Set Boundaries, Find Peace

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Set Boundaries, Find Peace

Nedra Glover Tawwab
खुद को बदलना चाहते हैं? तो फिर इस किताब को एक गाइड की तरह पढ़िए और सुनिए

दो लफ्ज़ों में
क्या आपको भी लाइफ के बारे में जानने की उत्सुकता होती है? क्या आपको भी अपनी लाइफ को बेहतर करने की इच्छा है? अगर हाँ, तो फिर साल 2021 में रिलीज़ हुई किताब “Set Boundaries, Find Peace”आपके इस काम को आसान कर देगी. इस किताब की मदद से आप बाउंडरीज़ के बारे में भी अच्छे से समझने लगेंगे. आपको पता चल जाएगा कि लाइफ में बाउंडरीज़ का होना क्यों ज़रूरी है? इसी के साथ आपको ये भी पता चलेगा कि इन बाउंडरीज़ को अपनी लाइफ में कैसे यूज़ किया जा सकता है? इस किताब के चैप्टर्स का असर आपकी पर्सनालिटी में ऐसे पड़ेगा कि आप और ज्यादा मज़बूत होकर निकलेंगे. 

ये किताब किसके लिए है 
- ऐसे लोग जिनसे ‘ना’ कहते नहीं आता है 
- ऐसे कपल जिनके बीच में दिक्कत चल रही हो 
- ऐसा कोई भी जिसको बाउंडरीज़ के महत्व को समझना हो 

लेखिका के बारे में
इस किताब को लेखिका Nedra Glover Tawwab ने लिखा है. उन्हें रिलेशनशिप एक्सपर्ट के तौर पर 12 सालों से भी ज्यादा का अनुभव है. उन्होंने अपने अनुभव के दम पर का लोगों के रिलेशनशिप इश्यु को सॉल्व किया है. अपने सालों के अनुभव को लेखिका ने शब्दों के माध्यम से इस किताब में पिरो दिया है. उन्होंने अपनी फिलॉसफी की मदद से उस रीज़न का पता लगा लिया है. जिसके कारण अधिकतर रिलेशनशिप में दिक्कतें देखने को मिलती हैं. उस रीज़न का नाम ‘अनहेल्दी बाउंडरीज़’ ह. 

हेल्दी रिलेशनशिप के लिए हेल्दी बाउंडरीज़ की ज़रूरत होती है
आज के बदलते हुए दौर में इस सवाल का आना लाज़मी है कि किसी भी चीज़ में मेरा क्या फायदा है? अब इस किताब को पढ़कर या सुनकर आपको क्या फायदा होगा? आपको इसका पता तो किताब की समरी को सुनने के बाद ही चलेगा. उसके लिए आपको थोड़ा सा पेशन्स दिखाना होगा. आपको कई बार लोगों ने ये भी कहा होगा कि अपनी रिलेशनशिप में हेल्दी बाउंडरीज़ का निर्माण करिए. लेकिन क्या आपको इसका मतलब पता है? 

इसको सुनकर ऐसा लगता है कि जैसे आपको एक वॉल का निर्माण करना हो, उसी वॉल की मदद से आप दो लोगों के बीच में दूरियां लाकर रख सकते हैं. लेकिन आपको बता दें कि हर बार बाउंडरीज़ का लेना देना दूरियों से नहीं होता है. हमारी पर्सनल लाइफ में कई बार बाउंडरीज़ दो लोगों को और पास लाने का भी काम करती हैं. उन बाउंडरीज़ से एक ऐसे माहौल का निर्माण होता है. जिससे आप के अंदर प्यार का भाव आ जाता है. लेकिन कई लोग ऐसे होते हैं जिन्हें बाउंडरीज़ का मतलब समझ में नहीं आता है. उन्हें पता ही नहीं चलता है कि बाउंडरीज़ का मतलब क्या होता है? वो इसके अहमियत को समझने की कोशिश नहीं करते हैं. इसका रिज़ल्ट क्या होता है? इसकी वजह से वो लोग अपने रिश्ते से ही बोर या फिर फ्रस्ट्रेट हो जाते हैं. कई बार तो इसका रिज़ल्ट इतना बुरा होता है कि रिश्ता टूटने की कगार में ही पहुँच जाता है. इस किताब की मदद से आपको अपने रिलेशनशिप को बचाने में मदद मिलेगी. आपको पता चलेगा कि रिश्ते में हेल्दी बाउंडरीज़ कैसे बनाई जाती है?

