Edgar H. Schein
बताने के बजाय पूछने की कला
दो लफ्जों में
हंबल इंक्वायरी (2013) सही सवाल सही तरीके से पूछने की आर्ट के बेसिक प्रिंसिपल पर बेस्ड है. समरी इस बात को एग्ज़माइन करती है कि कैसे आपका इंक्वायरी करने का अप्रोच आपके प्रोफेशनल रिलेशनशिप, काम को कंप्लीट करने की एबिलिटी और एक लीडर के तौर पर आपकी सक्सेस पर असर डालता है.
किनके लिये है?
- कोई भी, जो अपनी प्रोफेशनल कम्युनिकेशन बेहतर करना चाहता हो
- बेहतरीन लीडर बनने की ख्वाहिश रखने वाला
- कोई भी, जो यह सीखना चाहता है कि सही सवाल कैसे पूछे जाएं
लेखक के बारे में
edgar H. Schein मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में मैनेजमेंट एमेरिटस के स्लोअन फेलो प्रोफेसर हैं. उन्हें अपने करियर में कई अवॉर्ड्स और ऑनर मिले, उन्होंने "आर्गनाइज़ेशनल कल्चर एण्ड लीडरशिप" और "द कॉरपोरेट कल्चर सर्वाइवल गाइड" सहित कई किताबें लिखी.
अगर एंप्लॉय अपनी सोच खुलकर जाहिर नहीं कर पाते, तो आप एक सक्सेसफुल टीम कभी नहीं बना पाएंगे
मंडे है, और आपका बॉस फोन करके कहता है, "मैंने नोटिस किया है तुम बहुत खराब काम कर रहे हो, मुझे लगता है कि तुम प्रॉब्लम को गलत तरीके से सॉल्व करने कर रहे हो."
ऐसी सिचुएशन में, आपको क्या लगता है आप कैसा महसूस करेंगे? आपका दिल टूट जाएगा और आप डिसएप्वाइंट हो जाएंगे, न? इससे भी ज्यादा यह कि अपने आप को इंप्रूव करने के बजाय हो सकता है आप अपने बॉस के खिलाफ़ हो जायें. अब एक दूसरी सिचुएशन इमेजिन कीजिए, आपका बॉस आपसे पूछता है, "तुम्हारा काम कैसा चल रहा है? क्या तुम कुछ बदलो गे"? जब इस तरीके से बात की जाती है तो आप उदास और नाराज होने की जगह अपने काम में ज्यादा इंगेज होने लगते हैं. इस समरी में हम हम्बल इंक्वायरी की पावर जानेंगे. दूसरी तरह कहें, तो बताने की बजाय कैसे पूछा जाए. हम कम्युनिकेशन के उन सीक्रेट के बारे में जानेंगे जो किसी भी फील्ड के लीडर के लिए इंपॉर्टेंट हैं। इस समरी में हम जानेंगे कि रिले रेस जीतने का सबसे अच्छा तरीका क्या है? नोबेल प्राइज़ विनर की प्रेजेंस में आपको कैसे बिहेव करना चाहिए, और हमें क्यों अपने बच्चों पर चिल्लाना नहीं चाहिए?
तो चलिए शुरू करते हैं!
ग्रेट टीन सुनते ही आपके दिमाग में क्या आता है? अपनी कुछ फेवरेट स्पोर्ट टीम के बारे में सोचिए जिनके करेज और यूनिटी के चलते उन्होंने जीत हासिल की हो. क्या चीजें एक बेहतरीन टीम बनाती हैं? क्या कुछ काबिल लोगों को एक साथ ले आना काफी है? नहीं, जो चीज 1 ग्रेट टीम बनाती है वह टीम मेंबर के बीच का रिलेशनशिप है. अच्छी कम्युनिकेशन स्किल इस रिलेशनशिप को मजबूत बनाती है.क्वार्टरबैक से लाइनमैन तक, टीम का हर मेंबर एक दूसरे से कुछ भी बताने में कंफर्टेबल है. "लेफ्ट जाओ!" "आइ एम ओपन!" "ग्रेट पास!" हर प्लेयर बिना किसी डर के अपनी बात कहता है, बिना किसी झिझक के ओपिनियन दिए जाते हैं और हर किसी को पार्टिसिपेट करने का मौका मिलता है. बहुत सारे बिजनेस लीडर अपनी टीम में भी वही टीमवर्क चाहते हैं जो उनकी फेवरेट स्पोर्ट्स टीम के बीच है, लेकिन एंप्लॉय और मैनेजर के बीच के कम्युनिकेशन बैरियर की वजह से नाकाम रह जाते हैं. अक्सर एंप्लॉय अपना कोई भी मैटर बॉस से शेयर करने में झिझकते हैं, वह डरते हैं कि अपनी जरूरतों को जाहिर करने और क्रिटिसाइज करने का उनके करियर पर बुरा असर पड़ेगा. आप खुद इसके बारे में सोचिए क्या आप अपने बॉस के पास जाकर कह सकेंगे कि कंपनी की स्ट्रेटजी में बहुत सारी कमियां है?
