Radical Collaboration

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Radical Collaboration

James W. Tamm and Ronald J. Luyet
अच्छे रिश्ते बनाने के लिए 5 स्किल्स

दो लफ्ज़ों में
साल 2004 में रिलीज़ हुई किताब “Radical Collaboration” आपको इन वैल्युएबल मेथड प्रोवाइड करती है. जिसकी मदद से आप हाई फंशनिंग कोलैबोरेटिव रिलेशनशिप को डेवलप कर सकते हैं. इसी के साथ ही साथ इस किताब की मदद से आप किसी भी तरह की कॉनफ्लिक्ट को डील कर सकते हैं. इस किताब में बताई गई मेथड में 5 स्किल्स के बारे में भी बताया गया है. उन स्किल्स की मदद से आप बेहतर टीम मेट बन सकते हैं. 

ये किताब किसके लिए हैं? 
- बिजनेस लीडर्स 
- मैंनेजर्स और टीम मेट्स 
- ऐसे लोग जो बेहतर कोलैबोरेटर्स बनना चाहते हों 

लेखक के बारे में
इस किताब को “James W. Tamm”और “Ronald J. Luyet” ने मिलकर लिखा है . “James W. Tamm” कॉनफ्लिक्ट रेजोल्यूशन के एक्सपर्ट हैं . उन्हें बेस्ट वर्क प्लेस क्रिएट करने का एक दशक से भी ज्यादा का अनुभव है. वहीं Ronald J. Luyet ग्रीन ज़ोन कल्चर ग्रुप के को-फाउंडर हैं. जिनका काम ही कम्पनियों को ये सलाह देना है कि वो एक अच्छा वर्किंग माहौल कैसे बनाएं? ये बिजनेस कन्सल्टेंट ग्रुप के सीनियर मेंबर भी हैं. इसी के साथ इन्होने ‘Where Freedom Begins: The Process of Personal Change’ नाम की किताब का लेखन भी किया है.

कोलैबरेशन के लिए अच्छी नियत की ज़रूरत होती है, आपके पास अच्छी नियत के साथ-साथ अनसेल्फिश एटीट्यूड भी होना चाहिए
जब कभी भी आप बिल गेट्स या स्टीव जॉब्स के बारे में पढ़ते होंगे. तो आप यही सोचते होंगे कि सफलता पान वन मैन शो होता है. लेकिन असल में सक्सेस का मतलब काफी अलग होता है. असलियत में सक्सेस का मतलब ये भी होता है कि आपके दूसरों के साथ प्रोफेशनल रिश्ते कैसे हैं? आज के दौर में तो प्रोफेशनल कोलैबरेशन का महत्त्व और भी ज्यादा बढ़ चुका है. जनवरी 2016 में हार्वर्ड बिजनेस रिव्यु में एक रिसर्च रिपोर्ट छपी थी. इस रिपोर्ट में पिछले 20 सालों के डेटा को पढ़ा गया था. उसमे ये बताया गया था कि अब मैनेजर्स और कर्मचारी आपस में ज्यादा समय कोलैबरेशन की कोशिश करते हैं. तो अब सवाल ये उठता है कि आपको कोलैबरेशन से ज्यादा से ज्यादा फायदा कैसे हो सकता है? इसी सवाल का जवाब इस किताब के चैप्टर्स में मिलने वाला है. इसलिए इस किताब की समरी को सुनने या पढ़ने की शुरुआत कर दीजिए. 

तो चलिए शुरू करते हैं!

कोलैबरेशन के लिए अच्छी नियत की ज़रूरत होती है, आपके पास अच्छी नियत के साथ-साथ अनसेल्फिश एटीट्यूड भी होना चाहिए। 

आज का समय ऑनलाइन कम्युनिकेशन का है. इसकी मदद से आज कल के बिजनेस काफी ज्यादा इंटर कनेक्टेड भी होते हैं. आज के बिजनेस में लोग दुनिया भर की टीम के साथ ऐसे कनेक्ट रहते हैं. जैसे कोई अपने पड़ोसी से बात कर रहा हो, इसलिए आज के समय में कोलैबरेशन स्किल होना बहुत ज़रूरी हो गया है. 

