Maynard Webb and Carlye Adler
उनके लिए सलाह जो लोगों को लीड करते हैं, मैनेज करते हैं या खुद का बिजनेस शुरू करना चाहते हैं।
दो लफ्जों में
डीयर फाउंडर ( Dear Founder ) में हम देखेंगे कि एक फाउंडर किस तरह से अपने स्टार्ट अप को कामयाब बना सकता है। यह किताब बताती है कि किस तरह से आप अपने स्टार्ट अप की अलग अलग समस्याओं को सुलझाकर उसे डूबने ने बचा सकते हैं और किस तरह से उसपर काम कर के उसे कामयाब बना सकते हैं।
यह किसके लिए है
-वे जो खुद का बिजनेस शुरू करने के बारे में सोच रहे हैं।
-वे जो अपने कर्मचारियों को अच्छे से मैनेज नहीं कर पा रहे हैं।
-वे जो एक बिजनेसमैन हैं।
लेखक के बारे में
मेनार्ड वेब ( Maynard Webb ) अमेरिका के एक बिजनेसमैन हैं। वे एक लेखक भी हैं जो कि अपनी बेस्ट सेलिंग किताब रीबूटिंग वर्क के लिए जानें जाते हैं। वे लोगों को एक कामयाब बिजनेस चलाने के तरीकों के बारे में बताते हैं।
कार्ली एड्लर ( Carlye Adler ) एक जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें अपने काम के लिए अवार्ड मिला है। वे न्यूयॉर्क टाइम्स की बेस्ट सेलिंग लेखिका भी हैं, जिन्होंने बहुत से दूसरे लेखकों के साथ मिलकर किताबें लिखीं हैं।
यह किताब आपको क्यों पढ़नी चाहिए?
बिजनेस शुरू करना हर दिन के साथ मुश्किल हुआ जा रहा है। टेक्नोलॉजी की इस दुनिया में चीजें बहुत तेजी से बदल रही हैं। आप इस समय बिजनेस के बारे में जो भी पढ़ रहे हैं, आने वाले समय में वो जानकारी बेकार हो जाएगी। तब तक नए आइडियाज़ मार्केट में आ जाएंगे और लोग पुरानी कंपनियों को भूल जाएंगे।
इसका मतलब यह है कि आज कंपनियां पहले के मुकाबले बहुत तेजी से नाकाम हो रही हैं। तो फिर किस तरह से आप एक कामयाब स्टार्ट अप की शुरुआत कर सकते हैं? यह किताब हमें इसी सवाल का जवाब देती है। यह किताब बताती है कि एक फाउंडर को किस तरह से काम करना चाहिए और किस तरह से समस्याओं को सुलझाना चाहिए ताकि वो अपने बिजनेस को डूबने से बचा सके।
-किस तरह से आप अपने स्टार्ट अप के लिए फंड इकट्ठा कर सकते हैं।
-किस तरह से आप कर्मचारियों को बिना माइक्रोमैनेज किए उनसे अच्छे से काम पूरा करवा सकते हैं।
-किस तरह से आप खुद को तनाव भरे हालात से बाहर निकाल सकते हैं।
अपना स्टार्ट अप शुरू करने से पहले खुद से कुछ जरूरी सवाल पूछिए और कुछ तैयारियाँ कर लीजिए।
बहुत से लोग खुद का बिजनेस शुरू करने के लिए उतावले होते हैं। "खुद के लिए काम करो", पैसे से काम करवाना सीखो" और "नौकरी कभी आपको आजादी नहीं देगी", इस तरह की लाइनें सुनकर ही लोगों का बिजनेस शुरू करने का मन करता है। लेकिन क्या खुद का बिजनेस शुरू करना इतना आसान है?
सबसे पहली बात यह कि बहुत से स्टार्ट अप नाकाम हो जाता हैं। दुनिया में इतने लोग, पैसा या साधन नहीं है कि हर बिजनेस गूगल और फेसबुक की तरह कामयाब हो जाए। बहुत से बिजनेस हैं जिन्हें कठोर प्रतियोगिता का सामना करना पड़ता है और वो अक्सर इसमें हार जाया करते हैं।
लेकिन अगर आप मेहनती हैं और सूझबूझ से काम लेना जानते हैं, तो आप कामयाब हो सकते हैं। बस इसके लिए आपको सबसे पहले यह तय करना होगा कि बिजनेस करने के पीछे आपका मकसद क्या है। क्या आप बहुत सारा पैसा कमाना चाहते हैं? या दुनिया को बदलना चाहते हैं? या दुनिया को बदलकर पैसा कमाना चाहते हैं?
