Eddie Jaku
The Beautiful Life of an Auschwitz Survivor
दो लफ्ज़ों में
साल 2020 में रिलीज़ हुई किताब “The Happiest Man on Earth” एक इंसान की सच्ची कहानी है. इस किताब में ऐसे इंसान की कहानी को बताया गया है, जिसने अपनी ज़िन्दगी में बहुत कठिन सिचुएशन का सामना किया है. इस किताब की शुरुआत सेकंड वर्ल्ड वॉर के पहले से होती है. इस किताब में बताया गया है कि इंसान अपने सारे करीबियों से दूर होकर भी दिलेरी से ज़िन्दगी जी सकता है. इस किताब से आपको बहुत कुछ सीखने को मिलेगा, सबसे बड़ी चीज़ आपको ज़िन्दगी में खुश रहने की हिम्मत मिलेगी. ऐसा भीं हो सकता है कि इस किताब की समरी को सुनने के बाद, आपको फिर किसी मोटिवेशनल गुरु के दरवाज़े में जाने की ज़रूरत ना पड़े. इसलिए चलिए इस शानदार सफर की शुरुआत करते हैं.
ये किताब किसके लिए है?
- सभी फील्ड के स्टूडेंट्स के लिए
- ऐसे लोगों के लिए जिन्हें मोटिवेशन की ज़रूरत हो
- ऐसे लोगों के लिए हिस्ट्री में इंटरेस्ट हो
लेखक के बारे में
आपको बता दें कि इस किताब का लेखन ‘Eddie Jaku’ ने किया है. ये German-born engineer हैं, जिन्होंने सेकंड वर्ल्ड वॉर के बीच में अपनी लाइफ का बहुत समय जेल और भयानक टेंट्स में बिताया था. लेकिन फिर 1950 का दौर आते-आते ये अपने परिवार के साथ ऑस्ट्रेलिया में शिफ्ट हो गए थे. इसी के साथ-साथ ये Sydney Jewish Museum के फाउंडर भी हैं.
हिटलर के चांसलर बनते ही ऑथर की लाइफ बदलने लगी थी
इस किताब के चैप्टर्स की कहानी आपके नज़रिए को बदलने की क्षमता रखती है. आपको इसमें ज़िन्दगी को देखने का एक नया नज़रिया मिलेगा. आपको पता चलेगा कि कैसे एक इन्सान सही मानसिकता की मदद से डेथ कैम्प में भी सर्वाइव कर सकता है? इस किताब की मदद से Eddie Jaku ने वो सब शेयर किया है, जो उन्होंने देखा था. इसलिए भयानक से भयानक मंज़र से ज़िन्दगी की खुशबु निकालने के लिए आपको इस किताब की समरी को ज़रूर सुनना चाहिए.
आपको इस किताब में ये भी सीखने को मिलेगा
-एजुकेशन की वैल्यू क्यों समझनी ज़रूरी है?
-सफलता के लिए क्या करना ज़रूरी है?
-ख़ुशी से बढ़कर कुछ और नहीं हो सकता है
तो चलिए शुरू करते हैं!
कहानी की शुरुआत Eddie Jaku के बचपन के दिनों से होती है. आज के तमाम बच्चों की तरह Eddie Jaku भी पढ़ लिखकर कुछ अच्छा करना चाहते थे. वो अपने पिता के बताए रास्ते पर चलना चाहते थे. और इंजीनियर बनना चाहते थे.
साल 1933 आते-आते Eddie Jaku जर्मनी के स्कूल से ग्रेजुएट हो चुके थे. वो आगे की पढ़ाई करना चाहते थे लेकिन तभी सत्ता में हिटलर आ गए. हिटलर के पॉवर में आते ही बाकी Jewish बच्चों की तरह Eddie Jaku का फ्यूचर भी पूरी तरह से बदल चुका था.
हिटलर के आने से पहले एडी ने कभी भी खुद को Jewish के तौर पर नहीं देखा था. उनके पिता ने हमेशा कहा था कि सबसे पहले वो जर्मन हैं और फिर कहीं जाकर Jewish का नंबर आता है. लेकिन हिटलर के आने के बाद चीज़ें बदलने वाली थीं.
