Dominique Antiglio
बस साँसों की लय से लय मिलाएं और अपने खुशहाल और शांत व्यक्तित्व से कनेक्ट हो जायें
दो लफ़्ज़ों में
द लाइफ-चेंजिंग पावर ऑफ़ सोफ्रोलॉजी, 2018, में आई ये किताब, हमें सोफ्रोलॉजी की जिंदगी में बदलाव लाने वाली शक्तियों की गहरायीयों में ले जाती है. सोफ्रोलॉजी अपने आप में एक अद्भुत उपचार पद्दति है जो साँसों की लय, मैडिटेशन और क्रिएटिव विजुअलाईजेशन की मदद से तनाव को कम करते हुए रोज़मर्रा की समस्याओं को सुलझाने में आपकी मदद करती है. सोफ्रोलॉजी के आसान तरीके किसी भी लाइफस्टाइल और आपकी व्यस्त दिनचर्या में फिट हो सकते हैं. बस रोज़ कुछ मिनटों का अभ्यास और आप एक स्वस्थ, खुशहाल और कल्याणकारी जीवन जी सकते हैं.
ये किताब किसके लिए है?
- तनाव और चिंता से जूझ रहे लोगों के लिए.
- स्वस्थ रहकर कल्याण के रास्ते पर चलने की चाह रखने वालों के लिए.
- ऐसे माता-पिता जो परिवार की मांगें पूरी करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.
लेखक के बारे में
स्विट्ज़रलैंड में जन्मी सोफ्रोलॉजिस्ट और ओस्टियोपैथ डॉमिनिक एंटीग्लियो, नें 15 साल की उम्र से गंभीर स्वस्थ संबंधित समस्याओं से निपटने के लिए सोफ्रोलॉजी की प्रैकटिस शुरू कर दी थी. उन्होंने इस तकनीक के संस्थापक प्रोफेसर अल्फोंसो केएसेदो (Alfonso Caycedo) के साथ स्पेन में अध्ययन करने के बाद, 2006 में केएर्डियन सोफ्रोलॉजी (Caycedian sophrology) में ग्रेजुएशन किया. 2011 में, उन्होंने लंदन के सबसे प्रमुख सोफ़्रोलॉजी क्लिनिक, बेसोफ़्रो (BeSophro) की स्थापना की.
सोफ्रोलॉजी वेस्टर्न मेडिसिन और ईस्टर्न मैडिटेशन तकनीक का एक दिलचस्प मिश्रण हैं.
हम कितनी भी कोशिश कर लें अपनी रोज़मर्रा के जीवन की कठिनाईयों से पीछा नहीं छुड़ा पाते. अपने परिवार और काम के बीच बैलेंस बनाते-बनाते कई बार हमारी दिनचर्या इतनी व्यस्त हो जाती है कि हमें लगता कि बस अब हमसे और नहीं होगा, या फिर हम किसी शारीरिक बीमारी से ग्रस्त हो जाते हैं जिसके कारण हमारी सारी योजनाओं पर पानी फिर जाता है. इन सबके बीच छोटे-छोटे काम जैसे बाज़ार से सामान लाना या फिर किसी अधूरे ईमेल को पूरा करना भी बहुत चुनौतीपूर्ण लगने लगता है. छोटी हों या बड़ी ये सभी चुनौतियाँ हमें तनाव, चिंता और डिप्रेशन से भर देती हैं. लेकिन चाहे चुनौतियाँ कितनी भी कठिन क्यूँ ना हो उनसे निकलने का रास्ता जरुर होता है. सोफ्रोलॉजी के आसान एक्सरसाइजों को सीख कर आप बस, अपनी साँसों को महसूस कर, मुश्किल से मुश्किल घडी में भी खुद को पॉजिटिव रख कर चिंताओं से बच सकते हैं.
कई बार डॉक्टर के पास जाने से भी हमारी बीमारी ठीक नहीं होती. आप टेस्ट करवाते है, दवाईयाँ भी लेते हैं फिर भी आप अच्छा महसूस नहीं कर पाते.
इसका मतलब है कि अब ये आम दवाईयाँ कुछ नहीं कर पाएंगी और आपको इस बार अपने लिए कुछ नया सोचना होगा. लेकिन क्या? सोफ्रोलॉजी, के बारे में आपका क्या ख्याल है? एक ऐसी तकनीक जो शरीर और दिमाग के बीच बैलेंस बनाते हुए आपको स्वस्थ और खुशहाल रखेगी.