इसके अलावा एक बार अगर आप बिजनेस में आ रहे हैं, तो "कभी ना हार मानने" वाला एटिट्यूड साथ लेकर आइए। अगर आपको लग रहा है कि पैसा लगाने के बाद भी आपको 1 साल के बाद कुछ खास नतीजे नहीं मिलने वाले, तो आपको शुरुआत नहीं करनी चाहिए।अपने परिवार वालों को और अपने दोस्तों को साफ साफ समझा दीजिए कि आप अपना बिजनेस शुरू कर रहे हैं। अगर आपके पास उनका सहारा रहेगा, तो इससे आपको हौसला मिलेगा।
अपने स्टार्ट अप के लिए फंड इकट्ठा करने के लिए आपको सही इंवेस्टरर्स को खोजना होगा।
जब आपको कोई नौकरी नहीं मिलती है, तो आप कोई भी नौकरी करने के लिए तैयार हो जाते हैं। ठीक उसी तरह से आपके स्टार्ट अप को कोई फंड नहीं कर रहा होता, तो आप हर उस व्यक्ति से पैसे लेने के तैयार हो जाते हैं जो आपको पैसे दे सकता है।
लेकिन स्टार्ट के लिए फंड इकट्ठा करना कहानी का अंत नहीं है। इसके बाद आपको उस पैसे का इस्तेमाल कर के उस स्टार्ट अप को कामयाब भी बनाना होगा। और आपके पास शायद उतना अनुभव ना हो। आप पैसे तो इकट्ठा कर लेंगे, लेकिन उसका सही इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। इसलिए आप हमेशा उन इंवेस्टर्स से पैसे लीजिए जो कि आपकी इंडस्ट्री को अच्छे से समझते हों और उसमें पहले भी काम कर चुके हों। इस तरह के इंवेस्टर्स आपको पैसे के साथ साथ नए कान्टैक्ट और सही सलाह भी दे सकेंगे,
आपको सबसे पहले प्लान बनाना होगा। आपको पहले यह देखना होगा कि आप इस समय कहाँ पर हैं और जो पैसा आपको मिलेगा उससे आप कहाँ तक पहुंच सकते हैं। अपने इंवेस्टर्स से मिलने से पहले आपको इन सबकी प्लानिंग बहुत पहले से कर लेनी चाहिए, ताकि जब आपको पैसे की जरूरत हो तो आप भावनाओं में बहकर काम ना करने लगें।
साथ ही आपको अपने स्टार्ट अप को देखते हुए पैसे माँगने चाहिए। अगर आप अभी अभी शुरू कर रहे हैं तो आपको छोटी रकम माँगनी चाहिए। अपना प्लान इंवेस्टर्स को बताने के अलावा आपको उन्हें सुनना भी चाहिए। अगर बहुत से इंवेस्टर्स आपको फंड देने से इनकार कर रहे हैं और कह रहे हैं कि आपका आइडिया काम नहीं करेगा, तो शायद आपको उनकी बात मान लेनी चाहिए।
अपने कर्मचारियों को माइक्रोमैनेज करना अच्छी बात नहीं है।
क्या आप किसी ऐसे मैनेजर को जानते हैं जो अपने कर्मचारियों के को अपने हिसाब से काम करने की ज़रा सी भी आजादी नहीं देते हैं। इसे ही माइक्रोमैनेज करना कहा जाता है, और यह अच्छी बात नहीं है।
