John Pfeiffer
आने वाले नौं महीने में कैसे आप खुद को और अपने पार्टनर को संभाल सकते हैं।
दो लफ़्ज़ों में
ड्यूड! यू आर गोइंग टु बी अ डैड हर उस पुरुष के लिए एक बहुत ही ज़रूरी किताब है जो कि एक पिता बनने वाला है। यह किताब आपको सिखाती है कि पिता बनने से पहले आपको अपने पार्टनर से कैसे बातें करनी चाहिए और कैसे आपको इस बारे सोचना और काम करना चाहिए। इन सबक में आप सीखेंगे कि बच्चे के पैदा होने के बाद कैसे आप खुद को संभाल सकते हैं।
यह किसके लिए है
- वे पुरुष जो पिता बनाने को ले कर उत्सुक हैं।
- वे पुरुष जो पिता बनने के बारे में या गर्भावस्था के बारे में जानना चाहते हैं।
- वे युगल जो एक परिवार शुरू करना चाहते हैं।
लेखक के बारे में
जॉन प्फीफ़र (John Pfeiffer) तीन बेटियों के पिता होने की वजह से वह एक बहुत अच्छे पेरेंटिंग सलाहकार हैं। वह एक लेखक और एक आर्थिक सलाहकार भी हैं।
एक अच्छे पिता बनिए।
हर पुरुष की ज़िन्दगी में वो लम्हा बहुत ही खूबसूरत होता है जब उसे पता चलता है कि वो एक पिता बनाने वाला है। कुछ पुरुष ये खबर सुनकर ख़ुशी के मारे चौंक जाते हैं। लेकिन कोई भी आने वाले दिनों के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं होता।
अगर आप एक पिता बनने वाले हैं या एक पिता बनने के बारे में सोच रहे हैं तो आने वाले सबक आपके लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकते हैं। इन्हे पढ़कर आप गर्भावस्था के बारे में कुछ ज़रूरी बातें जानेंगे। आप सीखेंगे कि गर्भावस्था के वक्त आप कैसे अपने पार्टनर की देख भाल कर सकते हैं। आप ये भी सीखेंगे कि बच्चे के पैदा होने के बाद आपको कौन से कदम उठाने चाहिए।
पिता बनने के लिए तैयार हो जाइये।
क्या आप एक पिता बनने वाले हैं या पिता बनने के बारे में सोच रहे हैं? क्या आपको गर्भावस्था के बारे में सारी बातें पता हैं? क्या आपको पता है कि आने वाले नौं महीनों में आपको क्या करना है? इन सबक में आपको इन सारे सवालों के बारे में जानकारी मिलेगी। इस जानकारी का इस्तेमाल कर आप अपने काम को आसान बना सकते हैं।
अगर आप एक पिता बनना चाहते हैं तो आपको अपने पार्टनर के मेंस्ट्रुअल साइकिल के बारे में जानकारी होनी चाहिए। अगर आपको इस बारे में जानकारी नहीं है तो आपको एक डॉक्टर की ज़रूरत पड़ सकती है। अगर आप अपने पार्टनर को एक पैरेंट बनने के लिए मना लेते हैं तो आपको मिस्कैरिएज (Miscarriage) के लिए सावधानी बरतनी होगी। एक बार अगर आपकी पार्टनर प्रेग्नंट हो जाती हैं तो आपको डॉक्टर के पास हर महीने जाना चाहिए। आपको खासकर पहले, तीसरे और चौथे महीने में ज़रूर जाना चाहिए क्योंकि यही वो समय होता है जब आप अपने बच्चे को पहली बार अल्ट्रासाउंड में देखकर उसी धड़कने सुन सकते हैं।
गर्भावस्था के वक्त आपके पार्टनर को बहुत सी परेशानियां होंगी। ऐसे में आपको उसे पूरी तरह से संभालना सीखना होगा। आपके पार्टनर्र को दोपहर या रात में बुखार हो सकता है। इसलिए आपको घर में नीम्बू या अदरक रखना चाहिए। इसकी चाय पीने से पेट की बीमारियों से राहत मिलती है।
आपको अपने पार्टनर को एक्सरसाइज करने के लिए भी मनाना होगा। आपको उसके साथ एक्सरसाइज करनी होगी। इस बीच आपके पार्टनर के शरीर में बहुत से बदलाव आएंगे जिसे आपको स्वीकार करना होगा। आपको उससे प्यार जताना होगा और उसकी देख भाल करनी होगी। अपने पार्टनर को मसाज मत दीजिए क्योंकि इससे अकड़न हो सकती है।
चौथे महीने में खुद को आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार कर लीजिये।