जब हिटलर चुने गए, तो उन्होंने शुरू से ही लोगों को अपने यहूदी विरोधी विचारों से अवगत कराया. फिर जर्मनी1918 में प्रथम विश्व युद्ध हार गया और युद्ध में हार की वजह से देश को विजयी पावर्स को भारी रकम का भुगतान करना पड़ा. उस रकम को देश अफोर्ड नहीं कर सकता था. जिसकी वजह से जर्मनी में भुखमरी के हालात पैदा हो चुके थे.
इसकी वजह से जर्मनी के लोग काफी परेशान हो चुके थे, उनके अंदर गुस्सा भी भरने लगा था. लोगों के पास घर दो टाइम खाना खाने का पैसा भी नहीं बचा था. वो खुद को एक क्रूर शासक का गुलाम समझने लगे थे. वो शासक उनसे बार-बार यही कहता था कि वो उन्हें गोल्डन पीरीयड ऑफ़ जर्मनी में वापस लेकर जाएगा. लेकिन सच्चाई कुछ और ही कहानी बयाँ कर रही थी.
अगर हम Jewish community यानि यहूदी लोगों की बात करें तो ये समुदाय लीपज़िग की संस्कृति और अर्थव्यवस्था के केंद्र में सैकड़ों वर्षों से रहा है. लेकिन जब हिटलर सत्ता में आया, तो वह अपने साथ यहूदी-विरोधी का ज्वार लेकर आया.
हिटलर की सोच की वजह से Eddie को लगने लगा था कि सिचुएशन बहुत जल्दी और भी ज्यादा खराब होने वाली हैं. क्योंकि जिस एडी का सपना पढ़ाई करने का था. उसे हाई स्कूल में भी जाने की अनुमति नहीं थी.
अब आप खुद सोचिए कि ऐसे हालात में एक बच्चे के दिमाग में क्या असर पड़ रहा होगा? वहीं अगर Eddie के परिवार की बात करें तो कुछ सालों पहले ये परिवार शहर में इज्ज़त के साथ रहा करता था. लेकिन अचानक से इस परिवार के साथ दुश्मनों की तरह व्यवहार होने लगा था. जो परिवार देश को ही अपना सम्मान समझता था. उसे बता दिया गया था कि तुम लोग इस देश के लिए कुछ भी नहीं हो. ऐसे में उन लोगों को खुद के साथ विश्वासघात जैसी फीलिंग आ रही थी.
लेकिन Eddie के पिता ने हिम्मत नहीं हारी, उन्हें समझ में आ चुका था कि उन्हें अपने बच्चे की पढ़ाई के लिए कोई ना कोई रास्ता तो निकालना ही पड़ेगा. इसके लिए उन्होंने एक समाधान भी सोचा लेकिन ये और ज्यादा भयानक होने वाला था. इसके लिए छोटे से बच्चे को अपने माता पिता को छोड़कर कहीं अंजान जगह जाना था.
दोस्तों, आगे की बात अभी होगी, लेकिन उससे पहले ‘एडी’ एक घटना को याद करते हुए फ्लैशबैक में जाते हैं और कहते हैं कि “75 साल पहले युद्ध के बाद के दिनों में मुझे एक ‘नाज़ी’को उसके युद्ध अपराधों के लिए बेल्जियम में बंदी बनाए जाने की सूचना मिली. मैंने उससे मिलने का इंतजाम किया और फिर इंतज़ाम होने के बाद मैंने उससे पूछा - क्यों आखिर तुमने ऐसा क्यों किया?जिसकी वजह से तुम्हे सजा मिल रही है. वो उत्तर नहीं दे पाया और रोने लगा. वो बुरा नहीं लग रहा था, वो तो वास्तव में किसी और की परछाई था.. मुझे उसके प्रति सहानुभूति थी वो इतना कमज़ोर लग रहा था मानो पहले ही मर चुका हो और मुझे मेरे प्रश्न का उत्तर नहीं मिल पाया..”