तो चलिए शुरू करते हैं!

हेल्दी रिलेशनशिप के लिए हेल्दी बाउंडरीज़ की ज़रूरत होती है। 

अब सवाल ये उठता है कि आपको कैसे पता चलेगा कि बाउंडरीज़ की ज़रूरत है? इसके साइन क्या होते हैं? 

इसके लिए खुद से कुछ सवाल पूछिए- क्या आप अधिकांश स्ट्रेस में रहते हैं? काम करते हुए भी परेशान रहते हैं? क्या आप अपने जानने वाले लोगों इग्नोर करने लगे हैं? क्या आपको कहीं एकांत में भाग जाने का मन करता है? 

अगर आपक जवाब किसी भी सवाल का ‘हाँ’ है. तो फिर हो सकता है कि आपको अनहेल्दी बाउंडरीज़ से परेशानी हो रही हो. आपको ये दिक्कतें जितनी अलग-अलग दिख रही हैं. वास्तव में वो सब एक जैसी हैं. इसका मुख्य कारण यही है कि किसी को फर्स्ट प्लेस में रखने की वजह से आपने अपनी ज़रूरतों के ऊपर ध्यान नहीं दिया है. 

अब समय आ गया है कि आप बाउंडरीज़ के महत्व को समझ जाएँ. हेल्दी बाउंडरीज़ रखने का यही मतलब है कि आप खुद की अहमियत को समझने की कोशिश करिए. किसी दूसरे के साथ उतना ही समय बिताइए जितने में आप कम्फर्टेबल रह सकें. 

जब कभी भी हम बाउंडरीज़ के बारे में सुनते हैं. तो हमारे दिमाग में सबसे पहले फिजिकल बाउंडरीज़ के बारे में ख्याल आता है. हम उसे पर्सनल स्पेस से जोड़ लेते हैं. आपको बता दें कि फिजिकल बाउंडरीज़ 6 टाइप ऑफ़ बाउंडरीज़ का एक हिस्सा है. उदाहरण के लिए हमें सेक्सुअल बाउंडरीज़ के बारे में भी जानने की ज़रूरत है. इसके अलावा इमोशनल और इंटेलेक्चुअल बाउंडरीज़ भी होती हैं. जिसकी ज़रूरत दूसरों से बात-चीत करते समय आती है. इन सबके अलावा मटेरियल बाउंडरीज़ और टाइम बाउंडरीज़ के बारे में भी समझने की ज़रूरत है. सभी 6 टाइप्स की बाउंडरीज़ के बारे में आपको जानने की ज़रूरत है. दूसरे हमारे टाइम की वैल्यू करते हैं या फिर नहीं करते हैं. ये टाइम बाउंडरीज़ से तय होता है. 

इसी के साथ-साथ आपको ये भी पता होना चाहिए कि हर बार बाउंडरीज़ को सेट करना इतना आसान नहीं होता है. आप ही सोचिए कि अगर ये इतना आसान काम होता तो किसी की रिलेशनशिप में कोई दिक्कत ही नहीं हो रही होती. लेकिन आज के समय में सभी की रिलेशनशिप में दिक्कतें आ रही हैं? इसके पीछे की मुख्य वजह क्या है? वो यही है कि लोगों को बाउंडरीज़ के महत्व के बारे में नहीं पता है. कई बार हम ये सोचकर डर जाते हैं कि बाउंडरीज़ को सेट करने से रिश्ते में दूरी आ जाएगी. कई बार हम बाउंडरीज़ को सेट करने में असहज भी महसूस करते हैं. लेकिन हमें इस बात का ध्यान होना चाहिए कि बाउंडरीज़ को सेट करने से रिश्ते बेहतर होते हैं. इसलिए हमें इन्हें समझते हुए सेट करना चाहिए. आगे के चैप्टर्स में आप इन्हें और बेहतर तरीके से समझ पाएंगे.

