Everyday Millionaires

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Everyday Millionaires

Chris Hogan
ऑर्डिनरी लोग एक्स्ट्राऑर्डिनरी दौलत कैसे बनाते हैं?

दो लफ्जों मे
एवरीडे मिलेनियर्स (2019), अमेरिका में मिलेनियर्स पर कराए गए सर्वे पर आधारित किताब है जिसमें एक बहुत जरूरी सच्चाई को लोगों के सामने लाने का प्रयास किया गया है, और वह सच्चाई है कि- कोई भी आम या खास मिलेनियर्स बन सकता है। यदि आप भी मिलेनियर्स बनना चाहते हैं तो यह बिल्कुल भी मायने नहीं रखता कि आपका बैकग्राउंड क्या है, अभी आप कितना कमाते हैं, और आपका लक कैसा है। जो बात मायने रखती है वह है कि आपको कितनी प्रैक्टिकल नॉलेज है और आप अपने प्लान को फॉलो करने के लिए कितने कमिटेड और डिटरमाईंड हैं।

यह किताब किनके लिए है?
-जो लोग यह मानते हैं कि वह आगे नहीं बढ़ सकते।
-जो लोग सोचते हैं कि सभी मिलेनियर्स ने पैसे से पैसा बनाया है।
-एस्पायरिंग मिलेनियर्स।

लेखक के बारे में
क्रिस होगन एक बैस्ट सैलिंग ऑथर और फाइनेंशियल एक्सपर्ट होने के साथ-साथ एक डायनामिक इवेंट स्पीकर और फाइनेंसियल कोच हैं। कई डिकेड से रैमसे सॉल्यूशंस के साथ काम करते हुए उन्होंने, यूएस की तकरीबन सारी ऑडियंस को कई होपफुल मैसेज दिए हैं, इसके अलावा उन्होंने काउंटलैस लोगों को सिखाया है कि कैसे वह अपने फाईनेंस पर कंट्रोल रखते हुए अपने सभी गोलस को हासिल करना है। उनके पॉडकास्ट, द क्रिस होगन शो,  में हर वीक नए एपिसोड रिलीज किए जाते हैं।

आप तब तक करोड़पति नहीं बन सकते जब तक आपको विश्वास न हो कि आप ये कर सकते हैं - और एक बार जब आप कर लें तो स्वयं पर गर्व जरूर करें!
जब ऑथर अपने थर्टरीस में था उस समय, उन्होंने डेव रैमसे के साथ काम करना शुरू किया, डेव रैमसे अपने रेडियो प्रोग्राम और फिसकल डिसिप्लिन के अलावा वैल्थ क्रिएशंस से संबंधित बैस्ट सैलिंग बुक्स के लिए फेमस थे। डैव रैमसे के इन्फलुएंस का ऑथर पर यह असर हुआ कि वह एक फाईनेंसियल कोच बन गए और उन्होंने सब चीजों को एक नई नजर से देखना शुरू कर दिया। जिसका रिजल्ट यह हुआ कि ऑथर पूरी तरह से कर्ज मुक्त हो गए और उन्होंने रियल, लाँग लास्टिंग वैल्थ कमाना शुरू कर दिया। 

यह समरी ऑथर की मिलेनियर्स के बारे में फाईंडिंगस पर आधारित है- कि आखिर मिलेनियर्स हैं कौन, वह किन बातों पर बिलीव करते हैं, और सबसे जरूरी बात कि उनके कौन से बिहेवियरस ने उन्हें सफलता दिलाई है। आगे आपको जो भी बताया जाएगा, वह ऑथर और उनकी रिसर्च टीम द्वारा मिलेनियर्स पर की गई मोस्ट कंप्लीट और लार्जेस्ट स्टडी है। इस दौरान वह 10,000 से भी अधिक अमेरिकी मिलेनियर्स के पूरे टच में रहे और इन मिलेनिर्स की हैबिट्स बिलीफ्स और उनकी स्ट्रेटजीस के बारे में नसे पूछा।

मिलेनियर्स के बारे में, और मिलेनियर्स बनने के बारे में बहुत सारे झूठ फैलाए गए हैं। अब समय आ गया है कि सब बातों को बिना किसी झूठ के स्ट्रेट तरीके से आपके सामने रखा जाए। और आगे आने वाले लैसनस में आपको इसी बारे में विस्तार से बताने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा आप इसमे जानेंगे कि क्यों आपको ब्रैंड-नेम एजुकेशन के लिए कभी पे नहीं करना चाहिए? माइकल फेल्प्स की ओलंपिक सफलता का रहस्य; औरअपने फाईनेंसियल जीपीएस को कैसे प्रोग्राम करें?