लीपज़िग में लौटने से एडी का जीवन बिखर गया
एक तरीका था, जिसकी मदद से Eddie को अच्छी एजुकेशन मिल सकती थी. लेकिन इस तरीके के लिए उसे खुद को कुछ और दिखाना पड़ता. उसे वो बनना पड़ता जो वो नहीं था.
उसके पिता ने कुछ ऐसा ही किया, उन्होंने कुछ नकली दस्तावेज़ बनवाए, जिसमें ये दिखाया गया कि Eddie एक जर्मन अनाथ बच्चा है. जिसका नाम Walter Schleif है. और इसके माता पिता ने पैदा होने के साथ इसे छोड़ दिया था.
ये कहानी आपको काफी दिलचस्प लगने लगी होगी, लेकिन ये आपके लिए दिलचस्प हो सकती है. उस बच्चे के लिए ये कत्तई दिलचस्प नहीं थी. अब Eddie को एक दूसरी पहचान के साथ अपने शहर से दूर दूसरे शहर के अनाथ आश्रम में रहना था. अचानक से उसे बता दिया गया था कि तुम्हारा अपने माता-पिता और परिवार से कोई वास्ता नहीं है. हम तुम्हें नहीं जानते हैं कि तुम कौन हो? कहाँ से आए हो? तुम एक जर्मन अनाथ बच्चे हो और आज से यही तुम्हारी पहचान होने वाली है.
इसलिए इस नई पहचान के साथ जितनी जल्दी तुम दोस्ती कर लोगे, आगे का सफर तुम्हारे लिए उतना ही आसान होने वाला है.
अब अगले 5 साल की शुरुआत होने वाली थी. इन 5 सालों में Eddie अपने परिवार से नहीं मिलने वाला था. इन्हीं 5 सालों में Eddie टीनेजर की उम्र से भी गुज़र रहा था. उसके लिए ये समय काफी मुश्किलों भरा रहा. उसे घर की याद आती थी, उसे ऐसा लगता था कि जैसे अचानक से ही उसके शरीर में किसी और की आत्मा को डाल दिया गया हो.
फिर एक ऐसा समय आया जब वो ग्रेजुएट हो चुका था, उसनें फैसला किया कि अब वो अपने माता पिता से मिलने अपने घर की तरफ जाएगा. इसी दौरान उसके माता-पिता की 20वीं वेडिंग एनिवर्सरी भी आने वाली थी.
लेकिन उसे नहीं मालुम था कि ये फैसला पूरी तरह से ग़लत साबित होने वाला है. Eddie सबसे बचते हुए रात में अपने होम टाउन लीपज़िग पहुंचा, लेकिन उसे घर के दरवाज़े में कोई नहीं मिला. उसे नहीं पता था कि उसके घर वाले उस घर से दूर जा चुके हैं. उन्होंने उस घर को इसलिए छोड़ा था कि वो Eddie से दूर रहेंगे और उससे कभी नहीं मिलेंगे. जिससे Eddie की लाइफ में कोई दिक्कत ना आए.
लेकिन Eddie की लाइफ में अब बड़ी दिक्कत आने वाली थी क्योंकि उसने लिपजिंग में वापसी की थी. उसे पुराने मोहल्ले वालों ने देख लिया था, वो फिर भी घर के अंदर गया और अपने पुराने बिस्तर से लिपटकर सो गया.
लेकिन उसकी नींद ज्यादा देर तक के लिए नहीं थी, कई नाज़ीयों ने उसे घर से बाहर निकालकर मारना शुरू कर दिया. इन नाज़ीयों में कई उसके पुराने जानने वाले भी थे. लेकिन अब उनके अंदर इंसानियत खत्म हो चुकी थी. वो एक ऐसी भीड़ का हिस्सा बन चुके थे. जिन्हें बस किसी की जान लेते आता है.
