Matthew Dicks
कहानी कहकर घुलने -मिलने , सिखाने, भरोसा जीतने और अपनी ज़िंदगी बदलने की कला सीखिए
दो लफ़्ज़ों में
स्टोरीवरथी (2018) किताब सिखाती है कि कैसे हम एक लेखक के तौर पर अपने पाठकों को गहराई से प्रभावित करने के लिए कहानी लेखन की कला का सहारा ले सकते हैं । अपनी रचना में दिलचस्प शुरुआत से लेकर संतुष्टिपूर्ण अंत और बीच की चीजों को किस तरह से मैनेज करना है, यह किताब आपकों इस चीज से संबंधित आसान और असरदार टिप्स देती है। ताकि आपके पाठक आपकी लिखी हुई रचनाओं से इस तरह चिपके रहें, जैसे कि गुड से चींटियाँ चिपकती हैं.
ये किसके लिए है?
- हर उस व्यक्ति के लिए जो अपनी कहानी लिखने या कहने की कला को बेहतर बनाना चाहता है।
- उनके लिए जो अपनी सार्वजनिक मंच पर भाषण देने की कला को सुधारणा चाहते हैं।
- अंतर्मुखी (Introvert) व्यक्ति जो अपनी बात करने के कौशल को सुधारना चाहते हैं।
लेखक के बारे में
मैथ्यू डिक्स (Matthew Dicks) 'सम्थिंग मिसिंग' और 'मेमोयर्स ऑफ ऐन इमीजिनरी फ्रैंड' जैसी बेस्ट सेलिंग किताबों के लेखक हैं। साथ ही मैथ्यू एक अदाकार और शिक्षक भी हैं। वे ग्रैंडस्लैम और स्टोरीस्लैम जैसी प्रतियोगिताओं के विजेता भी रह चुके हैं।
यह किताब आप को क्यों पढ़नी चाहिए?
अच्छी कहानियाँ हर किसी को पसंद होती है। चाहे हम दोस्तों के साथ बान्फायर के पास बैठे हों या फिर घरवालों के साथ सोफ़े पर, एक अच्छी कहानी जो कि एक अच्छे अंदाज में भी सुनाई गई हो, हमें ज़िंदगी भर के लिए याद रह जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि किस तरह से हम एक कहानी को एक अच्छे ढंग और मजेदार अंदाज में बयां कर सकते हैं। अच्छी कहानी कहने के राज क्या हैं? हालांकि इस बात पर विश्वास करना थोड़ा सा मुश्किल है लेकिन यह सच है, कि हममें कोई भी व्यक्ति, चाहे वो दुनिया के किसी भी कोने का हो, अपनी ज़िंदगी के तजुर्बों को शानदार कहानी के रूप में बयां करने का हुनर रखता है। हमें जरूरत होती है तो बस कुछ साधनों और तरीकों की, जिनसे हम ऐसा करने में कामयाब हो पाएँ।
लेखक मैथ्यू के साथ चलिए एक ऐसे सफर पर, जिसमें हम जानेंगे कि कैसे आप अपनी रोजमर्रा की ज़िंदगी, बचपन और करियर के छोटे छोटे लम्हों और तजुर्बों को बयां करके अपनी ऑडियंस को मंत्रमुग्ध कर सकते हैं। इसमें हम जानेंगे कि आप अपनी कहानी कहने की कला को किस तरह से रोचक बना सकते हैं। कौन सी चीजें हैं जो लोगों को कहानियों में पसंद नहीं आती हैं और कौन कौन सी चीजें आपको अपनी कहानी में शामिल करनी चाहिए। साथ ही साथ हम जानेंगे कि कहानी में किस्सों को किस तरह पिरोया जाना चाहिए। कहानी की शुरुआत और अंत कैसे करना चाहिए और उसके बीच में चीजों को किस क्रम और रूप में रखना चाहिए, इसके अलावा अपनी कहानी को बहुत ज्यादा असरदार बनाने के लिए किन चीजों को शामिल करना चाहिए और किनको नहीं।
- क्यों एक शानदार कहानी 5 सेकंड के पल के चारों तरफ घूमती है।
- एक अच्छी कहानी को किन छोटी- छोटी कसौटियों पर खरा उतरना चाहिए।