कम्युनिकेशन की कमी का बहुत बुरा नतीजा हो सकता है. मिसाल के तौर पर कंपनी के लो लेवल वर्कर का कंपनी के टॉप तक इंफॉर्मेशन ना पहुंचा पाना, कम्युनिकेशन की कमी ही मेक्सिको की खाड़ी में तेल के रिसाव की वजह था। बिज़नेस लीडर्स को एक ऐसा एनवायरमेंट क्रिएट करने की जरूरत है जिसमें एंपलॉयज़ कोई भी थॉट और आइडिया बिना किसी झिझक के शेयर कर सकें। यकीनन, कहना करने से ज्यादा आसान हैं. आगे हम जानेंगे, कैसे.
एक अच्छी टीम बनाने के लिए आपको ऐसे सवाल पूछने होंगे जो यकीन के साथ ही दूसरों के लिए इज्जत भी जाहिर करें
इमेजिन कीजिए कि आप अपने डिपार्टमेंट के हेड हैं, मोराल बिल्ड करने के लिए, आप दूसरे डिपार्टमेंट को रिले रेस के लिए चैलेंज करते हैं। आपको सबसे पहले दौड़ना है, जैसे ही आप बैटन स्वैप करने की जगह पर पहुंचते हैं, अपने एंप्लॉय को कहते हैं "अपना बाया हाथ बाहर निकालो," ताकि आप उसे बैटन दे सकें। क्योंकि आप उसके बॉस हैं, इसलिए आप के कहने पर उसने फौरन अपना बाया हाथ बाहर कर दिया, लेकिन उसके हाथ में चोट लगी है और जैसे ही आपने उसे बैटन दिया वह उसके हाथ से गिर जाता है। आप इससे अलग क्या कर सकते थे? आपको यह समझना होगा, कि आपके बॉस होने की वजह से लोग आपसे डिसएग्री करने से डरते होंगे, इसलिए आपको हंबल इंक्वायरी का सहारा लेना होगा. हंबल इंक्वायरी का मतलब, इस तरीके से सवाल पूछना है कि सामने वाले को एहसास हो, कि उसका नजरिया भी मायने रखता है, और आप उनके फैसले की इज्ज़त करते हैं.
रिले रेस स्टार्ट होने से पहले आपको अपने कलीग से पूछना चाहिए था "किस हाथ में मुझे बैटन देनी चाहिए," ना कि अचानक से डिमांड करना. हंबल इंक्वायरी सिर्फ सवाल पूछने की स्ट्रेटजी नहीं बल्कि एक एटीट्यूड है.
डिपार्टमेंट में 15 प्रोफेसर होने के चलते, एक बार डीन ने लेखक को नोट भेजा कि डिपार्टमेंट का फोन बिल बहुत ज्यादा है. उन्हें एक लिस्ट भी दी गई जिसमें सभी प्रोफेसर द्वारा किए गए कॉल की डिटेल थी ताकि उन्हें प्रॉब्लम समझने और सॉल्व करने में आसानी हो. जिस नज़रिये से लेखक ने इस लिस्ट को समझा, उस हिसाब से इस प्रॉब्लम को सॉल्व करने के 3 तरीके थे. वह सभी प्रोफेसर के साथ बैठकर इस पर डिस्कस कर सकते थे, खुद से ही लिस्ट एनालाइज करके ज्यादा बिल आने के ज़िम्मेदार लोगों से इंडिविजुअली बात कर सकते थे, या फिर वह सभी प्रोफेसर के पास लिस्ट भेज कर प्रॉब्लम के सल्यूशन के बारे में पूछ सकते थे. तीसरा ऑप्शन फेलो प्रोफेसर पर ज्यादा यकीन और डिपेंडेंसी जाहिर करता था, इसलिए लेखक ने वही किया, और वह कारगर रहा. बहुत सारे फकैलिटी मेंबर ने माना कि उन्होंने पर्सनल कॉल करके बिल बढ़ाया है, ऐसा आइंदा से नहीं करेंगे.