अधिकांश रिश्तों की समस्याएं बाउंडरीज़ के कारण होती हैं जो बहुत कठोर होती हैं
अपनी बाउंडरीज़ के बारे में सोचिए, उन्हें किसी सेल की मेम्ब्रेन की तरह होना चाहिए. जिनका काम कुछ इस तरह होना चाहिए कि यूज़फुल चीज़ें आराम से पास हो जाएँ और हार्मफुल चीज़ों को रोक लिया जाए. सेल मेम्ब्रेन की तरह ही आपकी बाउंडरीज़ को भी परफेक्ट बैलेंस बनाकर चलना चाहिए. जिनका काम ये होना चाहिए कि पॉजिटिव चीज़ों का स्वागत करें और नेगेटिव फैक्टर्स को दूर कर दें. अगर आप इस तरह का बैलेंस नहीं बना पाएंगे तो इसका मतलब साफ़ है कि आपकी रिलेशनशिप में कई सारी दिक्कतें आएँगी. अगर आपकी बाउंडरीज़ में काफी छेद होंगे यानी कि वो कमजोर होंगी. तो फिर आप काफी वलनरेबल हो जायेंगे. तब आप दूसरों के इमोशन को हैंडल नहीं कर पाएंगे. वहीं अगर आपकी बाउंडरीज़ काफी कठोर हैं. तो भी आपके साथ खतरा बना हुआ ही है. तब भी चांस है कि आपको काफी इमोशनल दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा. 

छेद वाली बाउंडरीज़ को पोरस बाउंडरीज़ कहा जाता है. ये काफी ज्यादा कमजोर होती हैं. इसमें बहुत ज्यादा इमोशनल कमजोरी होती है. जिसके पास इस तरह की बाउंडरीज़ होती है. वो इंसान कभी भी खुश नहीं  रह पाता है. वो पूरे कांफिडेंस से कभी भी अपने फैसले नहीं ले पाता है. उसकी जिंदगी दूसरों को खुश करने में ही बीतती रहती है. 

पोरस बाउंडरीज़ के परिणामस्वरूप भावनात्मक जुड़ाव और कोडपेंडेंसी (किसी के ऊपर हद से ज्यादा निर्भर रहना) हो सकती है.बहुत ज्यादा इमोशनल अटैचमेंट उन कपल्स में देखने को मिलता है. जो हमेशा एक साथ ही नज़र आते हैं. आपको ऐसे कपल नज़र आते होंगे. जो हमेशा एक साथ देखने को मिलते हैं. उन्हें आप कभी भी अलग-अलग नहीं देखेंगे. कोडपेंडेंसी (किसी के ऊपर हद से ज्यादा निर्भर रहना) भी इमोशनल अटैचमेंट की ही तरह है. लेकिन ये ज्यादा अन बैलेंस चीज़ है. इसके लिए आपको समझना पड़ेगा कि कोडपेंडेंट रिलेशनशिप क्या होती है?

इस रिलेशनशिप में एक पार्टनर हमेशा दूसरे की समस्या को सॉल्व करता रहता है. एक पार्टनर का काम ही यही होता है कि वो सामने वाले की दिक्कतों को सॉल्व करता रहे. इस तरह की सिचुएशन दोनों लोगों के लिए बुरी ही होती है. इसके पीछे का रीज़न यही है कि दूसरे पार्टनर की नीड्स कभी पूरी नहीं हो पाती है. इससे दूसरे पार्टनर के अंदर फ्रस्ट्रेशन का जन्म हो जाता है. उसका विश्वास ही रिश्तों के ऊपर से उठने लगता है. इसी के साथ-साथ अन्य पार्टनर भी कभी अपनी समस्या को सॉल्व करना नहीं सीख पाता है. जिस रिलेशनशिप में सीखने की उम्मीद खत्म हो जाती है. वो रिश्ता बोरिंग ही हो जाता है. 

