Marissa King
Decoding the Elements of Human Connection
दो लफ्जों में
सोशल केमिस्ट्री (2020) नेटवर्किंग के लिए फॉरेस्ट रिसर्च बेस्ड अप्रोच है. आधार बताते हैं कि हम कैसे नेटवर्क करते हैं और हमारे लिए कौन-कौन से नेटवर्किंग मोड अवेलेबल हैं. नतीजतन हमारे सामने अच्छे नेटवर्किंग की ट्रांसफॉर्मेटिव पावर पेश की जाती है.
किन के लिए है
- उन लोगों के लिए जो ट्रेडिशनल नेटवर्किंग इवेंट्स नहीं पसंद करते
- प्रोफेशनल्स, जिनके पास बिजनेस कार्ड्स तो हैं लेकिन उनका फायदा नहीं हासिल कर पा रहे
- हर कोई जो किसी अजनबी से जुड़ना चाहता है लेकिन उसे समझ नहीं आ रहा कि यह कैसे किया जाए
लेखक के बारे में
मरिसा किंग येल यूनिवर्सिटी में ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर की प्रोफेसर हैं, जिन्हें नेटवर्क, सोशल इनफ्लुएंस और ग्रुप डायनॉमिक्स में खासा दिलचस्पी है. नेटवर्किंग में उनके काम को ओपीएड क्राइसिस और लोनलिनेस एपिडेमिक के खिलाफ लड़ने के लिए इस्तेमाल किया गया. उनकी रिसर्च अटलांटिक और न्यूयॉर्क टाइम्स जैसे पब्लिकेशन में फीचर हुई.
अगर आप अच्छी तरीके से नेटवर्किंग करना जानते हैं तो यह कोई काम नहीं लगता
नेटवर्क कितना इंपॉर्टेंट है, वर्नन जॉर्डन से पूछिए. 1960 के दशक में जॉर्जिया में, जॉर्डन को एक इंटरशिप ऑफर हुई जो तब रद्द हो गई जब उनके एंपलॉयर्स को जॉर्डन के ब्लैक होने का पता चला. जॉब की जरूरत में जॉर्डन ने अटलांटा के फॉर्मर मेयर रॉबर्ट मेडोक्स के ड्राइवर के तौर पर नौकरी कर ली.
जॉर्डन के अंदर कनेक्शंस बनाने और उनको नये कनेक्शंस में बदलने की काबिलियत थी. मेडोक्स के साथ उनके कनेक्शन ने उन्हें एग्जीक्यूटिव सिविल राइट लीडर के तौर पर कामयाबी दिलाई. और अब उनकी पहचान वालों में बराक ओबामा और मॉर्गन फ्रीमैन शामिल हैं. वह 9 एग्जीक्यूटिव बोर्ड का हिस्सा है और एक बार उन्हें 500 कंपनीज़ में किन्हीं दो कंपनियों के बीच सबसे तेज रास्ते के तौर पर डिस्क्राइब किया गया था.
कुल मिलाकर जॉर्डन को पता है कि नेटवर्क कैसे काम करता है और कैसे बनाया जाना चाहिए. आप भी ऐसा करना सीखिए, आपका नेटवर्क आपको वहां ले जा सकता है जिसके आपने ख्वाब देखे हैं.इस समरी मे आप जानेंगे स्ट्रांग और वीक टाईस का फर्क, आपका नेटवर्क स्टाइल क्या है, औरक्यों आप उस शख्स से 6 कनेक्शन से ज्यादा दूर नहीं है जिससे आप मिलना चाहते हैं।
हो सकता है आप भी ज्यादातर लोगों की तरह नेटवर्किंग पसंद नहीं करते. यह शब्द आपको नेटवर्किंग इवेंट्स के डरावने ख्याल में डाल देता होगा जहां पार्टिसिपेंट्स अपने कन्वर्सेशन पार्टनर के आसपास बात करने के लिए किसी ज्यादा इंपॉर्टेंट शख्स की तलाश करते हैं. या फिर कोई ऐसी कॉन्फ्रेंस जहां आप बिजनेस के ढेर सारे कार्ड और कार्ड ओनर्स की धुंधली याद के साथ आते हैं.
लेकिन2 मिनट के लिए रिलेशनशिप द्वारा अपनी जिंदगी में अदा किए जा रहे किरदार के बारे में सोचिए. रिश्तों का नेटवर्क आपकी जिंदगी में कंफर्ट, नया एक्सपीरियंस, नया नजरिया, खुशियां और बहुत कुछ ला सकता है. जब आप इसके बारे में गहराई से सोचते हैं, तो यह बहुत सर्पराइजिंग लगता है कि आप अपने नेटवर्क को ज्यादा वक्त नहीं दे रहे हैं.
स्लिक कॉर्पोरेट नेटवर्किंग मेन चीज को नज़रअंदाज़ कर देता है. यह इस गलतफहमी पर आधारित होता है कि आप जितने ज्यादा लोगों को जानेंगे आपको उतना ज्यादा सोशल स्टेटस, जॉब ऑफर, फाइनेंसियल मुनाफ और इंसाइडर इंटेलिजेंस का फायदा होगा.लेकिन ऑथेंटिक नेटवर्क इंसान और रिलेशनशिप को चीजों की तरह नहीं समझता, इसका मतलब कॉमन ग्राउंड ढूंढना, नये रिश्ते बनाना और पुराने को बनाए रखना है. एक अच्छा नेटवर्क करने वाला दोनों चीज पर फोकस करता है, कि वह लोगों को क्या दे सकता है और उनसे क्या हासिल कर सकता है.
