This is Your Mind On Plants

0
This is Your Mind On Plants

Michael Pollan
Examining the Human Attraction to Consciousness Altering Plants

दो लफ्जों में
2021 में आई ये बुक हमें तीन तरह के प्लांट्स से मिलने वाले ड्रग्स की केमिस्ट्री और हिस्ट्री के बारे में बताती है। वो तीन ड्रग हैं ओपियम, मेस्केलिन और पियोट। इस बुक में हम जान पाएंगे कि किस तरह से इन ड्रग्स ने हमारी हिस्ट्री, कल्चर और माइंड को नया शेप प्रोवाइड किया है।

ये बुक किसके लिए है? 
- ये बुक उन लोगों के लिए जो अच्छे थिंकर्स हैं और जिनको अलग अलग चीजों के बारे में जानने में दिलचस्पी रहती है। 
- ये बुक बोटानिस्ट, प्लांट लवर्स और साइंस के चाहने वालों के लिए भी है। 
- ये बुक उनके लिए भी है जोकि यूनाइटेड स्टेट्स में हुए ड्रग वॉर और उसके इफेक्ट के बारे में नॉलेज चाहते हैं।
 
लेखक के बारे में 
माइकल पोलन एक जर्नलिस्ट होने के साथ साथ ऑथर और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी  और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में राइटिंग इंस्ट्रक्टर भी हैं। उन्होंने अभी तक 8 बुक्स लिखीं हैं जिनमें से 6 बुक्स न्यूयॉर्क टाइम्स की बेस्ट सेलर भी रह चुकी हैं। 2010 में टाइम मैगज़ीन के द्वारा उनको दुनिया के टॉप 100 इंफ्लुएंसर में रखा गया था।

इस बुक में हमारे लिए क्या है? 
सुबह उठने के बाद आप सबसे पहले क्या पीते हैं। हो सकता है गर्म पानी आपका जवाब हो लेकिन उसके बाद आप चाय या फिर कॉफ़ी का सेवन जरूर करते होंगे जिसमें हमें प्लांट से निकला हुआ ड्रग मिला के दिया जाता है। आपको शायद पता हो उस ड्रग को हम कैफीन के नाम से जानते हैं। चाय और कॉफ़ी में जो भी पावर होती है सब कैफीन की वजह से ही है। हम शायद इतना कभी उस बारे में नहीं सोचते लेकिन कैफीन हमारी दिमागी हालत को भी कंट्रोल करता है। हम इस चीज को शायद इसलिए इग्नोर कर देते हैं क्योंकि कैफीन हमारी सोसाइटी के गोल्स के साथ ठीक बैठता है। तो असल में हम ड्रग्स को किस तरह से डिफाइन कर सकते हैं। इस बुक में हम जानेंगें कि किस तरह से ओपियम, मेस्केलिन और पियोट जैसे ड्रग्स हमारे कल्चर, सोसाइटी और हमारे खुद के माइंड को इम्पैक्ट किया है। 
इस बुक में हमने ड्रग से रिलेटेड काफी बात की है लेकिन हम ड्रग के यूज़ को बिल्कुल प्रमोट नहीं करते। 
इस समरी में हम अअजेंगे कि क्या ऐसा पॉसिबल है कि आप अपने घर के गार्डन में ओपियम ग्रो कर रहे हों? 
किस तरह से मखियाँ कैफीन की एडिक्टेड हो जाती हैं? 
मेस्केलिन की वजह से आपके ब्रेन में क्या क्या चेंज हो सकते हैं?