Eddie बुरी तरह से ज़ख्मी हो चुका था, उसके शरीर के हर हिस्से से खून बह रहा था. उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था. फिर भीड़ ने Eddie के सामने ही उसके बचपन के घर को जला दिया. Eddie के नज़रों के सामने उसकी बचपन की यादें जल रहीं थीं. वो रो भी रहा था और अपने फैसले पर पछता भी रहा था.
कैंप बुचेनवाल्ड भयानक था, अब सुनिए इस कैम्प की कहानी
बचपन में जिस ज़ू में Eddie घूमने जाया करता था, उसी जगह उसे बंदी बनाकर ले जाया गया. इस बार उसे बिल्कुल मज़ा नहीं आ रहा था. उसके शरीर मे बुरी तरह से घाव दिए जा रहे थे.
रात भर में कई यहूदियों को वहां लाया गया, सुबह सबको कैंप बुचेनवाल्ड लेकर जाना था. उस कैम्प की हालात हद से ज्यादा खराब थे. वहां टॉयलेट तक नहीं हुआ करता था. छोटे-छोटे डिब्बों में हज़ारों लोग बंद थे.
ना ही किसी को खाने के लिए दिया जाता था और ना ही पीने का पानी मिलता था. पूरे कैम्प में बीमारी फैली हुई थी. उस कैम्प में फेंक दिए लोग दिन रात अपने मरने की दुआ मांगते थे.
कुछ दिनों पहले तक Eddie की लाइफ पढ़े लिखे जर्मन्स के बीच बीत रही थी. लोग उसे इज्ज़त की निगाहों से देखते थे. लेकिन कुछ दिनों बाद ही उसकी ज़िन्दगी नर्क से भी बदत्तर हो चुकी थी. बुचेनवाल्ड का कैम्प किसी नर्क से भी बद्दत्तर था.
अब आप खुद सोचिए कि इस तरह के कैम्प में हज़ारों लोग कैसे रह रहे थे? हालाँकि, इस बात में कोई दो राय नहीं है कि वहां पर किसी को रहने के लिए नहीं बल्कि मरने के लिए छोड़ा गया था.
Eddie को समझ में नहीं आ रहा था कि कोई इतना दरिंदा कैसे हो सकता है? वहां पर लोगों को दौड़ाकर उनकी पीठ में गोली मारी जाती थी. लोगों के नाखूनों को बार-बार उखाड़ा जाता था.
लेकिन Eddie की किस्मत ने साथ दिया और उसकी मुलाकात एक ऐसे सिपाही से हुई, जो उसकी जान पहचान का था. सिपाही को पता था कि Eddie मैकेनिकल इंजीनियर है और उसने अपने कमांडर को बताया कि इसकी स्किल नाज़ीयों के बहुत काम आ सकती हैं.
इसके बाद Eddie को नाज़ीयों की फैक्ट्री जाने का मौका मिल गया, इसके बाद Eddie के परिवार से भी कांटेक्ट किया गया. Eddie के पिता को ये ज़िम्मेदारी दी गई कि वो एडी को फैक्ट्री तक लेकर जाएगा, लेकिन एडी के पिता ने ऐसा नहीं किया, उन्होंने जुगाड़ लगाकर एडी को बेल्जियम के बॉर्डर पहुंचा दिया. जहाँ उन्होंने कुछ तस्करों की मदद ली और बॉर्डर पार करने की प्लानिंग की..
तस्करों ने एडी को जंगल के रास्ते से बॉर्डर पार करवाया, लेकिन जब एडी ने पीछे मुड़कर देखा तो उसको उसके पिता कहीं नज़र नहीं आए... उसकी आँखों से आंसू की धारा बहती जा रही थी. उसे अपनी ज़िंदगी से नफरत होने लगी थी. उसे लग रहा था कि बिना माता-पिता के इस ज़िन्दगी का क्या ही मतलब है? उसे पता नहीं था कि अब उसकी लाइफ में आगे कौन से ट्विस्ट और टर्न आने वाले हैं?