एक मिथ है कि अमेरिकन ड्रीम मर चुका है।“अमेरिकन ड्रीम” एक “विश्वास” है। जिसे हम कुछ इस तरह डिफाईन कर सकते हैं, “कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई कहां पैदा हुआ था, किस क्लास यानि किस वर्ग में पैदा हुए था, एक ऐसी सोसाइटी में जिसमें समाज में ऊँचा स्तर हासिल करना किसी के लिए भी पॉसिबल है।

कुछ लोग तो यह भी कहते हैं कि एवरेज अमेरिकन आगे नहीं बढ़ सकता है।

लेकिन ये सच नहीं है. यह एक हार्मफुल झूठ है जो लोगों को खुद पर यह विश्वास करने से रोकता है कि वह अपने सपनों को पूरा कर सकते हैं। होगन ने इसे डायरेक्ट तरीके से एक्सपीरियंस किया है। होगन एक ब्लैक मैन हैं जिन्हें केन्टकी में एक सिंगल पेरेंट ने पाल-पोस कर बड़ा किया था, उन्हें लगता था कि मिलेनियर बनने का उनका सपना उनसे उतना ही दूर है जितना जमीन से तारे दूर हैं। लेकिन धीरे धीरे उन्हें महसूस होना शुरू हुआ कि जब तक आपका विश्वास खुद पर अनशेकेबल है कि आप भी मिलेनियर बन सकते हैं, तब आप भी अपने सपने को निश्यत ही पूरा कर पाएंगे। आपका सामना ऐसे लोगों से भी होगा जो आपको बताएंगे कि यह आपके बस का नहीं है और आप सफल नहीं हो सकते। लेकिन चिंता न करें- एक सिंपल ट्रिक है, अपने सपनों को पूरा करें और इन लोगो को गलत साबित करें, ऐसा करने से ये लोग अपने आप ही कहीं गायब हो जाएंगे।

ब्रिटिश डिस्टेंस रनर रोजर बैनिस्टर यह थ्योरी साबित करने के लिए एक बेहतरीन उदाहरण हैं। उनके समय में,  लोग यही मानते थे कि एक इंसान चार मिनट से कम टाईम में एक किलोमीटर की दूरी पूरी नहीं कर सकता। कई लोग तो ऐसे भी थे जो यह मानते थे कि यदि कोई रनर ऐसा करने की कोशिश करता भी है तो स्ट्रेन से उसका हार्ट एक्सप्लोड हो जाएगा। लेकिन 6 मई, 1954 को बैनिस्टर ने उन्हें गलत साबित करके दिखाया, जब उन्होंने तीन मिनट और 59 सेकंड में 1 किलोमीटर की दौड़ पूरी कर ली। जब रोजर बैनिस्टर ने यह कर दिखाया कि 4 मिनट से कम समय में भी 1 किलोमीटर की दूरी को पार करना संभव है तो अन्य लोगों ने भी उनके इस विचार को मानना शुरू कर दिया कि ऐसा हो सकता है। 6 हफ्तों बाद, किसी और शख्स ने बैनिस्टर से भी कम समय में 1 किलोमीटर की दौड़ को पूरा कर लिया।

मिलेनियर बनना भी कुछ एसा ही है। यदि आप अपने आस-पास देखने की कोशिश करेंगे तो पाएंगें कि, बाकी लोगों ने अपनी कड़ी मेहनत से मिलेनियर बनने के अपने सपने को पूरा कर दिखाया है। और आप भी मिलेनियर बन सकते हैं। सीएनबीसी मनी ने 2017 में एक रिपोर्ट पेश की थी जिसमें यह बताया गया था कि, आज अमेरिका में करीब 1 एक करोड़ दस लाख लोग मिलेनियर हैं!

और जब आप यह सोच रहे हों कि आप भी इसी नंबर का एक हिस्सा बन सकते हैं तो इस सोच पर शर्मिंदा न हों। मिलेनियर्स यह जानते हैं कि वह अपने हार्ड वर्क से फाईनेंसियली स्ट्राँग हुए हैं, और उन्हें इस पर हमेशा प्राउड होता है। और होगन की स्टडी में, यह पूरी तरह से क्रिस्टल क्लियर हो गया था। मिलेनियर मानते हैं कि विनिंग हासिल करना हमेशा ही अच्छा होता है, इस बात पर शर्म महसूस करने जैसा कुछ भी नहीं है। इसका मतलब यह नहीं है कि मिलेनियर्स जब भी कुछ करने की कोशिश करते हैं तो वह जीतते ही हैं। लेकिन इसका सीधा सा मतलब है कि वह अपने सैटबैक्स से रुकते नहीं है बल्कि वह अपने इन सैटबैक्स को अपनी अगली बड़ी जीत के लिए मोटीवेशन के तौर पर लेते हैं।

अब चलिए आगे जानते हैं कि मिलेनियर कौन हैं और वह कैसे होते हैं, इस बारे में कुछ मिथकों को भी दूर करके स्वयं को मोटीवेट करते हैं।

बहुत सारे अमीर लोग हार्ड वर्क से अपना पैसा कमाते हैं, और वह इसे डिजर्व करते हैं।
हम सब ने किसी न किसी को मिलेनियर्स के बारे में यह कहते हुए सुना होगा कि, "मैं शर्त लगाता हूं कि उस आदमी ने अपने पूरे जीवन में कभी भी काम नहीं किया होगा।" और किसी कारण से, लोग यह मानना पसंद भी करते हैं कि अमीर लोग या तो इंक्रेडिबली लकी होते हैं या मुंह में चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुए होते हैं। 

लेकिन क्या आप यह भी सोच सकते हैं कि बहुत सारे मिलेनियर्स को विरासत में उनकी दौलत नहीं मिली होती है। वास्तव में, लेखक ने अपनी स्टडी के दौरान जब मिलेनियर्स का इंटरव्यू लिया तो पाया कि 79 प्रतिशत लोगों को कोई विरासत नहीं मिली थी। यह सब उन्हें उनके हार्ड वर्क, सैक्रिफाईज और अपने प्लान पर टिके रहने के कारण ही हासिल हुआ है। हम आपको थॉमस का उदाहरण देकर समझाने की कोशिश करते हैं। थॉमस का जन्म गरीब घर में हुआ था, उसके पेरेंटस शराबी थे और उनका जीवन काफी डायफंक्शन था। उसके माता-पिता दोनों की ही यंग एज में डैथ हो गई, और जब थॉमस कॉलेज जाने लायक हुआ तब उसे एक बात पता थी कि वह अपने जीवन में दो चीजों को अवॉइड करेगा और वह हैं- शराब और गरीबी।