अगर हिस्ट्री को देखा जाए तो ओपियम यानी कि अफीम को लोगों ने अच्छी और बुरी दोनों तरह से स्वीकार किया है।
1990 का दशक ड्रग्स को लेकर काफी चर्चा में रहा। 1996 में लगभग  एक मिलियन अमेरिकन्स को ड्रग से रिलेटेड क्राइम के चक्कर में जेल की सैर करनी पड़ी थी। इनमें ऐसे भी बहुत लोग थे जोकि समाज के लिए खतरा नहीं थे लेकिन इसके बाउजूद उनका ड्रग से सम्बंधित होना उनके लिए महंगा पड़ा और उनको जेल जाना पड़ा। उस टाइम सरकार के पास भी ये अथॉरिटी थी कि वो ऐसी प्राइवेट जगह जहां पर ड्रग्स से रिलेटेड कोई सबूत मिलता है उसको बंद करवा सकते थे। उस प्राइवेट जगह का मालिक ड्रग क्राइम में इन्वॉल्व हो या न हो उससे कोई फर्क नहीं पड़ता था। 

गवर्नमेंट के द्वारा पब्लिक के लिए ड्रग क्राइम के अगेंस्ट ऐसे स्टेप लेना काफी सही साबित हो रहा था। लेकिन क्या इससे ड्रग एडिक्शन में कमी आयी? क्या उन लोगों की संख्या में कमी आयी जो ड्रग्स का सेवन करते थे? शायद नहीं। बल्कि हुआ ये कि अमेरिका के जेल में ऐसे बहुत से कैदी आ गए थे जिनका गुनाह बस इतना था कि वो ड्रग्स का सेवन करते थे। इन लोगों में भी काले लोगों की संख्या ज्यादा थी। 

हालांकि अगर हम ओपियम की बात करें तो उसको पहले अच्छे और बुरे दोनों नजरिये से देखा जाता था। ओपियम इस दुनिया में पिछले काफी सालों से चलता चला आ रहा है। इस ड्रग का मेन यूज़ था शारीरिक दर्द को कंट्रोल करना। 

19वीं सदी में पूरी दुनिया में ड्रग ने कोहराम मचा दिया। विक्टोरिया में रहने वाले लोग ओपियम को उतना ही यूज़ करते थे जितना आज के टाइम में हम सभी दर्द से राहत पाने के लिए एस्पिरिन जैसी दवा का यूज़ करते हैं। बहुत सारे कवियों ने उस टाइम ड्रग के ऊपर कविता भी लिखी थी। इसके अलावा ग्रेट ब्रिटेन ने ओपियम के एक्सपोर्ट को कंट्रोल करने के लिए एक सीरीज ऑफ वॉर भी शुरू की थी। 

बात करें आज के टाइम की तो आज लोग ओपियम को अलग नजरिये से देखते हैं। सबसे पहले एक खतरनाक नशीला पदार्थ। लोगों की इस सोच का सबसे बड़ा रीजन था ड्रग वॉर और एक ट्रेजडी जिसको हम ओपीओइड क्राइसिस के नाम से जानते हैं।

इस क्राइसिस की शुरुआत 1996 में हुई थी जब purdue फार्मा नाम की एक कम्पनी ने ऑक्सिकॉन्टिन नाम का एक ड्रग को मार्केट में इंट्रोड्यूस किया। उनका कहना था कि इस ड्रग के सेवन से लोगों को दर्द से राहत मिलेगी। 

लेकिन असल में क्या हुआ? धीरे धीरे इस नए ड्रग का एडिक्शन लोगों में बढ़ने लगा। देखते ही देखते 2 मिलियन से ज्यादा लोग इसका यूज़ करने लगे। 1996 में ओवरडोज़ की वजह से लगभग 4700 लोगों ने अपनी जान गवां दी। बात करें आज की तो हर साल लगभग 50000 लोग इस ड्रग के ओवरडोज़ की वजह से अपनी जान गवांते हैं। 

ओपियम दो तरह से यूज़ किया जा सकता है ये बात तो उसकी हिस्ट्री से हमें पता चली है।  और शायद इसलिए ही पहले के टाइम में रोमन्स और ग्रीक लोग पॉपी, जिससे ओपियम बनता है उसको मृत्यु और सोने के सिंबल की तरह यूज़ किया करते थे।

ओपियम को पाना और उसको यूज़ करना उतना मुश्किल नहीं जितना लोग सोचते हैं। 

ओपियम यानी कि अफीम को लेकर लोगों ने अपने दिमाग में बहुत सारी गलत धारणा क्रिएट कर रखी है। 
कुछ लोगों को लगता है कि ओपियम सिर्फ कुछ स्पेशल जगहों पर ही उगाया जा सकता है। बहुत से लोगों का मानना है कि इसकी खेती के लिए हमें बहुत सारे वर्कर्स  और स्पेशल तरह के ब्लेड्स की जरूरत होती है। 