जो लोग भी पोरस बाउंडरीज़ से परेशान हों, उन्हें सबसे पहले तो अपने रवैये को बदलने की कोशिश करनी चाहिए. उन्हें अपने नज़रिए में बदलाव लाने की कोशिश करनी चाहिए. उन्हें एक दूसरे से कुछ समय के लिए ही सही फिजिकल और इमोशनल दूरी बनाने की ज़रूरत है. उन्हें ये समझना चाहिए कि अब समय आ गया है कि वो खुद के ऊपर अपना पूरा ध्यान लगाने की कोशिश करें. इसी की दूसरी साइड में भी एक बाउंडरीज़ है. इसे कठोड़ या रिजिड बाउंडरीज़ कहते हैं. जो लोग इससे जूझ रहे होते हैं. वो लोग लोगों के पास ही नहीं आ पाते हैं. उनके अंदर एक समस्या ये आ जाती है कि वो लोग अपनी भावनाओं को दूसरों के सामने प्रकट नहीं कर पाते हैं. इसलिए वो इमोशनल लेवल पर लोगों से कट जाते हैं. इस बाउंडरीज़ से निकलने का एक हल है. वो ये है कि आपको क्लोज़ रिलेशनशिप बनाने की कोशिश करनी चाहिए. आपको खुद के दिल को दूसरे के सामने रखने की कोशिश करनी चाहिए. 

आपको खुद को तैयार करना होगा कि अब तुम प्यार करने के लिए रेडी हो. आपको ये बात समझनी चाहिए कि हेल्दी बाउंडरीज़ ना ही पोरस है और ना ही रिजिड. वो इन दोनों के बीच में कहीं है. क्या आपको पता है कि वो कहाँ है? अगर नहीं पता है तो फिर आगे इसी काम में लगने की ज़रूरत है. 

हेल्दी बाउंडरीज़ को सेट करने के लिए क्लियर कम्युनिकेशन और क्लियर एक्शन की ज़रूरत होती है। 

जब हम सीधे तरीके से बाउंडरीज़ को सेट नहीं करते हैं. तो फिर उनके पास एक और तरीका होता है. उसे इन डायरेक्ट तरीका कहा जाता है. इसी को पैसिव अग्रेसिवनेस भी कहते हैं. ये तरीका पॉपुलर है लेकिन इफेक्टिव नहीं है. आपको बता दें कि पैसिव अग्रेसिवनेस कम्युनिकेशन के एक खराब तकनीक है. इस तकनीक में हम सीधे तौर पर नहीं कहते हैं कि हमें किस चीज़ से दिक्कत हो रही है बल्कि हम एक्ट करते हैं. हम एक्ट करते हुए ये ट्राय करते हैं कि सामने वाला समझ जाए. लेकिन इस तकनीक की मदद से हम सामने वाले को फ्रस्ट्रेट कर देते हैं. जिससे दो लोगों के बीच में दिक्कत और भी ज्यादा बढ़ जाती हैं. पैसिव अग्रेसिव नेस हमें रोमांटिक रिलेशनशिप में ज्यादा देखने को मिलती है. इस तरह की रिलेशनशिप में पार्टनर कोशिश करते हैं कि वो अपनी दिक्कतों को पार्टनर से सीधे डिसकस ना करें. लेकिन सच यही है कि किसी का भी पार्टनर दिमाग को नहीं पढ़ सकता है. इसलिए इस तरह की उम्मीद भी नहीं लगानी चाहिए. इस तरह की उम्मीद लगाना भी बेईमानी ही है. 

इसलिए ये अच्छा ही होगा कि आप अपनी दिक्कतों को सीधे कम्यूनिकेट करने की कोशिश करें. आपकी कोशिश रहनी चाहिए कि आप अपनी बात सीधे और सिम्पल तरीके से बता सकें. बाउंडरीज़ से डायरेक्ट कम्युनिकेशन के दो तरीके हैं. एक वर्बल और दूसरा एक्शन की मदद लेकर भी आप कम्यूनिकेट कर सकते हैं. 

आप अपनी दिक्कतों को सामने वाले से खुल कर बात कर सकते हैं. अगर आप ये रास्ता अपनाते हैं तो बहुत कम चांस है कि लोग आपकी बात समझ नहीं पाएंगे. इसलिए आपकी हमेशा यही कोशिश रहनी चाहिए कि आप अपनी बात खुलकर करें. खुलकर बात करते समय अधिकांश जिस शब्द का उपयोग होता है. वो है ‘मैं चाहता हूँ’ मान लीजिए कि आप अपनी माँ से बात कर रहे हैं. तो आप कह सकते हैं कि “मैं चाहता हूँ कि आप मेरी शादी के बारे में बात ना करे.”