- हर बार अपनी कहानी को एक अच्छे अंदाज में कैसे शुरू करना चाहिए।
एक शानदार कहानी बदलाव की बात करती है और कहानीकार को नायक बनाती है।
लेखक हर तरह के, हर इंडस्ट्री के लोगों को सिखाते हैं कि अपने बारे में और अपने अनुभवों को एक कहानी में कैसे जाहीर करते हैं। एक सेल्स एक्सएकूटिव, जो अपनी कंपनी की सेल्स बढ़ाना चाहता है, से लेकर एक बूढ़ा आदमी, जो अपने नाती-पोतों के साथ वक्त बिताना चाहता है, कहानी कहने की कला हर किसी को एक अच्छा वार्तालापी बनाने में सहयोग करती है।
एक अच्छा कहानीकार बनने के लिए कुछ बेहद जरूरी नियम हैं जो आपको हमेशा ध्यान रखने चाहिए:
सबसे पहले तो आपकी कहानी सिर्फ और सिर्फ असाधारण घटनाओं से भरी पड़ी नहीं होनी चाहिए। उसमें कुछ ऐसा भी मौजूद होना चाहिए जिससे कि यह पता चले कि आपकी ज़िंदगी में उसके बाद क्या बदलाव आया था।
अगर आपकी ज़िंदगी में इससे कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है तो घबराने की बात नहीं है। जो भी बदलाव आपकी ज़िंदगी में इसके कारण आया है, चाहे वो छोटा है या बडा, बस उसे लिख दीजिए।
कहानियाँ जो वक्त के साथ नहीं बदलती हैं, एक छोटे से चुटकुले या फिर एक छोटे से किस्से में तब्दील हो जाती हैं। ये छोटी छोटी चीजें असाधारण तो हो सकती हैं, जिनसे थोड़ी देर के लिए कोई हास्य या फिर दुखभरी भावना आ जाती है लेकिन ये चीजें हमारी ज़िंदगी पर स्थायी रूप से कोई गहरा असर नहीं डालती हैं । दुर्भाग्य से, किसी बिना बदलाव की कहानी के द्वारा हम अपनी ऑडियंस को बहुत ज्यादा हद तक प्रभावित नहीं कर सकते हैं या किसी चीज के बारे में उनकी राय को नहीं बदल सकते हैं। अपनी कहानी के द्वारा लोगों को गहराई से प्रभावित करने के लिए हमें उनसे एक गहरा कनेक्शन बनाना होता है और कहानी में बदलाव का जो पॉइंट होता है, वो ये काम कर देता है।
आपको इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि आपकी कहानी आपको एक नायक के रूप में प्रस्तुत करती है। इसलिए कहानियाँ जो आप लोगों को कहने जा रहे हो आपसे संबंधित होनी चाहिए, बजाय आपके किसी दोस्त या अन्य व्यक्ति से।
ऐसा क्यों? क्योंकि किसी आदमी की कहानी उसी की जुबानी सुनने से कहानी दिल की गहराई में उतर जाती है और उसका असर कई गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा अपनी कहानी कहने के लिए बहुत ज्यादा हिम्मत की जरूरत होती है क्योंकि उसमें बहुत सारी कड़वी यादें और सच्चाई छुपी होती है। और यही वो चीजें हैं जो लोग घंटों तक बिना ऊबे हुए सुन और पढ़ सकते हैं।
हमारे कहने का यह मतलब नहीं है कि आप किसी और की कहानी को बयां नहीं कर सकते हैं। बल्कि हम यह कहना चाहते हैं कि आपको दूसरों की कहानी को प्रभावशाली बनाने के लिए उसे अपने अंदाज में बयां करने का प्रयास करना चाहिए। उदाहरण के लिए "वॉयस ऑफ होप" नामक एक संगठन के साथ जुड़कर लेखक ने नाज़ियों के अत्याचारों से बचे हुए यहूदी (हालकॉस्ट) बच्चों को उनके माता-पिता की कहानी कहने का तरीका सिखाया। बच्चों