ड्रग जर्नलिस्ट जिम हॉगशायर ने अपनी बुक ओपियम फ़ॉर द मासेस में लिखा था कि ये सब चीजें जो हम ओपियम को लेकर सोचते हैं वो गलत है। उनके एकॉर्डिंग कोई भी इंसान पॉपी नाम के प्लांट से आसानी से ओपियम पा सकता है। अब आप सोच रहे होंगे कि ये प्लांट कहाँ मिलगा? ये आपको किसी भी दुकान पर मिल सकता है जोकि ग्रीन प्लांट का व्यपार करते हैं। आप इस प्लांट का बीज भी खरीद सकते हैं या फिर एक पूरी तरह से तैयार प्लांट भी। 

जब ऑथर माइकल पोलन ने पहली बार जिम हॉगशायर की लिखी हुई किताब पढ़ी तब उस टाइम उनका इंटरेस्ट एकेडमिक एरिया में ज्यादा था। पोलन गार्डनिंग में इंट्रेस्टेड थे और उसी के बारे में लिखते थे। वो एक गार्डनर भी थे। उन्होंने पास्ट में ड्रग्स का भी यूज़ किया था लेकिन उन बातों को वो काफी पीछे छोड़ चुके। लेकिन जिम हॉगशायर की बुक पढ़ने के बाद उनका पॉपी प्लांट में इंटरेस्ट बढ़ा और उन्होंने अपने गार्डन में उस प्लांट को उगाना शुरू किया। 

उनको इस बात का अंदाजा था कि वो जो काम कर रहे हैं वो कहीं न कहीं इल्लीगल है। लेकिन उन्हें ये भी पता था कि गवर्नमेंट किसी नार्मल गार्डनर के पीछे नहीं पड़ेगी। और अगर आपने अथॉरिटी के सामने  ये प्रूफ कर दिया कि आप जो प्लांट उगा रहे हैं उससे आपको ओपियम टी यानी कि चाय बनाना जानते हैं तो आप आसानी से बच सकते हैं। 

धीरे धीरे ऑथर को इस चीज की आदत सी हो गयी। एक सुबह वो अपने गार्डन में गए और वहां पॉपी के प्लांट से कुछ रेड पॉपी ली और उनको क्रश करके उसकी चाय बनाई और उसका सेवन किया। 

उस चाय की पहली सिप थोड़ी कड़वी थी। उस चाय का इफेक्ट 10 मिनट बाद शुरू हुआ। हालांकि ऐसा कुछ ज्यादा नशीला नहीं था पर उसको पीने से ऑथर का जो रेगुलर हेडेक, दर्द और बेचैनी थी वो गायब हो गयी। 

ऐसा नही था कि उसके सेवन से उनको अपने आसपास हो रही किसी भी चीज का अंदाजा नहीं था। उन्होंने अपने एक जर्नल में लिखा था कि उसके सेवन के बाद उनको ऐसा फील हो रहा था कि वो एक जगह बैठे हैं और उनके सामने सारी चीजें सुकून से घट रही हैं।

बहुत से प्लांट पॉलिनेटर्स को अट्रैक्ट करने के लिए कैफीन जैसी चीजों को प्रोड्यूस करते हैं।
पॉलिनेटर्स वो होते हैं जो प्लांट्स के रिप्रोडक्शन में मदद करते हैं। चाय और कॉफ़ी के प्लांट्स पूरी दुनिया में काफी फेमस हैं। एक टाइम था जब कॉफ़ी के प्लांट दुनिया के कुछ चुनिंदा हिस्से में ही उगा करते थे। ईस्ट अफ्रीका और  साउथ अफ्रीका कॉफ़ी के प्लांट्स के लिए काफी फेमस थे। चाय प्रोड्यूस करने वाला प्लांट सिर्फ साउथवेस्ट चीन में मिलता था। 