जब आप इस तरह की बाउंडरीज़ को सेट कर रहे हों तो क्लियर बोलने की कोशिश करनी चाहिए. उस बात-चीत में ऐसा नहीं लगना चाहिए कि आपको बुरा लग रहा है. उस बात-चीत में ये पता चलना चाहिए कि आपकी इंटेंशन बिल्कुल साफ हैं. बाउंडरीज़ को सेट करने का ये मतलब नहीं होता है कि आप कम्युनिकेशन को ही खत्म कर रहे हैं. इसका मतलब होता है कि आप अपनी बात बता रहे हैं. आप उस बात को सामने वाले के सामने रख रहे हैं. जिन बातों से आपको दिक्कत होती है.

आपको बाउंडरीज़ के उल्लंघन से निपटने का का तरीका भी मालुम होना चाहिए
ये कहना भी आसान ही है कि बाउंडरीज़ को सेट करते समय हमें दिलेरी दिखानी चाहिए. लेकिन ये सब इतना आसान नहीं होता है. हम सभी के ऊपर काफी ज़िम्मेदारी होती है. उन जिम्मेदारियों की वजह से हमारे अंदर कई तरह के डर का भाव भी होता है. उसी डर की वजह से हम जो महसूस करते हैं. वो क्लियर कह नहीं पाते हैं. हमारे दिमाग में कई सारी दुविधाएं चलती रहती हैं. हमको डर लगता रहता है कि अगर सच बोलने से सब कुछ पूरी तरह से खराब हो गया तो क्या होगा? आपको ये बात पता होनी चाहिए कि ज़रूरी नहीं है कि जितने समझदार आप हैं. उतना ही समझदार सामने वाला होगा. ये भी ज़रूरी नहीं है कि सामने वाला इंसान मैच्योर होगा. इसलिए बाउंडरीज़ को सेट करते समय ऐसा भी हो सकता है कि सामने वाला आपके ऊपर सवाल उठाने लगे. 

कई बार आपको काफी ज्यादा कठिन सवालों से भी गुज़रना पड़ सकता है. कई बार आपकी नियत पर भी ऊँगली उठाई जा सकती है. इसलिए इस तरह की सिचुएशन के लिए भी आपको तैयार रहना पड़ेगा. कई बार आपको बाउंडरीज़ का उल्लंघन भी देखने को मिल सकता है. अगर ये उल्लंघन एक या दो बार हो तो उसे नज़र अंदाज़ किया जा सकता है. लेकिन अगर ये काफी समय तक लिए हो तो फिर इसे कैसे नज़र अंदाज़ किया जाएगा. 

इसके ऊपर एक्शन लेने का प्लान भी आपके पास तैयार रहना चाहिए. किसी भी बाउंडरीज़ का फायदा तभी है. जब उसे ईमानदारी से निभाया जाए, अगर निभाने में ईमानदारी नहीं होगी. तो फिर आपके बाउंडरीज़ का भी कोई फायदा लाइफ में देखने को नहीं मिलेगा. 

हम बाउंडरीज़ को सेट करने से बचते क्यों हैं? इसके पीछे का सबसे बड़ा रीज़न ये भी है कि हम उसे समझते ही नहीं हैं. हम सोचते हैं कि बाउंडरीज़ को सेट करने से हम सामने वाले भावनात्मक रूप से दूर हो जायेंगे. इससे हमें उसके लिए सेल्फ लेस होकर कुछ भी कर नहीं पाएंगे. इसलिए ही आप देखते होंगे कि बाउंडरीज़ को सेट करने में औरतें काफी पीछे हैं. उन्हें बचपन से समझाया जाता है कि अच्छी बेटी और पत्नी बनने के लिए सेल्फ लेस सेवा करनी होती है. इसलिए आज के दौर में औरतों के अंदर इतना ज्यादा डिप्रेशन देखने को मिल रहा है. कोई भी बिना मोटिवेशन के ज्यादा सेल्फ लेस नहीं हो सकता है. 