सोफ्रोलॉजी शब्द अपने आप में बैलेंस का सिंबल है. सोफ्रोलॉजी एक ग्रीक शब्द सोफ्रोसिने से बना है, इस शब्द को सबसे पहले ग्रीक फिलोसफर प्लेटो (plato) नें इस्तेमाल किया था जिसका मतलब है शरीर, आत्मा और दिमाग के बीच ताल-मेल और बैलेंस.
1932 में पैदा हुए स्पैनिश डॉक्टर अल्फोंसो केसेदो नें सोफ्रोलॉजी की खोज की. मैड्रिड में मेडिसिन की पढ़ाई करते हुए केसेदो को वेस्टर्न मेडिसिन की सीमाओं का एहसास हुआ. खासतौर पर मानसिक अस्पताल में काम करन के दौरान, जब उन्होंने मानसिक रोगियों को इलेक्ट्रिक शॉक देते हुए देखा, तब वो बहुत निराश हुए. उन्हें ये एक हिंसक तरीका लगता था क्यूंकि कई बार पेशेंट कोमा में भी चले जाते थे. उन्होंने खुद से सवाल किया कि आखिर दिमाग को ठीक करने के लिए उसे इतना हिलाने कि क्या जरुरत? क्या और कोई रास्ता नहीं है?
उनके मन में ये बात साफ़ हो गयी थी कि वेस्टर्न मेडिसिन हर बीमारी का इलाज़ नहीं कर सकती खासतौर पर मानसिक बीमारी का तो बिलकुल नहीं. इसलिए उन्होंने कुछ नया सोचना शुरू किया .
1965 में वो भारत और जापान जैसे देशों की यात्रा पर निकल गए. इन देशों में सालों तक उन्होंने पूर्वी देशों के इलाज़ के तरीकों को समझा.वहाँ उन्होंने योगियों, ऋषियों और डॉक्टरों के साथ योगा सीखा. उन्होंने महसूस किया कि कैसे साँसों को अपने कंट्रोल में करके अपनी कॉनशियसनेस को जगा सकते हैं. वो धर्मशाला गए जहाँ उन्होंने तिबतन बुद्धिज्म के इलाज़ के तरीकों को सीखा. फिर जापान में उन्होंने ज़ेन बुद्धिज्म की मैडिटेशन की कला को सीखा.
स्पेन वापस लौटने पर वो अपने वेस्टर्न मेडिसिन के ज्ञान को योगा, मैडिटेशन, न्यूरोलॉजी, साइकोलॉजी और साइकाइट्री के साथ मिलाने में लग गए. इस मिश्रण का नतीजा था सोफ्रोलॉजी.
1960 से 1980 के दशक तक अपनी कला को और निखारने के लिए उन्होंने इस तकनीक की प्रैक्टिस बहुत सारे पेशेंटों पर की. उन्होंने सांस लेने की तकनीक, मैडिटेशन और विज़ुअलाइज़ेशन को मिला कर कई गाइडेड एक्सरसाइजेस को तैयार किया और उन्हें सोफ्रोलॉजी के 12 लेवलों में बाँटा, इन लेवलों को पार करते हुए आप अपने अन्दर झाँक कर अपनी कॉनशियसनेस की खोज कर सकते हैं और उसे निखार सकते हैं. इन 12 लेवेलों में महारत हासिल करने में आपको कम से कम 1-2 साल लग जायेंगे. लेकिन, बेसिक और लेवल 1 सोफ्रोलॉजी भी अपने आप में आपके लिए काफी है. इन दोनों को रोज़ मर्रा के जीवन का हिस्सा बनाकर ही आप काफी हद तक अपनी जिंदगी को सुधार सकते हैं.
और सबसे अच्छी बात है कि ये किसी भी लाइफस्टाइल, दिनचर्या और फिटनेस लेवल के व्यक्ति के लिए आसान है.
अपने शरीर और दिमाग के कनेक्शन को फिर से जोड़ना सोफ्रोलॉजी का पहला और सबसे जरुरी कदम हैं.
