Human Hacking

0
Human Hacking

Christopher Hadnagy with Seth Schulman
लोगों को इंप्रेस कीजिए, और ऐसे मिलिये कि आपसे मिलकर वह खुश हो जाएं

दो लफ्जों में
ह्यूमन हैकिंग (2021) एथिकल सोशल इंजीनियरिंग के लिए एक गाइड है. मतलब लोगों को इंप्रेस करने और उन्हें अपने फेवर में लाने के लिए सही तरीकों का इस्तेमाल करना. यह समरी बताती है कि कैसे आप हैकर्स द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले  साइकोलॉजिकल टूल्स के इस्तेमाल से अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में सोशल इंट्रैक्शन बढ़ा सकते हैं. यहां पर आप अपनी कम्युनिकेशन टेंडेंसीज को बेहतर करने से लेकर कंवर्जेशन को  अपने फेवर में करने तक की टिप्स जानेंगे. साथ ही यह समरी लोगों को इंप्रेस करने के लिए आपको एंपैथी और कंपैशन का इस्तेमाल करना सिखाती है.

किनके लिये है
- वह लोग, जो लोगों को आसानी से मना या कन्वेंस कर लेना चाहते हैं
- जो लोग नए दोस्त बनाना चाहते हैं
- सोशल इंजीनियरिंग में दिलचस्पी रखने वाले 

लेखक के बारे में
क्रिस्टोफर ग्लोबल सिक्योरिटी एक्सपर्ट और सोशल इंजीनियरिंग, LLC के फाउंडर हैं.  वह सिक्योरिटी प्रोफेशनल्स के लिए 'सोशल इंजीनियरिंग: द आर्ट ऑफ़ ह्यूमन हैकिंग' और 'सोशल इंजीनियरिंग: द साइंस ऑफ ह्यूमन हैकिंग' सहित  कई टेक्निकल बुक के बेस्ट सेलिंग लेखक हैं.

लोगों के फायदे को ध्यान में रखते हुए उन्हें इनफ्लुएंस करिए
क्या आपको कभी ऐसा महसूस होता है कि आप जो भी कहते हैं लोग उसका गलत मतलब समझ लेते हैं? या आपको लोगों से अपनी बात मनवाने में मुश्किल होती है? रोजमर्रा की जिंदगी में कम्युनिकेशन स्ट्रेटजी की कमी की वजह  से फीलिंग के हर्ट होने से लेकर इगो हर्ट होने तक कई प्रॉब्लम का सामना करना पड़ता है. अच्छी बात यह है कि आप सोशल इंजीनियरिंग के प्रिंसिपल के ज़रिए अपनी इंट्रैक्शन को बेहतर कर सकते हैं. जहां एक तरफ हैकर्स ने साइकोलॉजिकल टूल्स का इस्तेमाल कर लोगों को नुकसान पहुंचाया है आप अपने फायदे के लिए उन्हीं टूल्स कर इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए आपको एथिकल वैल्यूज को फॉलो करना होगा. इस समरी में आप ऐसी टैक्टिक्स जानेंगे जिनकी मदद से आप लोगों को इंप्रेस कर के जो चाहते हैं वह हासिल भी कर लेंगे, और लोग आपसे खुश भी रहेंगे. इस समरी में आप यह भी जानेंगे, कि कैसे आपकी मुट्ठी की पोजीशन आपकी कन्वर्सेशन गोल पर असर कर सकती है? क्यों एक रिसेप्शनिस्ट जानबूझकर किसी धोखेबाज को बिना इजाजत अपने वर्कप्लेस में घुसने देती है, और कैसे आप लोगों से इंफॉर्मेशन निकलवाने के लिए बकवास बातों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

तो चलिए शुरू करते हैं! 

यह बहुत पुरानी बात नहीं है जब लेखक क्रिस्टोफर अपनी फैमिली के साथ लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पर चेक-इन कर रहे थे. लेखक बैग में अपना पासपोर्ट देख रहे थे तभी उनकी वाइफ में अटेंडेंट के स्कार्फ की तारीफ की, बदले में अटेंडेंट मुस्कुराई और थैंक्यू कहा. हो सकता है यह एक ऐसा मोमेंट लग रहा हो जिसे भुला दिया जाएगा. अगर आपको ऐसा लगता है, तो आप ह्यूमन हैकिंग का चांस खो देंगे.  ऐसी सिचुएशन सामने आई तो एक सिक्योरिटी एक्सपर्ट होने के नाते लेखक ने सोशल इंजीनियरिंग का मौका भांप लिया. उन्होंने आगे बढ़ कर कैजुअली पूछ लिया कि अपग्रेट करवाने के लिए कितने पैसे लगेंगे. अटेंडेंट ने एक नजर लेखक की वाइफ की तरफ देखा और कहा, "मैं आप लोगों को फर्स्ट क्लास में अपग्रेट कर रही हूँ."

