था जबकि फ़्रेंकलिन ने सिर्फ इसे प्रकाशित होने से पहले चेक किया था और पेन को सुधार करने की सलाह दी थी। अपने प्रोस में पेन ने बड़े जोरदार ढंग से कोलोनीस की ब्रिटेन से आजादी की वकालत की थी। इसके अलावा उनका मानना था कि ऐसा कोई भी प्राकृतिक या धार्मिक तर्क नहीं है जो इंसानों को मालिक और गुलाम में बांटने की इजाजत देता हो।
पेन के इस पम्पलेट की 1 लाख 20 हजार से ज्यादा कॉपियाँ बिकी जो उस वक्त बहुत बड़ी संख्या थी। इस पम्पलेट ने कलोनीअल पॉवर्स के खिलाफ लोगों को रैली के रूप में जुटने की हिम्मत दी।
6 जुलाई 1776 को कॉन्टिनेन्टल काँग्रेस ने आजादी के पक्ष में वोट किया। आखिरकार जब जैफरसन ने आजादी का घोषणापत्र लिखा तो फ़्रेंकलिन ने उसमें कुछ सुधार किये। एक जगह पर जैफरसन ने लिखा था- "We hold these truths to be sacred and undeniable" जिसे फ़्रेंकलिन "We hold these truths to be self-evident" में चेंज करवाया। घोषणापत्र में यह छोटा-सा बदलाव फ़्रेंकलिन के जमाने के ह्यूमनिस्ट विचारकों के द्वारा उनपे पड़े गहरे प्रभाव का एक छोटा-सा उदाहरण है। फ़्रेंकलिन का मानना था कि भगवान ने इंसानी अधिकार सिर्फ कुछ इंसानों के लिए नहीं बनाए हैं बल्कि उन्होंने इसे दुनिया में मौजूद हर इंसान में बराबरी से बांटा है।
ब्रिटेन के खिलाफ अमेरिका की लड़ाई में फ्रांस को अपने ग्रुप में मिलाने में फ़्रेंकलिन ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई। अमेरिका की 13 कोलोनीस अब ब्रिटिश रूल से आजाद हो गई थी मगर अभी भी उनके उनका एक बड़ा दुश्मन मौजूद था। इस दुश्मन के खिलाफ लड़ाई जीतने के लिए नए अमेरिका को एक दोस्त की जरूरत थी जो कि था फ्रांस। लेकिन फ्रांस से बातचीत करने के लिए कौन जाएगा? बेशक, बेंजमीन फ्रेंकलीन। अमेरिकन रेवलूशन की सफलता अब बस उन्ही के हाथ में थी। साल 1776 के आखिरी दिनों में फ्रेंकलीन फ्रांस के तत्कालीन विदेश मंत्री Comte de Vergennes से मिलने के लिए फ्रांस गए।
फ़्रेंकलिन ने Vergennes के सामने अपनी बात रखते हुए उन्हें बताया कि वे नवजात अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस के बीच में सत्ता का एक हेल्थी बैलन्स चाहते हैं। फ्रेंकलीन को पता था कि Vergennes इस बात को अपने फायदे के नजरिए से जरूर देखेंगे। अगर फ्रांस अमेरिकन्स को सपोर्ट करता तो यह ब्रिटेन के लिए एक बड़ी हार होती; जिससे उसे अपनी अमेरिकन कोलोनीस और वेस्टइंडीज दोनों को खोना पड़ता।
फ़्रेंकलिन ने फ्रांस से वादा किया कि अगर अमेरिका लड़ाई में जीत जाता है तो वह उसे वेस्टइंडीज दे देगा। वहीं अगर फ्रांस उसे समर्थन नहीं करता है तो उसे मजबूरी में ब्रिटेन का साथ लेना पड़ेगा जो उसके लिए सही नहीं होगा।
Vergennes ने अमेरिका को सपोर्ट करने को लेकर हामी भर दी, हालांकि फ्रांस को ऐसा करने में थोड़ा वक्त लगा। और फिर आखिरकार फ्रांस के राजा लुइस XVI ने इसकी आधिकारिक घोषणा कर दी। घोषणा होने के तुरंत बाद फ्रांस के लोग राजमहल के गेट पर इकट्ठे हो गए। वे उस फेमस अमेरिकन को देखना चाहते थे जिसने यह समझौता किया था। फ्रांस की जनता ने फ़्रेंकलिन को "वाइव फ़्रेंकलिन (Vive Franklin!)" चिल्लाकर उनका स्वागत किया।
कुल मिलाकर
बेंजमिन फ़्रेंकलिन की ज़िंदगी दर्शाती है कि कैसे एक व्यक्ति अपनी अनंत जिज्ञासा और इंसानी तरक्की में अपने गहरे इन्टरेस्ट से इतिहास का रास्ता बदल सकता है।