चौथे महीने के बाद मिस्कैरिएज का डर खत्म हो जाता है। अब आप अपने आने वाले बच्चे के लिए सारी तैयारियां कर सकते हैं। साथ ही साथ आपको आने वाली चुनौतियों के लिए भी तैयार होना होगा। हार्मोन लेवल में बदलाव आने की वजह से आपके पार्टनर को चिड़चिड़ापन हो सकता है। चौथे महीने में फाल्स लेबर पेन हो सकते हैं जो दर्दनाक होते हैं। फाल्स लेबर पेन ज़्यादा हिलने डुलने से होते हैं। इनमें कोई रेगुलर पैटर्न नहीं होता।
चौथे महीने में ही आप आने वाले समय के लिए तैयार हो जाइये। गर्भावस्था के आखिरी कुछ महिनों में हालात अच्छे नहीं होते इसलिए सारी तैयारियां कर लीजिये। अपने बच्चे के लिए सारी ज़रूरत की चीज़ें खरीद लीजिये। अपने घर को आने वाले बच्चे के लिए सजा लीजिये।
अगर आपको ऐसा लगता है कि आपको अपने बच्चे के लिए किसी चीज़ की मरम्मत करानी है तो उसे जल्दी से जल्दी करा लीजिये। जैसे कि आपकी कार की सीट। आपको बच्चे के आने से पहले ही अपनी गाड़ी में सीट लगवा लेना चाहिये। बच्चे के आते ही आपके पास समय नहीं होगा जिसकी वजह से आप सीट को गलत तरीके से लगा सकते हैं।
इसी बीच आपको अपने बच्चे के लिए नाम भी खोजना होगा। नाम रखना कोई आसान काम नहीं है। आपके बच्चे का नाम सुनने में अच्छा होना चाहिए और साथ ही सबसे अलग भी होना चाहिए। अपने दोस्तों से सलाह लेकर अपने बच्चे के लिए एक अच्छा नाम चुनिये। आपका यह फैसला आपके बच्चे के साथ ज़िन्दगी भर रहेगा।
अलग अलग डिलीवरी के तरीकों के बारे में जानकारी हासिल कीजिये
अब जब आपने अपने बच्चे के लिए सारी तैयारियां कर ली है और आपने उसके लिए नाम भी चुन लिया है तो आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि आगे क्या करना है? अब आपको बर्थिंग प्रोसेस के बारे में जानना चाहिये। आपको इसके बारे में कुछ ज़रूरी बातें मालूम होनी चाहिये। इसके लिए आप हॉस्पिटल में जा सकते हैं। आपको रिसेप्शन एरिया और नर्सरी के बारे में सारी जानकारी होनी चाहिए क्योंकि आप अपना बहुत सारा समय यहाँ पर बिताने वाले हैं।
फर्स्ट एड और अलग अलग डिलीवरी के तरीकों के बारे में जानकारी हासिल कीजिये। आपको बहुत सारे अहम फैसले पहले ही लेने होंगे। वैजिनल या सिज़ेरियन बिर्थ (Vaginal or Ceasarian birth) के बारे में अपने पार्टनर की राय लीजिये। अगर आपको प्लेसेंटा बचाना है तो उसके बारे में भी पहले से ही सोच लीजिये।
बच्चे के पैदा होने के एक महीने पहले ही आप अपने सारे शौक़ पूरे कर लीजिये। क्योंकि एक पिता बनने के बाद आपकी ज़िन्दगी पूरी तरह से बदल जाएगी और आपकी ज़रूरतों की अहमियत कम हो जाएगी। अपने बॉस से इस बारे में पहले ही बात कर लीजिए क्योंकि आपको इस बीच कभी भी छुट्टी की ज़रूरत पड़ सकती है।
बच्चे के आने से आपके महीने के खर्च भी बढ़ जाएंगे। बच्चे के डाइपर ही आपकी जेब से हज़ारों रूपये निकाल सकते हैं। आपको अपने बच्चे की शिक्षा के लिए भी पैसे बचाने होंगे। आपको अपनी ज़रूरतों से समझौता करना होगा। इसलिए ये आखिरी महीना हँसी ख़ुशी बिताइये।
गर्भावस्था के आखिरी हफ़्तों में अपनी अपनी पार्टनर की ख़ास देखभाल कीजिये।
लगभग 98% महिलाएं 38 से 42 महीने के बीच कभी कभी बच्चे को जन्म दे सकती हैं। इसलिए इस बीच आपको अपने पार्टनर पर ख़ास ध्यान देना होगा।