किसी ईमारत को बनाते समय सीधा उसमें दीवारें या खिड़कियाँ नहीं जोड़ते, सबसे पहले उसकी नीव बनायी जाती है. है ना? चाहे कंस्ट्रक्शन हो या और कोई भी काम सबसे पहले एक मजबूत नीव का होना बहुत जरुरी है, और सोफ्रोलॉजी में भी कुछ ऐसा हीं है. इससे पहले कि आप सोफ्रोलॉजी के 12 लेवलों के बारे में जानें सबसे पहले आपको बेसिक लेवल जो कि सोफ्रोलॉजी की नीव है, उस पर मास्टरी करनी होगी. इसलिए इस लेवल को फाउंडेशन प्रैक्टिस कहा जाता है. इस लेवल में आप अपनी सेंसेस यानी इन्द्रियों पर कंट्रोल करना सीखते हैं, जिससे आपका शरीर आपके दिमाग के साथ कनेक्ट होता है और आप एक रिलैक्सड-अलर्ट स्थिति में आ जाते हैं. ये एक्सरसाइज आपकी कॉनशिअसनेस को मजबूत बनती है. आपको एक ऐसी शक्ति का एहसास होता है, जो आपकी शारीरिक और मानसिक पहलुओं को जोड़ती है.
फाउंडेशन प्रैक्टिस तीन एक्सरसाइजों पर आधारित है- बॉडी स्कैन, क्लीयरिंग ब्रेथ, ट्यूनिंग टू द वाइटल पॉवर. क्लीयरिंग ब्रेथ यानी अपनी साँसों को महसूस करते हुए अपने सारे शारीरिक तनावों को दूर करना. ट्यूनिंग टू द वाइटल पॉवर यानी अपनी कॉनशिअसनेस के अन्दर झांकना. लेकिन इन सबसे पहले बॉडी स्कैन करना बहुत जरुरी है.
बॉडी स्कैन के लिए सबसे पहले आप एक आरामदायक कुर्सी पर बैठ जाएँ. अपना समय लेते हुए धीरे-धीरे आप कुर्सी पर अपने शरीर के भार को महसूस करें. इस बीच लगातार सांस लें और सांस छोडें. फिर धीरे से अपने मन की आँखों से अपने शरीर के हर एक भाग को अच्छे से देखें. सोफ्रोलॉजी के अनुसार शरीर के पांच भाग है, सिर और चेहरा मिलकर पहला भाग बनाते है, कंधे, गर्दन और हाथ दूसरा, छाती तीसरी, पेट का ऊपरी हिस्सा चौथा है और निचला पेट, पेलविस और पैर पांचवां हिस्सा बनाते हैं.
बॉडी स्कैन में आप अपने शरीर के हर भाग से धीरे-धीरे गुजरते हुए ये महसूस करने की कोशिश करते हैं कि कहीं किसी अंग में कोई तनाव तो नहीं. कुर्सी पर बैठे हुए, गहरी साँसें लेते हुए आप अपनी साँसों की शक्ति से अपने शरीर के हर अंग को रिलैक्स करने की कोशिश करें.
आपके शरीर और दिमाग को जोड़ने के लिए ये एक्सरसाइज काफी कारगर है. अपने दिमाग को अपने शारीरिक एहसासों से जोड़ते हुए बॉडी स्कैन आपको अपने शरीर के बारे में जागरूक होने और उसे तनावमुक्त करने में मदद करता है. ऐसा करने से आप ऐसी कंडीशन में पहुँच जाते हैं जहाँ आपके एहसास और आपकी सोच दोनों आपको कॉनशिअसनेस की एक नयी राह पर ले जाते हैं.
एक बार आप इस एक्सरसाइज को कर के देखें आपको अपने आप में बहुत फर्क महसूस होगा. इसे करने के बाद आपका शरीर तो रिलैक्स हो जायेगा पर आपका दिमाग एकदम अलर्ट रहेगा. इस स्थिति को लेखिका नें रिलैक्सड-अलर्ट स्टेट का नाम दिया है और अगर सोफ्रोलॉजी की भाषा में समझें तो इसे सोफ्रोलिमिनल स्टेट कहते है. कितना अच्छा एहसास है, है ना? आप भी ट्राय करें.
सोफ्रोलॉजी का पहला लेवल आपके शरीर और दिमाग के बीच पॉजिटिव बैलेंस बनाता है. हम जिस शरीर में रहते हैं जिसका इस्तेमाल 24 घंटे करते हैं, असल में हम उसका कितना ख्याल रखते हैं, उसकी कितनी बातें सुनते हैं?