ने सीखा कि कैसे अपनी कहानी में अपनी ज़िंदगी के और अपनी माता-पिता की ज़िंदगी के तजुर्बों को शामिल करना चाहिए। इस तरह से इन यहूदी बच्चों ने शानदार कहानी बयां करनी शुरू कर दी जो बुनी तो उनकी खुद की पृष्ठभूमि पर थी मगर उसपे छाप उनके माता पिता के जीवन की भी थी । इस प्रकार ये कहानियाँ उबाऊ इतिहास के सबक बनने से बच गईं क्योंकि इसमें 'माता-पिता के कारण बच्चों की ज़िंदगी में क्या बदलाव आया' यह तत्व भी शामिल किया गया था।
अपनी कहानी को बिना रटे और काव्य आडंबर के कहें
लेखक डिक की भाषा में एक अच्छी कहानी वो है जो "द डिनर टेस्ट" में सफल हो जाती है। अपनी कहानी को डिनर टेस्ट के मापदंड पर जाँचना बहुत ही आसान है। इसके लिए आपको खुद से पूछना है- "क्या ये वो कहानी है जिसे मै अपने दोस्तों को रात के खाने पर सुनाकर उनका मनोरंजन कर सकता हूँ। क्या इस कहानी से वे प्रभावित होंगें?" खुद से इस तरह के सवाल पूछकर आप अपनी कहानी को टेस्ट कर सकते हैं। इसके बाद अगर आपको लगता है कि आपके दोस्तों को ये कहानी पसंद नहीं आएगी, तो शायद आपकी कहानी को अभी सुधार की जरूरत है।
जब आप कहानी को बयां करने के तरीके का अभ्यास कर रहे हों तो आपको ये बात ध्यान में रखनी चाहिए कि आप अपनी कहानी को ज्यादा लोगों के सामने यानि ऑडियंस के सामने ठीक उसी तरह से रखें जैसे कि आप उसे अपने दोस्तों के सामने जाहीर कर रहे हों।
कुछ कहानीकार होते हैं जो ऑडियंस के सामने अपनी बात को जीवंत रूप में दिखाने के लिए शारीरिक संकेतों का सहारा लेते हैं। जैसे कि अगर उन्हें लोगों को बताना हो कि कैसे एक आइडिया उनके दिमाग में आया तो वो ऐसा दर्शाने के लिए हाथों को सिर पर रखकर संकेत करते हैं। अब आप ही बताइए क्या आप अपने किसी दोस्त को कोई कहानी बताते वक्त ऐसे अजीब से संकेत करेंगे? बिल्कुल नहीं, है ना? याद रखिए, आप अपनी कहानी बता रहें हैं, ना कि थिएटर में किसी नाटक में अभिनय कर रहें हैं। इसलिए कहानी कहते समय इस प्रकार के संकेतों से जितना हो सके उतना बचना चाहिए।
हाथों के संकेतों के अलावा भी कई सारे आडंबर होते हैं जो लोग मंच पर अपनी कहानी को पेश करते वक्त करते हैं या फिर तब जब वो अपनी कहानी को लिख रहे होते हैं। एक बार फिर आप खुद से पूछिए कि क्या आप किसी ऐसे व्यक्ति के साथ डिनर करना पसंद करेंगे जिसने आपसे "उसके हरे-भरे बगीचे में लगे लाल गुलाब के फूल बड़े ही सुन्दर लगते हैं '' जैसी कवियों वाली बातें कहकर आपको बुरी तरह उबाया हो? इसलिए हमेशा याद रखिए आप कहानी कह रहें हैं ना कि कविता।
इसी तरह एक डायलॉग के साथ कहानी शुरू करना भी ज्यादातर बार गैर-जरूरी होता है। कल्पना कीजिए कि आप "पापा मेरे कमरे में मत जाइए" या फिर कुछ भी उलटी-सीधी आवाज जैसे "ढिश्कियाऊं" कहकर एक डिनर पार्टी में अपनी कहानी की शुरुआत करते हैं । कैसा लगेगा, अजीब ना? और हो सकता है कि लोग आपको फिर कभी अपनी पार्टियों में ना बुलाएं। इसके बावजूद भी कई सारे कथाकारों को लगता है कि अपनी कहानी की शुरुआत इस तरह की बेहूदा चीजों से करना सही है। पर यह पूरी तरह बेहूदा है। इसलिए एकदम से डाइलॉग मारकर कहानी की शुरुआत नहीं करनी चाहिए। पहले ऑडियंस को कहानी और उसके किरदारों का परिचय करवाना चाहिए।