माइक्रोमैनेज करना एक बार के लिए समझ में आता है। यह आपकी कंपनी है, इसमें आपकी मेहनत लगी है। आप ऐसे ही इसकी बागडोर किसी दूसरे के हाथ में कैसे दे सकते हैं? लेकिन खुशी की बात यह है कि कुछ तरीकों का इस्तेमाल कर के आप अपने कर्मचारियों को काम की जिम्मेदारी दे सकते हैं।
इसके लिए आपको एक ऐसा कल्चर तैयार करना होगा जिसमें लोग एक्सेलेंस हासिल करने की कोशिश करते हों। इसमें आपको लोगों को यह साफ साफ बताना होगा कि उनके गोल्स क्या हैं। साथ ही जब आपके लोग अपने दिए हुए गोल्स को पूरा कर लें, तो आपको उन्हें शाबाशी देनी चाहिए।
एक अच्छे कल्चर के लोग हमेशा समस्या सुलझाने की कोशिश करते हैं।अपने कर्मचारियों को उनके गोल्स के बारे में साफ साफ बताना और उन्हें समस्या को देखते ही उसका समाधान खोजने के लिए ट्रेन करना, यह दो चीजें अगर आप अपने कल्चर में ले आएंगे, तो आपको उन्हें हर कदम पर माइक्रोमैनेज नहीं करना होगा। इसके अलावा जब आपके कर्मचारियों को अपने हिसाब से काम करने की आजादी मिलेगी, तो वे खुद का दिमाग कंपनी में लगा पाएंगे। अब तक जहाँ सिर्फ आपका दिमाग लग रहा था, वहाँ अब बहुत से लोग मिलकर काम कर पाएंगे जिससे कंपनी का विकास होना निश्चित है।
अपना काम किसी दूसरे को देना आसान नहीं है, लेकिन RACI माडल इसमें आपकी मदद कर सकता है।
बिजनेस में आप अगर खुद से सब कुछ करने की कोशिश करेंगे, तो आप कभी उसे कामयाब नहीं बना पाएंगे। इसलिए यह जरूरी है कि आप अपने कुछ कामों को दूसरे लोगों से करवाएँ, ताकि आप अपने बिजनेस के जरूरी हिस्सों पर फोकस कर सकें। लेकिन यह करना काफी मुश्किल हो सकता है, क्योंकि शायद आपको इस बात का यकीन होगा कि आपका काम आप से बेहतर कोई नहीं कर सकता।
अपने काम को दूसरे से करवाने के लिए आपको उन्हें मैनेज करते हुए उन्हें जिम्मेदारी देनी होगी। इसके लिए आपको सबसे पहले यह देखना होगा कि आपकी टीम का कौन सा व्यक्ति इतना काबिल है कि वो एक दिए गए काम को अच्छे से पूरा कर सकता है। साथ ही आपको उसके काम को समय समय पर देखकर उसे जरूरी फीडबैक और रिवार्ड भी देना होगा, ताकि आपके कर्मचारी प्रेरित होकर काम करते रहें।
यह काम करने के लिए हमारे पास एक तरीका है, जिसे RACI माडल कहा जाता है। इसमें जब भी आप कोई काम किसी दूसरे व्यक्ति को करने के लिए देते हैं, तो आप खुद से यह चार सवाल पूछते हैं
इसके लिए कौन Responsible ( जिम्मेदार ) होगा?
इस काम को कौन Approve करेगा? यानी यह काम सही से हुआ है यह नहीं, इसका फैसला कौन करेगा?
अगर कोई समस्या आएगी, तो किससे Consult करना है, सलाह लेनी है?
अंत में, काम से संबंधित जानकारी ( Information ) किस किसके साथ बाँटनी हैं?