परिवार की जिम्मेदारियों, काम के तनाव और तेज़ दौड़ती ज़िन्दगी की रफ़्तार के कारण हम अपनी हीं उलझनों में उलझ कर रह जाते हैं. हम ये बात बात भूल हीं जाते हैं कि हमारा परेशान दिमाग भी हमारे शरीर का एक हिस्सा है और उसकी देखभाल भी हमारी जिम्मेदारी होती है.
और यहीं सोफ्रोलॉजी का काम शुरू होता है. सोफ्रोलॉजी के पहले 4 लेवेलों को डिस्कवरी साइकल कहते हैं यानी अपने दिमाग और शरीर के बीच बैलेंस की खोज, दुसरे 4 लेवेलों को मास्टरी साइकिल कहते हैं यानी इस बैलेंस को बनाये रखने में महारत हासिल करना, और आखरी 4 लेवेल्स को ट्रांस्फोर्मटिव साइकिल कहते हैं यानी अपनी कॉनशिअसनेस में बदलाव लाना.
लेकिन, सोफ्रोलॉजी की कला का फायदा उठाने के लिए जरुरी नहीं कि हमें सभी 12 लेवेलों का ज्ञान हो. मात्र पहले हीं लेवल को अपने जीवन का हिस्सा बना कर आप अपने जीवन में काफी बदलाव महसूस कर सकते हैं. अपने शरीर को थोडा सा हिला कर और अपनी साँसों की लय पर नियंत्रण प्राप्त कर के आप अपने शरीर और दिमाग को कनेक्ट कर सकते हैं. ये कनेक्शन हमें अपने घावों पर खुद मरहम लगाने की शक्ति देता है, हमें उन सभी तनावों को खुद से दूर करने की कला सिखाता है जो हमें खुश रहने से रोके हुए हैं.
जैसे लेवल 1 की सर को घुमाने वाली एक्सरसाइज यानी हेड रोटेशन को ही ले लें. ये एक्सरसाइज हमारे शरीर के पहले भाग यानी सिर और मूँह के लिए है. इसे करने के लिए सबसे पहले आप सीधे खड़े हो जायें फिर अपनी गर्दन को सामने की तरफ सीधा रखते हुए सांस अन्दर लें, और सर को पहले राईट फिर लेफ्ट घुमाएं, जब सांस छोड़ने का मन करें तो सर को वापस सामने की ओर ला कर छोडें. सामने की ओर मुँह कर के अपने शरीर के पहले भाग सिर और मूँह के एहसासों को महसूस करें. हो सकता है शुरू शुरू में आपको सांस रोके रखने के कारण थोडा अजीब लगे. लेकिन बाद में धीरे-धीरे आपको रिलैक्स महसूस होने लगेगा और आपको उन सभी तनाव के कारणों का पता चलेगा जिसके बारे में आप पहले अनजान थे.
इसे दोहराते हुए सामने की ओर मूँह करके साँसों को छोड़ते जायें. इस एक्सरसाइज को रोज़ करने के बहुत से फायेदे हैं. गहरी साँसों के साथ सिर को हलके हलके घुमाने से हमारे दिमाग में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ जाती है और हमारा फोकस भी बढ़ जाता. इस तरह की एक्सरसाइज ना केवल हमारे मन और शरीर को जोड़ता है बल्कि उनमें एक पॉजिटिव बैलेंस भी बनता है.
मजे की बात ये है कि हेड रोटेशन जैसी बेसिक लेवल 1 एक्सरसाइज आपके केवल 15 मिनट ही लेगी. इन एक्सरसाइजेस को अपने जीवन का हिस्सा बनाने पर ये हमें एनर्जी देंगी और हमारे मूड को अच्छा बनाते हुए हमारा फोकस बढ़ाएंगी.
सोफ्रोलोजी के सुपर टूल्स हमारे मन से नेगेटिव विचारों को दूर करने में हमारी मदद करते हैं.