एक जरूरी बात, कहानी कहते वक्त दिक्कतें होती हैं क्योंकि लोग एक बड़ी गलती कर देते हैं। उन्हें लगता है उनकी ऑडियंस उनसे कहानी कहने के साथ ही साथ उसे परफ़ॉर्म भी करवाना चाहती है। मगर असल में ऐसा नहीं होता है । जब आप अपनी कहानी को प्राकृतिक ढंग से नहीं कहते हैं, उसमे कुछ अलग से जोड़ने का प्रयास करते हैं, तो आपकी कहानी बनी-बनाई तैयार की हुई लगने लगती है। और आपके श्रोताओं को इस बात की भनक लग जाती है और उन्हे आपकी कहानी बनावटी लगने लगती है। दूसरे शब्दों में कहें तो वो आपके दिल से निकली बातों और भावनाओं को सुनना चाहते हैं और इस बीच अगर आप कोई बनावटीपन अपनी कहानी में शामिल कर देते हैं, तो इससे कहानी का कुदरती मजा किरकिरा हो जाता है और आपके और आपकी ऑडियंस के बीच का कनेक्शन कमजोर पड जाता है।
एक अच्छी कहानी दरअसल एक 5 सेकंड का पल होती है।
जब बात कहानी कहने की कला की आती है तो इसमे एक आश्चर्यजनक लेकिन आवश्यक सच सामने आता है, जोकि आपको जरूर जानना चाहिये। एक अच्छी कहानी असल में किसी की ज़िंदगी का 5 सेकंड का एक पल होती है। और हमारी कहानी कहने का मुख्य उद्देश्य होता है उस 5 सेकंड के पल को जितना हो सके उतनी चमक के साथ रोशन करना, ताकि लोग आपके उस लम्हे को खुद से जोड़कर महसूस कर पाएं।
किस तरह के 5 सेकंड के पल के बारे में हम बात कर रहें हैं?
5 सेकंड के पल से हमारा मतलब ज़िंदगी के उन लम्हों से है जो किसी को स्थायी रूप से बदल कर रख देते हैं। जैसे- आप अपने जीवन में अपने प्यार से मिल जाते हैं या फिर मिला हुआ प्रेम खो देते हैं। या हो सकता है कि आपकी किसी चीज के बारे में राय बदल जाती है; आप किसी को माफ कर देते हैं या फिर आप किसी प्रकार की निराशा से घिर जाते हैं। 5 सेकंड के पल कुछ इसी तरह की घटनाएँ होती हैं, जो ज्यादातर अचानक, शक्तिशाली और छोटी होती हैं। और यही वो पल होते हैं जो हमारी कहानी के लिए शानदार नींव का निर्माण करते हैं।
अगर आप अभी भी इस 5 सेकंड के लम्हे और इसकी ताकत को नहीं समझ पाए हैं, तो लेखक की ज़िंदगी से जुड़ी नीचे दी गई ये कहानी पढिए, जिसने कई लोगों को रोने पर मजबूर किया है-
लेखक मैथ्यू बताते हैं कि जब वे अपनी जवानी के दिनों में थे तो एक बार कार दुर्घटना में उनके शरीर का ऊपरी भाग कार के शीशे के टुकड़ों से कट गया था और उनके पैर कार के डैशबोर्ड से जोर से टकराने की वजह से टूट गए थे। यह दुर्घटना इतनी भयावह थी कि मैथ्यू को जब गाड़ी से बाहर निकाला गया तो उनके दिल ने काम करना लगभग बंद कर दिया था; उनके प्राण लगभग उड ही चुके थे। इसके बाद बचाव दल के चिकित्सकों ने उन्हें सड़क के किनारे लिटाकर उनमें जान वापस लाई और उन्हें अस्पताल पहुंचाया।
तो आपको क्या लगता है कि यही वो 5 सेकंड का पल था जिसने लोगों को रोने पर मजबूर कर दिया था?