हालांकि धीरे धीरे इन दोनों तरह के प्लांट्स ने पूरी दुनिया को कवर कर लिया। गेंहू, चावल और मक्के के साथ साथ अब ये दोनों प्लांट्स भी दुनिया के सबसे सफल प्लांट्स में शामिल हैं। 

हालांकि न ही चाय और न ही कॉफ़ी से हमें एनर्जी मिल सकती है। इनका मेन काम होता है हमारी कॉउंसियसनेस में चेंज लाना और इसके लिए इसमें यूज़ होता है कैफीन। 

एक बात आपको पता होनी चाहिए कि इन प्लांट्स का मेन मोटिव सिर्फ कैफीन प्रोड्यूस करना नहीं होता। उनका भी इसमें कुछ फायदा होता इसलिए ही वो ऐसा करते हैं। आइये जानते हैं कि वो क्या है। 

जो इन्सेक्ट प्लांट्स को खाते हैं कैफीन का हाई डोज उनके किए काफी खतरनाक होता है। हालांकि अगर कैफीन उन इन्सेक्ट को जान से मारने लगे तो शायद इन्सेक्ट इस चीज से खुद को दूर कर लेंगे। इसलिए ज्यादातर प्लांट्स जो कैफीन प्रोड्यूस करते हैं वो हाई डोज में नहीं करते। वो बस इतना प्रोड्यूस करते हैं जिससे इन्सेस्ट अपने कम्फर्ट जोन से बाहर आ जाएं और उस प्लांट की तरफ आकर्षित हों। 

सिर्फ इतनी बात नहीं है। कम डोज में प्लांट्स इसलिए भी कैफीन प्रोड्यूस करते हैं क्योंकि कैफीन पॉलिनेटर्स और मक्खी को अट्रैक्ट करता है। अगर आप एक प्लांट हैं तो ये आपके लिए एक शानदार डील है। पॉलिनेटर्स तो तभी प्लांट के पास आते हैं जब उनको कैफीन की हेल्प से बुलाया जाता  लेकिन मक्खी के साथ चीजें थोड़ा अलग है। मखियों के साथ ये भी देखने को मिलता है कि वो बार बार उस प्लांट के पास जाती हैं जो उनको कैफीन देते हैं क्योंकि वो एडिक्टेड हो जाती हैं। 

अब आप सोच रहे होंगे कि कैफीन के सेवन से जो चीजें इन्सेक्ट के साथ होती क्या वही इंसान के साथ भी होता है। 

शुरू में तो कैफीन के सेवन से हमें एनर्जी मिलती है। शायद इसलिए ही ज्यादतर लोग मॉर्निंग में कॉफी और चाय का सेवन करना बेहद पसंद करते हैं।  हालांकि कैफीन का सेवन हमारे ब्रेन के कुछ नार्मल फंक्शन को अफ़ेक्ट करता है। 

कैफीन हमारे ब्रेन में मौजूद उस केमिकल को अफ़ेक्ट करता है जो हमारे न्यूरॉन्स को कंट्रोल करता है। इसलिए अगर आपको कभी देर रात तक जागना है तो कॉफ़ी की हेल्प से आप ऐसा कर सकते हैं क्योंकि इससे बॉडी में प्रोसेस स्लो हो जाते हैं और हमारे माइंड तक ये बात बाद में पहुंचती है कि हमें  नींद आ रही है।

कॉफ़ी ने रिलीजन, पॉलिटिक्स, फिलॉसफी और यहां तक कि इकोनॉमिक्स में भी काफी इम्पोर्टेन्ट रोल प्ले किया है। 

क्या आपको पता है कि कॉफी को सबसे पहले कैसे प्रोड्यूस किया गया था?अगर नहीं पता तो हम बताते हैं। दरअसल नौवीं शताब्दी में एक बकरी चराने वाले ने देखा कि उसकी बकरियां किसी अनजान प्लांट को खा रही हैं और उसके बाद उसने नोटिस किया कि उसको खाने के बाद बकरियों के अंदर एक अलग एनर्जी  आ गयी और उसी की वजह से बकरियों को नींद भी नहीं आ रही थी। फिर उस आदमी ने ये बात एक लोकल जानकर व्यक्ति को बताई। उस व्यक्ति ने उसके बाद उस प्लांट में से कुछ बैरी तोड़कर पीने के लिए एक चीज तैयार की और वो चीज थी दुनिये में बनाई गई सबसे पहली कॉफ़ी। उस प्लांट को हम कॉफ़ी अरेबिका के नाम से जानते हैं। 