Eddie अपने परिवार से मिलने के लिए बेकाबू हो रहा था, उसे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था
Eddie बेल्जियम पहुँच चुका था लेकिन उसके पिता उसके जैसे किस्मत वाले नहीं थे. उन्हें सर्च लाइट की मदद से पकड़ लिया गया और सोल्जर्स के हवाले कर दिया गया था. जहाँ उनके साथ भी बर्बरता की हदें पार कर दी गईं थीं.
इसी के साथ लिपजिंग में Eddie की माता और बहन को भी सोल्जर्स द्वारा अरेस्ट कर लिया गया था.
आखिर कार कई महीनों के संघर्ष के बाद एडी के माता-पिता और बहन की रिहाई हुई और काफी मुश्किलों के बाद वो लोग बेल्जियम पहुँच ही गए. हालाँकि, तब तक वहां से एडी जा चुका था.
एक बार फिर से क्रॉस बॉर्डर में एडी की गिरफ्तारी हो गई और उसे बेल्जियम कैम्प में भेज दिया गया. जहाँ उसे साल भर के लिए कैद कर दिया गया था.
बेल्जियम में गिरफ्तारी के बाद, बहुत मुश्किलें आईं और किसी तरह से एडी पोलैंड के कैम्प तक पहुँचने में कामयाब रहा, इस बीच उसनें जर्मनी और बेल्जियम का युद्ध भी देखा.
फिर एक दिन एक लड़के की मदद से एडी पोलैंड से भागने में कामयाब रहा और बेल्जियम की तरफ वापसी कर दी, क्योंकि एडी को तलाश अपने परिवार की थी. आखिरकार उसकी तलाश पूरी हुई और बेल्जियम में उसकी उसके परिवार से मुलाक़ात हो गई.
ऑशविट्ज़ ने एडी के परिवार को छीन लिया, इसी के साथ उसकी जीने की इच्छा भी खत्म सी हो गई थी
एडी जब बेल्जियम में अपने परिवार से मिला, तो वो क्षण उसके जीवन का सबसे खुशहाल था. लेकिन ये ख़ुशी ज्यादा समय तक नहीं टिकी, किसी ने अथॉरिटी से शिकायत कर दी. और पूरे परिवार को अरेस्ट करके ऑशविट्ज़ की ओर जाने वाली ट्रेन में फेंक दिया गया.
जी हाँ, बैठाया तो इंसान को जाता है. उस दौर में किसी के साथ इंसानों जैसा व्यवहार नहीं किया जा रहा था.
वो जर्नी 9 दिनों की थी, और इन 9 दिनों में किसी को भी खाने पीने को कुछ नहीं दिया गया था. किसी के पास बैठने की भी जगह नहीं थी. छोटे से कम्पार्टमेंट में हज़ारों लोगों को ठूसा गया था.
इस 9 दिनों की भयानक जर्नी में एडी ने अपने माता-पिता को हमेशा के लिए खो दिया था. एक छोटे बच्चे को अपने माता-पिता को फाइनल गुड बाय बोलने का भी मौका नहीं मिला.
ऑशविट्ज़ से बुरी जगह एडी ने कभी नहीं देखी थी, अब आप खुद कल्पना कीजिये कि ऑशविट्ज़ कितनी बुरी जगह रही होगी? हर रात वहां मौत तांडव करती थी. लोगों को बिना कपड़ों के माइनस डिग्री टेम्प्रेचर में सुला दिया जाता था. सुबह ना जाने कितने लोग बर्फ बन जाया करते थे.
हर रात एडी को आखिरी रात नज़र आया करती थी. वहां प्रिजनर्स से बहुत ज्यादा काम लिया जाता था. अगर कोई भी प्रिजनर काम करने से मना कर दे तो उसे तुरंत मौत की नींद सुला दी जाती थी. और उसकी मौत कोई आम मौत नहीं होती थी बल्कि रूह कपा देने वाली मौत दी जाती थी.
ये सब देखकर कई प्रिज़नर तो इतना परेशान हो जाते थे कि वो अपनी जान खुद ही ले लिया करते थे. कई लोगों ने खुद को नंगी तारों में झोक दिया था.