थॉमस ने अपनी पीएचडी की डिग्री हासिल की, लेकिन डिग्री हालिस करने के बाद वह किसी फ्लैशी, हाई पेईंग जॉब के चक्करों में नहीं पड़े। इसके बजाय, उन्होंने 37 साल तक मैथ पढ़ाया। जब वह रिटायर हुए तब उनकी कुल संपत्ति $2.6 मिलियन थी। थॉमस अपने दम पर मिलेनियर बन गए। वह किस्मत के कारण या विरासत में मिली दौलत के कारण मिलेनियर नहीं बने बल्कि इसके लिए उन्होंने हार्ड वर्क किया। उन्होंने धीरे-धीरे करके पैसा सेव किया। उन्होंने कर्ज नहीं लिया, कैश में पे किया, जब भी पॉसिबल होता वह एक्स्ट्रा काम करते साथ ही उन्होंने वाईसली इन्वेस्ट करके पैसे बचाए। लोग अक्सर सोचते हैं कि जब भी कोई व्यक्ति मिलीयन रैंक करता है तो इसमें उसका लक साथ दे रहा होता है। लेकिन असल में, वह लोग उस व्यक्ति की एकांप्लिशमेंट्स के पीछे का उसका हार्ड वर्क नहीं देख पाते हैं।

स्विमर माइकल फेल्प्स के केस को कंसीडर करते हैं। वह हमारी हिस्टरी के सबसे सफल ओलंपियन हैं और उनकी बॉडी एक ऐसा गिफ्ट है जो स्वीमिंग के लिए बिल्कुल परफैक्ट थी। बहुत से लोगों ने यहां तक लिखा था कि उन्होंने अपनी यह सफलता अपने अच्छे लक के अलावा अच्छे जीनस् के कारण हासिल की थी। जब फेल्प्स सक्सेस के अपने पीक पर थे तब भी वह हर वीक केवल 1 दिन का ब्रेक लेते थे और रोज 6 घंटे प्रैक्टिस करते थे। वह सीरियस वेट लिफ्टिंग करने की बजाए हफ्ते में 50 माईल्स स्वीमिंग करते थे। क्योंकि वह जानते थे कि जैनेटिक एडवांटेज भी तभी काम आ सकती थी अगर वह हार्ड वर्क करेंगे।

मिलेनियर्स भी कोई अलग नहीं हैं। अगर आप भी यह मान चुके हैं कि एक मिलेनियर की सफलता पूरी तरह से उसके लक पर बेस्ड है होती है, तो आप खुद को एक बड़ा आदमी बनने से रोक रहे हैं। रियेलिटी तो यह है कि सबके लिए इनफ अपॉर्चुनिटी अवेलेबल हैं। चाहे आपका लक अच्छा हो या नहीं हो, आपको कोई इनहैरीटेंस मिली हो या नहीं मिली हो। लेकिन आपको स्वयं पर विश्वास करना होगा। होगन ने जिस भी सिंगल मिलेनियर्स से बात की थी उन सभी को स्वयं पर विश्वास था। वह अपने लिए उपलब्ध सभी अपॉर्चयुनिटी पर नजर रखते हैं और उनके पास इतनी विजडम होती है कि वह उन सभी अपॉर्चयुनिटी में से सही का चुनाव कर सकें। इस बारे में विस्तार से हम आगे जानेंगे। 

अमीर लोग बेवकूफी भरे रिस्क लेकर गलत रास्ते पर नहीं जाते।

जब भी आप एक अमीर व्यक्ति के बारे में सोचते हैं, तो आप एक रास्ते चलते समान बेचने वाले व्यक्ति को इमैजिन करते हैं जो बोल्ड और फीयरलैस डील्स करता है, और ये डील्स उसे रातोंरात मिलेनियर बना देती हैं। वैल, हम आपके इन बबल्स को बर्स्ट करने लिए माफी चाहते हैं, लेकिन रियल लाईफ में ऐसा कुछ नहीं है। यह आईडिया कि अमीर लोग रिस्की इन्वैस्टमेंटस करते हैं यह केवल एक मिथ है।

उदाहरण के लिए, लेखक की स्टडी में शामिल किसी भी मिलेनियर ने सिंगल स्टॉक्स में इन्वेस्टमेंट करने की बात को मेंशन नहीं किया। और यह बात पूरी तरह क्लीयर है कि एसा क्यों है- क्योंकि ऐसा करने में बहुत अधिक रिस्क है। जब आप एक स्टॉक खरीदते हैं, तो आप अपने सभी एग्स एक ही बास्केट में डाल रहे होते हैं। अगर स्टॉक फेल होता है, तो आपको अपनी हार्ड-अर्नड मनी को ऐसे ही जाते हुए देखना होगा और आप कुछ भी नहीं कर पाएंगे।