तो आप अच्छे नेटवर्कर कैसे बन सकते हैं? सबसे पहले अपना नेटवर्क स्टाइल जानिए. आपका नेटवर्क स्टाईल, 3 तरह के नेटवर्क स्टाइल में से हो सकता है- एक्सपेंशनिस्ट, ब्रोकर और कंवीनर.
एक्सपेंशनिस्ट हर कॉकटेल आवर और कॉन्फ्रेंस का हिस्सा होता है. क्यों. इस तरह के नेटवर्कर के अंदर अंजाने लोगों बातचीत करने और स्पॉन्टेनियस रिलेशंस बनाने की काबिलियत होती है. अगर आप एक एक्सपेंशनिस्ट हैं तो हो सकता है आपके पास बहुत सारे कांटेक्ट्स हों. हलांकि आप अपने सभी कांटेक्ट्स को जानते हैं लेकिन हो सकता है आपके कनेक्शंस एक दूसरे को ना जानते हों.
ब्रोकर ,ब्रोकर के पास अलग-अलग इंटरेस्ट और स्पोर्ट लाइव रखने वाले लोगों का कनेक्शन होता है. ब्रोकर ऐसे अलग-अलग दिलचस्पी रखने वालों को एक दूसरे से मिलाने की नेचुरल खासियत रखता है. मिसाल के तौर पर, अपने आर्कियोलॉजिस्ट फ्रेंड को अपने साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट फ्रेंड से मिलाना. ब्रोकर द्वारा बनाए गए कनेक्शन का नतीजा अक्सर इनोवेशन और कोलैबोरेशन के तौर पर होता है. अगर आप ब्रोकर हैं, तो आपके ज्यादातर कांटेक्ट आपकी तरह ही, क्रिएटिव और ओपन माइंडेड होंगे.
कंवीनर ,कंवीनर का नेटवर्क छोटा होता है जिसमें लोग आपस में जुड़े होते हैं. कंवीनर के सभी मेन कॉन्टैक्ट सिर्फ क्लोज फ्रेंड नहीं होते बल्कि उन कॉन्टैक्ट के बीच में गहरा रिलेशन इस्टैबलिश्ड करने के लिए कंवीनर ने मेहनत की होती है. नतीजतन,कंवीनर के दोस्त एक दूसरे को जानते हैं और उनका सर्कल भी एक ही होता है. अगर आप कंवीनर हैं, तो आप अपने सर्कल का एक इंपॉर्टेंट हिस्सा है जिस पर यकीन किया जाता है, और यह सब इसलिए हुआ क्योंकि आपने उस रिश्ते को बनाने में मेहनत की है.
कोई एक स्टाइल दूसरे स्टाइल से बेहतर नहीं है, लेकिन अपनी स्टाइल के बारे में जानना आपको बेहतर नेटवर्कर बना सकता है.
एक आइडियल नेटवर्क में क्वालिटी और क्वांटिटी के बीच बैलेंस होता है
आपके लिए क्या ज़्यादा इंपॉर्टेंट है- कनेक्शन की क्वालिटी या क्वांटिटी.यकीनन क्वालिटी ज्यादा इंपॉर्टेंट है. आप अपने क्लोज रिलेशन में ही ट्रस्ट और इंटिमेसी एक्सपीरियंस करते हैं, सलाह और सपोर्ट के लिए भी आप इन्हीं पर डिपेंडेंट होते हैं. लेकिन एंथ्रोपॉलजिस्ट रॉबिन डनबर बताते हैं कि एक एवरेज इंसान के पास सिर्फ2 से 5 लोगों के साथ ही ज़्यादा इंटिमेट रिश्ता बनाने का वक्त और कॉग्नेटिव एनर्जी होती है. और इस तरह के रिश्ते हम लगभग150 तक की बना सकते हैं.
आपके कैजुअल ग्रुप का हिस्सा होने वाले 150 लोगों के कनेक्शन को, नेटवर्क रिसर्चर स्ट्रांग टाईस की कैटेगरी में रखते हैं. इमरजेंसी पड़ने पर आप इन 150 लोगों में से चंद को ही कॉल करेंगे. लेकिन अगर इनमें से किसी से भी आपकी मुलाकात हो जाती है तो साथ में कॉफी पीने के बारे में दो बार नहीं सोचेंगे.
क्या आप 150 से ज्यादा का नेटवर्क डिवेलप करना चाहते हैं? यहीं पर क्वांटिटी सामने आ जाती है आपके फ्रेंड सर्कल के बाहर के वीक टाईस उतने ही जरूरी हैं जितने कि स्ट्रांग टाईस. जो लोग आपके साथ स्कूल में थे, आपके वह कलीग जिनसे आपका कनेक्शन टूट गया है या आपके कार्नर वाले स्टोर के काउंटर पर बैठने वाला शख्स.