हम सबने अपने मन की वो बातें तो सुनी होगी जो हमें किसी भी काम को करने से रोक देती है, जैसे ये काम हमारे बस का नहीं हैं, दुसरे हमसे बेहतर हैं , कुछ नया ट्राय करने से कोई फायेदा नहीं क्यूंकि हम फिर नाकाम हो जायेंगे. अगर हम इस आवाज़ की सुनते रहे तो धीरे-धीरे हम अपना आत्म-विश्वास खो देंगे, और अपनी मजिल तक कभी नहीं पहुँच पाएंगे. हमारे इरादों के पंखों को काटने के लिए एक हीं नेगेटिव विचार काफी है. ये नेगेटिव विचार इतने ताकतवर होते हैं कि ये हमें अपनी ताकतों के ऊपर फोकस हीं नहीं करने देते और हम अपनी हीं शक्तियों और पॉजिटिव पहलुओं को नहीं देख पाते. लेकिन अच्छी बात ये है कि सोफ्रोलॉजी के पास इस समस्या का हल है. सोफ्रोलॉजी के सुपर टूल आपकी रोज़मर्रा की चुनौतियाँ का सामना करने में आपकी सहायता करेंगे, जैसे नेगेटिव विचार, भावनाएं और परिस्थितियाँ जो आपकी सफलता के रास्ते में रोड़ा डाल रही हैं. इन आसान टूल्स की मदद से हर छोटी-बड़ी मुश्किल में हम शांति, आत्म-विश्वास और लचीलापन हासिल कर सकते हैं. हमारी साँसों, हमारी गति, हमारी सतर्कता और हमारे इरादों को साथ जोड़कर ये सुपर टूल्स हमारे मन में ऐसे बदलाव लाते हैं जिनसे हम अपने ऊपर पड़ने वाले नेगेटिव प्रभावों से बच सकते हैं.
आईये इस बात को एक उदाहरण से समझते हैं. मान लीजिये बहुत से नेगेटिव विचार आपके दिन को अच्छा गुजरने से रोक रहे हैं तो अपनी आँखें बंद कीजिये और किसी बैग की फोटो इमेजिन कीजिये. आंखें खोलिए और वही बैग अपने सामने की दीवार पर टंगा हुआ महसूस कीजिये. अब उस बैग की हर एक डिटेल को महसूस कीजिये और अपने सारे नेगेटिव विचार और बुरी यादें और पछतावे उस बैग में डालिए. अब एक अच्छा सा कराटे का पोज़ लीजिये और दो चार मुक्के बैग में मार कर अपने नेगेटिव बातों को ख़तम कर दीजिये. अब नष्ट किये हुए बैग की धुल को मुट्ठी में उठा कर फूंक मार दीजिये. जैसे हीं आप उस धुल को हवा में उड़ायेंगे आपको एहसास होगा की आपके सारे नेगेटिव विचार एक पॉजिटिव शक्ति में बदल गए हैं.
यकीनन आपको ये बातें थोड़ी अजीब सी लग रही होंगी. लेकिन एक बार आप इसे कर के देखिये आपको फर्क खुद महसूस होगा. इस एक्सरसाइज को करने के बाद आप एकदम हल्का और पॉजिटिव महसूस करेंगे, इसलिए लेखिका नें बैग को एक सुपर टूल कहा है.
सोफ़्रोलॉजी के सुपर टूल्स आपको बेहतर नींद दिलाने में भी मदद कर सकते हैं. अगर ऐसा होता कि मात्र चार घंटे की नींद आपको तरोताजा कर दे. सोचें फिर दिन में आपके पास चीज़ों को करने का कितना समय बचा रहेगा. लेकिन, कुछ ही लोग ऐसे खुशनसीब होते हैं जिन्हें ऐसी चैन की नींद आती है. कुछ लोगों के साथ तो इसका बिलकुल उल्टा होता है, उन्हें ज्यादा नींद की जरुरत होती है लेकिन अक्सर उनकी रातें बस करवटें बदलते हुए ही निकल जाती हैं.
अगर आपने भी कोई रात नींद के बिना काटी है, तो आपको इस बात का एहसास होगा कि कितना बुरा लगता है जब आप सुबह थकी आँखों के साथ उठते हैं. नींद की कमी से आपको थकान, एनर्जी कि कमी, जोड़ों का दर्द और डिप्रेशन तक हो सकता है. नींद की कमी के और भी बहुत साइड इफ़ेक्ट हैं, जैसे आपके स्वभाव में बदलाब, चिडचिडापन, सिगरेट शराब कि लत आदि जो कि आगे चलकर आपके सेहत को और नुक्सान पहुंचा सकती है. लेकिन अब आपको रात को सोने के लिए नींद की गोलियों की जरुरत नहीं क्यूंकि सोफ्रोलॉजी के पास इस बिमारी के इलाज़ के लिए भी एक बेहतरीन सुपर टूल है.