हम ये भी सोचते हैं कि बाउंडरीज़ का मतलब दूसरे हमारे साथ कैसा व्यवहार करेंगे? लेकिन ये बस एक साइड की स्टोरी है. बाउंडरीज़ का ये भी मतलब होता है कि हम खुद के साथ कैसा व्यवहार करते हैं? क्या हम खुद को जानते हैं? क्या हम खुद से भी सेल्फ लेस प्यार करते हैं? तो फिर क्या खुद के साथ भी हेल्दी बाउंडरीज़ हो सकती है? 

क्यों नहीं हो सकती है? खुद के साथ बाउंडरीज़ रखेंगे तो फिर आपकी काफी मदद हो सकती है. आपकी जिंदगी से वो फैक्टर्स बाहर हो सकते हैं, जिनकी ज़रूरत नहीं है. उदाहरण के लिए आपकी बाउंडरीज़ आपको बताएगी कि पैसे बचाने चाहिए. सेल्फ बाउंडरीज़ का मतलब बस ‘नो’ कहना ही नहीं है. वो ये भी कहेगी कि आपको खुद से प्यार करना चाहिए. वो बताएगी कि सेल्फ केयर का महत्व कितना ज्यादा है? 

आपको ये भी पता होना चाहिए कि सेल्फ केयर का ये मतलब नहीं होता है कि आपको रोज़ महंगे स्पा जाने की ज़रूरत है. सेल्फ केयर का पैसों से कोई लेना देना ही नहीं होता है. सेल्फ केयर का असली मतलब आपकी आत्मा से होता है. आपको खुद की आत्मा का ख्याल रखना चाहिए. याद रखना चाहिए कि असली ख़ुशी शरीर में नहीं है. असली हैप्पीनेस आत्मा में छुपी हुई है. इसलिए पैसों को खर्च करके ज्यादा देर तक खुश नहीं रहा जा सकता है. पैसों को खर्च करके आप बस कुछ देर तक के लिए ही हैप्पी रह सकते हैं. सोल को खुश रखिये और अपनी पूरी लाइफ को खुश कर दीजिए. सेल्फ केयर का ये भी मतलब होता है कि जो चीज़ आप नहीं करना चाहते हैं. उन्हें सीधे मना करिए. जिन लोगों से आपकी लाइफ में दुःख है उन्हें एंट्री देना बंद करिए. सीधे ‘नो’ कहना सीखिए.

क्या फैमिली के साथ भी बाउंडरीज़ को सेट करना चाहिए? इस बड़े सवाल का तर्क संगत जवाब इस चैप्टर में मिल जाएगा
परिवार वो जगह होती है, जहाँ पर आप बाउंडरीज़ सेट करने से पहले बहुत दुविधा में आ सकते हैं. ख़ासकर, बेटे या बेटी की अपने माता-पिता के साथ रिश्ते में बाउंडरीज़ को सेट करना बहुत मुश्किल है. ये बात सुनने में ही कितनी अजीब लग रही है? तो फिर सोचिए कि इसे करने में कैसा ही लगेगा? लेकिन हमें पैरेंट्स के साथ बाउंडरीज़ को ज़रूर सेट करना चाहिए. इसके पीछे का रीज़न यही है कि अगर हम ग्रो करना चाहते हैं. तो फिर पैरेंट्स के साथ बाउंडरीज़ होनी ही चाहिए. ऐसा करने से हम एडल्ट की तरफ बढ़ने लगेंगे. हमको पता चल जाएगा कि हमारी खुद की भी एक पर्सनालिटी है. हमें इस लाइफ को खुद के भरोसे ही चलाना है. इसलिए इस बाउंडरीज़ की ज़रूरत बहुत ज्यादा है. लेखक यहाँ पर एक छोटा सा किस्सा शेयर करते हैं. वो कहते हैं कि एक बार उन्हें एक महिला के साथ काम करने का मौका मिला था. वो महिला शादी शुदा थी. लेकिन उसकी शादी खराब हो चुकी थी. उसके पीछे का रीज़न ये था कि पति माँ से बहुत क्लोज़ था. जिसकी वजह से वो कोई भी फैसला बिना माँ के नहीं लेता था. वो चाहता था कि माँ की तरह ही पत्नी उसका ख्याल रखे. जो मुमकिन नहीं था. इसलिए उनका रिश्ता खत्म होने वाला था. 