स्ट्रांग टाईस (Strong Ties) से लगातार फायदा होता रहता है, लेकिन उन फायदों के साथ कुछ ड्यूटी भी होती है. आपका स्ट्रांग टाईघर शिफ्ट करने में आपकी मदद कर सकता है. लेकिन जब वह शिफ्ट करे, तो आपको भी वक्त निकालकर उसकी मदद के लिए पहुंचना ही होगा.वीक टाईस (Weak Ties) से होने वाले फायदे अनप्रिडिक्टेबल होते हैं. हो सकता है कि एक बैरिस्टा और स्क्रीनराइटिंग का शौक रखने वाले किसी शख्स को उस प्रड्यूसर की मदद मिल जाए जिससे वह रोज काम पर बातें करती है, लेकिन उसके प्रड्यूसर होने का मालूम नहीं था. यहां “हो सकता है” ऑपरेटिंग शब्द है.
सच यह है, कि हम अपने वीक और स्ट्रांग टाईस के बीच अलग ढंग से अपने रिसोर्सेज अलॉट करते हैं, और इसका एलोकेशन कैसे होगा यह हमारे नेटवर्किंग स्टाइल पर डिपेंड करता है.
एक्सपेंशनिस्ट वीक टाईस बनाते हैं. उनके लिए नए कनेक्शंस बनाना आसान है, और उन्हें बनाए रखने की ज़रूरत नहीं महसूस करते.ब्रोकर स्ट्रांग टाईस के छोटे ग्रुप में रहते हैं लेकिन अपने वीक टाईस को मेंटेन रखने के लिए भी वह वक्त निकाल लेते हैं. मेंटेन न किए गये वीक टाईस अक्सर खत्म हो जाते हैं.कंवीनर एक छोटे से सोशल कांटेक्ट में ही रहते हैं. वह अपनी स्ट्रांग टाईस को मेंटेन करने पर ज्यादा ध्यान देते हैं.
बेसिकली, स्ट्रांग और वीक कनेक्शंस से मिलकर आपका नेटवर्क बनता है. और इनका रेश्यो आपके नेटवर्किंग टाइप पर डिपेंड करता है. आपका नेटवर्किंग टाइप उन कनेक्शंस को कॉन्फ़िगर करने के तरीके पर भी असर डालता है.
आगे हम इन तीन तरह के नेटवर्किंग के बारे में और अच्छे से जानेंगे.
कंवीनर्स यकीन, इंटिमेसी और खासियत के आधार पर नेटवर्क बनाते हैं।
इन ए लिस्ट सेलिब्रिटीज़ में से कौन कंवीनर हो सकता है? जॉर्ज क्लूनी, विओला डेविस, एम्मा स्टोन या ब्रैड पिट.यह एक ट्रिकी सवाल है, यह सब कंवीनर्स है.
जब साउदर्न यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया और बेन ग्युरियन यूनिवर्सिटी ने साथ मिलकर यह पता लगाने का फैसला किया कि B और C लिस्टर से अलग क्या चीजें लोगों को A-लिस्टर बनाती हैं. तो उन्होंने पाया कि ए लिस्टर के नेटवर्क एक इंटरकनेक्टेड स्ट्रांग टाईस के बीच में रहते हैं मतलब A-लिस्टर्स कंविनर्स हैं.
कंवीनर सिर्फ कनेक्शंस नहीं बनाते वह अपने कनेक्शंस के बीच कनेक्शन बनाते हैं. और इन सभी कनेक्शंस के बीच में एक हाई लेवल ट्रस्ट होता है. इस यकीन में तीन तरह के फैक्टर शामिल होते हैं.
पहला, इन नेटवर्कस के इंटरकनेक्टेड और एक्सक्लूसिव होने का मतलब है, कि अगर आप इस ग्रुप में हैं तो आप यकीन करने लायक होने चाहिए. कंवीनर के कनेक्शंस में ज़्यादातर स्ट्रॉन्ग टाईस होते हैं. यह अपने दोस्तों को करीब रखते हैं और बाहरियों के लिए इनके पास वक्त नहीं होता.
दूसरा, यह यकीन एक तरफ से इन कनेक्शंस को एक दूसरे के लिए जिम्मेदार बनाता है. कंवीनर नेटवर्क के कनेक्शंस आपस में अपने सीक्रेट्स और कमजोरियां शेयर करने में कंफर्टेबल होते हैं. इमोशनल मोमेंट्स इस दोस्ती को एक गहरे रिश्ते में बदलने में इंपॉर्टेंट रोल अदा करते हैं. और यह मोमेंट्स एक दूसरे पर उनके यकीन को बढ़ाते हैं.
तीसरा, कंवीनर्स के नेटवर्क में चेक और बैलेंस सिस्टम के ज़रिये यह डिसाइड किया जाता है कि कौन उस नेटवर्क का हिस्सा होगा या कौन बना रहेगा. अगर कोई कनेक्शन नेटवर्क के वैल्यूज़ के अकॉर्डिंग नहीं है तो उसे साइडलाइन किया जा सकता है यहां तक कि नेटवर्क से बेदखल भी किया जा सकता है. नेटवर्क क्लोजर एक ऐसा माहौल बनाता है जहां एक दूसरे पर यकीन पनप सके. अगर कोई यकीन करने लायक नहीं है तो वह नेटवर्क के लिये सेंट्रल नहीं होगा.