इस सुपर टूल का नाम है स्लीप गेटकीपर, जो कि चैन की नींद लेने में आपकी मदद करेगा. लेकिन आप जैसा सोच रहे हैं वैसा नहीं है, ये एक्सरसाइज आपको रात कि बजाये दिन में हीं करनी है ताकि आप अपने दिमाग को पहले से ही सोने के लिए तैयार कर सकें.
इस एक्सरसाइज का सबसे जरुरी पहलु है कि आप एक ऐसे शब्द को चुनें जो आपके नींद के पहरेदार यानी स्लीप गेटकीपर की तरह काम करेगा. ये शब्द ऐसा होगा कि जिसे दोहराने से आप अपनी सारी चिंताएं और परेशानियाँ भूल कर नींद की गोद में सो जायेंगे. ये शब्द कुछ भी हो सकता है कोई भी ऐसी चीज़ जो आपको सुकून देती हो. आपको करना ये है कि दिन में थोडा सा वक़्त निकाल कर एक जगह बैठें उस शब्द के बारे में एक एक डिटेल अच्छे से सोचें. और ऐसा करते हुए अपनी साँस अन्दर की ओर लें फिर छोडें फिर दुबारा उस शब्द को याद करें और सांस अंदर लें.
उस शब्द को सोचने और महसूस करने के बाद आप ये कल्पना करें कि आप एक पॉजिटिव और सुकून भरी नींद लेने वाले हैं. फिर धीरे से अपनी साँसों को लय में मिलते हुए खुद को गहरी नींद में इमेजिन कीजिये और सोचिये वो गेट कीपर शब्द किसी पहरेदार की तरह आपकी नींद की रक्षा कर रहा है. और फिर जब आप रात को सोने के लिए बिस्तर पर जायें तो उस शब्द के बारे में सोचें और देखिये कैसे आपका गेटकीपर आपको सुकून और शांति भरी नींद की ओर लेकर जाता है.
सुनने में कितने आसान लग रहा है, है ना? लेकिन इसमें एक जरुरी बात छुपी है वो ये कि आप इस एक्सरसाइज को जितना रिपीट करेंगे आप उतनी हीं जल्दी और अच्छी नींद में सो पाएंगे. ऐसा नहीं है कि महीने में एक बार इसे कर लिया और हो गया आपको आपने गेट कीपर को रोज़ दिन में कम से कम एक बार जरुर याद करना है. ऐसा करने से ये शब्द आपकी नींद के साथ जुड़ जायेगा और आपकी आदत में आ जायेगा और इस शब्द के बारे में सोचते ही आपको नींद आने लगेगी.
तो अब बस रिलैक्स कीजिये अपने गेट कीपर को बुलाईये और नींद की आगोश में खो जाईये.
सोफ्रोलॉजी अपने अपने पास्ट से रुकने की बजाय ताकतवर होने में आपकी मदद करता है.
क्या आपने भी कभी खुद को अतीत के पन्ने पलट कर पछताते हुए पाया है. अक्सर हम जब अतीत में झांकते हैं तो हमें ज्यादतर वही समय याद आता है जब हम दुखी थे, नाकाम हुए थे या जब हमसे कुछ गलत हो गया था या हमने किसी से कुछ गलत कहा था. इन सबको याद करके हम नेगेटिव सोच और पछतावे से भर जाते हैं. पर अतीत की नेगेटिव यादों को यूँ बार-बार याद करना हमारे लिए बिलकुल भी अच्छा नहीं है. क्यूंकि, ऐसी बातें हमारे मन में एक डर बैठा देती है कि हमने पहले भी ऐसी गलती की थी या हम ऐसे कार्य में पहले भी फेल हो गए थे तो वही सब फिर से होगा. इसके कारण हम कोई भी रिस्क लेने से डरते हैं और हमारी सफलता रुक जाती है.