बिना देर किए हुए, हम उन स्किल्स के बारे में जानते हैं. जो कि हर कोलैबरेटर के पास होना ही चाहिए. उन स्किल्स की मदद से आप अपने बिजनेस रिलेशनशिप के साथ-साथ पर्सनल रिलेशनशिप को भी बेहतर बना सकते हैं. एक अच्छे कोलैबरेशन के लिए सही उद्देश्य की ज़रूरत होती है. इसलिए पहली स्किल नाम कोलैबरेटिव इंटेंशन है. इस स्किल की मदद से आप सही मानसिकता के मालिक बन सकेंगे. आप राईट माइंड सेट में रह सकें, इसके लिए आपको हमेशा रेड ज़ोन के बजाए ग्रीन जोन में रहने की कोशिश करनी चाहिए. 

रेड ज़ोन और ग्रीन ज़ोन से क्या मतलब है? 

रेड ज़ोन से मतलब है कि आप स्वार्थी बहुत हैं. आपको कोशिश करनी चाहिए कि आपके अंदर सेल्फ इंटरेस्ट की भावना कम से कम रहे. इससे आपके बिजनेस को काफी ज्यादा फायदा भी होगा. जब आप रेड ज़ोन में रहते हैं. तब आप सेल्फिश हो जाते हैं. उसी की वजह से आपके काम में परेशानी आने की शुरुआत भी हो जाती है. इसलिए बिजनेस करते समय सेल्फिश नहीं होना चाहिए. सेल्फ इंटरेस्ट आपके अंदर की अच्छी खूबियों को भी कम कर देता है. इसकी बजाय अगर आप ग्रीन ज़ोन में रहने की कोशिश करेंगे तो फिर आपका दिमाग बेहतर तरीके से काम करने लगेगा. आपको समस्या का हल जल्दी से जल्दी पता चल जाएगा. ऐसा इसलिए होगा क्योंकि तब आप कोलैबरेशन करने की कोशिश करेंगे. तब आपकी कोशिश रहेगी कि आपकी टीम में सभी को बराबर आगे बढ़ने का मौका मिले. 

तब आप अपनी टीम के मेम्बर्स की इज्जत भी करने लगेंगे. ऐसा करने से आपकी टीम के अंदर एकता की भावना आएगी. आपको इस बात का पता होना चाहिए कि कई बार लोग सोचते हैं कि वो ग्रीन ज़ोन में हैं. लेकिन असलियत ये होती है कि वो रेड ज़ोन में ही रहते हैं. आपको ये गलती नहीं करनी है. आपको रियलिटी का अंदाजा होना ही चाहिए. इसलिए ये बहुत ज़रूरी है कि आप खुद के प्रति ईमानदार रहें. ये कहा भी जाता है कि आप दुनिया से झूठ बोल सकते हैं. लेकिन आप खुद से झूठ नहीं बोल सकते हैं. इसलिए खुद का रियलिटी चेक भी इंसान को करते रहना चाहिए. इसका एक सबसे अच्छा तरीका ये है कि अपने सहयोगियों से खुद का फीडबैक लेते रहना चाहिए. 

इसके लिए एक एक्सरसाइज भी कर सकते हैं. आपको बस इतना करना है कि अपने सहयोगियों से कहिए कि आपको 10 शब्दों में बयाँ करने की कोशिश करें. इसमें वो आपके एटीट्यूड को ध्यान में रखते हुए आपनी बातें कहें. इसके बाद गौर करिएगा कि आपके साथ काम करने वाले लोग आपके बारे में किन शब्दों का उपयोग करते हैं. फीडबैक को यूँही जाने मत दीजियेगा. उसके ऊपर लगातार काम करने की कोशिश करियेगा. 