हमारे सामने ऐसा ही एक उदाहरण है क्रिप्टोकरेंसी और बिटकॉइन आदि। इन्हें आजकल काफी मीडिया अटैंशन भी मिल रहा है। यह मनी अर्न करने का एक नया और हॉट कॉन्सेप्ट है जो लोगों को बेतहाशा अमीर बनाने की पोटेंशियल रखता है। लेकिन क्रिप्टोकरेंसी लिटरली मेड-अप करंसी है। यहकंप्लीटली अनरैग्यूलेटिड है और कोई भी इसके लिए अकाउंटेबल नहीं है। यह 100% रिस्की है- यह करंसी एक ऐसा रिस्क है जिसे मोस्ट मिलेनियर लेने से बचते हैं। 

इस स्पेक्ट्रम का दूसरा एंड क्या है? वैल, सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉडिट और बौंड, लो रिस्क इन्वैस्टमेंट के  ऑप्शन के तौर पर एवाइलेवल हैं। इन पर पैसा लगाना अक्सर बहुत सुरक्षित दांव समझा जाता है,  लेकिन इनके रिजल्ट में काफी काम रिवार्ड मिलते हैं। ज्यादातर मिलेनियर इन्हें नहीं खरीदते हैं- वह हाई लेवल और लो लैवल दोनो तरह के एक्सट्रीम रिस्क को लेना अवॉईड करते हैं। असल में, 79 प्रतिशत मिलेनियर का कहना यही था कि उन्होनें पैसा कमाने का जो रास्ता चुना वह काफी प्रीडिक्टेबल था- जैसे एक एंप्लॉयर स्पॉन्सर्ड रिटायरमेंट प्लान।और इस प्लान को कामयाब करने के लिए उन्होनें सबसे अधिक बार किसमें इन्वैसट किया? तो जवाब है ग्रोथ स्टॉक म्यूचुअल फंड, जो एक रीजनेबल, डायवर्सिफाइड रिस्क को बैलेंस करके ग्रोथ करने के लिए गुड पोटेंशियल प्रदान करते हैं। 

यह सब हमारे अंदर एक और मिथ को जन्म देता है- जो है कि “मिलेनियर आर ऑल अबाउट गैटिंग रिच क्विक”।

सच तो यह है कि मिलेनियरस को यह सब बहुत लंबे समय तक हार्ड वर्क करके प्राप्त होता है, 95 प्रतिशत मिलेनियर को वह सब हासिल करने में जो आज उनके पास है, 10 साल से भी अधिक का समय लगा। बहुत सारे तो 49 वर्ष की आयु तक एक मिलियन तक नहीं अर्न कर पाए थे। यह सारा नोशन कि अमीर तो एकदम से अमीर बन जाते हैं, पूरी तरह से एक भ्रम है, जो लोगों का ध्यान वैल्थ क्रिएशन के प्रूवन मैथडज़ से बहुत दूर ले जाता है। यहां तक कि होगन को भी याद है कि 1990 के दशक में होगन भी एक दोस्त के बहकावे में आ गए थे, जिसने उन्हें बताया था कि वह भी जल्दी से अमीर बन सकते हैं। होगन भी क्विक वैल्थ बैक और पैसों के फास्ट रिटर्न के दोस्त के वादे को सुनकर आकर्षित हो गए थे। और उसकी बातों से कन्वींस होकर उन्होंने अपना सारा पैसा सिंगल स्टॉक- एओएल में इन्वैस्ट कर दिया।होगन को जल्द ही पता चल गया कि यह कितना रिस्की है, लेकिन जब तक वह अपने होश में वापिस आए और अपने लॉस को कम करने का प्रयास किया तब तक वह 25,000 डॉलर पहले ही गंवा चुके थे।

अधिकांश मिलेनियर फैंसी स्कूलों में नहीं पढ़े होते ना ही उन्होने हाई-पेईंग जॉब की होती हैं।
आपको लगता होगा कि मिलेनियर क्लब में शामिल होने के लिए, आपको प्रेस्टीजियस एजुकेशन और हाई-स्टेट्स जॉब चाहिए होती है, सही कहा ना? खैर, आपके इस विचार में बहुत छोटा सच है। यह निश्चित तौर पर सही बात है कि बहुत सारे मिलेनियरस ने कॉलेज एजुकेशन हासिल की होती है। ऑथर की स्टडी में शामिल 88 प्रतिशत मिलेनियर के पास बैच्लर डिग्री है, जबकि एक सर्वे से पता चलता है कि जनरल पॉप्यूलेशन का केवल 33 प्रतिशत लोग ही कॉलेज डिग्री हासिल करते हैं।

हर एक मायने से, कॉलेज एजुकेशन को वैल्युएबल माना जाता है – जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के अकॉर्डिंग, जिन लोगों ने बैच्लर की डिग्री हासिल की होती है वह अपनी लाईफ में उन लोगों तुलना में 74 प्रतिशत अधिक कमाते हैं, जिन्होने केवल हाई स्कूल डिप्लोमा हासिल किया होता है। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है कि एजुकेशन को एक ब्रांड-नेम की जरूरत होती है। मिलेनियर्स से पूछें तो हमे पता चलेगा कि- इनमें से 62 फीसदी ने सरकारी स्कूलों से अपनी डिग्री हासिल की है। बेशक, प्राईवेट स्कूलों में भी कुछ गलत नहीं है। प्राईवेट स्कूल उन लोगों के लिए एक अच्छा ऑप्शन हो सकते हैं जो इनका खर्चा उठा सकते हैं। लेकिन सीएनएन मनी के अनुसार, अमेरिका में एक एवरेज प्राईवेट स्कूल में एक साल का कुल खर्चा लगभग$45,370 डॉलर के करीब है। दूसरी ओर, स्टेट के स्कूल में यही खर्चा लगभग $20,090 डॉलर है। इसका मतलब है कि आप सेम डिग्री प्राप्त करने के लिए एक ब्रांड-नेम वाले स्कूल में डबल पे करते हैं।