आपको कितनी जल्दी जवाब चाहिए, इस आधार पर कई तरह से हंबल इंक्वायरी की जा सकती है
सवाल पूछने के कई तरीके हैं. आप सामने वाले को बिना ऑफेंड किए घुमा फिरा कर सवाल कर सकते हैं, या सीधे मुद्दे की बात भी कर सकते हैं. चाहे आप किसी भी तरह पूछें, बस हंबल रहिए. लेकिन प्रैक्टिकल तौर पर हम्बल रहने का क्या मतलब है? जब आप हंबल इंक्वायरी का तरीका अपनाते हैं, तो आप सच में जानना चाहते हैं कि सामने वाले के दिमाग में क्या है. जब हम "really" कहते हैं, तो हमारा मतलब भी वही होता है. हंबल इंक्वायरी डेफिनेशन से सिंसेयर है. इसके साथ ही, आपकी बॉडी लैंग्वेज और टोन से सामने वाले को यह पता चल जाएगा कि आप सच में कितनी केयर करते हैं. डिजिटल इक्विपमेंट कॉरपोरेशन के फाउंडर, केन ओसलेन, कंपनी के ऑफिस में टहलना पसंद करते हैं, और कभी-कभी इंजीनियर के डेस्क पर ठहर कर पूछ लेते हैं, "तुम किस चीज पर काम कर रहे हो?"
हंबल इंक्वायरी से जुड़ा यह सिंपल सा क्वेश्चन, ऐसी कन्वर्सेशन शुरू कर सकता है, जो आपको पर्सनली और प्रोफेशनली दोनों तरीके से फायदेमंद लगेगी. इस तरह के सवाल के ज़रिए ओसलेन ना सिर्फ अपने एंपलॉयज़ के बारे में जान जाते हैं, बल्कि उन्हें यह भी पता चल जाता है कि वह क्या काम कर रहे हैं. ओसलेन का यह हम्बल स्टाइल ही था, जिसके जरिए उन्होंने लाखों एंपलॉयज़ की इज्जत कमा ली. हालांकि कभी-कभी आपको अपने इंटरेस्ट के हिसाब से कन्वर्सेशन के तह में जाने की जरूरत पड़ती है. इसी को डायग्नोस्टिक इंक्वायरी कहते हैं. डायग्नोस्टिक इंक्वायरी किसी पर्टिकुलर पॉइंट से रिलेटेड सवाल करके आपको उसके बारे में ज़्यादा जानने में मदद करती है. मिसाल के तौर पर, अगर आप किसी ऐसे दोस्त के साथ हैं, जिसने हाल ही में अपनी जॉब बदली है, तो आप उससे कुछ इस तरह के डायग्नोस्टिक सवाल पूछ सकते हैं-
डायग्नोस्टिक इंक्वायरी हंबल होनी चाहिए ताकि सामने वाला आपके सवालों से आफेंड न हो, उसे अपनी बातें इम्पॉर्टेंट लगें.