कॉफ़ी की शुरुआत को लेकर ये एक कहानी है और ये कहाँ तक सच है इसका पता किसी को नहीं है। 15वीं शताब्दी आते आते कॉफ़ी ने पूरे विश्व में अपनी अलग जगह बना ली थी। 

कॉफ़ी का पहला सबसे मेजर इम्पैक्ट अरब में देखा गया। वहां पर लोग ज्यादा देर तक जागने के लिए इसका सेवन करते थे। 1570 आते आते टर्की में भी कॉफ़ी का सेवन होने लग गया था। बहुत सारी नई कॉफ़ी शॉप खुलने लगीं थीं जहां पर लोग जाते थे गॉसिप करते थे, न्यूज़ एक दूसरे के साथ शेयर करते थे। 

वेस्ट में कॉफ़ी का चलन 1600 में शुरू हुआ। लंदन में बहुत सारे कॉफ़ी शॉप ओपन किये गए। और जल्द ही वो कॉफ़ी शॉप लोगों के पॉलिटिक्स डिसकस करने का अड्डा बन गईं।

कॉफी से पहले यूरोप में लोग मैजिकल थिंकिंग को एनकरेज करने के लिए शराब का सेवन करते थे। लेकिन जैसे जैसे कॉफी का चलन बढ़ा और लोगों को पता चला कि कॉफी में कैफीन नाम का प्रोडक्ट होता है जो माइंड में आ रहे थॉट्स को एक सही डायरेक्शन देता है तो लोगों को शराब को कॉफ़ी से रिप्लेस करना स्टार्ट कर दिया। 

कैपिटलिज्म को बढ़ावा देने में भी कॉफ़ी का बड़ा रोल था। कॉफ़ी ने हमारे काम करने के तरीके को नया शेप प्रदान किया था। पहले लोगों को रात में जागना काफी अटपटा लगता था लेकिन कॉफी ने लोगों की उस सोच को बदल कर रख दिया। 

कॉफ़ी में मौजूद कैफीन की हेल्प से लोग कभी भी और कितनी भी देर तक जाग सकते हैं। इंडस्ट्रिलिस्ट्स ने ये नोटिस किया था कि अगर वो अपने वर्कर्स को बीच बीच में कॉफ़ी ब्रेक देते हैं तो इससे उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़ जाती है। और आज आप देख ही रहे हैं कि किस तरह से कॉफी ब्रेक आज के वर्क कल्चर का हिस्सा बन गया है। 

कम शब्दों में कहें तो कॉफी मॉडर्न सोसाइटी के लिए काफी यूज़फुल है। हालांकि इस बात से भी इन्कार नहीं किया जा सकता की  कैफीन एक साइकोएक्टिव ड्रग है।

कैफीन वैसे तो इतना अनहेल्थी नहीं है पर हमारी नींद के लिए ये काफी हानिकारक है।
ऑथर ने कैफीन के ऊपर आधी रिसर्च कर ली थी और तभी उनके मन में डाउट आने लगे। उनको लगने लगा कि क्या वो जिस टॉपिक पर इतना टाइम और एफर्ट इन्वेस्ट कर रहे हैं वो इसके लायक भी है या नहीं। क्या लोग उनकी इस रिसर्च में इंटरेस्ट लेंगे। और क्या उनको इस रिसर्च में मजा आ रहा है?

उनके मन में ये सारे सवाल इसलिए ही आ रहे थे क्योंकि उन्होंने खुद कैफीन का सेवन करना बंद कर दिया था।

आजकल ज्यादातर लोग अपनी पूरी लाइफ कैफीन का सेवन करते करते गुजार देते हैं। अमेरिका में तो ऑलमोस्ट 90% लोग ऐसे हैं जो रेगुलर बेसिस पर कैफीन का सेवन करते हैं। लेकिन इस सब से एक सवाल जरूर पैदा होता है और वो ये कि कैफीन के इतने सेवन से क्या लोगों के बायोलॉजिकल लाइफ पर कुछ असर हो रहा है? 