लेकिन बहुत से स्टूडेंट प्राईवेट स्कूलों को अंटैंड करने के लिए स्टूडेंट लोन लेने का रास्ता चुनते हैं, जो उनके जीवन की सबसे बड़ी गलतियाँ होती है। इसे ओवरस्टैंड नहीं किया जा सकता, स्टूडेंट लोन से जितना जितना दूर रह सकते हैं दूर रहें। लोन आपकी लाईफ को बरबाद कर सकता है, ये आपकी लाईफ के उन महत्वपूर्ण शुरुआती वर्षों को बर्बाद कर सकते हैं,  जब आपने अपना करियर शुरू ही किया होता है, औऱ आप अपने जीवन में सेविंग्स करने के महत्व को सीख रहे होते हैं, लोन आपकी सेविंग्स करने की एबिलिटी और इंटरस्ट को खत्म कर सकता है। 68 प्रतिशत मिलेनियर ने स्टूडेंट लोन का एक पैसा भी नहीं लिया। जो जनरल पॉप्यूलेशन का 49 प्रतिशत हिस्सा करता है। मिलेनियर अपने कॉलेज के वर्षों में लोन-फ्री रहने के महत्व को समझते थे ताकि वह अपने करियर की शुरुआत में ही पैसे बचाना शुरू कर सकें।

इसके अलावा, अगर आप मिलेनियर बनना चाहते हैं तो जरूरी नहीं कि आप कोई हाई-पेईंग जॉब करें। मिलेनियर्सके बारे में यह एक और मिथ है कि सभी मिलेनियर हाई-पेईंग जॉब करने के बाद ही मिलेनियर बने हैं। वास्तव में, 30 प्रतिशत मिलेनियर्स की हाउसहोल्ड इनकम पूरे साल की टोटल इनकम को मिलाकर 6 डीजिट तक भी क्रॉस नहीं कर पाई। और टोटल मिलेनियर्स में से केवल एक तिहाई लोग ही एवरेज $100,000 डॉलर प्रति वर्ष कमाते थे। तो, आखिर यह मिलेनियर करते क्या हैं? टॉप के तीन प्रोफैशन, इंजीनियर, अकांउटेट और टीचर को माना जाता है। सर्वे में यह पता चला है कि ज्यादातर मिलेनियर नॉरमल जॉब करने वाले नॉरमल लोग ही होते हैं। जो चीज उन्हें सबसे अलग करती है, वह है उनका बिहेवियर, ना कि उनकीइयरली सैलरीज़।

पैसा मिलेनियर्स के पास रुक जाता है, क्योंकि वह अपनी फाईनेंशियल सक्सेस की रिस्पांसिबिलिटी खुद लेते हैं।

ऐसा लग रहा है कि यूएस इन दिनों क्राइसिस से घिरा हुआ है। फाईनेंशियल क्राइसिस से लेकर महामारी तक, जहां भी नजर डालो यही क्राइसिस नजर आ रही हैं। आज अमेरिका में क्राइसिस जो प्लेग की फैल रही उनकी रिस्पांसिबिलिटी लेने का संकट मंडरा रहा है, लेकिन उसके बारे में कोई बात नहीं कर रहा है।

कड़वी सच्चाई यह है कि ज्यादातर लोग अपने फाईनांस को मैनेज की जिम्मेदारी नहीं लेते हैं। रिटायरमेंट के लिए की जाने वाली सेविंग्स इस बात को प्रूव करने का सबसे अच्छा उदाहरण है। होगन की सर्वे टीम ने पाया कि जहां 56 प्रतिशत अमेरिकी रिटायरमेंट को लेकर बस चिंतित हो रहे थे, वहीं कुछ लोग वास्तव में रिटायरमेंट के लिए तैयारी कर रहे थे। सर्वे में शामिल बेबी बूमर्स यानि 1946 से 1964 के बीच जन्मे लोगों में से आधे लोगों के पास सेविंग्स के नाम पर 10,000 डॉलर भी नहीं बचे थे। और बाकी के 80 प्रतिशत मिलेनियल यानि 1981 से 1996के बीच जन्मे लोग विश कर रहे थे कि वह रिटायरमेंट के लिए ज्यादा सेविंग कर पाते - लेकिन वह वास्तव में ऐसा कुछ नहीं कर रहे थे।

आखिर उन्हें ऐसा करने से क्या रोक रहा है? आफ्टर ऑल अपना पैसा इनवैस्ट करने की जिम्मेदारी तो उनकी ही है। यह काम कोई और तो उनके लिए नहीं कर सकता। मिलेनियर्स इस बात को अच्छे से समझते हैं। वह जानते हैं कि उनके साथ जो भी हो रहा होता है उसकी रिस्पांसिबिलिटी उनकी अपनी है- 97 प्रतिशत मिलेनियर यह मानते हैं कि वह खुद अपने भाग्य के मालिक हैं। और स्वयं इसे बदलने की हिम्मत रखते हैं। वह यह भी जानते हैं कि एक बार जब आप अपने फाईनांस की जिम्मेदारी ले लेते हैं, तो आप असल में मिलेनियर बनने की अपनी जर्नी शुरू कर रहे होते हैं। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे किसी जीपीएस से अपनी ट्रिप के बारे में पता लगाना, आप अपनी जर्नी वहीं से शुरू करते हैं जहां आप हैं लेकिन जीपीएस के सहारे आपको पता होता है कि आपको कहां जाना चाहते हैं।