अब सवाल ये उठता है कि एडी क्यों ज़िन्दा था? इसका जवाब मोटिवेशन पर छुपा हुआ है, एडी को पता चल गया था कि उसकी बहन अभी ज़िन्दा है. और इसी तरह किसी दूसरे कैम्प में है. उसे किसी भी तरह अपनी बहन तक पहुंचना था. शायद इसी वजह से एडी ने खुद को कभी मारने की कोशिश नहीं की थी.
अब कहानी में ऑशविट्ज़ ज़िन्दा रहेगा, इस चैप्टर में आएगा टर्निंग पॉइंट
18 जनवरी 1945 की बात है, एक कमांडर ने फैसला किया कि जल्द से जल्द ऑशविट्ज़ के कैम्प को खाली करवाना है. रशियन आर्मी इसे बंद करना चाहती थी.
एडी के साथ और लोगों को कम कपड़ों के साथ बर्फीले रास्ते में मरने के लिए छोड़ दिया गया, उन्हें किसी भी तरह का खाने पीने का सामान नहीं दिया गया. और उन्हें चेतावनी दी गई कि जो रुकेगा उसे गोली मार दी जाएगी.
ये सुनकर ही डरावना लग रहा है, अब सोचिए कि ये सब इस किताब के ऑथर ने रियल में फेस किया है.
ये सफर खतरनाक भी था और मुश्किल भी, एडी कमजोर पड़ता जा रहा था, लेकिन हिम्मत उसने नहीं हारी थी. एडी का एक दोस्त जिसका नाम कर्ट था, वो तो बुरी तरह से कमजोर हो चुका था.
आखिरकार पूरा ग्रुप एक ऐसी जगह पहुँच चुका था, जहाँ वो रात बिता सकते थे. धीरे-धीरे एडी बढ़ता गया और एक और कैम्प में पहुँच गया. लेकिन इस बीच उसनें अपने ख़ास दोस्त कर्ट को हमेशा के लिए खो दिया था.
लेकिन उसे एक सीख मिल चुकी थी कि लाइफ का दूसरा नाम ही आगे बढ़ते जाना है. तमाम मुश्किलों के बाद भी एडी ने हिम्मत नहीं हारी और लगातार आगे बढ़ता गया.
एडी के दिमाग में किसी भी तरह से नाज़ी की नज़रों से भागने का प्लान था? लेकिन उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर वो नाज़ी की नज़रों से कैसे भागे?
लेकिन उसे इतना समझ में आ चुका था कि अगर अब वो नहीं भागा तो उसका अंजाम भी मौत ही होगा. चलते-चलते उसे ड्रेनेज पाइप दिखी, उसने बिना सोचे समझे ड्रेनेज पाइप में छलांग लगा दी.. पाईप की चौड़ाई ज्यादा थी. जिसकी मदद से एडी काफी दूर तक भाग सकता था.
पाइप की मदद से भले ही उसे रास्ता मिल गया था लेकिन ये भागने का सफर बिल्कुल भी आसान नहीं होने वाला था. पाईप में बर्फीला पानी आ रहा था, जो कि बुरी तरह से ठंडा था. एडी के पास ना ही जूते थे और ना ही ढ़ंग के कपड़े. उसके पास केवल और केवल ज़िन्दा रहने का हौसला था. इस किताब को लिखते वक्त एडी को यकीन नहीं होता है कि आखिर उन्होंने उस टाइम सर्वाइव कैसे कर लिया? इसलिए ऑथर सलाह देते हैं कि इंसान को कभी भी अपनी लाइफ को हल्के में नहीं लेना चाहिए.
लाइफ की वैल्यू उसे ही समझ में आती है, जिसके पास ये बचती नहीं है.
युद्ध के अंत तक में एडी की मेंटल हेल्थ खत्म हो चुकी थी
अब तक के सफर में हमें पता चल चुका है कि एडी ने अपनी लाइफ में बहुत कुछ सहन किया है. उसने नाज़ीयों के द्वारा दी गई चोट के साथ-साथ कई सालों तक की ज़िल्लत को भी झेला है. इस दौरान उसनें अपने माता-पिता के साथ-साथ करीबी दोस्त को भी हमेशा के लिए खो दिया है.