तो असल में हुआ क्या था? दरअसल लेखक ने भांप लिया था की अटेंडेंट को डेली बदतमीज और चिड़चिड़े पैसेंजर्स से डील करना पड़ता है. ऐसे माहौल में उसे एक अनएक्सपेक्टेड कंपलीमेंट मिल गया था, उसकी स्माइल से पता लग रहा था कि उसका मूड बेहतर हो गया था. क्योंकि लेखक सोशल इंजीनियरिंग एक्सपर्ट थे इसलिए उन्हें मालूम था कि यह सिचुएशन उनके और उनकी वाइफ के लिए फायदेमंद होगी. तो उन्होंने एक रिक्वेस्ट करने का फैसला किया और नतीजतन उन्हें दोगुना फायदा हो गया. यहां पर जो चीज इंपॉर्टेंट है वह यह कि उन्होंने अटेंडेंट से फ्री में अपडेट करने की रिक्वेस्ट नहीं की थी. एथिकल हैकिंग से उलट क्रिमिनल हैकिर्स लोगों के इमोशंस का फायदा उठाकर उनसे अपनी रिक्वेस्ट पूरी करवा लेते हैं, चाहे इससे सामने वाले को कितना ही नुकसान हो जाए. लेकिन जब आप सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल एथिकली करते हैं तो सामने वाला ना सिर्फ आपकी रिक्वेस्ट पूरी कर देता है बल्कि उसे खुद के बारे में भी अच्छा महसूस होता है, जैसा कि एयर लाइन अटेंडेंट वाले केस में हुआ. लेखक के लिए win-win सिचुएशन थी. आगे हम ऐसे टूल्स के बारे में बात करेंगे जिनकी मदद से आप अनजानो और जिन लोगों का फायदा शामिल है उन्हें, दोनों को एक दूसरे के फायदे के लिये इंप्रेस कर सकेंगे. जब आप सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल करें तो ह्यूमन हैकिंग के एथिकल कोड्स को हर इंट्रैक्शन में अपने ध्यान में रखें जो कहता है, कि "लोगों को आपसे मिलने के बाद खुशी होनी चाहिए." इन टैक्टिक्स का इस्तेमाल कम्पैशन के लिए कीजिए लोगों को मैनिपुलेट करने के लिए नहीं. इससे पहले कि आप लोगों को इंप्रेस करने चलें, आपको खुद की हैकिंग आनी चाहिए.

दूसरों को जज या इवेलुएट करने से पहले अपनी कम्युनिकेशन टेंडेंसीज़ को मास्टर कीजिए
मान लीजिए कि आपका कोई दोस्त अपने पर्सनल मैटर पर आपका ओपिनियन मांगता है. जैसे आप अपना सच्चा ओपिनियन उसे देना शुरू करते हैं वह आपको रोक देता है और नाराज होकर कहता है कि आप बहुत इनसेंसेटिव हैं, मतलब आपको लोगों के जज्बातों का ख्याल नहीं. आप हैरत में पड़ जाते हैं, आप तो सिर्फ अपने थॉट शेयर कर रहे थे क्योंकि आपसे कहा गया था. आप सोच लेते हैं कि आपका दोस्त जरूरत से ज्यादा ही सेंसिटिव है. क्या ऐसा नहीं हो सकता था कि आप का बताने का तरीका कुछ और होता? दूसरों को इंप्रेस या हैक करने से पहले आपको यह जानना होगा कि आपकी नेचुरल कम्युनिकेशन टेंडेंसी, नेचुरल बात करने का तरीका, कैसे रिप्रेज़ेन्ट होते हैं. लेखक, साइक्लोजिस्ट विलियम मोल्टन, मार्सटन द्वारा 1920 में बनाई गई प्रोफाइलिंग टूल, DISC को रेकमेंड करते हैं. DISC लोगो को चार अलग-अलग हिस्से में बांट देता है, पहला है डॉमिनेंट, जो कॉन्फिडेंट होते हैं और अपना गोल अचीव करने पर फोकस करते हैं, दूसरे इनफ्लुएंसर होते हैं जो बड़ी लगन और उत्साह के साथ लोगों के साथ मिलकर काम करते हैं, सिंसेयर लोग अक्सर शांत और सपोर्टिव होते हैं, आखिर में आते हैं कॉसेंशियस यानी ईमानदार लोग, जो ऑर्गेनाइज होते हैं और फैक्स्ट के आधार पर काम करते हैं. यह जानने के लिए कि आप किस टाइप के इंसान हैं, अपने आप से 2 सवाल कीजिए, जब आप लोगों से मिलते हैं तो क्या आप लोगों पर फोकस करते हैं या अपने मकसद पर? अगर आप नतीजे को तरजीह देते हैं और डायरेक्ट कम्युनिकेट करते हैं तो हो सकता है आप डोमिनेंट या इनफ्लुएंसर में से कोई एक हों. वहीं दूसरी तरफ अगर आप लोगों पर फोकस करते हैं और इनडायरेक्टली बात करते हैं तो आप कॉशियस या सिंसेयर टाइप के इंसान होंगे. आप किस तरह के इंसान हैं यह जानना खास तौर पर इस लिए फायदेमंद होता है क्योंकि इससे आपको पता चल जायेगा कि किन-किन जगहों पर आपकी बात करने का स्टाइल नुकसानदायक हो जाता है. उन सिचुएशंस के बारे में सोचिए, जो बार-बार आती हैं जैसे कि अपने फैमिली मेंबर्स, फ्रेंड्स या को वर्कर के साथ होने वाली बातचीत, जहां आप कुछ इस तरीके से बात करते हैं जो लोगों को पसंद नहीं आतीं. एक बार अगर आप प्रॉब्लम को समझ लेते हैं तो आप उसे सॉल्व करने की स्ट्रेटेजी भी बना लेंगे. अगर आप इनफ्लुएंसर टाइप के इंसान हैं तो हो सकता है आप मीटिंग में अपनी फीलिग्स के बारे में कुछ ज्यादा ही बातें करके आपने कलीग्स को अलग थलग कर देते हों. इसे सही करने के लिए, अगले पूरे हफ्ते अपने बारे में बात करने की ख्वाहिश को दबाइए. उस सिचुएशन के लिए खुद को तैयार कीजिए खास करके इमोशनल रिस्पांस के लिए जो बदले में आपके अंदर होने वाली हैं. अगर जरूरत हो तो ब्रेक भी ले लीजिए. एक बार जब आपका खुद की आदतों पर कंट्रोल हो जाए तो आप अपनी जिंदगी के इंपॉर्टेंट लोगों का DISC एसेसमेंट कर सकते हैं. क्ल्यूलेस होने के बजाय, आप अपने फ्रेंड के कम्युनिकेशन प्रोफाइल पर अच्छे से फीडबैक भी दे सकेंगे, जिससे उसका कॉन्फिडेंस भी कम ना हो. आपका मकसद क्या है इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता, अगर आप अपने कम्युनिकेशन स्टाइल में थोड़ा सा एडजस्टमेंट कर लेते हैं, तो यह आपके सक्सेस के चांसेस को बढ़ा देगा.