हाल में हुई रिसर्च की बात करें तो ये साबित किया जा चुका है कि कैफीन हमारे लिए उतनी हार्मफुल नहीं है। बल्कि इसके सेवन से हमें कुछ बेनिफिट भी हो सकते हैं। रिसर्च के एकॉर्डिंग कैफीन के सेवन से कुछ खास तरह के कैंसर, डायबिटीज टाइप 2 और पार्किंसन जैसी खतरनाक बीमारियों से बचा जा सकता है। 

कैफीन से जुड़ी हुई एक चीज है जो हमारे लिए परेशानी का सबब है और वो ये कि कैफीन का सेवन हमारी नींद खराब करता है। न्यूरोसाइंटिस्ट मैट वॉकर के एकॉर्डिंग कैफीन की क्वार्टर लाइफ 12 घण्टों की होती है। यानी कि अगर आप दोपहर में कैफीन का सेवन करते हैं तो रात में जब आप सोने जाएंगे तब भी आपकी बॉडी में लगभग 25% कैफीन सर्कुलेट कर रहा होगा और इतना कैफीन हमारी नींद को खराब करने के लिए काफी है। 

सोते टाइम हमारी ब्रेन लो फ्रीक्वेंसी वेव्स निकालती है जिससे हम शार्ट टर्म मेमोरी को लांग टर्म मेमोरी में कन्वर्ट कर सकते हैं। अगर आप रात को कॉफ़ी का सेवन करते हैं तो सोते टाइम वो लो फ्रीक्वेंसी वेव्स कम प्रोड्यूस होंगी। इससे आपको ऐसा फील होगा जैसे आप 12 साल पहले ही बूढ़े हो रहे हैं। 

इसलिए जब ऑथर ने कैफीन का सेवन बंद किया तो उनको ये देखकर बिल्कुल हैरानी नहीं हुई कि वो एक बच्चे की तरह खूब देर तक सोया करते थे। और जब वो सो के सुबह उठते थे तो काफी एनरजेटिक फील करते थे। 

लेकिन एक चीज ये भी की उनका काम में ज्यादा मन नहीं लगता था। उनको फील होता था कि जैसे उनका काम में पूरी तरह से मन नहीं लग रहा। वो कॉन्सन्ट्रेट नहीं कर पा रहे थे। 

तीन महीने बाद उन्होंने फिर से कॉफ़ी का सेवन किया और उनका बहुत अच्छा महसूस हुआ। उनको सब कुछ अच्छा लगने लगा और अपनी बॉडी में एनर्जी फील हुई। लेकिन ये सब कॉफी पीने के बाद से सिर्फ आधे घण्टे तक ही महसूस होता था और उसके बाद उनको फिरसे सब उसी तरह नार्मल लगने लगता था।

मेस्केलिन हमारी ब्रेन की इन्फॉर्मेशन प्रोसेस करने के तरीके को अफ़ेक्ट करता है। 

एक बार ऑथर बाहर बैठ कर बुक रीड कर रहे थे तभी उनकी नजर आस पास के नजारे पर पड़ी और उनके मन में एक सवाल उठा कि आखिर उनके सामने इतना सब कुछ देखने को और एन्जॉय करने को है तो वो बैठकर बुक क्यों रीड कर रहे हैं। उनका बस इतना मन था कि वो चीजों को देखें। उस टाइम उन्होंने मेस्केलिन ड्रग का सेवन किया हुआ था जिससे वो अपने पास्ट और फ्यूचर की टेंशन से दूर सिर्फ अपने आसपास और अपने प्रेजेंट की बातों को सुन और देख रहे थे। ऐसा लग रहा था कि उन्हें जिस जिस चीज की नीड थी वो सब उनके सामने ही थी। मेस्केलिन लेने के बाद जैसे जैसे दिन बीत रहा था ऑथर के लिए रियलिटी हैंडल करना मुश्किल होता जा रहा था। उनको सब कुछ सही से नजर नहीं आ रहा था। ऐसा लग रहा था उनकी कॉन्शियसनेस पर अफ़ेक्ट हो रहा और वो खुद की हेल्प भी नहीं कर पा रहे हैं। 

हालांकि वो खुद की हेल्प नहीं कर पा रहे थे पर क्या उनके माइंड को ये पता था कि उनके साथ असल में हो क्या रहा?

