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Joseph Callaway and JoAnn Callaway
दो शब्दों का खेल

दो लफ़्ज़ों में
फ्लाइंट्स फर्स्ट (2013), हमें बताती है कि कैसे क्लाइंट के साथ मजबूत और भरोसेमंद रिश्ता बनाकर, आपकी ईमानदारी, काबिलियत और लगन कंपनी में आपकी कामयाबी की सीढ़ी बन सकती है। इस किताब में ऑथर्स, कुछ ही सालों में एक फ्लैट ब्रोकर से बेहद कामयाब रियल एस्टेट एजेंट बनने का अपना एक्सपीरियंस भी शेयर करते हैं।

यह किताब किन के लिए है?
- कोई भी जो रियल स्टेट में काम करता हो या करना चाहता हो।
- सेल्समैन, जो अपनी सेल बढ़ाना चाहते हैं।
- ऑन्टरप्रेनियोर, जो अपने बिजनेस की तरफ लोगों का ध्यान खींचना चाहते हों।

लेखक के बारे में
जोसफ और जोऍन कैलवे रियल स्टेट एजेंट हैं, जिन्होंने अपने बिजनेस के शुरुआती 10 साल में $1 बिलियन की सेल कर ली थी। अपने करियर मेंClients First
Joseph Callaway and JoAnn Callaway
दो शब्दों का खेल

पुरानी कहावत के बारे में तो सब ने सुना है कि 'कस्टमर इज़ ऑलवेज राइट'। बिजनेस का बेसिक नियम होने के बावजूद अब यह कारगर नहीं रहा मॉडर्न वर्ल्ड की साइकोलॉजी के हिसाब से 'कस्टमर इस ऑलवेज फर्स्ट' ज्यादा यूज़फुल साबित हो रहा है। लेकिन इसे अपने बिज़नेस पर अप्लाई कैसे करें?

रियल स्टेट में कामयाब कपल के 122 इंस्ट्रक्शन्स पर बेस्ड यह समरी सिखाती है, कि क्यों आपको क्लाइंट के इमोशन्स, जरूरतों और ख्वाहिशों पर खासतौर से ध्यान देने की जरूरत है। क्लाइंट को अपनी इंफॉर्मेशन और नॉलेज के हिसाब से सलाह देने के बजाय कोशिश कीजिए कि आप उनकी ख्वाहिशों और जरूरतों को समझकर, उन्हें सलाह दें। यह तरीका आपके बिजनेस को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है। इसके इस समरी में आप जानेंगे कि कैसे ऑथर्स ने कस्टमर्स को खुद की कंपनी से ना खरीदने की सलाह देकर अपनी सेल्स बढ़ाई?, कैसे कस्टमर्स का यकीन मंदी में भी कंपनी को डूबने नहीं देता? और कैसे आपके बिजनेस की तरक्की सीखते रहने की ख्वाहिश से जुड़ी है?

चाहे आप हाई-पेड कंसलटेंट हों या फिर कोई मामूली से सेल्सपर्सन, याद रखिए, कि कस्टमर के यकीन से ही बिज़नेस आगे बढ़ता है। हम जानते हैं कि क्लाइंट्स के साथ मजबूत रिश्ते क्यों बनाने चाहिए, लेकिन क्या हमें मालूम है, कि कैसे?

यह इतना भी मुश्किल नहीं है। ईमानदारी, काबिलियत और केयर, इन तीनों पर ध्यान देकर आप अपने बिजनेस को वह नींव दे सकते हैं, जो उसे बेहतरीन कस्टमर-ब्रांड रिलेशनशिप के लिए चाहिए।

तो चलिए शुरुआत 'ईमानदारी' से करते हैं।

ईमानदारी का मतलब कस्टमर को सच बताना नहीं बल्कि उन हालातों में सच बताना है जब इसका असर आपके फायदे और नुकसान पर हो सकता है। हालांकि थोड़े से झूठ से किसी को ऐतराज़ भी नहीं है, है न? रियल स्टेट से जुड़े एग्जैम्पल से समझने की कोशिश करते हैं, कि इस बिज़नेस में ईमानदारी इतनी ज़रुरी क्यों है?