फाइनेंशियली तो आप कहां हैं, यह आपकी नैट वर्थ डिटरमाइंड कर देती है। जो सिंपली यह होता है कि, अगर आपके लोन को माइनस कर दिया जाए तो आप क्या और कितना ओन करते हैं। आपको इसे सही-सही कैल्क्युलेट करना पड़ेगा, लेकिन उससे पहले आपको यह यह पता होना चाहिए कि आपको इसे कैसे कैल्क्युलेट करना है। इसके लिए आप ऑनलाइन मिलने वाले नैट वर्थ कैलकुलेटर को ट्राई करें- यह आपको ऑथर की वेबसाइट पर भी मिल जाएगा। जब आपके हाथ में एक नंबर होता है, तो आपको मैप पर वह छोटा सा डॉट मिल ही जाता है जो आपको बताता है कि आप कहां हैं।

एक बार जब आपको यह पता चल जाता है कि आप कहाँ हैं, तो यही सही टाईम होता है यह पता लगाने का कि आपको कहां जाना है। खुद से पूछें- और अगर आप शादीशुदा हैं तो अपने जीवन साथी से पूछें कि आप रिटायरमेंट के बाद अपनी लाईफ कैसी चाहते हैं। आप कहां रहना चाहते हैं? आप किस तरह की कार ड्राइव करना चाहते हैं? अपने रिटायरमेंट प्लान को लेकर एक क्रिस्टल-क्लियर पिक्चर तैयार करने की कोशिश करें। अब समय आता है यह देखने का कि आप कितनी संपत्ति अभी ओन करते हैं। अपने इस सपने को पूरा करने के लिए आपको वास्तव में कितने पैसों की आवश्यकता होगी? आपको यह पता होना चाहिए कि आपको उन पैसों को इक्टठा करने के लिए कितनी सेविंग्स करनी है, और यह भी कि हर महीने कितना खर्च करना है। आज ही यह सब सोचना शुरू करें- क्योंकि कोई और आकर आपके लिए यह सब नहीं करेगा।

मिलेनियरस इंटेशनली यह प्रैक्टिस करते हैं कि उनकी फाईनेंशल ज़िंदगी कंट्रोल में रहे
आप एक मिलेनियर की पहचान कैसे कर सकते हैं? क्योंकि बहुत सारे मिलेनियर साधारण जीवन जीते हैं, और हममें से बाकी लोगों की तरह ही नीली जींस पहनते हैं। तो यहां आपके लिए एक टिप है- लोगों के बिहेवियर को देखें। मिलेनियर वही होते हैं जो इंटेशनली चीजें करते हैं।

इंटेशनली का मीनिंग यहां डिसाइड करने और फिसलने के बीच के अंतर से है। यदि आप लाईफ में बिना सोचे समझे सिर्फ ऐसे ही फिसल रहे हैं, तो मतलब आपका खुद पर कोई कंट्रोल नहीं हैं। अगर बिना किन्ही प्लान्स के बस जिंदगी ऐसे ही जिए जा रहे है, तब रिटायरमेंट की उम्र में, आपको शायद एहसास होगा कि आपके पास सेविंग्स के नाम पर एक पैसा भी नहीं है। दूसरी ओर, डिसाइड करके आगे बढ़ना यह दिखाता है कि आप पूरी तरह कंट्रोल में हैं और सोच-समझकर निर्णय लेते हैं।

मिलेनियर कपल फ्रैंक और ऐलिस का उदाहरण लेते हैं, जिनसे ऑथर ने मिलेनियरस पर अपनी स्टडी के दौरान बात की थी। फ्रैंक के पिता और दादा कम खर्चा करने वाले हार्ड-वर्किंग जर्मन इमीग्रैंटस थे। वह अपने संसाधनों से परे रहने या लोन लेने के बारे में सोच भी नहीं सकते थे, और फ्रैंक के लिए उन्होंने उसके बचपन से लेकर ही जो उदाहरण सैट कर दिया था, उसने फ्रैंक को उसकी पूरी जिंदगी गाईड किया। इसका फायदा यह हुआ कि जब उन्होंने वॉल स्ट्रीट पर काम किया, तो उन्होंने शाईनी चीजें खरीदने के लिए पैसा खर्च करने के बजाय इंटैंशनली इन्वैस्टिंग और वैल्थ बिल्डिंग करना सीखा। आज, फ्रैंक और ऐलिस की कुल संपत्ति $6 मिलियन है, और वह यहां तक पुराने तरीके से ही पहुंचे- जो था कि उन्होनें न्यूयॉर्क की बड़ी-बड़ी प्राईसी दुकानों से खरीददारी करने के लिए पैसा वेस्ट करने की बजाए काम खर्च करने का डिसीजन लिया और फ्यूचर के लिए सेविंग्स की।