इस एग्जाम्पल को सुनकर आपको समझ में आया होगा कि परिवार के साथ एक सीमा यानी बाउंडरीज़ की क्यों ज़रूरत होती है? परिवार के साथ बाउंडरीज़ तैयार करने का पहला तरीका है कि उनके साथ थोड़ी फिजिकल और इमोशनल दूरी बनाने की कोशिश करिए. दूसरा तरीका है कि अपनी इच्छा को दिलेरी के साथ पूरा करने की कोशिश करिए. अब वो समय आ चुका है कि लाइफ के कुछ फैसले बस खुद की मर्जी से ही लेना चाहिए. ये एडवाइस आपके ऊपर तब भी लागू होती है. जब अगर आप खुद पैरेंट्स हैं या फिर बनने वाले हैं. जब आपके बच्चे बाउंडरीज़ सेट करेंगे तो फिर आपकी ज़िम्मेदारी बनेगी कि आप उस बाउंडरीज़ का आदर-सम्मान करेंगे. बच्चों की भावनाओं का कद्र करना आपकी मौलिक ज़िम्मेदारी है. इसी के साथ अगर आप बच्चें हैं तो अपने पैरेंट्स की रिस्पेक्ट करना बंद नहीं करनी है. उनका सम्मान पहले से ज्यादा करना है. 

ऑफिस के अंदर भी बाउंडरीज़ को सेट करना बहुत ज़रूरी होता है।

हमारे दिमाग में बैठा दिया गया है कि ओवर वर्क करना ज़रूरी है. हम हफ्ते में 60 घंटे से भी ज्यादा काम करते हैं. हम वीकेंड पर भी काम करने को हाँ कर देते हैं. हम सोचते हैं कि वीकेंड में काम करना भी हमारी ही ज़िम्मेदारी है. साल 2018 में अमेरिकी जनता ने 700 मिलियन दिनों की छुट्टी का यूज़ ही नहीं किया था. यहाँ तक कि अगर हमारी पर्सनल लाइफ में हेल्दी बाउंडरीज़ हैं. फिर भी हमारी वर्किंग लाइफ में पोरस बाउंडरीज़ रहती हैं. ऐसा क्यों हो रहा है? 

ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि हम अपने बॉस के साथ बाउंडरीज़ सेट नहीं कर रहे हैं. हमको डर लग रहा है कि हम ऐसा करेंगे तो अच्छे कर्मचारी नहीं रह जाएंगे. आपको पता होना चाहिए कि ये रवैया भी बिल्कुल सही नहीं है. हमें ये ध्यान रखना चाहिए कि जब तक हमारी ऑफिस लाइफ अच्छी नहीं होगी. हमारी पर्सनल लाइफ भी बिगड़ती रहेगी. दोनों आपस में जुड़ी हुई हैं. इसलिए बहुत ज़रूरी है कि आप अपनी ऑफिस की जिंदगी में भी बाउंडरीज़ को सेट करने की कोशिश करें. वो भी जल्दी से जल्दी हेल्दी बाउंडरीज़ को सेट करिए. इसको सेट करने का पहला तरीका यही है कि माइंड सेट डेवलप करिए कि हर प्रोजेक्ट को हाँ करने की ज़रूरत नहीं है. इस माइंड सेट को भी डेवलप करिए कि अच्छा कर्मचारी ओवर वर्क नहीं करता है. इसी के साथ-साथ नो कहने की आदत को डेवलप करने की कोशिश करिये. दूसरा तरीका है कि अपने वर्किंग घंटों में ही काम को खत्म करने की कोशिश करिए. अपने सह-भागियों से भी बता दीजिए कि ‘काम बहुत है, बातें लंच के टाइम में करेंगे’

आपको ये पता होना चाहिए कि ऑफिस में भी हेल्दी बाउंडरीज़ को सेट किया जा सकता है. चुप रहकर परेशान मत हुआ करिए, ज़रूरी लगे तो अपने बॉस के साथ कॉफ़ी में बैठकर बात कर लीजिएगा. ऑफिस में बाउंडरीज़ सेट करने के बाद आपको कमाल का सुकून मिलेगा. तब आप सोचेंगे कि इस काम को बहुत पहले कर लेना चाहिए था.