नहीं, बिल्कुल नहीं! वो पल इसके बाद का था। दरअसल लेखक के घरवाले उस रात उन्हें देखने के लिए अस्पताल नहीं गए। बल्कि वे उस दुर्घटना वाली जगह पर गए, यह देखने के लिए कि गाड़ी को टक्कर से कितना नुकसान पहुंचा है। उस रात अस्पताल में लेखक बहुत ज्यादा तनावग्रस्त और अकेला महसूस कर रहे थे, लेकिन सिर्फ तब तक जब तक कि उसकी ज़िंदगी में वो 5 सेकंड वाला पल नहीं आया था। जब डॉक्टर लेखक का इलाज कर रहे थे तभी अचानक से उसके कुछ जवान दोस्त अस्पताल के प्रतीक्षा कक्ष में पहुँच गए और उन्होंने जोर-जोर से चिल्लाकर लेखक का हौसला बढ़ाना शुरू कर दिया।
क्या आप बता सकते हैं कि ऑडियंस के लिए घरवालों और दोस्ती वाला ये 5 सेकंड का पल मौत से मुलाकात वाले उस खौफनाक पल से भी ज्यादा असरदार क्यों था? क्यों वे कहानी के इस मोड पर आकर रो पड़े थे?
बात साफ है क्योंकि ये 5 सेकंड वाला ये पल लेखक की ज़िंदगी में एक बड़े बदलाव का पल था, जिससे ऑडियंस में से हर कोई खुद को जुड़ा हुआ महसूस कर सकता है। शायद हम में से बहुत सारे लोगों को पता भी नहीं होगा कि मौत से मुलाकात कितनी खौफनाक होती है। इसलिए ज्यादातर लोग मौत से खुद को जोड़ नहीं पाते है। जबकि अकेलापन, अस्वीकरण और दोस्ती की ताकत को हम सब लोग बहुत अच्छे से जानते और पहचानते हैं क्योंकि ये हमारी ज़िंदगी में कई बार घटित हो चुके होते हैं। इसलिए ये जो पल होते हैं इनसे ऑडियंस खुद को बहुत ज्यादा जुड़ा हुआ महसूस करती है। यहाँ तक कि जब कभी लोग कई दिनों बाद लेखक से इस कहानी के बारे में बात करते हैं तो बहुत ही कम लोग होते हैं जो कहानी के दुर्घटना वाले भाग का जिक्र करते हैं। ज्यादातर लोग कहानी के उस भाग को याद करते हैं जिसमें अकेलेपन के दुख से और दोस्तों के प्रेम के आ जाने से लेखक की ज़िंदगी में अचानक से एक बड़ा बदलाव आ गया था।
अपनी कहानी की शुरुआत 'अंत किस तरह से होगा' यह देखकर कीजिए।
जब आपको अपनी कहानी का 5 सेकंड वाला बदलाव का पल मिल जाता है तब बारी आती है आपकी कहानी का अंत ढूंढने की। लेकिन क्यों? क्योंकि यह जो 5 सेकंड वाला पल है आपकी कहानी का सबसे जरूरी हिस्सा है और साथ ही साथ आपकी कहानी का उद्देश्य और शिखर भी है। इसलिए इसके बाद कहानी का अंत जितना जल्दी किया जाए उतना ही अच्छा होगा।
हमारा काम यहीं खत्म नहीं होता क्योंकि कहानी का सबसे कठिन हिस्सा अभी भी बचा हुआ है। अब तक हम जान चुके हैं कि कहानी का अंत कैसे और कब करना है, तो चलिए अब जानते हैं कि कहानी कि शुरुआत कैसे करना है। क्योंकि एक शानदार अंत के लिए एक अच्छी शुरुआत जरूरी होती है।
कहानी की अच्छी शुरुआत करने के लिए सही जगह ढूंढना बेहद जरूरी है। इसके लिए आपको अपनी ज़िंदगी के तजुर्बों के पन्नों को पलटना है और उनमें से आपको जो सबसे शानदार लम्हे मिले उनके साथ अपनी कहानी की शुरुआत करनी है। हम में से ज्यादातर लोगों की ज़िंदगी में ऐसे शानदार लमहें बहुत सारे होंगे इसलिए उनमें से किसी एक लमहें को छाँट पाना बिल्कुल भी आसान नहीं होगा। तो फिर आप इतने सारे विकल्पों में से सबसे अच्छे विकल्प का चुनाव कैसे कर पाएंगे?