इसलिए अतीत को दुःख के पर्दों की बजाये आनंद के परदे से झाँक कर देखना चाहिए. हमें वो सारे पल याद करने चाहिए जब हम खुश थे, कामयाब थे और आत्म-विश्वास से भरे थे. अपनी बिजी लाइफ से समय निकाल कर उन ख़ुशी के लम्हों की पहचान करें और उन्हें याद करें. ऐसा करने से आपके दिमाग को सिग्नल जायेगा की आप एक लायक व्यक्ति हैं आपने पहले भी कामयाबी हासिल की और आज भी कर सकते हैं. लेकिन, कहना आसान है और करना मुश्किल. पर सोफ्रोलॉजी आपकी ये मुश्किल हल कर देगी, सोफ्रोलॉजी की गाइडेड पास्ट विजुअलाईजेशन (Gioded Past Visualization) एक्सरसाइजेस की मदद से आप अपने अतीत के सुनहरे पन्नों को पलट सकते हैं. ये एक्सरसाइज लेवल 3 में करवाई जाती है, और बाकी एक्सरसाइजों की तरह ये भी बहुत आसान, छोटी सी और काफी इफेक्टिव है.
इस एक्सरसाइज की शुरुवात फाउंडेशन प्रैक्टिस की तरह होती है. आप किसी आरामदायक कुर्सी पर बैठ कर साँसों को अन्दर-बाहर करते हुए रिलैक्सड-अलर्ट स्टेट में पहुँच जायें. इससे आपका दिमाग और शरीर एहसासों और विचारों को आसानी से समझने के लिए तैयार हो जायेंगे .
इस स्टेट में पहुँचने के बाद आप अपने अतीत का कोई ऐसा खास पल याद करें जब आपने खुद को आत्म-विश्वास से भरा हुआ और सफल महसूस किया था. जैसे जब आपको प्रमोशन मिला था या जब आपकी सरेआम किसी अच्छे काम के लिए तारीफ हुई थी. उस पल की हर एक डिटेल आपको याद करनी है. जैसे आपने क्या पहना था, कैसे खड़े थे किससे बात कर रहे थे, क्या-क्या हुआ था और खासतौर पर की अपने क्या महसूस किया था उस वक़्त.
अपने दिमाग का फोकस आत्मविश्वास, सफलता और शक्ति से भरी उन भावनाओं पर रखें. इन सब भावनाओं को महसूस करने के बाद साँस बाहर छोडें और रिलैक्स करें. हर बार सांस अन्दर लेते हुए भावनाओं को महसूस करें फिर साँस छोडें. इसे 4-5 बार करने के बात इस बात पर ध्यान दीजिये कि एक्सरसाइज के बाद आप कैसा महसूस कर रहे हैं. देखिये कैसे आपका मन उत्साह और जोश से भर जाएगा.
लोग अक्सर कहते हैं कि अतीत हमेशा अतीत नहीं रहता वो आज और आने वाले कल पर भी असर डालता है. तो क्यूँ ना उस असर का पॉजिटिव तरीके से इस्तेमाल किया जाए यानी आपको गिराने की बजाये और आपको और ऊपर उठाने में.
विजुअलाईजेशन की ताकत से सोफ्रोलॉजी हमारे आने वाले कल से बेहतर रिश्ते बनाने में हमारी मदद करती हैं. आपने सुना होगा कि ‘सोचने से कुछ नहीं होता’ लेकिन अगर सच में सोचने से बहुत कुछ हो जाये तो? कैसा हो अगर केवल इमेजिनेशन की ताकत से हम अपने फ्यूचर के साथ अच्छे रिश्ते बना सकें जिससे हमें एनर्जी और इंसपीरेशन मिलती रहे?
फ्यूचर में पॉजिटिव बदलावों की पूरी संभावना होने के बावजूद भी हम उससे डरते रहते हैं. हमे हमेशा डर रहता है कि हमारे आज के रिस्की डिसिशन हमारे कल में हमें नुक्सान पहुंचा सकते हैं. चूँकि हम इस बात की गारंटी नहीं ले सकते की आगे क्या होगा इसलिए हम हमेशा बच-बच के चलते हैं किसी भी प्रकार का कोई रिस्क लेना ही नहीं चाहते.
लेकिन अगर हम अपनी सोच को थोडा सा पॉजिटिव बना लें तो हमें महसूस होगा कि हम चाहें तो अपने फ्यूचर को और बेहतर बना सकते हैं अपनी लाइफ को और खुशहाल बना सकते हैं. ऐसी सोच से हमें हिम्मत मिलती है और हम आने वाले कल को एक अलग नज़रिए से देख पाते हैं.