पूरी कंवर्जेशन को अपने फायदे में या अपने फेवर में लाने के लिए कुछ प्रिटेक्स्ट तैयार कीजिए। 

इमेजिन कीजिए कि आपको आपके बॉस की तरफ से एक मेल आता है जिसमें किसी तरह की ग्रीटिंग नहीं होती बस यह लिखा होता है कि, "कल मुझे 3:00 बजे कॉल करो." अगले 24 घंटे आप इस फिक्र में गुजार देते हैं कि आपकी जॉब जाने वाली है. लेकिन जब आप आगले दिन नींद से भरे होकर अपने बॉस को कॉल करते हैं तो पता चलता है कि उन्हें प्रेजेंटेशन के किसी छोटे से मसले पर बात करनी है. क्या अच्छा नहीं होता अगर वह मुलाकात की वजह लिख देतीं? उनके मेल में जिस चीज की कमी थी वह है, प्रिटेक्स्ट, या फिर ऐसे कांटेक्ट जो किसी भी सोशल इंटरेक्शन को कामयाब कर सकते हैं. जिसे लेखक "द आर्ट ऑफ स्टार्ट" कहते हैं. प्रिटेक्स्टिंग का मतलब मुलाकात का सामने वाले के लिए फायदेमंद होने की जरूरत को समझना. किसी भी कन्वर्जेशन से पहले बड़ी आसानी से प्रिटेक्स्ट करने के लिये लेखक 7 स्टेप फ्रेमवर्क बताते हैं, जिसे PREPARE शब्द की मदद से याद रखा जा सकता है. इसका इस्तेमाल आपको किसी भी वक्त किसी भी कन्वर्सेशन के लिए तैयार करता है. पहला अपने मन में उस प्रॉब्लम(P) को क्लेरिफाई कीजिए जिसे आप सॉल्व करके कोई रिजल्ट(R) हासिल करना चाहते हैं. मान लीजिए कि आपकी बेटी के माक्र्स तेजी से कम होते चले जा रहे हैं. यहां पर प्रॉब्लम अचानक से उसकी खराब परफॉर्मेंस है. इसका रिजल्ट आपका उसकी दिक्कतों को समझना है ताकि आप उसे दूर कर सकें. लेकिन इससे पहले कि आप उससे बातचीत करना शुरू करें आपको इमोशनल(E) माहौल को देखना होगा और खुद ऐसा कुछ करना होगा मतलब कोई प्रोवोकेशन(P) करना होगा जिससे जरूरत का इमोशनल माहौल तैयार हो सके. मान लीजिए कि आप यह बातें बड़ी शांति से करना चाहते हैं, तो शांत माहौल क्रिएट करने के लिए, आपको एंपैथेटिक तरीके से बातचीत करनी होगी. 