इसी के साथ ही साथ अपने सहयोगियों से ये भी पूछियेगा कि पिछली डील के समय आपके द्वारा क्या गलती की गई थी? इसे भी उन्हें कम शब्दों में बताने को कहियेगा. ये कोशिश करिएगा कि आपके सहयोगी ऑनेस्ट जवाब दें. उनके जवाब से अपनी पर्सनालिटी को बेहतर करने की कोशिश करते रहिएगा. धीरे-धीरे आप बेहतर से बेहतर होते चले जाएंगे. किसी भी बिजनेस के लिए बेहतर होना बहुत ज़रूरी होता है. आपका बिजनेस उतना ही बढ़ियां दिखेगा, जितने बढ़ियां आप होंगे.

क्या आप फर्स्ट ट्रुथ फर्स्ट टूल के बारे में जानते हैं? इससे आपके बिजनेस को बहुत मदद मिलेगी
क्या आप कभी किसी रिलेशनशिप में रहे हैं? अगर आपने इसका अनुभव किया होगा. तो फिर आपको मालुम होगा कि किसी भी रिलेशनशिप में विश्वास बहुत बड़ी चीज़ होती है. ये कहना गलत नहीं होगा कि किसी भी रिलेशनशिप की नींव ही ट्रस्ट के ऊपर खड़ी होती है. यही रूल सक्सेस्फुल कोलैबरेशन में भी लागु होता है. इसलिए कोलैबरेशन के लिए दूसरी स्किल का नाम ही ट्रुथफुल है. इसलिए इसमें एक स्ट्रेटजी भी है. जिसे फर्स्ट ट्रुथ फर्स्ट टूल कहा जाता है. इस टूल का यूज़ टीम के साथ किया जाता है. जिसका मकसद साफ़ होता है कि टीम के मेम्बर ईमानदारी से दिक्कतों के बारे में बात कर सकें. ये एक ओपन डिस्कशन प्लेटफ़ॉर्म की तरह होता है. 

लेकिन यहाँ पर मैंनेजर्स को ये गलती करने से बचना चाहिए कि वो किसी भी कर्मचारी से गलत ढ़ंग से बात करें. अगर वो ऐसी गलती करते हैं. तो फिर उन्हें कभी भी बेस्ट रिजल्ट्स नहीं मिलेंगे. फर्स्ट ट्रुथ फर्स्ट टूल की मदद से आप किसी भी बड़ी दिक्कत का हल खोज सकते हैं. इसके लिए बस आपको सबके सामने सीधे सच बोल देना पड़ेगा. बिना टाल मटोल किए हुए सीधा सच. उस सच के कई फायदे होंगे, जो कि धीरे-धीरे आपको देखने को मिलने लगेंगे. लेकिन इसके साथ-साथ आपको इस बात का ख्याल रखना है, कि आपका मैसेज क्लियर होना चाहिए. आपको पता होना चाहिए कि आप क्या बोलने वाले हैं? 

साफ़ बात करेंगे तो आपको रिजल्ट भी बेहतर देखने को मिलेंगे. इसी के साथ ही साथ अपनी बॉडी लैंग्वेज को भी पॉजिटिव रखने की कोशिश करियेगा. एग्जाम्पल के लिए अगर आप अपने चाहने वाले से अपने प्रेम का इज़हार कर रहे हैं. तो ये ज़रूरी है कि आप अपनी बातों को उसकी आँखों में देखते हुए कहें. ऐसा ना हो कि आप उसे ‘आई लव यू’ कहें और देखें पड़ोस वाली लड़की को, इससे सिचुएशन बिगड़ भी सकती है. इससे आपका मैसेज भी क्लियर नहीं जाएगा. 