वह अच्छी कंपनी में भी थे। होगन की स्टडी से यह पता चला है कि 94 प्रतिशत मिलेनियर अपने एक्सपेंसिस को अपनी इनकम से कम रखते हैं, और 95 प्रतिशत किसी भी बड़े खर्चों के लिए सेविंग्स करके रखते हैं। इसके अलावा मिलेनियर अपने फाईनेंशियल डिसीप्लिन को कैसे मैनेज करते हैं? यह जानना भी आसान है-वह अपने हर तरह के खर्चों के लिए बजट बना के रखते हैं।

बजट को अक्सर बैड नेम दिया जाता है। बहुत से लोगों को बजट, एक फाईनेंशियल पिंजरे की तरह लगता है। लेकिन बजट कोई केज नहीं है। यह एक ऐसा टूल है जो आपको अपने पैसों पर कंट्रोल देता है। बजट के साथ, आप अपनी मेहनत की कमाई को स्ट्रैच कर सकते हैं और इससे भविष्य में अन्य बड़ी चीजें कर सकते हैं। साथ ही, बजट आपके फाईनेंस में क्लीएरिटी लाते हैं। यदि आप बजट के अनुरूप अपने खर्चों को मैनेज करना सीख जाते हैं तो आपको पता होता है कि आपका हर एक पैसा कहां खर्च हो रहा है। और एक बार जब आप अवेयर हो जाते हैं, तो आप अपने लिए बैस्ट च्वाईसिस कर पाते हैं। क्या आप हर महीने ग्रौसरीज पर जरूरत से ज्यादा खर्च कर देते हैं? अपना बजट एडजस्ट कीजिए,और आप पाएंगे कि आपके पास अचानक से एक्सट्रा पैसा आ गया है।

फाईनली, कह सकते हैं कि बजट आपके पैसे को काम पर लगा देता है- आप हर पैसे को एक तरीके से और ज्यादा पैसे कमाने के लिए जॉब दे रहे होते हैं। बजट बनाकर ग्रौसरीज पर खर्चा करने के बाद आपके पास जो एक्सट्रा पैसा बचेगा उसे किसी जरूरत की जगह पर प्रयोग में लगाएं जैसे- किसी जरूरतमंद की मदद करने में, सेविंग्स करने, इन्वैस्ट करने या अपने लोन से छुटकारा पाने में।

मिलेनियर अपने लिए गोल सैट करते हैं और सुनिश्चित करते हैं कि वह उन्हें अचीव कर सकें।

मिलेनियरस के बारे में एक बात यह है कि, जब वह कहते हैं कि वह कुछ करेंगे, तो वह उस चीज को करके रहते हैं। इन फैक्ट, 97 प्रतिशत मिलेनियर ने लगभग हमेशा अपने लिए सेट किए गए गोल्स को अचीव करने की रिपोर्ट दी है। कोई भी अपने लिए गोल सैट करना सीख सकता है, और अगर आप इस मामले में पहले से स्मार्ट हैं, तो इसका मतलब यह है कि आप एक्चुअल में उन्हें हासिल करेंगे।

स्मार्ट का मतलब स्पैसिफिक, मैजरेबल, अचीवेबल, रैलीवेंट और टाईम सेविंग है।

स्पैसिफिक का अर्थ है कि आपके गोल हाई-डेफिनेशन वाले होने चाहिए। अर्थात आपके गोल्स डिटेल्ड, क्लीयर और स्पष्ट होने चाहिए। यदि आपने रिटायरमेंट के लिए अपना खास वीजन तैयार करने के लिए टाईम निकाला है, तो यह आपके काम आएगा। मैजरेबल गोल्स को क्लीयर माईलस्टोन या मेट्रिक्स के जरिए अचीव किया जा सकता है, जैसे कि आप हर महीने के खर्चे के लिए बजट बना के कुछ पैसे अलग रखते हैं। इन चैकप्वाईंटस को अपनी लाईफ शामिल करने का मतलब होगा कि आपको पूरी क्लीयैरिटी के साथ पता चल जाएगा कि आप अपने गोल्स को अचीव कर रहे हैं या नहीं।

अचीवेबल गोल्स रियलिस्टिक होते हैं। अगर हम कुछ करने की ठान लें तो कुछ भी इमपॉसिबल नहीं होता, लेकिन अपने गोल्स को रियलिस्टिक रखने का मतलब है कि आप एक्चुअली उन्हें पूरा करने में एबल होंगे। रैलीवेंट“रैंडम” का अपोजिट है। अर्थात आप रैग्यूलर वेकेशन लेना चाहते हैं लेकिन उसी समय एक एजवांस्ड डिग्री करने की प्लानिंग कर रहे तो यह एक ही टाईप पर संभव नहीं हो सकता है।  आपके मेजर गोल्सजुड़े हुए होने चाहिए। खासतौर से वह प्लांस तो जुड़े हुए होने ही चाहिए जिन्हें आपने उन खास लक्ष्यों को पूरा करने के लिए बनाया है जो आपको उस परफैक्ट लाईफ तक ले जाएंगे जिसे आपने अपना एम बनाया है। टाईम-सैंसेटिव का अर्थ है अपने गोल्स को पूरा करने के लिए डैडलाईनस तय करना। उदाहरण के तौर पर, यदि आप रिटायरमेंट का प्लान बनाने पर फोकस कर रहे हैं तो, आपको पता होना चाहिए कि आप किस उम्र तक इस प्लान को पूरा करना चाहते हैं। अपनी डैडलाईनस के प्रति एमबीशियस बनें- आपको सरप्राईज हो सकता है कि आप कैसे केवल थोड़ा सा प्रैशर खुद पर डालकर कितना हार्ड वर्क कर सकते हैं!