एक बार जब आप टारगेटेड इमोशनल टोन तैयार कर ले तो एक कदम आगे बढ़ कर अपना प्रिटेक्स्ट शुरु या एक्टिवेट (A) कीजिए. इसके तहत आप खुद को प्रिटेक्स्ट क्लियर करते हैं. इस पूरी बातचीत में आपका प्रिटेक्स्ट "अटैंटिव और हेल्पफुल पेरेंट्स" होना है. आपके सभी एक्शन सभी कदम इसी प्रिटेक्स्ट के तहत ही होने चाहिए. एक बार प्रिटेक्स्ट वाला काम खतम करने के बाद यह सोचिए कि इसे फाइनल रूप, या रेंडर (R), कैसे दिया जाए. इसके तहत, आपको अपने बातों की डिलीवरी कैसे देनी है कहां पर क्या कहना है, यह सारी चीजें आती हैं. आखिर में बहुत ध्यान से इस बात को इवेलुएट(E) कीजिए कि आपके PREPARE के सारे स्टेप एक दूसरे से मैच करते हैं या नहीं और आप जिस मकसद के साथ यह बातचीत करने आए थे क्या आप पॉजिटिव नोट पर बातचीत खत्म कर पा रहे हैं. प्रोफाइलिंग की तरह, प्रिटेक्सटिंग का मतलब इस बात का कंट्रोल पाना होता है कि दूसरे आपको कैसे समझेंगे, और किसी ऐसे नतीजे पर पहुंचना होता है जिसमें दोनों तरफ के लोगों की "हामी" हो ताकि आप दोनों ही बातचीत को एक पॉजिटिव नोट पर खत्म कर सकें.

लोगों के साथ एक फ्लो बनाइए और उन्हें अपनी रिक्वेस्ट मानने के लिए इंकरेज कीजिए
हम जब भी किसी इंसान से मिलते हैं तो हम इस बात का अंदाजा लगा लेते हैं कि हमारी उससे कितनी देर मुलाकात होगी और वह मुलाकात हमारे काम की भी होगी या नहीं. अगर आप कॉफी की लाइन में खड़े होकर कॉफी लेने का इंतजार कर रहे हैं और पीछे से कोई आपके कंधे पर हाथ रखता है तो उसे जवाब देना कोई बहुत मेहनत वाला काम नहीं लगता, आप यह मान लेते हैं कि ज्यादा से ज्यादा यह इंट्रैक्शन तब तक ही चलेगी जब तक आप में से कोई एक अपनी कॉफी लेकर यहां से चला नहीं जाता. अब सोचिए कि आप मीटिंग के लिए जा रहे हैं और कोई आपको रास्ते में रोक देता है. ऐसी सिचुएशन में पॉसिबल है कि आप बातचीत से बचें. क्योंकि आपको कहीं पहुंचना है. जब आप किसी दूसरे इंसान से बातचीत करने की कोशिश करते हैं तब भी इस बात को अपने ध्यान में रखिए, आप जिससे इंट्रैक्ट कर रहे हैं उसे बताइए कि आपकी बातें उसके वक्त के काबिल हैं. चूँकि हर सिचुएशन कि अपनी एक डेफिनिट टाइम लिमिट होती है, इसलिए जरूरी है कि आप पहली मुलाकात में ही जल्दी से जल्दी फ्लो बनाने की कोशिश करें. अगर आपको लगता है कि आप टाइम लिमिट के अंदर सामने वाले को इंप्रेस नहीं कर सकेंगे, तो पॉसिबल है कि आपकी रिक्वेस्ट न एक्सेप्ट की जाए. रैपर्ट बनाना बहुत इंपॉर्टेंट है, क्योंकि इसमें ऑक्सीटॉसिन शामिल होता है, एक ऐसा हार्मोन जिससे यकीन और जेनेरोसिटी डेवलप होती है. हम में से बहुत सारे लोग यह काम अपने पड़ोसी से इंट्रैक्ट करते वक्त क्लाइंट से बात करते वक्त और ग्रॉसरी के दुकान वाले से उसका हाल पूछते वक्त ऑटोमेटिकली करते हैं. लेकिन जब टाइम लिमिट ऑब्वियस न हो, जैसे कि आप किसी को रास्ते में रोक लेते हैं तो आप आर्टिफिशियल टाइम लिमिट बनाकर उससे रैपर्ट या बॉड बिल्ड करने के लिए इस अपॉर्चुनिटी का इस्तेमाल कर सकते हैं. जब आप किसी स्ट्रेंजर को टोक रहे हो तो उससे यह मत पूछिए कि क्या उसके पास कुछ वक्त है, बस कह दीजिए, "सुनिए, क्या मैं आपका 2 मिनट ले सकता हूं. मैं पड़ोस में नया हूं और एक अच्छे रेस्टोरेंट की तलाश कर रहा हूं." अगर आप प्रिटेक्स्ट पर अमल करते हुए थोड़े से वक्त में अपनी बात कह देते हैं तो सामने वाला खूशी खुशी आपसे बात करेगा. एक बार जब आपको बातचीत जारी रखने की इजाजत मिल जाए, तो अपने बारे में बताने से शुरुआत कीजिए. अगर आप अपने क्लाइंट से तालमेल बिठाना चाहते हैं और आपको उसके डेस्क पर कुत्ते की तस्वीर दिखाई पड़ती है तो आप अपने कुत्ते के बारे में बात कर सकते हैं. दूसरा तरीका अपने सब्जेक्ट को मेन पॉइंट बनाकर बात करना है. मिसाल के तौर पर, आप बेस्ट डॉग पार्क के बारे में सलाह मांग सकते हैं. जब आप सामने वाले को इंफॉर्मेशन और अथॉरिटी देते हैं तो आप उससे बराबरी का रिस्पांस एक्सपेक्ट कर सकते हैं. शुरुआत में रैपर्ट/बांड बनाने पर मेहनत करके, आप वह हासिल कर लेंगे जो आप चाहते हैं, साथ ही दूसरों को उनके बारे में अच्छा भी महसूस करवा सकेंगे.