इसलिए मजबूत कोलैबरेशन के लिए क्लियर मैसेज की ज़रूरत होती है. क्लियर मैसेज के साथ-साथ आपका बॉडी लैंग्वेज भी सही होना चाहिए. ऐसा कई रिसर्च में भी बताया गया है कि लोग डाउट फुल बातों पर ज्यादा समय बर्बाद करना पसंद नहीं करते हैं. इसलिए अपने मैसेज को जितना क्लियर रख सकें उतना ही आपके लिए अच्छा होगा. आपकी आवाज़, बोलने का तरीका और बॉडी लैंग्वेज आपके मैसेज के साथ मैच करनी चाहिए. तभी एक अच्छा कोलैबरेशन बन सकता है. 

गुड लिसनिंग स्किल एक मजबूत कोलैबरेशन के लिए बहुत ज़रूरी होती है. एक अच्छी कम्युनिकेशन के लिए आपको बोलना पड़ता है. लेकिन एक मजबूत कोलैबरेशन टू वे स्ट्रीट है. इसका मतलब ये एक ऐसा रास्ता है. जहाँ पर कई लोग साथ में चलते हैं. जब कई लोग साथ में चलेंगे तो फिर कई लोग बोलेंगे भी, इसलिए आपको सुनने की आदत होनी चाहिए. ऐसा कई जगह लिखा भी गया है कि एक अच्छा सुनने वाला रिश्तों की बारीकी को बेहतर समझता है. 

अगर कोई अपनी बात आपको बता रहा है. और उसे ये पता है कि आप उसकी बात सुन रहे हैं. तो फिर उसका दिमाग और बॉडी ज्यादा रिलैक्स हो जाती है. फिर वो अपनी बात आपको और भी बेहतर तरीके से समझा पाता है. ऐसा क्यों हुआ? ऐसा बस इसलिए हुआ है क्योंकि आपको बेहतर सुनना आता है. 

गुड लिसनर होने की वजह से आप अच्छे रिश्ते बना सकते हैं. इसके अलावा आप बेहतर इनफार्मेशन भी निकाल सकते हैं. जो इंसान अच्छे से सुन सकता है. उसे ये कला भी आती है कि सामने वाले के मन से पूरी बात को कैसे निकाला जा सकता है? इसलिए इस काम में जर्नलिस्ट को माहिर माना जाता है क्योंकि उनसे बेहतर सुनते आता है. 

एक अच्छा लिसनर बनने के लिए आप क्या कर सकते हैं? 

दो चीज़ें हैं जो आप कर सकते हैं-

पहला- टेल मी मोर एटीट्यूड लेकर आना पड़ेगा. इसके लिए आपको सामने वाले को पूरी अटेंशन देनी पड़ेगी. जब आप ऐसा करेंगे तो सामने वाले को लगेगा कि आप उसे महत्व दे रहे हैं. उसे स्पेशल फील होगा, जिसकी वजह से वो आपके सामने अपनी बात को खुलकर रख सकेगा. 

दूसरा- स्पीकर को ये एहसास दिलाइये कि आप उसे समझ भी रहे हैं. किसी को ऊपर-ऊपर से सुनना अलग बात है. लेकिन किसी को सुनने के साथ ही समझना भी बिलकुल अलग बात है. 

जैसे ही स्पीकर को ये एहसास होता है कि आप उसे समझ भी रहे हैं. वो इमोशनल तौर पर आपके पास आ जाता है. इस तरह उसे लगता है कि सामने वाला उसके ऊपर अपना टाइम खर्च कर रहा है. इससे वो और ज्यादा खुलकर आपको अपनी बातें बताता है. किसी को भी सुनते समय बीच-बीच में उसकी बातें रिपीट भी करना चाहिए. ऐसा करने से आपको सामने वाले की बातें अच्छे से समझ में आ जाती है. इसी के साथ सुनते समय भी अपनी आवाज़ और बॉडी लैंग्वेज का ख्याल रखियेगा.