प्रॉपर्टी खरीदने का फैसला, किसी भी शख्स के लिये बहुत बड़ा फाइनेंशियल और इमोशनल फैसला होता है। न सिर्फ वह कोई चीज़ खरीद रहे बल्कि अपनी फैमिली के लिए रहने की जगह ढ़ूंढ़ने के साथ अपनी जमा पूँजी लगा रहे होते हैं। ऐसे में क्लाइंट का घबरा जाना या फैसले पर डाउट करना कोई हैरत की बात नहीं है।

आपको लग सकता है कि एजेंट क्लाइंट्स के ऐसे इमोशनल मोमेंट का फायदा उठाते होंगे, लेकिन समझदार लोग ऐसा बिल्कुल नहीं करते। एजेंट्स जो क्लाइंट्स के जज्बात को समझ कर अपनी इमानदारी से उनका भरोसा जीत लेते हैं, वही लोग अपनी क्रेडिबिलिटी बनाकर कामयाब होते हैं।

रियल स्टेट एजेंट के तौर पर ऑथर्स की मुलाकात ब्राउन फैमिली से हुई, जो स्मिथ फैमिली के बिक रहे मकान को हर हाल में खरीदना चाहते थे। ऑथर्स चाहते, तो बड़ी आसानी से यह डील कराके अपने लिए मुनाफा कमा सकते थे। लेकिन उन्होंने अपने क्लाइंट्स को मोर्टगेज से होने वाले नुकसान के बारे में बता कर, डील ना करने की सलाह दी।

नतीजतन, ब्राउन और स्मिथ फैमिली ऑथर्स के परमानेंट क्लाइंट्स बन गए। ऑथर्स ने कस्टमर के फायदे को पहले रखा। दोनों ही फैमिलीज़ ने अपने जानने वालों से ऑथर्स के काम के बारे में बता कर उनकी की मदद की।

क्लाइंट उसी कंपनी के पास आते हैं, जो खुदकी काबिलियत साबित कर पाती है।
'ऑनेस्टी इज बेस्ट पॉलिसी', लेकिन सिर्फ इमानदारी से ही कस्टमर का भरोसा नहीं जीता जा सकता। कस्टमर फर्स्ट, का दूसरा पहलू कॉमपिटेंस है, जिसका मतलब, क्लाइंट्स के सामने अपनी काबिलियत साबित करना है।

कॉमपिटेंस का मतलब एक बार सीखकर, लगातार उसे ही अप्लाई करते रहना नहीं है। अपनी काबिलियत साबित करने के लिए, सीखने और आगे बढ़ने के प्रोसेस को अपनी जिंदगी में शामिल करना होगा। एक बेहतरीन रियल एस्टेट एजेंट बनने के लिए आपको लगातार पढ़ते और सीखते रहना होगा।

चूंकि, ऑथर्स ने बिना किसी खास ट्रेनिंग के काम शुरू किया था इसलिए वह अपनी पहली नौकरी में नाकाम रहे। ऐसा एक्सपीरियंस दूसरा कैरियर चुनने के लिए काफी था, लेकिन दोनों ने हार ना मानने की ठानी।

ऑथर्स ने, साल में लगभग 10 बार कॉन्फ्रेंस और सेमिनार में जाना शुरू कर दिया। वह ट्रेड मैगजीन पढ़ने लगे और यहां तक कि फ्री वक्त का इस्तेमाल एजुकेशनल सीडीज़ सुनने में किया। उनकी हार न मानने की जिद में उन्हें क्लाइंट्स का भरोसा जीतने के कबिल बनाया। अब वक्त था कि ऑथर्स की टीम भी उतनी ही टैलेंटेड बने।

ऑथर्स ने मेहनत करके काबिल लोगों की एक बेहतरीन कस्टमर सर्विस टीम बनाई, टीम का हर शख्स अपने काम में माहिर होता है। इस तरीके से क्लाइंट को अपने काम के हर स्टेप पर प्रोफेशनल लोग ही मिलते हैं। 

यह टीम किस तरीके से ऑर्गेनाइज है?

जब कोई भी कस्टमर आता है तो उसकी पहली मुलाकात मार्टिन से होती है, जूडी घर को प्रेज़ेन्टेबल बनाती है और हारून घर की फोटो खींचता है। उसके बाद डोना उस घर के लिए कस्टमर देखती है और जब कस्टमर मिल जाता है, जोसेफ और जोऍन को डील कंप्लीट करते हैं।

क्लाइंट के फायदे को समझकर, उन्हें जताएं, कि आपके लिये 'कस्टमर्स फर्स्ट' हैं।

डील लॉक करते वक्त कोई भी सेल्समैन क्या सोचता होगा? यकीनन, अपना कमीशन। खैर, बेहतरीन सेल्समैन ऐसा नहीं सोचते। क्लाइंट फर्स्ट का मतलब,  क्लाइंट को सबसे पहले रखना है, ना कि सिर्फ कमीशन।