अब आप खुद समझ सकते हैं कि इतना कुछ सहने के बाद एक इंसान की मानसिक हालत क्या हो गई होगी?
एडी पाईप से होते हुए एक गुफा में पहुँच गया था, जहाँ उसे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था. वहां के गंदे पानी की वजह से उसे बीमारी भी हो गई थीं.
अब उसनें फैसला कर लिया था कि वो इस गुफा से बाहर निकलेगा, अब उसे अपने मरने का भी डर नहीं था. क्योंकि अगर वो इस गुफ़ा में कुछ दिन और रह लिया तो वो तो वैसे ही मर जाएगा.
यही वो समय था, जब एडी ने अपने एटीट्यूड को बदलने का काम किया था. फिर किसी तरह वो वहां से निकला और कुछ समय बाद उसकी मुलाक़ात एक ऐसे इंसान से हुई, जिसकी वजह से उसे काफी ख़ुशी हुई.
ये इंसान कोई और नहीं बल्कि उसका पुराना दोस्त कर्ट था, इसी कर्ट को एडी ने मरा हुआ समझ लिया था. उसे लग रहा था कि कर्ट ने उसे हमेशा के लिए छोड़ दिया है. लेकिन कर्ट ज़िन्दा था और इस मुलाक़ात के बाद एडी को ज़िन्दा रहने की वजह भी मिल गई थी.
क्या एडी की लाइफ में इश्क़ यानि प्यार की भी एंट्री हुई थी?
कर्ट और एडी मिल चुके थे, दोनों ने एक रेंटेड कमरा लिया और अपनी ज़िन्दगी को फिर से शुरू करने का फैसला किया. कुछ दिनों बाद एडी को उसकी बहन भी मिल गई, जो उसी के साथ आकर रहने लगी.
अब कहानी में नए किरदार की एंट्री हो रही है, किरदार का नाम Flore है, इस लड़की ने अपनी पूरी ज़िन्दगी बेल्जियम में बिताई है.
एक दिन ऑफिस में काम के दौरान एडी की मुलाक़ात Flore से होती है. बातों ही बातों में एडी अपनी कहानी फ्लोरे को सुनाता है. और फ्लोरे को एडी की कहानी से लगाव हो जाता है.
हालाँकि बात कुछ ऐसी थी कि ऑथर को फ्लोरे से पहली नज़र में ही प्यार हो गया था. धीरे-धीरे फ्लोरे और ऑथर एक दूसरे को समझने की शुरुआत करते हैं. समय बीतने के साथ फ्लोरे को भी ऑथर से प्यार हो जाता है.
ये एक ऐसा दौर था, जब एडी को बहुत अच्छा लग रहा था. उसके पास उसकी बहन भी थी, दोस्त भी था और अब उसे एक लड़की से प्यार भी हो चुका था.
इस बारे में बात करते हुए ऑथर कहते हैं कि “इंसान की जिंदगी में प्यार की दस्तक ज़रूर होती है. भले ही समय अच्छा चल रहा हो या फिर बुरा.. और पूरी चीज़ इस बात पर निर्भर करती है कि क्या आप अपने प्यार को पहचान पाते हैं? अगर आप अपने प्यार को पहचान लें तो इससे आपकी लाइफ काफी ज्यादा बेहतर भी हो सकती है..”
तमाम मुश्किलों के बाद ऑथर ने सीखा कि ज़िन्दगी का दूसरा नाम ही प्यार है. इसलिए कभी भी अपनी लाइफ से इतना निराश नहीं होना चाहिए. कि हम सभी उम्मीदों को ही खत्म करने लगें. हमें याद रखना चाहिए कि ये लाइफ है और इसके अंदर हमें सरप्राइज़ देने की काबिलियत बाकी है.
हमें अपनी लाइफ से हमेशा प्यार करना चाहिए, हम इसे प्यार करके ही बेहतर बना सकते हैं.
क्या एडी और Flore की शादी हो पाई थी?