अपनी कन्वर्सेशन को आगे बढ़ाने और उसकी वैल्यू मेजर करने के लिए हम्बल इंक्वायरी इस्तेमाल कीजिए
हंबल इंक्वायरी को दो तरह की इंक्वायरी में बांटा जा सकता है, जो इस बात पर डिपेंड करता है कि आप कन्वर्सेशन से हासिल क्या करना चाहते हैं. मिसाल के तौर पर, अगर आपको बातचीत को किसी डायरेक्शन में ले जाना है तो आप कन्फ्रंटेशनल इंक्वायरी का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके तहत आप अपने आइडिया को क्वेश्चन की तरह पेश करते हैं. कन्फ्रंटेशनल इंक्वायरी में आप क्यूरियस और इंटरेस्टेड तो होते ही हैं, साथ में आपको यह भी लगता है कि आप अपनी तरफ से कुछ मीनिंगफुल जोड़ कर अपने कन्वर्सेशन पार्टनर से ज्यादा इंफॉर्मेशन हासिल कर सकते हैं. मिसाल के तौर पर, अगर आप मीटिंग के दौरान अपने कुछ कलीग्स को कुर्सी पर अनकंफरटेबली हिलते ढुलते नोटिस करते हैं तो आप मीटिंग के बाद दुसरे कोवर्कर से पूछ सकते हैं, "क्या तुम्हें लगता है कि वह लोग इसलिए ऐसा कर रहे थे क्योंकि वह नर्वस या अनकंफरटेबल थे?" ना कि डायरेक्टली पूछा जाए कि "वह लोग क्यों हिल रहे थे?"
यहां पर एक चीज याद रखने वाली है कि जिससे आप सवाल करें वह आपके सवालों से कंफ्रंटेड ना महसूस करे, उसे आपका इरादा साफ लगना चाहिए. अगर इरादे की बात करें तो, कंफ्रंटल इंक्वायरी शुरू करने से पहले आपको अपने इरादे के बारे में मालूम होना चाहिए. अगर आपको लगता है कि सामने वाले से सवाल पूछना सिर्फ आपके असंप्शन को टेस्ट करना होगा तो इस स्ट्रेटजी का इस्तेमाल मत कीजिए. इस इंक्वायरी का इस्तेमाल तभी कीजिए जब आप अपने कंवर्जेशन पार्टनर की मदद करना और सामने वाले के नजरिये को जानना चाहते हों. इस बात को इंश्योर करने के लिए कि आपके कंवर्जेशन में ह्यूमिलिटी बरकरार रहे, आपको प्रोसेस-ओरिएंटेड इंक्वायरी के जरिए कंवर्जेशन पर ही फोकस करने की जरूरत पड़ सकती है. कभी-कभी आप नोटिस करते हैं कि कन्वर्सेशन कुछ इस तरह से पटरी से उतर जाती है कि आपका कन्वर्सेशन पार्टनर अनकंफरटेबल फील करने लगता है. ऐसे में आपको यह पता लगाने की जरूरत पड़ सकती है कि आपका कन्वर्सेशन पार्टनर कन्वर्सेशन के बारे में क्या महसूस कर रहा है.
मिसाल के तौर पर, आप उससे कुछ इस तरह के सवाल कर सकते हैं- "आर वी स्टिल ओके?" "मैने तुम्हे ऑफेंड तो नहीं किया?" "क्या हमारी कंवर्सेशन सही डायरेक्शन में जा रही?" या "मै ज़्यादा पर्सनल तो नहीं हो गयी?"
इस तरह की इंक्वायरी आपके और आपके कन्वर्सेशन पार्टनर के रिलेशनशिप पर फोकस करती है, और इंश्योर करती है कि आप दोनों में से किसी पर ज्यादा दबाव ना बने और दोनों की ही एक्सपेक्टेशन पूरी हों.
अभी तक, हमने जाना कि हंबल इंक्वायरी क्या होती है और इसे कैसे अप्लाई किया जाता है. आगे हम उन रुकावटों के बारे में जानेंगे जो अक्सर आपके और कम्युनिकेशन पार्टनर के बीच में आती हैं.
"सिर्फ काम पूरा करना" अच्छे कम्युनिकेशन के बीच आता है और यह हंबल इंक्वायरी को भी रोकता है।
क्या आपने कभी अपने को-वर्कर से किसी प्रोजेक्ट में मदद मांगी है और उन्होंने सीधे तौर पर कह दिया, "नहीं! क्या तुम नहीं देख सकते कि मैं अपने काम में बिजी हूं?" इस तरह के जवाब हमें ह्युमिल्येटेड और उदास कर देते हैं.