इस तरह से आपको पता लग जाएगा कि कौन सा व्यक्ति है जो उस काम को पूरा करेगा, कौन सा व्यक्ति है जो काम की क्वालिटी पर ध्यान देगा और अंत में फैसला करेगा कि काम सही से हुआ है या नहीं और कौन सा व्यक्ति है जिससे जरूरत पड़ने पर मदद या सलाह ली जाएगी। साथ ही अंत में आपको कुछ लोगों को काम के प्रोग्रेस की जानकारी देते रहना चाहिए ताकि वे लोग आगे के फैसले लेते रहें।
नए लोगों को काम पर रखने से पहले उन्हें अच्छे से परखिए और खराब लोगों को तेजी से काम से निकालिए।
बड़ी कंपनियों में बहुत से कर्मचारी काम करते हैं। उनके पास बहुत से साधन होते हैं और ऐसे में अगर उनके कुछ कर्मचारी अपना काम अच्छे से ना करें, तो उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन एक स्टार्ट अप के लिए हालात दूसरे होते हैं।
एक स्टार्ट अप के पास साधन और कर्मचारी बहुत कम होते हैं। ऐसे में वो अपने उन साधनों का इस्तेमाल बेहतर से बेहतर तरीके से करे और अपने कर्मचारियों से अच्छे से काम करवाए। ऐसे में खराब कर्मचारी को इसी समय निकालने में देर मत कीजिए।
लोगों को काम से निकालना एक बार के लिए बुरा लग सकता है, लेकिन यह जरूरी है। कुछ लोग अपने काम के लिए ठीक नहीं होते हैं। अगर आप एक आम मैनेजर से पूछेंगे कि उसने कितने कर्मचारियों को निकाल कर अच्छा फैसला लिया है, तो उसका जवाब 80% होगा। 80% कर्मचारियों को निकाल देने पर एक कंपनी के हालात सुधर जाते हैं। एक खराब कर्मचारी अपने साथ काम करने वाले लोगों की परफ़ार्मेन्स पर भी असर डाल सकता है।
आपको लोगों को बार बार काम से ना निकालना पड़े इसके लिए आप सही व्यक्ति को काम पर रखिए। नए लोगों को काम पर रखने से पहले अपना समय ले लीजिए और उनकी काबिलियत को सही से नापिए। ऐसा करने में शुरुआत में कुछ ज्यादा समय लग सकता है, लेकिन लम्बे समय में आप अपने बहुत से साधन बचा जाएंगे, क्योंकि एक अच्छा कर्मचारी अपनी सैलेरी से कई गुना ज्यादा कीमती होता है।
मुश्किल वक्त में कभी अपना धैर्य मत खोइए।
एक बिजनेस चलाने का मतलब है आप ने मुश्किलों से शादी कर ली है, क्योंकि जब तक यह बिजनेस चलता रहेगा तब तक परेशानियां आपका साथ नहीं छोड़ेंगी। इस तरह के हालात में आपको खुद को यह यकीन दिलाना होगा कि यह हालात गुजर जाएंगे। उम्मीद खोना आपके हार की वजह बन सकती है।
मुश्किल वक्त में हम समस्या में इतने उलझ जाते हैं कि हम उसे सही से समझने में समय ही नहीं बिताते। इसलिए जब भी समस्या आए, आपको दो कदम पीछे हटकर उसे सही से समझने की कोशिश करनी चाहिए। जब आपको वो समस्या समझ में आ जाएगी, तो आपको उसका समाधान भी मिल जाएगा।
जब भी कोई समस्या आए, तो उसे आप इन चार स्टेप्स की मदद से सुलझा सकते हैं
सबसे पहले अपनी रफ्तार धीमी कीजिए, जो कर रहे थे उसे करना बंद कीजिए। इसके बाद समस्या की वजह को पता लगाने की कोशिश कीजिए। फिर उसका एक समाधान खोजिए। अंत में उस समाधान का इस्तेमाल कर के उस समस्या को सुलझाइए।
समस्या आने पर कुछ देर के लिए रुकना सबसे सही आप्शन होता है क्योंकि ऐसा कर के ही आप उस समस्या को समझ पाएंगे। हो सके तो यह भी पता लगाने की कोशिश कीजिए कि उस समस्या को सुलझाने में और कौन कौन सी समस्याएं आ सकती हैं, ताकि जब वो समस्याएं आएं तो आपको हैरानी ना हो।
इसके बाद आप सारे कामों की एक लिस्ट बनाइए। यह पता कीजिए कि आपको कौन कौन से काम करने हैं और सबसे पहले कौन सा काम करना है। अंत में उन समस्याओं को सुलझाने के लिए खुद को समय दीजिए, ताकि जल्दबाज़ी में आप खुद के लिए और समस्या ना खड़ी कर दें।