छोटी-छोटी टैक्टिक्स को एक साथ इस्तेमाल करके आप दूसरों को अपने लिए बिडिंग करने के लिए तैयार कर सकते हैं. एक सिक्योरिटी एक्सपर्ट होने के नाते लेखक को कमियों की पहचान करने के लिए कंपनी के सिक्योरिटी सिस्टम में छानबीन करने की जिम्मेदारी दी गई.  कंपनी के एग्जीक्यूटिव  ऑफिसों में लेखक ने पाया कि रिसेप्शनिस्ट अपने कम्प्युटर पर गेम खेल रही थी. यह उनके लिए अपनी सोशल इंजीनियरिंग की काबिलियत का इस्तेमाल करने का मौका था. लेखक ने उसे वॉर्न किया कि वह  देख सकते हैं, कि उसके स्क्रीन पर क्या चल रहा है, रिसेप्शनिस्ट ने फौरन अपने बॉस को देखते हुए अपना कंप्यूटर बंद कर दिया, जिसके लिए उसने और लेखक को शुक्रिया भी कहा. और इसी वक्त लेखक को अंदर आने की इजाजत मांगने का मौका मिल गया, उन्होंने कहा कि वह एक मीटिंग के लिए लेट हो गए हैं, हालांकि रिसेप्शनिस्ट के फेस रिएक्शन से लग रहा था कि वह जानती है कि लेखक झूठ बोल रहे हैं, लेकिन फिर भी उसने लेखक को अंदर आने दिया. चंद मिनटों में कंपनी का सारा डाटा हैक कर लिया. इस सिचुएशन में जिस तरीके का इस्तेमाल किया गया उसे ना ही रैपर्ट बिल्डिंग कहते हैं और ना ही इसके लिए लेखक ने प्रिटेक्ट का इस्तेमाल किया. यह सिंपल ह्यूमन हैकिंग थी जिसे प्रिंसिपल ऑफ इनफ्लुएंस कहते हैं. यहां पर उन्होंने खास तौर पर रिसिप्रोकेशन नाम के प्रिंसिपल का इस्तेमाल किया. उन्होंने रिसेप्शनिस्ट को वह जानकारियां दी जो उसके लिए जरूरी थी, तो एहसान के बदले उसे मदद करनी पड़ी. इसी तरह रैपर्ट बिल्डिंग, जिसे बांड बनाना भी हम कह सकते हैं, से उलट अपने सब्जेक्ट को मेन पॉइंट बनाने के बजाय प्रिंसिपल ऑफ इंफ्लुएंस में खुद को अथॉरिटी में रखा जाता है. क्योंकि जो लोग या चीज़ अथॉरिटी में होते हैं, हम उनसे जल्दी तालमेल बिठाने की कोशिश करते हैं इसलिए जरूरी और एक्सपर्ट इंफॉर्मेशन शेयर करके आप भी ट्रस्ट बिल्ड कर सकते हैं. मिसाल के तौर जब आप अपने बॉस को खुद को हायर करने के लिए कन्वेंस कर रहे हों तो आप उस फील्ड से रिलेटेड वोकैबुलरी यानी कठिन शब्दों का इस्तेमाल कर सकते हैं. क्यों ना आप इसी हफ्ते प्रिंसिपल ऑफ इनफ्लुएंस टेस्ट करें? अपने किसी दोस्त को वह खाने के लिए मनाइए जो वह कभी ट्राई भी नहीं करना चाहता था. अगर आप किसी रॉ फूड खाने वाले को सूशी ट्राई करने के लिए मनाना चाहते हैं, तो आप उसके खाने का बिल पे करने का इनिशिएटिव ले सकते हैं. खाने के दौरान आप सूशी से जुड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कुछ गहरी जानकारियां शेयर कर सकते हैं. अगर आपका इनफ्लुएंस आपके दोस्त को अपनी लिमिट से आगे बढ़ने के लिए इंस्पायरर करता है, तो सरप्राइज होने की जरूरत नहीं है. 

जब आप जमीनी तौर पर इन तरीकों का इस्तेमाल करते हैं, तो इन्हें हालात के हिसाब से थोड़ा सा ऊपर नीचे किया जा सकता है. लेकिन जरूरत से ज्यादा मत कीजिए. अगर आपकी नियत जाहिर होती रहेगी तो आप पकड़े जाएंगे और हो सकता है कि लोग आपको ना पसंद करने लगे.