अनफॉर्चूनेटली, आज के काम निकालने के कल्चर में यह एटीट्यूड आम हो गया है, जिसका हमारे बिजनेस पर गहरा असर पड़ सकता है. अमेरिकन वर्कप्लेस में लोग खुद को मिले काम को पूरा करके स्टेटस हासिल करते हैं. इसलिए अगर आप इंटरनल रिवेन्यू सर्विस के लिए टैक्स अनालिस्ट का काम करते हैं, आपको ऑडिट करने के लिए अकाउंट की लिस्ट दे दी जाएगी और एक्सपेक्ट किया जाएगा कि आप पूरी की पूरी लिस्ट कंप्लीट कर लें. और जो लोग ऐसा कर लेते हैं अमूमन उन्हें ही प्रमोशन का रिवार्ड मिलता है. और फिर इन न्यूली प्रमोटेड लोगों से एक्सपेक्ट किया जाता है कि वह अपने नीचे काम कर रहे लोगों को डिक्टेट करके अपना काम कराएं. इस अपरोच को डु-एण्ड-टेल कहते हैं, और यह ऐसे कल्चर को प्रमोट करता है जहां टॉप लेवल के लोग अपने सब-ऑर्डिनेट को डिजरिस्पेक्ट कर सकते हैं .
ना सिर्फ यह डिजरिस्पेक्ट बेवजह है, बल्कि कम्युनिकेशन के बीच रुकावट भी है. यह कल्चर पूछने के बजाय बताने को तरजीह देता है और इतना हावी होता है कि ना काबिलियत का साइन माना जाता है. जब एक मैनेजर आपने एंप्लॉय से पूछता है, "हम यहां पर क्या कर सकते हैं?" उसे उसकी जॉब के लिए ना काबिल समझा जाता है. वहीं दूसरी तरफ बताने को अच्छी आदत के तौर पर देखा जाता है! जब लेखक ने मैनेजमेंट स्टूडेंट्स से पूछा कि मैनेजर बन जाना उनके लिए कैसा है, तो उन्होंने जवाब दिया, "तब वह लोगों को बता सकते हैं कि क्या करना है."
यह एटीट्यूड पूरी तरीके से गलत है, और अच्छे कम्युनिकेशन के बीच बैरियर बनता है, नतीजतन अच्छे काम के बीच.
स्टेटस और सोशल रैंक को लेकर हमारी सनक हंबल इंक्वायरी के बीच रुकावट बनती है
आज बिजनेस और कल्चर में उहदा बहुत इंपॉर्टेंट रोल अदा करता है. अगर किसी ने ऑफिस के सीईओ को कीपर के साथ गोल खेलते देख लिया तो यह ख़बर ऑफिस की हॉट गॉसिप बन जाती है. ऐसा क्यों है? रैंक को लेकर हमारा ऑब्सेशन सिर्फ लोगों के बीच में बे वजह का बैरियर खड़ा करता है और हमें अच्छे रिश्ते बनाने से रोकता है. जब हम नए लोगों से मिलते हैं, तो हम ऐसे सवाल करते हैं जिससे उनके स्टेटस का पता लगाया जा सके, और फिर हमारा रवैया उसी हिसाब से बदल जाता है.
मिसाल के तौर पर, जब लेखक मीटिंग में थे तो किसी अंडरग्रैजुएट ने उनके साथ तस्वीर खिचाने के लिए कहा. इस बारे में उनका असंप्शन यह था कि प्रोफेसर होने के नाते उनका स्टेटस हाई है, इसलिए उन्हें एक बड़ी सी स्माइल के साथ पोज़ करना चाहिए. वहीं दूसरी तरफ जब उनकी मुलाकात नोबेल प्राइज विनर से हुई जिनके बारे में उनका ख्याल था कि वह हाई स्टेटस रखते हैं, वह पूरी तरीके से हैरान थे, उनकी तरफ ज़्यादा रिस्पेक्टफुल हो गए और हम्बल इंक्वारीज़ कीं. इससे पता चलता है, कि अगर हम खुद को हाई स्टेटस वाला समझते हैं तो पॉसिबल है कि हम हंबल इंक्वायरी ना करें. तो, यह सब प्रोफेशनल वर्ल्ड में कैसे काम करता है?