सबसे पहले तो आपको याद रखना है कि आपको अपनी कहानी का अंत किस प्रकार से करना है या कहें कि आपने अपने 5 सेकंड वाले पल में क्या दिखाना है? इसके बाद आपको अपने 'कहानी की शुरुआत' वाले विकल्पों को लेकर खुद से एक सवाल पूछना है- "इनमें से कौन सी शुरुआत मेरी कहानी के बदलाव, रहस्य और अंत के बिल्कुल विपरीत है?" । सरल शब्दों में कहें तो आपकी कहानी की शुरुआत उसके अंत के ठीक विपरीत होनी चाहिए। कहानी के अंत और शुरुआत का एक दूसरे के विपरीत होना बेहद जरूरी है क्योंकि इससे कहानी में रोमांचक मोड़ बनते हैं जो आपकी कहानी में बदलाव का तत्व उत्पन्न हो जाता है।
उदाहरण के लिए, एक रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म की कल्पना कीजिए जिसकी शुरुआत में एक जवान लड़की को उसकी बैंक की नौकरी से बेदखल करते हुए दिखाया गया है और उस लड़की का बैंकर प्रेमी उस लड़की की सबसे अच्छी सहेली के साथ भाग जाता है। शायद अब तक आप जान गए होंगे कि इस फिल्म का अंत किस अंदाज में होगा। संभवता हमारी दुखी नायिका को जल्द ही एक नया प्रेमी मिल जाएगा जो उस बैंकर से बिल्कुल अलग होगा- एक कलाकार। और शायद इसके बाद उसे बैंक की अपनी नौकरी के बिल्कुल विपरीत एक नौकरी मिल जाए, जैसे- किसी बेकरी में। और इसके बाद उस बैकरी में उसका कोई बहुत अच्छा दोस्त बन जाए जैसे कि कोई जिंदादिल समलैंगिक।
कहने का अर्थ यह है कि अगर आप जानना चाहते हैं कि किसी फिल्म का अंत किस अंदाज में होगा। तो पहले शुरुआत में करीब 15 मिनट उस फिल्म को देखिए और फिर ठीक उसका उल्टा सोचिए जो आपने थोड़ी देर पहले देखा है। संभवतया आप फिल्म का अंत अच्छी तरह से जान जाएंगे। आपकी कहानी भी कुछ इसी तरह की होनी चाहिए।
अपनी कहानी से लोगों को मंत्रमुग्ध कर देने के कुछ 'हाँ' और 'ना'
एक अच्छी कहानी वो होती है जो लोगों को एक रोमांचक सफर पर ले जाने की क्षमता रखती है। लेकिन ले कहाँ जाती है? अच्छी कहानी दर्शकों को आपके साथ उस जगह पर, उस समय में ले जाती है, जब वो कहानी आपके साथ सच में घटित हुई थी। अच्छी कहानी में लोग वही दृश्य देखते हैं, वहीं आवाजे सुनते हैं और वही भावनाएँ महसूस करते हैं, जो आपने उस वक्त महसूस की हों जब वो घटना आपकी ज़िंदगी में घटित हुई हो।
लेकिन अगर आपको लगता है कि कहानी को उसके असल रूप में लोगों को दिखा पाना बहुत ही कठिन काम है, तो ऐसा नहीं है। कुछ बातों का ध्यान रखकर अगर हम अपनी कहानी बनाएं और उसे लोगों को बताएँ, तो कहानी को उसके जीवंत रूप में आसानी से बयां किया जा सकता है।
लोगों को अपनी कहानी से जोड़े रखने का एक छोटा सा तरीका है भूतकाल के स्थान पर वर्तमान काल का प्रयोग करना। जैसे कि "मैं ट्रेन से मुंबई जा रहा था और रास्ते में मेरा शरीर धूजने लगा.." कहने के बजाय अगर आप कहें- "मैं ट्रेन से बंबई जा रहा हूँ और रास्ते में मेरा शरीर धूज रहा है.." तो ये ज्यादा रहस्यमयी लगता है। वर्तमान काल का इस्तेमाल करने से लोगों में ऐसी भावनाएं पैदा होती हैं जिनसे उन्हें ऐसा लगता है कि जो कुछ भी हो रहा वो सच में ही रहा है और वे कहानी में और ज्यादा समा जाते हैं।