इस चीज का आंसर  हमें शायद न्यूरोसाइंस में मिल सकता है। एक चीज है जिसे हम प्रेडिक्टिव कोडिंग बोलते हैं जो क्लेम करती है कि हमारी ब्रेन चीजों को लेकर गेस करती रहती है। हमारे दिमाग में जो भी चल रहा होता है उसको लेकर हमारी ब्रेन अलग अलग चीजें गेस करती है। उसके बाद वो सिर्फ उतनी इन्फॉर्मेशन को एडमिट करती है जिससे किसी इवेंट को करेक्ट या फिर कन्फर्म किया जा सके। 

बात करें उस टाइम का जब ऑथर ने मेस्केलिन लिया था तो उस टाइम ऑथर का माइंड ऐसा कुछ गेस नहीं कर पा रहा था। उनकी ब्रेन के लिए कुछ भी प्रेडिक्ट करना उस टाइम एकदम इम्पॉसिबल हो गया था। उनको हर चीज कुछ ज्यादा ही इंट्रेस्टिंग लग रही थी। उनकी सेंस करने की एबिलिटी पूरी तरह इम्पैक्ट हो चुकी थी। 

अब हमारे मन में ये सवाल आ रहा होगा कि आखिर प्लांट मेस्केलिन जैसा प्रोडक्ट क्यों प्रोड्यूस करते हैं। जिस तरह से कैफीन प्रोड्यूस करने से उनको फायदा होता है तो क्या मेस्केलिन से भी उनको फायदा होता है? इस सवाल का जवाब हालांकि अभी तक पता नहीं किया जा सका है। लेकिन लोगों का मानना है कि इसका स्वाद बहुत खराब होता है और शायद इसलिए प्रीडेटर से बचने के लिए प्लांट इस ड्रग को प्रोड्यूस करते हैं।

हालांकि इंसानों के लिए भी मेस्केलिन का स्वाद काफी खराब होता है। इसको टॉलरेट करना काफी मुश्किल होता है क्योंकि इसके इफ़ेक्ट काफी खतरनाक होते हैं और परेशान करने वाले होते हैं।

अगर इतिहास देखा जाए तो पियोट अमेरिका के अपने लोगों के लिए काफी पवित्र माना गया है।
17वीं शताब्दी में पियोट को मेक्सिकन लोगों ने अलग अलग नाम दिए। डायबोलिक रुट, हेरेटिकल परवरसिटी और न जाने क्या क्या। पियोट एक तरह का कैक्टस का प्लांट होता है जिससे हमें मेस्केलिन जैसे ड्रग मिलते हैं। अमेरिका के लोग इस प्लांट को पिछले काफी सालों से हीलिंग और अलग अलग तरह के रिचुअल में यूज़ करते आ रहे हैं। 

यूनाइटेड नेशंस के लोगों के लिए पियोट कुछ ज्यादा पुराना नहीं है। बात करते हैं 18वीं शताब्दी की जब अमेरिका में दो स्प्रिचुअल मोमेंट की शुरुआत हो रही थी। एक था घोस्ट डांस और दूसरा था पियोट रिलीजन। 

घोस्ट डांस एक ऐसा रिचुअल था जिसमें काफी लोग एक साथ इकट्ठा होते थे और और पूरी रात डांस करते थे गाना गाते थे। ये रिचुअल 24 घण्टे तक चलता था और इसमें लोगों के द्वारा काफी अलग अलग एक्टिविटी की जाती थी। 