रोमांटिक बाउंडरीज़ को कैसे सेट किया जाता है? इस बारे में पूरा ज्ञान इस चैप्टर में दिया गया है
रोमांटिक रिलेशनशिप का सबसे महत्वपूर्ण पहलू क्या होता है? क्या आपको पता है? नहीं. आपको बता दें कि उस पहलू को कम्युनिकेशन कहते हैं. ब्रेकअप और तलाक की मुख्य वजह ही खराब कम्युनिकेशन होता है. इससे आप समझ सकते हैं कि रिलेशनशिप में कम्युनिकेशन का रोल कितना ज्यादा होता है? कम्युनिकेशन खराब इसलिए होता है क्योंकि कपल रोमांटिक बाउंडरीज़ को सेट नहीं करते हैं. उन्हें पता ही नहीं होता है कि सामने वाले को क्या चाहिए? इसलिए बहुत ज़रूरी है कि आपको अपने पार्टनर की चाहत के बारे में क्लियर पता होना चाहिए. इसके लिए ज़रूरी है कि आप दोनों आपस में बैठकर अच्छे सेबात करें. बातचीत से बड़े-बड़े मुद्दों को हल किया जा सकता है. ये तो फिर भी लव रिलेशनशिप है. इसे तो बड़े प्यार और मोहब्बत से डील करना चाहिए. 

कपल्स अपने पार्टनर से सीधे बात करना बंद कर देते हैं. उन्हें कोई ना कोई डर सताता रहता है. जिसकी वजह से वो सीधी रिक्वेस्ट नहीं करते हैं. इसी वजह से दोनों के बीच में दूरी आ जाती है. कपल होने के नाते आप दोनों को सच के साथ खड़ा होना चाहिए. क्लियर बात करनी चाहिए कि आप दोनों एक दूसरे से क्या-क्या चाहते हैं. 

अगर वो बात सेक्सुअल प्लेज़र को लेकर है. तो भी आप दोनों को एक दूसरे से क्लियर बात करनी चाहिए. 

ये दुखद है लेकिन सच है कि कई सुंदर रिश्ते खराब सेक्स की वजह से टूट जाते हैं. उस इश्यु को भी बात करके सॉल्व किया जा सकता है. आपको पता होना चाहिए कि अनकम्फर्टेबल कन्वर्सेशन रिलेशनशिप को बचा लेते हैं. इसलिए उन्हें करने से कभी भी पीछे मत हटियेगा. आपका रिश्ता आपके लिए बहुत ज़रूरी है. उसे छोटी-छोटी वजहों से खराब मत होने दीजिए. इसलिए कम्युनिकेशन किसी भी रिश्ते में बहुत ज़रूरी होती है. रोमांटिक रिलेशनशिप में बाउंडरीज़ को सेट करिए, सामने वाले को बताइए कि आप उसके लिए क्या-क्या कर सकते हैं? साथ ही उसे ये भी बताइए कि आपको उससे कितनी उम्मीदें हैं? क्या आप दोनों एक दूसरे का साथ दे सकते हैं? 

बाउंडरीज़ को सेट करने के बाद आपको इन सवालों का जवाब मिल जाएगा.

कुल मिलाकर
हेल्दी बाउंडरीज़ ना होने के वजह से आपकी जिंदगी में बहुत सारी दिक्कतें हैं. उन्हें बाउंडरीज़ की मदद से हल किया जा सकता है. अपनी रिलेशनशिप को बेहतर करने के लिए उन जगहों को ढूंढिए जहाँ बाउंडरीज़ की ज़रूरत है. 

 

क्या करें?

जब आपको पता चल जाए कि बाउंडरीज़ की कहाँ ज़रूरत है. तब एडवांस में प्लानिंग करिए कि आपको सामने वाले से क्या बात करनी है? 

आपकी तैयारी ही बता देगी कि आप सफल होने वाले हैं कि नहीं, इसलिए तैयारी बढ़िया होनी चाहिए. बाउंडरीज़ की मदद से आप अपनी लाइफ को पूरी तरह से बदल सकते हैं. इस किताब की समरी में आपको 6 तरह की बाउंडरीज़ के बारे में पता चल चुका है. जिन्हें आपको अपनी लाइफ में उतारने की ज़रूरत है. चैप्टर्स में बताई गई टिप्स की मदद से आप ऐसा बड़ी आसानी से कर सकते हैं.

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