डु-एण्ड-टेल सिस्टम में हम उन्हीं से हंबल इंक्वायरी करते हैं जिन्हें हम खुद से हाई स्टेटस वाला समझते हैं वहीं दूसरी तरफ, जब कंट्रोल हमारे हाथ में होता है तो हम सामने वाले को कम इज्जत देते हैं. मिसाल के तौर पर, अगर आप किसी स्टोर में सूट खरीद रहे हैं तो सेल्समैन आपको बहुत इज्जत से ट्रीट करेगा, शायद बहुत ज़्यादा ही इज्ज़त! वहीं यह थोड़ा मुश्किल है कि आप कस्टमर के तौर पर उसे वैसी ही इज्जत दें. वहीं जब आपका सूट सिल रहा हो, तो मुमकिन है कि आप टेलर के डायरेक्शन को माने क्योंकि वहां पर कंट्रोल उसके हाथ में होता है.
सही माइंड-सेट बेहतर तरीके से कम्युनिकेट करने में मदद करता है, और हंबल इंक्वायरी को आसान बनाता है। अभी हमने जाना कि कैसे सोशल स्टेटस हंबल इंक्वायरी के बीच रुकावट बन जाता है. अब हम जानेंगे कि हमारे माइंडसेट का सवालों पर क्या असर पड़ता है. हमें क्रिटिसिज्म नहीं पसंद. इसलिए हम में से ज्यादातर लोग अपनी फीलिंग को छुपाने की पूरी कोशिश करते हैं.
इसका, अपना नतीजा होता है. सेफ प्ले करना, रिलेशनशिप बनाने की हमारी एबिलिटी को नुकसान पहुंचाता है, जो हंबल इंक्वायरी के लिए जरूरी है. तो, हम ऐसे माइंडसेट से कैसे बच सकते हैं? एक तरीका अपने बारे में कुछ बता कर उनसे खुलकर पर पेश आना है. यह दिखा करके कि खुलकर बातें कहना सेफ है, आप अपने टीम मेंबर्स को भी फ्रीली अपनी फीलिग्स और डाउट शेयर करने के लिये इंकरेज कर सकेंगे. मिसाल के तौर पर अगर आपको कराओके पसंद है तो आप अपने कलीग्स को गाने को लेकर आपकी पसंद पर अपने फेवरेट कराओके बार के बारे में बता सकते हैं. हो सकता है इसी दौरान कोई और अपनी हॉबी के बारे में बताने लगे और ऐसे टीम एक हेल्थी और स्ट्रांग रिलेशनशिप की ओर बढ़ जाएगी. इसके साथ ही हमारा, अप्रोच का, एक नैचुरल तरीका भी होता है, जिसमें हम ज़्यादा आब्जेक्टिव स्टैंड लेने के बजाय अपने पर्सनल बायसेस के आधार पर झुकते हैं. यह हमारी कम्युनिकेशन एबिलिटी को बुरी तरीके से खराब कर सकता है. लेखक का एक स्टूडेंट अपने एग्जाम के लिए बेसमेंट पढ़ाई कर रहा था. उसने सुना कि उसकी 6 साल की बच्ची दरवाजे पर खटखटा रही है, जबकि उसने पहले ही उसे डिस्टर्ब ना करने के लिए कहा था. उसने गुस्से में उसे ऊपर जाने के लिए कहा, जिसकी वजह से वह रोने लगी. दूसरे दिन उसकी वाइफ ने बताया कि उसने बच्ची को इसलिए भेजा था ताकि वह तुम्हें गुड नाइट कह सके और पूछ सके कि तुम्हें कॉफी वगैरा तो नहीं चाहिए.
अगर यहां पर स्टूडेंट ने हंबल इंक्वायरी का इस्तेमाल करके अपनी बच्ची से यह पूछा होता कि वह क्यों आई है तो वह गुस्से से भी बच जाता और बच्ची को रुलाता भी नहीं. यहां सीख यह है, कि जजमेंट देने से पहले जानिए कि असल में मामला क्या है.
कुल मिलाकर
अच्छा कम्युनिकेशन अच्छे रिश्ते पर डिपेंड करता है. हंबल इंक्वायरी के जरिए आप अपने कन्वर्सेशन पार्टनर में दिलचस्पी और यकीन दिखा सकते हैं जो एक साथ मिलकर स्ट्रॉग और मीनिंगफुल रिश्ता बनाते हैं.
येबुक एप पर आप सुन रहे थे Humble Inquiry by Edgar H. Schein
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