घोस्ट डांस ने लोकल अथॉरिटी के मन के अंदर काफी डर पैदा कर दिया था। उन्हें ये एक तरह का विद्रोह लगता था। और ये वही समय था जब पियोट रिलीजन अपने पीक पर था। अगर इस को घोस्ट डांस के साथ कम्पेयर किया जाए तो फिर पियोट रिलीजन एक गंभीर और शांत तरह का स्प्रिचुअल मोमेंट हुआ करता था। इसमें शामिल होने वाले लोग शांति से सीधा खड़ा होकर इसको परफॉर्म करते थे। पूरी रात आग के सामने खड़े होकर इसको परफॉर्म किया जाता था और उनकी पूरी कोशिश रहती थी कि सफेद लोगों की नजरों से बच के इस स्प्रिचुअल को पूरा किया जाए। 

इन दोनों रिचुअल मोमेंट्स में से सिर्फ पियोट रिलीजन ही आगे चलके पॉपुलर हुआ। हालांकि अब पियोट की कमी वहां के लोगों को महसूस हो रही है। और इसलिए शायद ऑथर ने उस ट्रेडिशनल सेरेमनी में पार्ट लेने से खुद को दूर रखा। 

ऑथर को एक मेडिसिन कैरियर भी मिला जोकि वचुमा  का यूज़ करके इस सेरेमनी को  कंडक्ट करना चाहता था। वचुमा भी एक तरह का मेस्केलिन ड्रग होता है जोकि हमें अलग टाइप के कैक्टस से ही मिलता है। इस सेरेमनी में ऑथर और उनके 6-7 साथी एक डेकोरेटेड रूम में जाते हैं और वहाँ पर वो लोग अल्टर पर अपने कुछ पर्सनल सामना रखते हैं और फिर 3 कप वचुमा का सेवन करते हैं। 

इसको पीने के बाद वो लोग काफी जेंटल फील करते हैं। ऑथर को ऐसा फील हो रहा था जैसे कि वहां मौजूद सभी की एनर्जी एक साथ चैनल हो रही हो। ऐसा लग रहा था जैसे कि वो गर्म पानी में हों और उनके थॉट्स उनको अपने साथ किसी ओर ले जा रहे हैं।

कुल मिलाकर
हम जिस तरह से आजकल ड्रग्स को देखते हैं उससे ये पता चलता है कि वो हमारे सोशल, कल्चरल और लीगल हिस्ट्री के साथ कुछ न कुछ सम्बन्ध जरूर रखते है। एक टाइम था जब ओपियम यानी कि अफीम को बहुत ही कॉमन माना जाता था पर अब उसका रोल काफी बदल गया है। उसी तरह से कैफीन भी एक टाइम पर लोगों के बीच में काफी फेमस था लेकिन आज लोग उसे अपनी प्रोडक्टिविटी इनक्रीज करने के लिए इस्तेमाल करते हैं। बात करें पियोट और मेस्केलिन जैसे ड्रग्स की तो उनका यूज काफी समय पहले से अमेरिका के लोगों के द्वारा अलग अलग तरीके से किया जाता है। आज के टाइम में बात की जाए तो ओपियम आज भी काफी इल्लीगल है, कैफीन का सेवन हम लोग चाय और कॉफी में लगातार करते आ रहे हैं। मेस्केलिन और पियोट जैसे ड्रग्स को हम  पूरी तरह से एक्सेप्ट नहीं कर पाए हैं।

 

येबुक एप पर आप सुन रहे थे This is Your Mind On Plants by Michael Pollan

ये समरी आप को कैसी लगी हमें yebook.in@gmail.com  पर ईमेल करके ज़रूर बताइये.

आप और कौनसी समरी सुनना चाहते हैं ये भी बताएं. हम आप की बताई गई समरी एड करने की पूरी कोशिश करेंगे.

अगर आप का कोई सवाल, सुझाव या समस्या हो तो वो भी हमें ईमेल करके ज़रूर बताएं.

और गूगल प्ले स्टोर पर ५ स्टार रेटिंग दे कर अपना प्यार बनाएं रखें.

Keep reading, keep learning, keep growing.


Post a Comment

0Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.
Post a Comment (0)

YEAR WISE BOOKS

Indeals

BAMS PDFS

How to download

Adsterra referal

Top post

marrow

Adsterra banner

Facebook

#buttons=(Accept !) #days=(20)

Accept !