एक्सक्लूसिव और अपने नेटवर्क की एकजुटता की वजह से, कंवीनर्स इंपॉर्टेंट सोशल एडवांटेज हासिल कर सकते हैं. स्ट्रांग टाईस से बने हुए नेटवर्क में, कनेक्शंस, हाई लेवल का मेंटल और इमोशनल बैंडविथ ऑफर करने के इच्छुक यानि विलिंग होते हैं. वह एक दूसरे की मदद के लिए टाइम देते और कोशिशें करते हैं. मिसाल के तौर पर प्रोफेशनल सेटिंग में एक कंवीनर अपने नेटवर्क के जरिए ज्यादा इंसाइडर इंफॉर्मेशन हासिल कर सकता है, ऐसा इसलिए क्योंकि उसका नेटवर्क उसके साथ वह इंफॉर्मेशन शेयर करना चाहता है.
नेटवर्क के इस स्ट्रक्चर के डिसएडवांटेज भी हैं. इस तरह के नेटवर्क में गुटबाजी होती है और वह बाहरियों का कोई वेलकम नहीं होता. एंट्री के लिए लगाये बैरियर्स और तय बिहेवियर की वजह से, ऐसे लोग होमोजेनियस हो सकते हैं.फिर भी इसे नकारा नहीं जा सकता कि अगर आप कंवीनर हैं, तो आपका ट्रस्टेड नेटवर्क आपको सोशल एडवांटेज पहुंचाएगा.
ब्रोकर अलग-अलग तरह के लोगों को एक साथ लाते हैं
फेरन एड्रिया दुनिया के बेहतरीन लिविंग शेफ में से एक हैं. एल बुली रेस्टोरेंट में काम के दौरान, उन्होंने फॉर्म्स और टेक्सचर पर एक्सपेरिमेंट करके बेहतरीन डिशेज़ बनायीं. हालांकि, एड्रिया एक काबिल शख्स की रेपुटेशन रखते हैं, लेकिन शेफ अपनी कामयाबी का क्रेडिट अपनी टीम और नेटवर्क को देने से पीछे नहीं हटते. एल बुली कोलैबोरेशन पर बेस्ड था, एड्रिया ने इंस्पिरेशन के लिए इसी फील्ड और फिजिक्स और आर्किटेक्चर जैसी दूसरी फील्ड में अपने दोस्तों की तलाश की. यहां एड्रिया एक क्लासिक ब्रोकर है.
एक जैसा इंटरेस्ट या आईडेंटिटी रखने वालों के बीच कंवीनर नेटवर्क अपने आप बन जाता है, जैसे, किसी यूनिवर्सिटी के एलुमनाई या टेक वर्कर्स. ब्रोकर थोड़ा सा चैलेंजिंग काम करते हैं. वह लोगों के ग्रुप के बीच ऐसे आर्डर में कनेक्शन बनाते हैं जहां अलग-अलग पर्सपेक्टिव और एक्सपर्टाइज़ आपस में साझा किए जा सके.
हावर्ड टीम की 2.5 मिलियन पेपर्स की रिसर्च में पाया गया की इनोवेटिव और क्रिएटिव आइडिया प्रेजेंटेशन एक डाइवर्स टीम द्वारा लिखे जाने के लिए चांसेज़ ज्यादा हैं. ब्रोकर ऐसी ही डाइवर्स टीम बनाते हैं. इनके नेटवर्कस इन्हें आइडिया और इनफॉर्मेशन को एक साथ लाने वाले ब्रिज के तौर पर देखते हैं, जो अक्सर खुद भी काफी क्रिएटिव होते हैं. ब्रोकर्स बेहतरीन काम करते हैं, लेकिन क्या चीजें एक इंसान को अच्छा ब्रोकर बनाती हैं?
ब्रोकर्स सेल्स मॉनिटर्स होते हैं साइकोलॉजी, सेल्फ मॉनिटर्स उन लोगों को कहती है जो दूसरों के सामने अपनी क्या इमेज पेश करनी है इसका कंट्रोल रखते हैं. हाई सेल्फ मॉनिटर्ड, माहौल के हिसाब से डिसाइड करते हैं कि उन्हें दूसरों के सामने अपनी कैसी इमेज पेश करनी है. दूसरी तरह कहे तो वह एक सोशल कमिलियन होते हैं, एक ऐसी क्वालिटी जिसकी मदद से वह एक बड़े लेवल पर कनेक्शंस बनाते हैं.
वह तेजी से अपने आप को माहौल में ढाल लेते हैं, मिसाल के तौर पर अपने आसपास के लोगों की तरह लैंग्वेज और तौर तरीका अपनाकर. याद रखने वाली बात यह है कि अक्सर सक्सेसफुल ब्रोकर्स में मॉनिटरिंग की खासियत नैचुरली होती है. और ऐसे लोग जबरदस्ती माहौल के हिसाब से अपनी इमेज पेश करने की कोशिश करते हैं, उन्हें फेक कहा जाता है.