एक बार जब आप स्मार्ट हो जाएं, तो इस चैकलिस्ट के अनुसार अपने गोल्स को लिखकर उन्हें पूरा करने के लिए कमिटेड हो जाएं। साईकोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. गेल मैथ्यूज के एक सर्वे के अनुसार, इससे आपको अकांउटेबिलिटी मिलेगी, और इस बात की संभावना 42 प्रतिशत तक और बढ़ जाएगी है कि आप अपने गोल्स को अवश्य प्राप्त कर लेंगे।

आइडलीगोल्स, शॉर्ट-टर्म और लाँग टर्म मिक्स होने चाहिए। शॉर्ट टर्म गोल्ज जैसे एक अच्छे वेकेशन के लिए सेविंग्स करना, यह गोल उस जीत के तौर पर हो सकता है जो आपको आपके लाँग टर्म के गोल को पूरा करने के लिए ट्रैक पर रखेगी। लाँग टर्म गोल्स बिग लाईफ चेंजरस होते हैं। जैसे हम सबका सबसे बड़ा सपना होता है अपना खुद का घर खरीदने के लिए पे करना। जब आप इस गोल को पूरा कर लेते हैं, तो आप डैबेट लाईबिल्टी को100 प्रतिशत एसैट में बदल देते हैं। लेकिन, ऐसा करना किसी भी तरह से आसान नहीं है। लेकिन यदि आप यह करने में सफल नहीं हो पाते और लोन के चक्करों में पड़ते हैं तो आप खुद को नहीं बैंक को अमीर बना रहे होते हैं।

इमैजिन करें कि आपने 10 साल पहले ही अपने लोन को अपने बनाए बजट से पे कर लिया। तो जो पैसा आप अगले 10 साल तक लोन के तौर बैंक को देने वाले थे उसके कारण आप 10 साल बाद अमीर बन पाते। लेकिन अब एसा नहीं है क्योंकि आपने कंपाउंड इंटरस्ट की पावर का उपयोग किया, जिसके बारे में हम आगे जानेंगे।

यह मिलेनियरस की कंसिस्टैंसी है जो उनके पैसे को तब भी बढ़ा रही रही होती है जब वह सो रहे होते हैं।

पेशैंस रखना काफी मुश्किल होता है। शॉर्ट टर्म रिवार्ड से कौन आकर्षित नहीं होता है? लेकिन मिलेनियर अपने पेशैंसऔर कंसिस्टैंसी से वैल्थ अर्न करने के लिए डिस्ट्रैक्शनस से दूर रहते हैं। और जब कंसिस्टेंसी की बात आती है, तो कंपाउंड इंटरेस्ट के मैजिक से अच्छा कुछ नहीं हो सकता है। यहां तक कि एक धारणा भी है जिसे अल्बर्ट आइंस्टीन से जोड़कर देखा जाता है कि- कि इसेआइंस्टीन ने  यूनिवर्स का सबसे पावरफुल फोर्स कहा था।

मान लें कि आपने एक निवेश में 1,000 डॉलर लगाए और आपको पता चलता है एक साल बाद यह पैसा बढ़कर 1,100 डॉलर हो गए हैं। अगर आप पैसे को वहीं रखते हैं जहां यह है, तो यह एकस्ट्रा $ 100 डॉलर पर आपको ब्याज मिलना भी शुरू हो जाएगा। इसे कहते हैं, इंटरेस्ट अर्निंग इंटरेस्ट। यह केवल तभी संभव हो पाएगा यदि आप पेशैंस रखने के लिए तैयार हैं।

कुल मिलाकर
मिलेनियर कोई दुर्लभ प्रजाति के लोग नहीं हैं। वह पैसा में या किसी प्रिविलेज में जन्मे नहीं होते। इसके बल्कि वह आम लोग हैं जिन्होने अपनी लाईफ में जल्दी ही गोल्स सैट कर लिए थे, और उन गोल को अचीव करने के लिए हार्ड वर्क करने के साथ कोई भी सैकरीफाईज करने को तैयार थे। मिलेनियर बनना अमेरिकी ड्रीम है।इनफैक्ट, रैग्यूलर पीपल ही इसे हर दिन पूरा करते हैं।

 

एक इन्वेसटमेंट प्रोफैशलन से सहायता हासिल करें।

कोई भी अदालत में खुद का वकील नहीं बन सकता, राईट? वैल, जब आप वैल्थ बिल्डिंग कर रहे हैं तब भी आपको इसे करने के लिए खुद ही फैसले नहीं ले लेने चाहिए। इंटरनेट पर इन्वैस्टमेंट प्रोफैश्नल्स को सर्च करें। ऑथर की वेबसाइट भी आपके लिए एक रिसोर्स बन सकती है। एक बार जब आप किसी को शॉर्टलिस्ट कर लेते हैं, तो हर एक का इंटरव्यू लेने के लिए कुछ समय निकालें। उनके एक्सपीरियंस, सर्टीफिकेशन, फिलॉस्फी के बारे में प्रश्न पूछें। अगर आप राईट फिट ढूँढ लेते हैं तो यह आपके उस सर्चटाईम का सही उपयोग समझा जा सकता है। “After all, it’s your wealth. And your life.”

 

येबुक एप पर आप सुन रहे थे Everyday Millionairesby Chris Hogan

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