एडी का पहला प्यार सफल हुआ था, हालाँकि कोई भी प्यार असफल नहीं होता है. लेकिन April 20, 1946, को एडी और फ्लोरे ने आपस में शादी कर ली थी.
दोनों एक दूसरे से काफी ज्यादा प्यार करते थे, लेकिन शादी का पहला साल काफी ज्यादा कठिन था. एडी के दिमाग में उसकी बीती हुई जिंदगी का ट्रामा बुरा असर डाल रहा था. शादी के पहले कुछ साल काफी कठिन थे. एडी के अंदर कई तरह के डर बैठ चुके थे.
लेकिन एडी एक फाइटर था, उसे मालुम था कि वो अपने इस डर से भी बाहर आ जाएगा. समय और बीता और एडी पिता भी बन चुका था. उसके हाथों में उसका नन्हा सा बच्चा था.
बच्चे के हाँथ में आने के साथ ही एडी के सारे डर भाग चुके थे. उसनें फैसला कर लिया था कि अब वो किसी भी तरह के ट्रामा के साथ ज़िन्दगी नहीं बिताएगा. बल्कि वो पूरी ख़ुशियों के साथ अपनी ज़िन्दगी को अपने परिवार के साथ एन्जॉय करेगा.
साल 1950 आने के साथ ही एडी और उसकी पत्नी ने फैसला कर लिया कि अब वो बेल्जियम में नहीं रहेंगे. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया शिफ्ट होने का प्लान बनाया और सिडनी की फ्लाइट भी पकड़ ली.
एडी और फ्लोरे की ज़िन्दगी पूरी तरह से बदल चुकी थी. उनकी लाइफ में पैसे से लेकर सेक्स तक सब कुछ सही मात्रा में आ चुका था. ऑस्ट्रेलिया ने उनकी लाइफ को स्वर्ग की तरह सुंदर बना दिया था.
कुछ सालों तक एडी ने अपनी कहानी किसी से नहीं बताई, लेकिन फिर समय बीतने के साथ उसे एहसास हुआ कि लोगों को पता चलना चाहिए कि लाइफ कितनी खूबसूरत है? इसलिए एडी हमेशा कहते हैं कि वो इस दुनिया के सबसे ख़ुशहाल इंसान हैं. क्योंकि ख़ुशी का असली मतलब उसी को मालुम चलता है. जिसने असली कष्ट देखे होते हैं.
इसलिए अगर आपको कोई भी निराश इंसान दिखे, तो उसे एक बार एडी की कहानी ज़रूर सुनाइएगा. उसे पता चलेगा कि मौत से बड़ी निराशा कोई नहीं होती है.
एडी की कहानी से हमें सीखना चाहिए कि सिचुएशन कैसी भी हो? कभी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए. आज नहीं तो कल हमारे हिस्से की खुशियाँ हमारे दरवाज़े तक ज़रूर आएँगी. आज हमारा जो काम है, हमें उसे पूरी ईमानदारी से करने की कोशिश करनी चाहिए.
अपनी जर्नी को याद रखिए और खुद को इस दुनिया का सबसे ख़ुशहाल इंसान समझने की शुरुआत कर दीजिए.
कुल मिलाकर
Eddie Jaku की ज़िन्दगी को हिटलर सरकार के फैसले ने पूरी तरह से बदल दिया था. इसलिए हमें समझना चाहिए कि कट्टरपंत कभी भी सही नहीं हो सकता है. बहुत ज़रूरी है कि सबसे पहले इंसान को इंसानियत की नज़र से देखने की कोशिश की जाए.
क्या करें?
हमें समझना चाहिए कि ‘Happiness’ चॉइस है. इसकी तलाश करके खुद को परेशान करना बंद कर दीजिए. आप कहीं भी कभी भी ख़ुशी का रास्ता चुन सकते हैं. लाइफ बहुत खूबसूरत है, आपकी खुशियाँ आपके पास ज़रूर आएँगी.
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आप और कौनसी समरी सुनना चाहते हैं ये भी बताएं. हम आप की बताई गई समरी एड करने की पूरी कोशिश करेंगे.
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