क्लाइंट को सबसे पहले रखने का मतलब, पर्सनल लाइफ में उनकी मदद या फिर उनका इमोशनल सपोर्ट बनने से नहीं है। आमतौर पर केयर का मतलब हम सिमपेथी से ही समझते हैं। बिजनेस के मामले में केयर का मतलब, यह समझना है, कि क्लाइंट का फायदा कहां है और वह क्या चाहता है। जब क्लाइंट को एहसास होगा कि कंपनी उसके फायदे की डील ऑफर कर रही है, तो वह आपकी सभी सलाह मान लेंगे।

एक केयरिंग कंपनी अपने क्लाइंट को नुकसान से बचाने के लिए, उसकी सोच को बदलने की पूरी कोशिश करती है। ब्राउन फैमिली के बारे में सोच कर देखिए। ऐसे कॉम्प्लिकेटेड केस में आपको अपने क्लाइंट्स का फायदा सबसे पहले सोचना होगा, तभी क्लाइंट्स आप पर यकीन कर सकेंगे।

अगर आप अपने क्लाइंट को कंफर्टेबल करने की कोशिश नहीं करते तो उनकी ज़रुरत समझने में आपको काफी मेहनत करनी पड़ सकती है, क्योंकि अक्सर इतना बड़ा फैसला लेते वक्त क्लाइंट्स में घबराहट और डर होता है, जो वह छिपाने की कोशिश करते हैं। लेकिन एक बार जब उन्हें कंपनी पर यकीन हो जाता है, तो वह अपनी सारी हिचकिचाहट और डर बता सकते हैं। इस तरह कंपनी और कस्टमर में दोतरफा भरोसे का रिश्ता कायम हो जाता है। जब कंपनी अच्छा करती है, तो क्लाइंट अपने जानने वालों को कंपनी के बारे में बताने पर गर्व महसूस करता है। कस्टमर के साथ आपका बर्ताव, कंपनी का सबसे बड़ा एडवर्टाइजमेंट है, और यह कभी भी कंपनी के लिए बड़ा बदलाव ला सकता है।

2007-08 में आई मार्केट ड्रॉप के दौरान ऑथर्स की कॉम्पटीटर कंपनीज़ ने अपने कमीशन में 70 परसेंट की गिरावट दर्ज की। लेकिन ऑथर्स की कंपनी को कमीशन में सिर्फ 20 परसेंट का नुकसान हुआ। ऐसा क्यों? दरअसल, ऑथर्स के भरोसेमन्द कस्टमर्स ने कंपनी को बुरे दौर में भी लगातार सपोर्ट और प्रमोट किया।

कस्टमर फर्स्ट का उसूल, खराब इकोनॉमिक सिचुएशन में भी अच्छी बिक्री की गारंटी देता है।
इकोनॉमी अच्छे और बुरे दौर से गुजरती रहती है, लेकिन इससे कंपनीज़ का बुरा वक्त आसान नहीं हो जाता।  कई बार मार्केट की हालत खराब होने की वजह से अच्छे खासे बिजनेस को बंद करने की जरूरत पड़ जाती है। लेकिन एक तरीके से कंपनी का सेफ्टी नेट बरकरार रखा जा सकता है: स्ट्रांग कस्टमर बेस।

2007-8 में आई फाइनेंशियल क्राइसिस के दौरान यूनाइटेड नेशन्स का रियल स्टेट मार्केट बर्बाद हो गया। कोई भी मोर्टगेग से घर खरीदने के लिए तैयार नहीं था, जबकि बेचने वालों की बाढ़ सी आई हुई थी और बैंक रिपोज़ेज्ड घरों को अपने रिकॉर्ड बुक से जल्द से जल्द हटा देना चाहते थे। कुल मिलाकर घरों की कीमत बेहद कम हो गई थी, लेकिन खरीदने वाला कोई नहीं था। यूनाइटेड स्टेट में रियल स्टेट मार्केट अपने आप को बचाए रखने के लिये स्ट्रगल कर रहा था।

जबकि ऑथर्स ने बाकियों के मुकाबले अपने बिजनेस को स्टेबल रखने में कामयाबी हासिल कर ली थी। इसके पीछे की वजह उनकी क्लाइंट फर्स्ट की  पॉलिसी थी।  क्लाइंट और उनके फायदे को हमेशा पहले रखने की आदत ने, मार्केट बर्बाद होने जैसे बुरे वक्त में भी कंपनी के भरोसेमंद कस्टमर्स को बनाए रखा। साथ ही क्लाइंट्स को हमेशा बेस्ट एडवाइस देने की काबिलियत ने भी बदलते हालात में ऑथर्स की कंपनी को बचाए रखने में मदद की।