अब तक हमने जाना कि कौन कौन सी चीजें करके आप अपनी कहानी को जीवंत बना सकते हैं। अब जानते हैं कि कौन कौन सी चीजों को अपनी कहानी में शामिल करने से आपको बचना चाहिए।
पहली बात, कभी भी कहानी के बीच में अपनी ऑडियंस से कोई भी प्रश्न ना पूछें। क्योंकि इससे आपकी ऑडियंस दिमाग का इस्तेमाल करके जवाब देगी और आपकी कहानी का सत्र एक सवाल-जवाब के सत्र में तब्दील हो जाएगा। दिमाग खुलने की वजह से उनकी कल्पना टूट जाएगी और फिर वो आपके साथ कहानी में सफर करने के बजाय मंच पर सवाल जवाब करने लगेंगे।
दूसरी बात जो आपको अपनी कहानी कहते वक्त नहीं करनी चाहिए वो है- ऑडियंस को संबोधित करना । जैसे कि अगर आप मंच पर जाकर लोगों को संबोधित करते हुए कहते हैं- "दोस्तों मैं आज आपके सामने पेश करना चाहता हूँ अपनी दर्द भरी कहानी.." तो इससे लोगों का जो कल्पना भाव था वो समाप्त हो जाता है। और वे कहानी को छोड़कर आप पर और कमरे में बैठे दूसरे लोगों पर ध्यान केंद्रित करने लगते हैं।
इसलिए अपनी ऑडियंस से कहानी से बाहर की ज्यादा बातें मत कीजिए और ना ही उनसे कोई सवाल-जवाब करिए। इसके बजाय उनसे सिर्फ अपनी कहानी कहिए, सिर्फ कहानी, वो भी वर्तमान काल में।
अपनी कहानियों में बदजबानी और अश्लीलता से बचें
जब लेखक मैथ्यू अपने ब्लॉग पे अपनी कहानियाँ लिखते है तो क्या आप जानते हैं वह शब्दों के इस्तेमाल को लेकर इतना सजग क्यों रहते है? ऐसा इसलिए क्योंकि वे जानते हैं कि वे किस तरह के शब्दों का अपनी कहानी में इस्तेमाल करते हैं, इससे उनकी इज्जत पर फर्क पड़ता है। आपको शायद ही उनकी कहानियों में उनके साथियों और दोस्तों की आलोचना या फिर किसी प्रकार की बदजबानी देखने को मिलेगी। इसलिए अगर आप एक अच्छा कहानीकार बनना चाहते हैं तो आपको अपने शब्दों के चुनाव को लेकर बहुत ही सजग रहना होगा। आपको देखना पड़ेगा कि आपको कौन-सा शब्द इस्तेमाल करना है और किस तरीके से करना है।
चाहें आप किसी शादी में लोगों को अपनी कहानी सुना रहें हैं या फिर किसी मंच पर, दोनों ही परिस्थितियों में आपको अपने शब्दों के चुनाव के प्रति सजग रहना पड़ेगा। क्योंकि इससे आपकी ऑडियंस पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है।
बिना अपशब्दों के अपनी कहानी कहने से आपकी ऑडियंस की संख्या में वृद्धि होती हैं। उदाहरण के लिए लेखक (मैथ्यू) अपनी कहानी को हजारों लोगों को कह पाया क्योंकि उसे एक लोकप्रिय रेडियो प्रोग्राम या पॉडकास्ट, जिसका नाम 'द मॉथ' है, में आमंत्रित किया गया था। सबसे जरूरी बात, द मॉथ उनकी कहानी को अपने प्रोग्राम पर प्रसारित कर पाया क्योंकि वे पूरी तरह अपशब्दों या कहें गाली-गलौच से मुक्त थीं और साथ ही साथ उस शो की ऑडियंस के पसंद की भी थी। अगर आप अपनी कहानी में अपशब्द कह रहे हैं तो आप उम्मीद नहीं सकते है कि कोई आपको किसी व्यवसायिक, स्कूल या फिर पारिवारिक कार्यक्रमों में आमंत्रित करेगा। इसलिए अपनी कहानी में अपशब्दों का बम फोड़ने से पहले अच्छी तरह से सोच लें। हो सकता है कि इससे आप अपना ही करियर दांव पे लगा रहें हो।