सोफ्रोलॉजी इस पॉजिटिव सोच की ताकत हासिल करने में आपकी मदद कर सकता है. सोफ्रोलॉजी, विजुअलाईजेशन एक्सरसाइजेस और सिंपल टूल्स की मदद से हमारे फ्यूचर के साथ हमारे रिश्ते को बदल देता है, ताकि हम फ्यूचर को रिस्क की बजाये मौके के रूप में देखें.
फ्यूचर विजुअलाईजेशन लेवल 2 की एक्सरसाइज है, जो कि आपको आने वाले कल के पॉजिटिव संभावनाओं से मिलवाती हैं. इसे करने से पहले आप ये सोच लें की आने वाले कुछ महीनों या सालों में आप अपनी लाइफ में क्या बदलना चाहते हैं, ये अपना डेली रूटीन बदलने जैसी छोटी सी बात से लेकर करियर बदलने जैसी बड़ी बात भी हो सकती है.
इसके लिए सबसे पहले आप कुर्सी पर रिलैक्सड-अलर्ट स्टेट में बैठें और फिर खुद को 6 महीने या दो साल आगे लेकर जाएँ अपने मन में वो एक सीन इमेजिन करें जिसमें आपने वो बदलाव हासिल कर लिया है जिसके बारे में आपने सोचा था. इस सीन की हर डिटेल को महसूस करें आप कहाँ हैं, किसके साथ हैं और गहरी साँसें लेते हुए इस सीन के बारे में तब तक सोचें जब तक ये आपको सच ना लगने लगे. कुछ समय बाद आप बहुत अच्छा महसूस करने लगेंगे.
इस एक्सरसाइज के अंत में साँस अन्दर लें और इस पॉजिटिव भावना को साँसों के जरिए अपने शरीर में जाता हुआ महसूस करें. ऐसा करने से आपका मन और आपका शरीर दोनों इस पॉजिटिव बदलाव की राह पर चलने के लिए तैयार हो जायेंगे.
ऐसी कई और एक्सरसाइजों की मदद से आप अपने मन चाहे बदलाव को हासिल कर सकते हैं. फाउंडेशन प्रैक्टिस और सोफ्रोलॉजी के 12 लेवलों के इस्तेमाल से आपको अब रुकना नहीं है बस आगे बढ़ते हुए सफलता और आनंद प्राप्त करना है.
कुल मिलाकर
सोफ्रोलॉजी की मदद से आप अपने ऑन-द-गो हीलर बन सकते हैं यानी अपनी लाइफ की समस्याओं से खुद लड़ सकते हैं. सोफ्रोलॉजी वेस्टर्न मेडिसिन और ईस्टर्न मैडिटेशन की तकनीक का एक जबरदस्त मिश्रण है. सोफ्रोलॉजी के सरल, छोटे और कम समय लेने वाली एक्सरसाइजों को करने से हम अपने शरीर और मन में पॉजिटिव उर्जा का संचार कर सकते हैं. सबसे अच्छी बात ये है कि ये किसी भी लाइफस्टाइल और दिनचर्या में फिट हो जाता है. तो इससे पहले कि ज़िन्दगी आपसे आपका बेहतरीन पहलु छीन ले आप सोफ्रोलॉजी की एक्सरसाइजों की मदद से अपनी ज़िन्दगी से बेतरीन पलों को चुरा लें.
अपनी साँसों की लय को दुबारा से सेट करें
आज अपनी जिंदगी से कुछ पल निकाल कर अपनी साँसों पर फोकस करें. किसी आरामदायक कुर्सी पर बैठ जायें अब एक हाथ अपने पेट पर और दूसरा अपनी छाती पर रखें. आराम से सहज होकर सांस लें कोई जबरदस्ती न करें. क्या आपको अपनी छाती में कोई हलचल महसूस हो रही है. अगर हाँ, तो अपना फोकस पेट से साँस लेने की ओर रखें और अपने पेट को किसी गुब्बारे की तरह इमेजिन करते हुए, हर आती-जाती साँसों के साथ उसे फूलता और फिर पिचकता हुआ महसूस करें. आप देखेंगे की पेट से साँस लेने की छोटी सी एक्सरसाइज नें आपका काफी स्ट्रेस ख़त्म कर दिया है.
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