सामने वाले से बिना मांगे अपने काम की जानकारियां हासिल कीजिए
मान लीजिए कि आप पहली डेट पर है. आप जानना चाहते हैं की आप की डेट बच्चे करना चाहती है या नहीं, उसके पास जॉब है या उसकी दिलचस्पी या आप से मैच करती हैं या नहीं, इसके लिए एक ऑप्शन तो यह है कि आप फौरन उससे इस बारे में पूछ लें. हो सकता है कि आपको सही जवाब मिले या ना मिले. इसके साथ ही आपकी बातचीत छानबीन और पूछताछ जैसे लगने का भी रिस्क है. अगर आपको यह सारी जानकारियां बिना एक भी सवाल करे, और बातचीत को मजेदार बनाए रखते हुए मिल जाए तो?  प्रिंसिपल ऑफ एलिसिटेशन, यानी बातों में जज्बातों का तड़का लगाकर पेश करने के एक्ट, के जरिए आप किसी भी टॉपिक पर जानकारियां निकाल सकते हैं वह भी बिना पूछे. एलिसिटेशन इस तरह से लोगों को इंफ्लुएंस करता है, जिसमें वह जानकारियां साझा कर दी जाती हैं जो लोग अमूमन सीक्रेट रखते हैं. इस तरीके का इस्तेमाल खासतौर पर क्रिमिनल्स करते हैं. मिसाल के तौर पर जासूसी करने वाले फेक सोशल मीडिया अकाउंट बनाते हैं और लोगों से उनकी बैंक डिटेल्स जैसी सेंसिटिव जानकारियां निकाल लेते हैं.

जो चीज इस टेक्नीक को ज्यादा सक्सेसफुल बनाती है वह यह है, कि यह बिल्कुल भी खतरे वाली नहीं लगती. इसमें आपको कुछ इस तरीके से इंफॉर्मेशन देनी होती है जिससे सामने वाला मोटिवेट होकर अपनी जानकारियां साझा कर दे. चलिए मान लेते हैं कि आप बिना पूछे यह जाना चाहते हैं कि आप की डेट बच्चे चाहती हैं या नहीं. इसके लिए आप कुछ इस तरह के सेंटेंस इस्तेमाल कर सकते हैं, "आज मैंने कहीं पढ़ा कि बहुत सारे बच्चे लोग एनवायरनमेंट की वजह से बच्चे नहीं चाहते." इस तरह की बातें सामने वाले को अपनी जानकारियां साझा करने के लिए मोटिवेट करती है, और आपको पूछने की भी जरूरत नहीं पड़ती. 

दूसरा आसान तरीका कोई गलत बात कह देना है. लोगों के अंदर दूसरों को सही करने की नेचुरल आदत होती है और अगर आप कोई बात जानबूझकर गलत कहते हैं, तो मुमकिन है कि सामने वाला आपको उस बारे में सही जानकारी देने के साथ ही इस दौरान नई बातें बता दे. लेखक के एक स्टूडेंट ने बिना पूछे लोगों का बर्थडे जानने के लिए इसी टैक्टिक का इस्तेमाल किया. वह लोगों से खाने के दौरान बात तो करता, और कहता अगर आप स्ट्रॉबेरी खा रहे हैं इसका मतलब है आपका बर्थडे फरवरी में है. लोग ना सिर्फ उसके स्टेटमेंट को सही करते, बल्कि अपना असल बर्थडे भी बता देते. जितना ज्यादा आप अपने मकसद को लेकर क्लियर होंगे, उतनी आसानी से आप बातचीत को अपने फेवर में कर सकेंगे. जैसे जैसे आपको इस टेक्नीक में कामयाबी मिलती जाएगी, आप एक एलिसिटर के तौर पर बेहतर होते जाएंगे.

यह जानना कि पढ़ा कैसे जाए और नॉनवर्बल क्यूज़ का इस्तेमाल  कम्युनिकेशन को आपके फेवर में कर सकता है. जब एक फ्रेंडली डॉग पलट कर रोल करने लगे और सहलाने के लिये आपकी तरफ से अपनी बेली करता है तो इसका मतलब है, उसे आप पर यकीन है. इसे नॉन वेंट्रल डिस्प्ले कहते हैं. हालांकि अगर एक इंसान भी अपनी बैक या बेली आपकी तरह करता है तो यह भी कंफर्ट और ट्रस्ट का ही साइन है. एक ऐसा फिनोमिना जिसे फॉर्मर FBI इंस्टिगेटर 'जो नवारो' वेंट्रल फ्रंटिग कहते हैं. इस तरह के क्लूज़ की समझ आपको अपना सोशल इंट्रैक्शन बेहतर करने में मदद कर सकते है. जब आप लोगों से बात कर रहे हो तो इस बात का ध्यान रखना बहुत जरूरी हो जाता है कि वह उस पर्टिकुलर सिचुएशन में कंफर्टेबल है या नहीं. ऐसा करने का बहुत आसान सा तरीका उनकी बॉडी लैंग्वेज में आ रहे बदलावों पर ध्यान देना है, जिसे हम नॉनवर्बल कम्युनिकेशन भी कहते हैं. जैसा कि सभी सोशल इंजीनियर को मालूम है कि बहुत सारे वेंट्रल डिस्प्ले हैं, जिनका इस्तेमाल किया जा सकता है. मिसाल के तौर पर जब लोग आपके साथ कंफर्टेबल होते हैं तो वह नेचुरली अपना सर घुमाने और अपनी कलाई का अंदरूनी हिस्सा आगे करने जैसी बॉडी लैंग्वेज अपनाते हैं. अगर किसी को लंच के लिए इनवाइट करते हुए आप अपनी हथेली और अपनी गर्दन आगे की तरह झुकाते हैं, तो इस तरीके से इनविटेशन देना फ्रेंडली होने की कौतूहल दिखाता है. लेकिन अगर आप की गर्दन सीधी है और आपकी हथेली नीचे की तरफ है तो यह फॉर्मल रिलेशनशिप का साइन है.