आपको अपने एक्शन की ज़िम्मेदारी लेना सीखना चाहिए
क्या आप उस तरह के व्यक्ति हैं जो मानते हैं कि उनका भाग्य पूर्व निर्धारित है? अगर ऐसा है तो आप अपनी ज़िन्दगी में सही फैसले नहीं ले पाएंगे. ये किसी भी कोलैबरेशन या फिर रिलेशनशिप के लिए सही नहीं है. कोलैबरेशन के लिए आपको ये मानना पड़ेगा कि फैसला आपका था. अब अगर वो सही है. तो फिर ठीक है. 

लेकिन अगर वो फैसला गलत होता है. तो उसकी ज़िम्मेदारी भी आपको ही लेना है. आप कहाँ काम करते हैं और किसके साथ काम करते हैं? ये सब चीज़ें आपके फैसले और चॉइस के ऊपर ही डिपेंड करती हैं. इसलिए अपने एक्शन के प्रति ज़िम्मेदार रहना भी आपकी ही ज़िम्मेदारी है. किसी भी बिजनेस या कोलैबरेशन के लिए चॉइस का रोल बहुत महत्वपूर्ण होता है. भले ही आप अभी अपनी नौकरी से खुश ना हों, अपने बॉस को ब्लेम करने से पहले याद रखिये कि ये चुनाव आपका ही था. कोई भी कंपनी या सहयोगी ऐसा इंसान के साथ काम नहीं करना चाहते हैं. जो अपनी गलतियों का ज़िम्मेदार दूसरों को ठहराता हो. इसलिए अपनी चॉइस को लेकर सजग रहिए. 

आप खुद,अपने सहयोगी और कंपनी के बारे में कितना जानते हैं?क्या आप भी अपनी टीम की कंपैटबिलिटी को परखना चाहते हैं? इसके लिए आपको FIRO थ्योरी का सहारा लेना चाहिए. 

FIRO थ्योरी का फुल फॉर्म ‘Fundamental Interpersonal Relations Orientation’ होता है . 

इस थ्योरी के तीन ट्रेट्स होते हैं- इन्क्लूजन, ओपननेस और कंट्रोल. ये लक्षण हमारी इच्छाओं और आशंकाओं से निर्धारित होते हैं: हम सभी दूसरों से सराहना और अच्छी तरह महसूस करना चाहते हैं. जबकि साथ ही हम अपमानित, अस्वीकार किए जाने और उपेक्षा किए जाने से डरते भी हैं. ये फीलंग्स कितनी मज़बूत हैं. उसी हिसाब से ये हमारे रिश्तों को इफेक्ट भी करती हैं. इसी से बचने के लिए कोलैबरेशन के लिए चौथी स्किल का यहाँ जन्म होता है. जिसे कहते हैं सेल्फ अवेयर. 

इसलिए शुरू में ही कहा गया है कि आप खुद के बारे में और अपनी कंपनी के बारे में कितना जानते हैं? 

इसलिए लगातार खुद से सवाल करते रहा करिए कि आप दूसरों से कितना खुले हुए हैं?

इस तरह के सवालों से आपको पता चलता रहेगा कि आप और आपकी टीम के बीच में कम्पैटबिलिटी कितनी है? 

भले ही आप ओपननेस का सपोर्ट करें या फिर इन्क्लूजन का सपोर्ट करें. लेकिन सबसे ज़रूरी है कि आप सरल स्वभाव के होने चाहिए. आपके अंदर फ्लेक्सिबिलिटी सबसे ज्यादा होनी चाहिए. जितने ज्यादा आप फ्लेक्सिबल रहेंगे, उतना ही अच्छा आपकी कंपनी और सहयोगियों के लिए होगा.अगर आप भी सक्सेसफुल कोलैबरेशन बनाना चाहते हैं तो फिर आपको भी फ्लेक्सिबल रहना पड़ेगा. आपकी हमेशा कोशिश रहनी चाहिए कि टीम के अंदर और टीम के साथियों के साथ एक प्रोडक्टिव रिलेशनशिप बनी रहनी चाहिए.