ब्रोकर्स के अंदर सिर्फ अलग-अलग तरह के लोगों को आपस में मिला देने की खासियत नहीं होती. वह अलग-अलग तरह के लोगों की बातें सुनने में एक्सपर्ट होते हैं. एक फील्ड एक्सपेरिमेंट में यह एनालाइज करने की कोशिश की गई कि यूएस सेनेटर्स अपने कंस्टिट्युएंट्स से कैसे कम्युनिकेट करते हैं, इसमें पाया गया कि अगर सेनेटर किसी भी मुद्दे पर कांस्टीट्यूएंट के पॉलिटिकल ओहदे को मेंशन करते हुए लेटर का जवाब देते है तो कांस्टीट्यूएंट उन्हें ज्यादा फेवरेबली देखते है. ब्रोकर भी कुछ ऐसा ही करते हैं, वह अपनी ऑडियंस को स्पॉन्टेनियसली, और जल्दी जवाब देते हैं.
ब्रोकर्स की अनडूइंग, यहां अनडूइंग का मतलब अपने आप को ओपन-अप करना है, भी उनके लिए ब्लेसिंग हो सकती है. मैसेज को उसके मायने के साथ सेंसिटिवली एडजस्ट करके ब्लेंडइन करने में और इनऑथेंटिक और सेल्फ इंटरेस्टेड के तौर में पहचाने जाने में फर्क होता है. ब्रोकर्स ऐसे इंसान की इमेज बन जाने का रिस्क लेते हैं जो पसंद किए जाने और अपना मकसद हासिल करने के लिए कुछ भी कहने को तैयार रहता है. लेकिन वह अपनी क्वालिटीज़ का इस्तेमाल, लोगों को एक साथ लाने, मुश्किल कनफ्लिक्ट सुलझाने और अपने डायवर्स नेटवर्क में ट्रस्ट और जोश बढ़ाने के लिए कर सकते हैं.
एक्सपेंशनिस्ट का नेटवर्क काफी बड़ा होता है।
ज्यादातर लोगों के नेटवर्क में एवरेज तौर पर 600 लोग होते हैं. लेकिन एक्सपेंशनिस्ट के नेकवर्क में यह नंबर बहुत ज्यादा है. अमूमन एक्सपेंशनिस्ट उन लोगों की लिस्ट में आते हैं, जिन्हें नेटवर्क साइंटिस्ट सुपर कनेक्टर कहते हैं. ऐसे लोग जिनके नेटवर्क में 6000 या उससे ज्यादा के नंबर होते हैं.
बहुत सारे लोगों के लिए, सोशल मीडिया के तौर पर यह नंबर चौका देने वाले हैं. लेकिन 6000 अप्पर लिमिट नहीं है. अमेरिका के फॉर्मर प्रेसिडेंट फ्रैंकलीन रुजवेल्ट की एड्रेस बुक में 22,500 नाम थे. फेसबुक के इन्वेंशन से लगभग 60 साल पहले फ्रैंकलिन की डेथ हो गई थी, उस हिसाब से यह नंबर बहुत इंप्रेसिव है.
एक्सपेंशनिस्ट पॉपुलर होते हैं और पापुलैरिटी सोशल एडवांटेज ले आती है जो कई अलग तरह के एडवांटेज में बदलता है. रिसर्च बताती है कि स्कूल छोड़ने के चार दशक बाद भी स्कूल के दौरान पॉपुलर रहने वाले बच्चे गैर पॉपुलर के कंपैरिजन में ज्यादा कमाते हैं. हाल ही में हुई एक मेटा-स्टडी जिसने 130 पुरानी स्टडी को एनालाइज किया, पाया कि ज्यादा नेटवर्क वाले बेहतर परफॉर्म करते हैं और काम पर उन्हें ज्यादा एडवांचेज हासिल होते हैं.
पॉपुलर होना एक तरह से एक्सपेंशनिस्ट के लिए गारंटी है कि उनकी पॉपुलैरिटी बढ़ती रहेगी. साइंटिस्ट्स अल्बर्ट लैस्ज्लो बाराबेसी और रेका अल्बर्ट द्वारा दिया गया लैस्ज्लो-अल्बर्ट मॉडल, बताता है कि अगर किसी नेटवर्क के एक शख्स ने अपने काउंटरपार्ट के कनेक्शन को दोगुना कर दिया है तो पॉसिबिलिटी है कि वह भी और ज्यादा नये कनेक्शंस बनाये. क्यों? इसका जवाब है प्रेफरेंशियल अटैचमेंट. अगर हमें ऐसा लगता है कि किसी चीज या किसी इंसान को लोग ज्यादा पसंद कर रहे हैं तो नैचुरली हम उस चीज या इंसान को पसंद करने लगते हैं.
एक्सपेंशनिस्ट अपनी पॉपुलैरिटी बढ़ाते रहते हैं क्योंकि वह कम वक्त में डायरेक्ट कनेक्शन बनाने में माहिर होते हैं. ऐसे लोग एक्सट्रोवर्ट ना होने के बावजूद नॉनवर्बल कम्युनिकेशन करने की खासियत रखते हैं. वह एक अच्छे और एनर्जेटिक कम्युनिकेटर होते हैं.