जब आप किसी सोशल इंटरेक्शन वाली जगह पर जा रहे हों, तो नॉन वर्बल क्यूज़ का इस्तेमाल करना इंपॉर्टेंट है, क्योंकि इससे आपको वह जानकारियां मिल जाती हैं जो रैपर्ट बिल्डिंग में आपकी मददगार होंगी. चाहे आप किसी अनजान इंसान से मिल रहे हों या उससे जिसे आप बहुत अच्छी तरीके से जानते हैं अगर मुमकिन हो तो सामने वाले को 20 से 30 सेकंड तक देखिए. इतने में आपको कुछ इंपॉर्टेंट सिग्नल मिल जाएंगे, हालांकि इतनी देर तक मत देखिए कि सिचुएशन ही ऑकवर्ड हो जाए. अगर आप बातचीत के दौरान यह नोटिस करते हैं कि सामने वाला बात करने से कतरा रहा है या सेल्फ प्रोटेक्टिव सिग्नल का इस्तेमाल कर रहा है तो बेहतर है आप अपना तरीका बदलें या फिर पूरी की पूरी बातचीत खत्म कर दें. बातचीत को आगे बढ़ाने की अपनी ख्वाहिश को जाहिर करते वक्त, आप सामने वाले पर इमोशनल इफेक्ट डालने के लिए बॉडी लैंग्वेज का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके पीछे की वजह है "मिररिंग." मिसाल के तौर पर, स्माइल पॉजिटिव इमोशन डिवेलप करती है. ज्यादातर इंट्रैक्शन में अगर आप अपनी बॉडी लैंग्वेज से कॉन्फिडेंस और हैप्पीनेस जाहिर करते हैं, तो आपको इसके बदले में ऐसे ही बॉडी लैंग्वेज मिलेंगे.

चालबाज़ियों से भरे मैनिपुलेशन को समझिये ताकि आप इन से बच सकें
क्या आपने कभी बस में अपनी बगल वाली सीट पर अपनी जैकेट रखी है. ताकि आपको वह जगह किसी दूसरे इंसान के साथ शेयर ना करनी पड़े? हो सकता है कि आप हेडफोन लगा लेते हों ताकि लोग आपसे पूछ ही ना सकें कि बगल वाली सीट खाली है या नहीं. ऐसे सेनैरियोज़ ह्यूमन हैकिंग के नहीं बल्कि मैनिपुलेशन के एग्जांपल्स हैं. बातचीत की एथिकल टैक्टिक्स का इस्तेमाल करके आप अपने बगल में बैठने की कोशिश करने वाले से प्यार से बात कर उसे कहीं और बैठने के लिए मना सकते हैं. लेकिन झूठी सिचुएशन क्रिएट करके किसी को कोई फैसला लेने के लिए मजबूर करना जालसाज़ी है. जब खासतौर पर अनजाने लोग बस की सीट जैसी चीजें ढूंढ रहे हों, तो मैनिपुलेटिव बिहेवियर कॉमन है. लेकिन यह रोजमर्रा की जिंदगी की छोटी छोटी चीजों में भी कॉमन हो गया है, जो कि हैरत में डालने वाला है. चलिए मान लेते हैं कि आपको अपने किसी करीबी से कोई चीज चाहिए, क्या आप इसके लिए स्ट्रेटफारवर्ड तरीके का इस्तेमाल करते हैं? या फिर आप ऐसे इमोशंस जाहिर करते हैं जिसकी वजह से सामने वाला वह कर देता है जो आप चाहते हैं? 