किसी भी समस्या का समाधान शांति में ही है, इसलिए टीम को शांत करने की कोशिश करनी चाहिए
इस बात से फर्क नहीं पड़ता है कि आप कितने फ्लेक्सिबल हैं. अगर आप बहुत सारे लोगों के साथ काम करेंगे. तो फिर हितों का टकराव होना लाज़मी है. 

किसी भी कंपनी में कॉनफ्लिक्ट तो होते ही रहते हैं. सवाल ये है कि क्या आपको उन समस्याओं का हल ढूंढते आता है? 

इसलिए अब यहाँ पर कोलैबरेशन के लिए ज़रूरी पांचवी स्किल का काम आ गया है. 

ये स्किल यही है कि समस्या का हल कैसे निकालते हैं? 

पहला तरीका है कि इंटरेस्ट बेस्ड अप्रोच को अपनाइए. ये एक स्टेप बाय स्टेप प्रोसेस है. इसमें आपको सभी के इंटरेस्ट के बारे में पता होना चाहिए. फिर उस हिसाब से समस्या का पता चलेगा. 

इस प्रोसेस के लिए एक माहौल बनाना पड़ता है. जिस माहौल में सभी लोगों के ये लगे कि वो कम्फर्ट ज़ोन में हैं. उसके बाद बातचीत के ज़रिये धीरे-धीरे ये पता लगाया जाता है कि किस इंसान को क्या दिक्कत हो रही है? 

इस प्रोसेस में सभी को शामिल होना ज़रूरी होता है. 

दूसरा तरीका है कि दिक्कत को सीधे सभी के सामने बता दीजिए. 

इस तरीके से आप कंपनी के अंदर आ रही दिक्कत को सीधे सबके सामने रख सकते हैं. ऊपर बताई गई इन दोनों मेथड से आप दिक्कतों का हल निकाल सकते हैं. 

इंटरेस्ट बेस्ड अप्रोच की आगे की मेथड अगले चैप्टर में बताई गई है. 

खुद के साथ-साथ सभी का इंटरेस्ट आपको पता होना चाहिए. तीसरे स्टेज में जब आपको कॉनफ्लिक्ट में मौजूद सभी पार्टी के इंटरेस्ट के बारे में जानकारी हो जाए. उसके बाद खुद के इंटरेस्ट को भी टटोलने की कोशिश करियेगा. आपका इंटरेस्ट उस पोजीशन से अलग होना चाहिए. किस पोजीशन से?

आप कॉनफिल्क्ट का जो भी रिजल्ट चाहते हैं. आपका इंटरेस्ट उससे अलग होना चाहिए. अगर ऐसा होता है तभी आप न्यूट्रल रहकर फैसले तक पहुँच पाएंगे. 

इस मेथड में आपको ये ध्यान रखना है कि आपके पास कोई दूसरा प्लान होना चाहिए. 

मान लीजिए कि आपको अपनी कार बेचनी है. जिसकी कीमत आपने 8 लाख रूपए लगाई है. लेकिन फिर आपको पता चलता है कि आपके दोस्त को ही वो कार खरीदनी है. लेकिन वो बस 6 लाख ही दे सकता है. 

फिर आपको क्या करना चाहिए? क्या आपको दोस्त के साथ डील कैंसिल कर देनी चाहिए.

इस सिचुएशन में आपके पास वो कला होनी चाहिए कि आप कोई दूसरा प्लान बना सकें. 

तब आप अपने दोस्त से ऐसा भी कह सकते हैं कि “भाई, आप ईएमआई में पैसे दे सकते हो क्या?” या फिर आप एक नई कीमत भी लगाकर उसे ऑफर दे सकते हैं. 