ऐसे लोग सेल्फलेस काम को भी अपनी जिंदगी में जगह देते हैं, इसके लिए वह उन चीजों या लोगों में पैसा और वक्त इन्वेस्ट करते हैं जिनकी क्रेडिब्लिटी पर उन्हें यकीन होता है. कंवीनर से अलग अपने बड़े नेटवर्क की वजह से उनके पास किसी भी चीज में डीपली इंवॉल्व होने का वक्त नहीं रहता. एक्सपेंशनिस्ट अपने कनेक्शन को मीनिंगफुल तरीके से सपोर्ट नहीं कर पाते.
एक्सपेंशनिस्ट के नेटवर्क साइज की वजह से उनके नेटवर्क में वीक टाईस ज्यादा और स्ट्रांग टाईस बहुत कम होते हैं. इसका नुकसान भी हो सकता है. एक सर्वे में पाया गया कि काम नेटवर्क वाले लोगअपने फैमिली के बाहर के कनेक्शंस में से 6% लोगों के साथ करीबी रिश्ता रखते हैं, जबकि एक्सपेंशनिस्ट फैमिली के बाहर के कनेक्शंस में से सिर्फ 3% लोगों के साथ ही इंजॉय करते हैं. एक्सपेंशनिस्ट अपने बड़े नेटवर्क की वजह से स्ट्रांग टाईस वाले इमोशनल और प्रैक्टिकल एडवांटेज इंजॉय नहीं कर पाते.
दूसरे नेटवर्किंग स्टाइल का इस्तेमाल करिये और अपने फायदे के लिए नेटवर्क बनाइए
आप चाहे कंवीनर, ब्रोकर या एक्सपेंशनिस्ट हों आपका नेटवर्किंग स्टाइल नेचुरल होना चाहिए. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह पत्थर की लकीर हो गया. एक कंवीनर अलग तरह के बैकग्राउंड वाले अपने दो जान पहचान वालों के बीच ब्रोकिंग भी कर सकता है. या एक एक्सपेंशनिस्ट स्ट्रांग टाईस भी बना सकता है.
अगर आप अपने नेटवर्किंग गेम को बेहतर बनाना चाहते हैं तो दूसरे नेटवर्किंग स्टाइल की अच्छी टैक्टिक्स अपनाकर, नेटवर्किंग को हाइब्रिडाइज़ करना होगा.तो कैसे आप अपनी नेटवर्किंग स्टाइल अडेप्ट करके अपने कनेक्शंस से ज्यादा से ज्यादा फायदा हासिल कर सकते हैं?
याद रखिए, जिंदगी के अलग अलग स्टेज के लिए अलग-अलग नेटवर्किंग स्टाइल सूटेबल होती हैं. बहुत सारे वीक टाईस से बना एक्सपेंशनिस्ट नेटवर्क आपको जॉब ऑफर दिला सकता है. तो, अगर आप कॉलेज स्टूडेंट है तो अपना नेटवर्क बढ़ाने के बारे में सोचिए.
वहीं, बहुत सारे लोग अपने करियर के बीच में एक बेहतरीन ब्रोकर का किरदार अदा कर सकते हैं.
उनके पास कई स्किल्ड और पावरफुल कनेक्शंस बनाने का स्टेटस होता है, लेकिन उनका स्टेटस रिस्क अवॉइड करने के लिए काफी नहीं होता. अगर आप मिड-करियर एंप्लॉय हैं, तो अलग-अलग तरह के प्रोफेशनल्स के बीच कनेक्शंस बनाने की कोशिश कीजिए.
कंवीनर और ब्रोकर्स, स्ट्रांग रिलेशन बिल्ड करने में इंवेस्ट किए गए टाइम और दो अलग-अलग लोगों के बीच कनेक्शंस ब्रोकिंग में लगाए गए टाइम को आपस में स्विच कर सकते हैं. इससे कंवीनर्स अपने क्लोज सर्कल से बाहर डाइवर्स कनेक्शंस बना सकेंगे, जो उन्हें क्रिएटिव इनोवेशन की तरफ ले जा सकता है. इसके ज़रिए ब्रोकर्स भी चंद लोगों के साथ ट्रस्ट और डीप कनेक्शन बिल्ड कर सकते हैं, जो उनकी ब्रोकरिंग को क्रेडिबल बनाएगा.
कुछ वक्त के लिए इनएक्टिव हो जाने वाले टाईस को नजरअंदाज मत कीजिए. ऐसे कनेक्शंस को डोरमेंट टाईस कहते हैं. जैसे-जैसे हम जिंदगी में आगे बढ़ते हैं, हम उन लोगों से दूर हो जाते हैं जिनसे कभी बहुत क्लोज थे. हम में से काफी लोग इन रिलेशंस को दोबारा बनाने में शर्मिंदगी महसूस करते हैं. डोर्मेंट टाईस वैल्युएबल हो सकते हैं. अगर आप जिंदगी के अलग-अलग पड़ाव से गुजरे हैं तो ऐसे लोगों के साथ दोबारा कनेक्शन बनाकर आप फ्रेश फील करेंगे. आपका पहले वाला बॉन्ड कहीं नहीं जाएगा, हो सकता है, आप एक दूसरे से इतना क्लोज ना रहे, लेकिन फिर भी एक दूसरे पर कुछ हद तक यकीन होगा.