सोशल इंजीनियर की तरह ही मैनिपुलेटर्स भी ह्यूमन साइकोलॉजी का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करते हैं. लेकिन मैनिपुलेटर्स कंपैशन की जगह, साइंस जर्नलिस्ट डेनियल गोलमैन के मुताबिक "इमोशनल हाईजैकिंग" का इस्तेमाल करते हैं. स्कैमर्स और मैनिपुलेटर्स डर और दर्द जैसे स्ट्रांग इमोशंस का इस्तेमाल करते हैं, जो हमारे दिमाग में अमिगडाला एक्टिवेट करता है, जो हमारे सोचने की एबिलिटी को रोक देता है और हमारे एक्सटर्नल वजहों के असर में आने के चांसेस बढ़ा देता है. इसके लिए मैनिपुलेटर्स गलत या क्रिमिनल टेक्निक का इस्तेमाल कर लोगों को उनकी सोच और उनकी जानकारियों पर शक करने के लिए मजबूर कर देते हैं, इस टैक्टिक को  फोर्स्ड इवैल्यूएशन कहते हैं. मिसाल के तौर पर हो सकता है आपको कोई ऐसा ईमेल मिले जो आपसे कोविड वैक्सीन की सीट बुक करने के लिए किसी लिंक पर क्लिक करने के लिए कहे, इसके बावजूद कि आपने साइन अप नहीं किया, तो मुमकिन है कि आपका अमिगडाला एक्टिवेट हो जाए और आप इस जाल में फंस जाएं. या फिर अगर कोई कंपनी स्टाफ कम करने की बात कहती है, तो जॉब खो देने के डर से एंप्लॉयज़ ज्यादा मेहनत करने लग सकते हैं. यहां पर कन्फ्यूजन जैसे नेगेटिव इमोशन को एक्टिवेट करने के साथ ही, यह साइक्लोजिकल पावरलेसनेस का एहसास कराता है जिसका लोगों पर लॉन्ग टर्म के लिये असर हो सकता है. मैनिपुलेट करके किसी की तकलीफ की वजह बनने के बजाय  दूसरा और बेहतर रास्ता चाहिए. अब अपने आपसे इमानदारी से सवाल कीजिए कि आप इस तरीके के मैनिपुलेटेड टेक्निक का इस्तेमाल करते हैं या नहीं और फिर उसे प्रोफाइलिंग, रैपर्ट बिल्डिंग, प्रिटेक्सटिंग, बॉडी लैंग्वेज जैसे पॉजिटिव टेक्निक से बदलिए. क्योंकि जब आप पॉजिटिव वे में ह्यूमन हैकिंग करते हैं तो यह दोनों तरफ के लोगों के लिए फायदेमंद होता है.

कुल मिलाकर
इससे पहले कि आप दूसरों की हैकिंग करने की कोशिश करें अपनी कम्युनिकेशन स्किल्स को पहचानिए. रैपर्ट या बॉन्ड बनाने के लिए लोगों के इमोशनल नीड को अपने दिमाग में रखिए और उनसे अपनी रिक्वेस्ट मनवाइये. दूसरों को इंप्रेस करने के कुछ तरीके अपनाकर और नॉन वर्बल क्यूज़ का इस्तेमाल करके आप अपनी कम्यूनिकेशन सक्सेस के चांसेज़ बढ़ा सकते हैं. ध्यान रहे कि आपको ह्यूमन हैकिंग का इस्तेमाल कम्पैशन और एंपथी से करें और दूसरों की खुशियों का ख्याल रखें.

 

क्या करें

रिफ्लेक्टिव सवालों का इस्तेमाल कर अपनी सुनने की स्किल बढ़ाइए

अपने सुनने के स्किल को बेहतर करने के लिए रिफ्लेक्टिव सवाल कीजिए इसके लिए आपको सामने वाले द्वारा बोली गई बातों के आखिरी तीन 4 शब्दों को दुबारा क्वेश्चन की तरह पेश कर देना है. मिसाल के तौर पर, अगर आपकी दोस्त कहती है, "अब तक मैं जिन देशों में गई हूं उनमें पेरू सबसे कूल देश है." इसके लिए आप कुछ इस तरह रिफ्लेक्टिव सवाल कर सकते हैं, "सच में पेरू बहुत कूल है?" ना सिर्फ इससे आपकी दोस्त उस टॉपिक पर बातें करना कंटिन्यू रख सकेगी, बल्कि आपकी ध्यान से सुनने की आदत भी पड़ जाएगी.

 

येबुक एप पर आप सुन रहे थे Human Hacking by Christopher Hadnagy with Seth Schulman 

 

ये समरी आप को कैसी लगी हमें yebook.in@gmail.com  पर ईमेल करके ज़रूर बताइये.

आप और कौनसी समरी सुनना चाहते हैं ये भी बताएं. हम आप की बताई गई समरी एड करने की पूरी कोशिश करेंगे.

अगर आप का कोई सवाल, सुझाव या समस्या हो तो वो भी हमें ईमेल करके ज़रूर बताएं.

और गूगल प्ले स्टोर पर ५ स्टार रेटिंग दे कर अपना प्यार बनाएं रखें.

Keep reading, keep learning, keep growing.


Post a Comment

0Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.
Post a Comment (0)

YEAR WISE BOOKS

Indeals

BAMS PDFS

How to download

Adsterra referal

Top post

marrow

Adsterra banner

Facebook

#buttons=(Accept !) #days=(20)

Accept !