ऐसा करने से आप और आपके दोस्त के बीच के संबंध और बेहतर हो जाएंगे. 

आपको याद रहना चाहिए कि कोलैबरेशन के लिए प्लानिंग का होना भी बहुत ज़रूरी होता है. 

कभी-कभी हल निकालने के लिए इशयूज़ को ब्रेक डाउन भी कर देना चाहिए, इससे आपको नई अप्रोच मिल सकती है
चलिए इंटरेस्ट बेस्ड अप्रोच के फाईनल को खेलने की शुरुआत करते हैं. इसका नाम ‘कॉनफ्लिक्ट मैनेजमेंट’ है. 

इस एंड रिजल्ट में हम कॉनफ्लिक्ट को थोड़ा क्रिएटिव तरीके से सॉल्व करने की कोशिश करेंगे. इसमें हम इश्यु को ही कई पार्ट्स में तोड़ सकते हैं.एग्जाम्पल के लिए अगर लेबर यूनियन सैलरी के लिए स्ट्राइक पर जाता है. इस दौरान अगर मैनेजमेंट उनके सैलरी वाले इश्यु को और बारीकी से देखने की शुरुआत करे. तो उन्हें पता चल सकता है कि दिक्कत तो कहीं और ही थी. इसी के साथ ही साथ वो इस समस्या को बड़ी आसानी से हल भी कर सकते हैं. इस प्रोसेस में ज़रूरी क्या है? इस प्रोसेस को करते समय आपको सिस्टम का ख्याल रखना है. आपकी स्ट्रेटजी क्लियर रहनी चाहिए. लेबर्स की सैलरी का मुद्दा क्या हम साल भर में बोनस देकर खत्म कर सकते हैं? 

बोनस एक अप्रोच के रूप में आपको मिला है. इसे टेबल में मौजूद सभी लोगों से डिसकस करिए. 

जब आप सभी से बात करेंगे तो फिर आपको और भी ज्यादा आईडिया मिल सकते हैं. इसके बाद उस समस्या का हल निकालने के लिए आप नेगोशियेशन टेकनीक का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. आपको पता होना चाहिए कि किसी भी बिजनेस को सफल बनाने के लिए आपका नेगोशियेशन तकनीक में माहिर होना बहुत ज़रूरी है. जितने भी आईडिया आए हैं. उनका एक ड्राफ्ट बनाइए, उसके बाद उसे सभी को दीजिए. इसके बाद शांति से विचार विमर्श करिए. समस्या का हल आपके सामने होगा. याद रखिये लेखक बताते हैं कि मुद्दे को ब्रेक करने से नई अप्रोच के साथ ही साथ नया हल भी मिल जाता है. इसलिए अब समय आ गया है कि आप अपने बिजनेस के लिए कोलैबरेशन के महत्त्व को समझ जाइए.

कुल मिलाकर
आज की दुनिया इंटर कनेक्टेड हो चुकी है. आज के समय ये बहुत ज़रूरी है कि आपको कोलैबरेशन की स्किल्स के बारे में पता होना चाहिए. अब इस तकनीक के आप एक्सपर्ट कैसे बन सकते हैं? उसके लिए इस किताब के चैप्टर्स में बताई गईं 5 स्किल्स के ऊपर काम करने की शुरुआत कर दीजिए. 

 

क्या करे

किसी भी कॉनफ्लिक्ट को हल करने के लिए आप ब्रेनस्टॉर्म करने की तकनीक का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. ये एक ऐसी तकनीक है. जिसकी मदद से आपको बहुत सारे आईडिया मिलेंगे. इस तकनीक को करने के लिए सभी को आप दस मिनट का समय देकर उनसे 5 आईडिया लिखने को बोलियेगा. इससे आपके सामने आईडियाज़ की बरसात हो जाएगी. 

येबुक एप पर आप सुन रहे थे Radical Collaborationby James W. Tamm and Ronald J. Luyet

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