यह सिर्फ क्लाइंट और कंपनी के बीच भरोसेमंद रिश्ता ही नहीं था जिसने कंपनी को डूबने से बचाया बल्कि टीम के साथ भरोसेमंद रिश्ते का भी इंपॉर्टेंट रोल रहा है। इस क्राइसिस के दौरान बहुत सारी कंपनी ने अपने स्टाफ को निकालकर अपनी कंपनियों को छोटी करने का फैसला लिया था।

लेकिन  अपने स्टाफ को निकालने के लिए तैयार नहीं थे, क्योंकि इससे उनकी सर्विस क्वालिटी में कमी आ सकती थी। इसके बदले टीम ने भी खूब मेहनत की और क्राइसिस के दौरान भी हाई लेवल कस्टमर सर्विस प्रोवाइड करने में कामयाब रहे।

कैसे अपने क्लाइंट्स को सबसे पहले रखें, यह जानना एक अलग बात है और अपनी खुशी से क्लाइंट्स का फायदा सोचना अलग बात है। भरोसेमंद और कामयाब कस्टमर रिलेशनशिप बनाने के लिए, सही एटीट्यूट की सख्त जरूरत है। आखिरकार बहुत कम चीजें ही हैं जो हैप्पी जॉब से ज्यादा इंपॉर्टेंट होती हैं।

हकीकत यह है कि सही माइंडसेट के साथ की जा रही किसी भी जॉब में मन लग सकता है। जो काम पसन्द है उसे करने की कोशिश के बजाय क्यों न वह पसन्द करने की कोशिश की जाये जो कर रहे, चाहे वह कुछ भी हो। यह  अपने आप में बहुत यूज़फुल स्किल है, खासतौर पर तब, जब कोई काम आखरी ऑप्शन बन चुका हो।

जब ऑथर्स के बच्चे प्राइमरी स्कूल में थे तो उन्हें जॉब की बहुत ज़रुरत थी। जोसेफ़ को पास के हॉस्पिटल में हाउसकीपर की जॉब मिली, जहां एक तरफ बाकी हाउसकीपर्स को अपनी जॉब पसंद नहीं थी, वहीं ऑथर्स ने हमेशा सबसे अच्छा करने की कोशिश की। हॉस्पिटल की मैनेजर ने ऑथर्स से कहा कि पिछले 32 साल में, उन्होंने किसी एंप्लॉय को इतने अच्छे से काम करते नहीं देखा। ऐसी तारीफ ने एक अनचाही जॉब से भी कामयाबी का एहसास करा दिया। आखिरकार, बिजनेस लोगों और उनकी जरूरतों से ही चलते हैं- अपने क्लाइंट से बात करना और उन्हें पसंद करना अपने बिज़नेस से रिलेटेड जरूरतों को ढ़ूंढ़ने का इकलौता रास्ता है। जब जोसेफ रियल एस्टेट के बिजनेस में नये थे, तो वह अपने आस पड़ोस में जाया करते थे, हर रोज 30 से 40 घरों में जाकर वह लोगों से बात करते। रियल स्टेट के बारे में ऑथर्स को थोड़ा बहुत मालूम था, इसलिए रियल स्टेट के बारे में बात ना करके वह लोगों से उनके बारे में पूछा करते थे। शुरुआत में, इससे उनके बिजनेस को तो कोई फायदा नहीं हुआ, लेकिन उन्होंने अपने आसपास रहने वालों को पसन्द करना और उनकी केयर करना सीख लिया। आखिरकार उनका केयरिंग अपरोच रंग ले आया। 12 साल के अन्दर ही उन घरों में से वन-थर्ड घरों को बेचने का काम जोसेफ की कम्पनी को मिला, जहां वह लोगों के बारे में जानने के लिये जाया करते थे।

कुल मिलाकर
याद रखिए जिनके साथ आप काम करते हैं वह भी आपकी तरह नार्मल लोग हैं, तो काम करते वक्त उनके फायदे को सबसे पहले रखिए। अपने क्लाइंट के लिए आपकी ईमानदारी और केयर, बिजनेस को कंपटीशन से आगे ले जा सकता है।

 

'ऑनेस्टी इज द बेस्ट पॉलिसी'

जिसके साथ आप काम करते हैं उसके लिए ईमानदार और केयरिंग रहिये, आपको कभी अपने पास्ट के कामों पर अफसोस और बिज़नेस के फ्यूचर की फिक्र भी नहीं होगी। साथ ही,  ईमानदारी से आप पर कस्टमर का भरोसा मार्केटेबल प्रोफेशनल बनने में आपकी मदद करता है।

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