नेटवर्किंग को लेकर कोई बहुत पुख्ता नियम नहीं हैं. दूसरा नेटवर्क स्टाइल अपनाना, एक स्टाइल से दूसरे स्टाइल पर शिफ्ट करना, पुराने कनेक्शंस दोबारा बनाना, यही सब तरीके आपके अंदर नेटवर्किंग की काबिलियत पैदा करते हैं.
कनेक्शंस बनाना एक स्किल है जिसे सीखा जा सकता है।
नेटवर्किंग के कन्वेंशनल आईडियाज़ हमें “कनेक्शंस” पर फोकस करने के लिए कहते हैं. लेकिन इंडिविजुअल “कनेक्शन” का क्या.? आखिरकार, इनके बिना कोई नेटवर्क नहीं होगा. जैसे कनेक्शंस को मैनेज करना और उनसे फायदा हासिल करना जरूरी है वैसे ही डायरेक्ट रिलेशनशिप बनाना, मेंटेन करना और बढ़ाना भी ज़रूरी है, जिनसे आपका नेटवर्क बनता है.
कनेक्शंस बनाना चैलेंजिंग हो सकता है, लेकिन यह इंपॉसिबल नहीं है.
क्या आप नए कनेक्शंस बनाना चाहते हैं, यहां आपके लिए कुछ टिप्स हैं.
स्टेबल इंटरेक्शन में, सामने वाले को अपनी पूरी अटेंशन दीजिए. और हां इसके लिए आपको अपना फोन दूर रखना होगा. जब आप डिस्ट्रैक्ट हो जाते हैं, तो सामने वाले पर फोकस करने और उसको जवाब देने की एबिलिटी पर असर पड़ता है. फोन सिर्फ आपके फोकस पर असर नहीं डालता बल्कि यह इनअटेंशनल ब्लाइंडनेस की वजह भी बनता है. जब आप अपना फोन इस्तेमाल कर रहे होते हैं या फिर इसके बारे में सोच रहे होते हैं तो आपका फोकस टूट जाता है, दरअसल एक स्टडी में पार्टिसिपेंट्स से अपने फोन में देखने के लिए कहा गया, उन्होंने वैसा ही किया, ऐसे में सिर्फ 25% लोग ही यूनिसाइकिल की राइडिंग करते हुए गुज़रने वाले जोकर को देख सके.
सामने वाले के साथ आई कॉन्टैक्ट बनाने का मतलब है आप उसे अपनी पूरी अटेंशन दे रहे हैं. आई कांटेक्ट इनीशिएट करने वाले ऐसा न करने वालों के कंपैरिजन में ज़्यादा गुडलुकिंग, यकीन करने लायक और पसंद किए जाते हैं. आई कांटेक्ट बहुत लंबे वक्त के लिए मेंटेन करने की जरूरत नहीं है. ज्यादा से ज्यादा एक बार में 3 सेकंड के लिए ही किसी की आंखों में देखिए. इससे ज्यादा करने पर एक्सट्रीम या इंटेंस समझे जाने का जोखिम रहता है.
और आखिर में याद रखिए कि सही क्वेश्चन पूछे जाने में बहुत ताकत होती है. लोग अपने बारे में बात करना पसंद करते हैं. उनके लिए ऐसा माहौल तैयार कीजिए कि वह ऐसा कर सकें, वह आपको पसंद करने लगेंगे. डेट करने वालों पर की गई हावर्ड यूनिवर्सिटी की स्टडी बताती है कि जो ज्यादा क्वेश्चन पूछता है अपने पार्टनर के साथ कनेक्शन बनाने के उसके चांसेस ज़्यादा होते हैं. बस यह इंश्योर कीजिए कि आप सही सवाल पूछ रहे हैं, खासतौर पर फॉलो अप क्वेश्चंस. बहुत सारे सवाल बातचीत को सवाल करने वाले के इर्द-गिर्द घुमा देते हैं. इसलिए “आप क्या करते हैं” तरह का सवाल के बाद, “आपको आपकी जॉब में कौन सी चीज सबसे ज्यादा पसंद है”. जैसे फॉलो-अप क्वेश्चन कीजिये. इस तरह के सवाल अपने पार्टनर के बारे में जानने के लिये जेनुइन इंटरेस्ट दिखाते हैं.
किसी नये इंसान के साथ बातचीत शुरू करना हमेशा आसान नहीं होता. लेकिन अपनी जान पहचान वाले को आई कांटेक्ट के जरिए अटेंशन देकर, सवाल करके और फोन टच करना अवॉइड करके, आप फ्यूचर में बनने वाले रिलेशनशिप की अच्छी नींव रख सकते हैं.