अगर आप अपनी ऑडियंस को प्रभावित करना चाहते हैं तो बदजबानी के साथ ही साथ अश्लीलता से भी अपनी कहानी को दूर रखें।
अश्लील होने से हमारा मतलब दूषित घटनाओं को बयां करने से है, फिर चाहे वे कामवासना से प्रेरित हों या फिर शरीर से स्रावित होने वाले तरल पदार्थों से। अश्लील घटनाओं को बढ़ा चड़ाकर शायद आप सोच रहे हों कि इससे आप अपनी ऑडियंस को कल्पना के सागर में ले जा रहें हैं लेकिन वास्तव में आप उनके जीवन को घिनौना बना रहें हैं।
उदाहरण के लिए एक बार लेखक के एक दोस्त ने 'स्टोरीस्लैम' नाम की एक कहानी प्रतियोगिता में भाग लिया। जिसमें उन्होंने अपनी पहली डेट पर ही पेट खराब होने और उसके परिणामस्वरूप जो उन्होंने सोफ़े पर किया, उसका बहुत गहराई से जिक्र किया। वे चाहते तो इस घटना मे ऊपर ऊपर से ही निकल सकते थे, लेकिन ऐसा करने के बजाय उन्होंने सोफ़े पर की हुई चीज के रंग, आकार और खुशबू का जिक्र करना ज्यादा जरूरी समझा। जाहीर सी बात है कि शो के जजों को उनका यह अंदाज बिल्कुल नहीं भाया और उन्होंने इसे एक घटिया कहानी करार दिया।
अपनी कहानी के लिए शब्दों का चुनाव करते वक्त हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि ऐसा ना हो कि जो शब्द आपके लिए सही है वह आपकी ऑडियंस को पसंद ना आए, उन्हें अश्लील लगे। हमेशा रखिए थोड़ा सा संयम आपके लेखन के करियर को बहुत आगे ले जा सकता है।
कुल मिला कर
आप अपनी कहानी कहने के कौशल को कुछ तकनीकों की मदद से और बेहतर बना सकते हैं। एक अच्छी कहानी वो होती है जिसमें एक बदलाव का तत्व होता है। उसमे श्लीलता और अनावश्यक चीजें कम होती हैं और कहानीकार अपनी बात को वर्तमान काल में कहता है।
अपनी कहानी में बड़े लोगों के नाम का जिक्र करने से बचें
एक बार अपनी कहानी कहते वक्त लेखक ने अपनी गर्लफ्रेंड की तुलना अदाकारा 'जूए देशचनेल' से कर दी। इसके बाद जब उन्होंने ऑडियंस की ओर देखा तो पाया कि लगभग पचास फीसदी लोगों को ही यह बात समझ में आई, जबकि बाकी पचास फीसदी लोग अब भी उलझन में थे। इसके बाद से लेखक ऐसी चीजों का जिक्र कहानी में कम ही करते हैं जो लोगों को आसानी से समझ में नहीं आती है और आपको भी ऐसा करना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने से न सिर्फ आप उन लोगों को उलझन मे डाल रहें हैं जिन्हे कि उस बड़े आदमी के बारे में में पता नहीं है, जिसका जिक्र आप कर रहे है, बल्कि साथ ही साथ ऐसा करना आपके आलस को भी दर्शाता है, क्योंकि इस तरह आप एक किरदार का सम्पूर्ण वर्णन करने के बजाय उसे किसी बने बनाए चरित्र पर छोड़ रहे हैं। जब हम किसी किरदार की तुलना किसी व्यक्ति से करते हैं तो इस तरह से हम किरदार के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दे रहे होते हैं, जिससे कहानी सुनने वाले लोग उस किरदार को सही से नहीं समझ पाते हैं। इसलिए हमेशा अपने आप से पूछिए कि "किसी बड़े व्यक्ति से मिलती कुछ समानताओं के अलावा इस किरदार में ऐसी क्या बात है जो कि इसे खास बनती है?" और फिर मिले जवाब के आधार पर अपने किरदार का वर्णन कीजिए।