इस बीच अपने पार्टनर के साथ हर वक्त रहिए। हॉस्पिटल जाने के लिए सारी तैयारियां कर लीजिये। साथ ही पढ़ने के लिए एक किताब, कैमरा , कान्टैक्ट इनफार्मेशन और बर्थिंग प्लान ले जाना मत भूलियेगा। इस दौरान आप पैरेंटल फ्रीक आउट को महसूस करेंगे। इस बीच आप दोनों को ही आने वाले समय के लिए बेचैनी हो सकती है। इसलिये आप इसे अपने पार्टनर के साथ ज़रूर बाँटिये।
ये समय सेहत के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है। अपने पार्टनर को आखिरी हफ्तों में सारा दिन आराम करने दीजीए। सारा दिन बैठे रहने से वो बोर हो सकती हैं इसलिए उन्हें हमेशा किसी काम में उलझाए रखिये।
बच्चे के पैदा होने की तारीख से कुछ दिन पहले, आपके पार्टनर को पैन किलर की ज़रूरत पड़ सकती है। अपने डॉक्टर से इस बारे में सलाह लें और अपने पार्टनर को सारे फैसले करने दें।
अगर इस बीच आप असहाय महसूस करते हैं तो याद रखिये कि आपके पार्टनर को आपकी ज़रूरत है। साथ ही आपको भी उसकी ज़रूरत हमेशा रहेगी। अपनी भावनाओं को दिखाने का ये एक बहुत ही अच्छा मौका है। इन आखिरी दिनों को आप हँसी खुशी बिताइये।
एक दूसरे को सहारा देकर और आगे के बारे में प्लान कर आप अपनी नयी ज़िन्दगी की शुरुवात कर सकते हैं।
अब जब आपका बच्चा पैदा हो गया है तो आप एक नयी ज़िन्दगी के लिए तैयार हो जाइये। अब आपको बहुत सारे फैसले लेने होंगे। जैसे कि क्या आप बच्चे को माँ का दूध पिलाएंगे जो आपके पार्टनर और आपके बच्चे, दोनों के लिए फायदेमंद है या आप कोई और तरीका आज़माएंगे?
साथ ही साथ आपको अपना ख्याल भी रखना होगा। एक पिता बनना पार्क में घूमने जैसा आसान काम नहीं है। एक स्टडी में ये बात सामने आयी कि बच्चे के पैदा होने के बाद 15% पुरुष डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं।
आपके पैरेंट्स यानी बच्चे के दादा दादी इस काम में आपकी काफी मदद कर सकते हैं। लेकिन साथ ही वो आपको बहुत सी ऐसी सलाह देंगे जो शायद आपको अच्छी ना लगे। जैसे कि ज़्यादातर ग्रैंडपैरेंट्स का कहना है कि बच्चे के साथ सख्त होने से उसका कैरेक्टर अच्छा होता है। यह बच्चा आपका है और इसकी देख भाल करने के तरीके भी आपके ही होने चाहिये।
जब आप अपने पार्टनर के साथ घर आ जाएंगे तो हर कोई घर आए नए मेहमान से मिलने को उत्सुक होगा। लेकिन इस बीच आपको आराम की ज़रुरत होगी। इसलिए अपने घर पर ज़्यादा लोगों को मत आने दीजिए। इससे आपके बच्चे को इन्फेक्शन का खतरा भी हो सकता है। इस बीच सेक्स करना बिलकुल भी ठीक नहीं होगा। डॉक्टर्स डिलीवरी के 6 हफ़्तों तक सेक्स न करने की सलाह देते हैं।
बच्चे के आ जाने से आपकी नींद पर असर पड़ सकता है। एक स्टडी में पाया गया कि बच्चे के पैदा होने के 2 साल में पैरेंट्स 6 महीने की नींद खो देते हैं। आप इस समस्या का हल भी एक दूसरे से बात करके और एक दूसरे को सहारा देकर निकाल सकते हैं।
कुल मिला कर
गर्भावस्था में पुरुषों का भी एक अहम हिस्सा होता है। उन्हें अपने पार्टनर को पूरी तरह से संभालना चाहिए। इसलिए आप अगले नौं महीने अपने पार्टनर के साथ बिताइये। आप उससे बाते कीजिये, उसके साथ काम कीजिये और उसकी मदद कीजिये। ऐसा करने से आप एक अच्छे पिता बन सकते हैं।
एक डोउला को खोजिये।
डोउला ऐसी महिलाएं होती है जो डिलीवरी के वक्त आपके पार्टनर को सहारा देती हैं। उन्हें इस बारे में अच्छी जानकारी होती है और डॉक्टर के न आने तक वे आपके पार्टनर को संभालती हैं। डिलीवरी के वक्त वे आपके पार्टनर को सपोर्टिव स्टोरीज़ सुनाकर और मसाज कर उनका हौसला बढ़ाती हैं जिससे काफी मदद मिल सकती है। अगर आप एक डोउला खोजना चाहते हैं तो अपने पार्टनर से इस बारे में राय ज़रूर लें।