आपका नेटवर्क आप को दुनिया भर से कनेक्ट करता है
क्या आपने कभी “सिक्स डिग्री ऑफ सेप्रेशन” थ्योरी के बारे में सुना है. यह कहता है कि इस दुनिया में थ्योरैटिकली इंसान हर दूसरे इंसान से सिर्फ 6 कनेक्शन दूर है. यह 1967 में स्टेनली मिलग्रैम द्वारा किए गए रिसर्च में पाया गया है. उन्होंने यूएस में 300 लोगों को एक पैकेट दिया. हर पैकेट का एक ही टारगेट था- बॉस्टन में काम करने वाले स्टॉक ब्रोकर. पार्टिसिपेंट्स ने यह पैकेट उन लोगों को पास कर दिया जिन्हें वह फर्स्ट नेम से जानते थे. आखिर में स्टॉक ब्रोकर तक पहुंचाने के लिए पैकेट सिर्फ 5.2 इंटरमीडियरीज द्वारा पास किया गया.
मिलग्रैम के एक्सपेरिमेंट का टाइटल, “ द स्माल वर्ल्ड प्रॉब्लम” था. और इसके रिजल्ट से यह नतीजा निकाला जा सकता है कि दुनिया आपकी सोच कहीं ज़्यादा छोटी है. दूसरी याद रखने वाली बात यह है, कि आपसे ज्यादा आपके नेटवर्क की पहुंच हो सकती है.
दुनिया भर में लगभग 7.7बिलियन लोग रहते हैं. तो ह्यूमन नेटवर्क इनसे इतना इफेक्टिवली कनेक्शन कैसे बनाता है,
ह्यूमन नेटवर्क सिर्फ स्ट्रॉंग और वीक टाईस से नहीं बने होते, इनमें ऑर्डर्ड और रेंडम कनेक्शंस भी होते हैं.मैथ्स में, रेगुलर नेटवर्क वह नेटवर्क होता है जो लगातार और आर्डर में बिहेव करता है. मिसाल के तौर पर, नेटवर्क में हर पॉइंट इसे क्लोज करने वाले , पॉइंट से कनेक्ट करता है.वही रेंडम नेटवर्क में कोई कंसिस्टेंसी, पैटर्न नहीं होता, कि नेटवर्क में पॉइंट आपस में कैसे इंटरसेक्ट होते हैं.
ह्यूमन नेटवर्क में रेंडम और रेगुलर नेटवर्क दोनों के प्रिंसिपल होते हैं. आपके कुछ कनेक्शन प्रिडिक्टेबल होते हैं, कि वह बनेंगे ही बनेंगे. ऐसे कनेक्शन फैमिली, ज्योग्राफी और प्रॉफेशन के आधार पर बनते हैं. दूसरे आपकी लाइफ में वाइल्ड कार्ड एंट्री लेते हैं, वह इंसान जो आपके साथ लिफ्ट में था या फिर वह लेडी जो प्लेन में आप के बगल में बैठी थीं.
रिसर्चर्स डंकन वाट्स और स्टीवन स्ट्रोगेट्स इस ह्यूमन नेटवर्क को द स्माल वर्ल्ड नेटवर्क कहते हैं. जिससे पता चलता है कि ऑर्डर और रेंडमनेस का मिक्चर ही आपके नेटवर्क को बड़ा बनाता है. स्माल वर्ल्ड नेटवर्क में बहुत क्लोजली कनेक्टेड ग्रुप वाइल्ड कार्ड कनेक्शन के ज़रिए दूसरे ग्रुप से जुड़ते हैं.
स्मॉल वर्ल्ड नेटवर्क में हर तरह के नेटवर्किंग का किरदार होता है, कंविनर्स अपने आसपास कनेक्शंस का ग्रुप बनाते हैं, ब्रोकर्स इन ग्रुप्स को आपस में जोड़ते हैं. और एक्सपेंशनिस्ट एक ही वक्त पर कई ग्रुप को इंस्पायर कर और एक साथ ला सकते हैं.आपका नेटवर्क स्टाइल कुछ भी हो, आपके कनेक्शंस आपको जिंदगी में आगे ले जाने के काबिल पावरफुल रिसोर्स होते हैं.
कुल मिलाकर
नेटवर्किंग कोई काम नहीं है, असल में नेटवर्किंग एक मजे़दार चीज है. अच्छे से नेटवर्क करने के लिए अपने नेटवर्क स्टाइल को समझिए, स्ट्रांग रिलेशंस और वीक टाईस बनाइए, नये कनेक्शंस बनाने से मत डरिए.
क्या करें?
अपने फर्स्ट इंप्रेशन को क्रिटिसाइज मत कीजिए
चाहे किसी अंजान इंसान के साथ आपकी मुलाकात अच्छी गुज़री हो, लेकिन इसके बावजूद आप बाद में इसे एनालाइज करेंगे, सोचते रहेंगे कि क्या आपने अच्छा इंप्रेशन डाला. रिलैक्स. येल यूनिवर्सिटी ने अपनी रिसर्च में जब पार्टिसिपेंट्स को शुरुआती मुलाकात में अनजान इंसान के इंप्रेशन को रेट करने के लिए कहा, तो पार्टिसिपेंट्स ने इस बात को बहुत कम आंकां कि सामने वाले ने उस मुलाकात को कितना इंजॉय किया. अपने इंटरेक्शन के नाकाम होने की चिंताएं सिर्फ आपका दिमागी वहम हैं.
येबुक एप पर आप सुन रहे थे Social ChemistryBy Marissa King
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