प्रतियोगिता एक बार के लिए खराब लग सकती है, लेकिन इसके कुछ अपने फायदे हैं।
प्रतियोगिता के आ जाने से आपको बहुत सी समस्याएं आ सकती हैं। इससे आपके इंवेस्टर्स डरने लगते हैं। वे इस बात की चिंता करने लगते हैं कि कहीं प्रतियोगिता आपको हरा ना दे। इस वजह से वे आपको पैसे देने से पीछे हट सकते हैं, जिससे आपके हारने की संभावना और ज्यादा हो जाएगी।
इस तरह के हालात में कभी अपना आपा मत खोइए। अगर आप डर जाएंगे, तो इंवेस्टर्स को लगेगा कि इस समस्या का समाधान आपके पास नहीं है। इस वजह से वे आपको छोड़कर जाने का फैसला ले सकते हैं। और जब एक इंवेस्टर आपको छोड़कर जाएगा, तो उसे देखकर बाकी के इंवेस्टर्स भी अपना मुँह मोड़ सकते हैं। इस तरह से आपकी एक छोटी सी भावना कुछ ही देर में आपके हारने की सबे बड़ी वजह बन सकती है।
आप अपने दिमाग को ठंडा रखिए। इस तरह के हालात के वक्त कुछ आम समस्याएं आएंगी, जैसे आपके कर्मचारी अपना उत्साह खो सकते हैं या फिर आपको अपने इंवेस्टर्स से कम पैसा मिल सकता है। लेकिन फिर भी आप आराम से इस समस्या से निकलने के रास्ते खोजिए प्रतियोगिता इतनी भी बुरी चीज़ नहीं होती है। यही वो वक्त होता है जब दो लोग साथ मिलकर किसी एक को हराने की कोशिश करते हैं। इसका मतलब यह है कि जब प्रतियोगिता कड़ी हो जाती है, तब आपको कोई बहुत अच्छा पार्टनर मिल सकता है जिसकी मदद से आप ना सिर्फ अपनी प्रतियोगिता को हरा सकते हैं, बल्कि लम्बे समय तक खुद को कामयाब भी रख सकते हैं।
एग्ज़ाम्पल के लिए याहू जब अपना पहला फ्लाइट सर्च फीचर हिपमंक लाँच कर रहा था, तब उसे पता लगा कि गूगल भी इसी तरह का प्रोडक्ट मार्केट में लेकर आने वाला है। अब गूगल को टक्कर देने कौन जाए भला! याहू को इससे डर लगने लगा।
लेकिन इस वक्त कुछ दूसरी कंपनियां भी थीं जिन्हें गूगल के इस नए प्रोडक्ट से समस्या होने वाली थी, पैसे एक्सपीडिया और प्राइसलाइन। इन दो कंपनियों ने याहू से दोस्ती कर ली, जिनकी मदद से याहू को बहुत मदद मिली। आज हिपमंक गूगल के फ्लाइट सर्च फीचर से आगे है।
जब कोई समस्या आए तो उसे जल्दी से जल्दी सही तरीके से सुलझाने की कोशिश कीजिए
मान लीजिए कि एक बस स्टैंड पर एक टाइम बम लगा हुआ है। आपका काम है उस बम को नाकाम करना। अब अगर आप बस स्टैंड पर जाकर चिल्ला देंगे - यहाँ टाइम बम लगा है, भागो सब लोग!, तो यह आपके लिए और समस्या पैदा कर सकता है। लोगों में इतनी भगदड़ मच जाएगी कि आप अपना काम सही से कर ही नहीं पाएंगे।
इसलिए जब आपका सामना किसी समस्या से हो, तो आपको सिर्फ उसका समाधान नहीं खोजना है, बल्कि उसका सबसे अच्छा समाधान खोजना है। आपको यह देखना होगा कि आपके काम का क्या अंजाम हो सकता है और उसके हिसाब से आपको एक्शन लेना है।
समस्या का पता सबसे पहले कर्मचारियों को लगता है, क्योंकि वही लोग कंपनी के सारे काम देखते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि आप अपने कर्मचारियों से नजदीकी बना कर रखें।
लेखक कहते हैं कि किसी भी समस्या को सुलझाने के लिए सबसे पहले आपको यह नाप लेना चाहिए कि उस समस्या से आपको कितना खतरा है। इसके लिए वो एक स्केल का इस्तेमाल करते हैं, जिसमें वे 1 से 9 तक के नंबर का इस्तेमाल करते हैं। अगर उनके सामने कोई ऐसी समस्या आई है जो कि बहुत छोटी है, तो वे उसे 1 नंबर देते हैं। लेकिन अगर कोई ऐसी समस्या है जो कि कंपनी बंद करवा सकती है, तो वे उसे 9 नंबर देते हैं।
समस्या की गहराई नाप लेने के बाद आप जल्दी से जल्दी उसे सुलझाने की कोशिश कीजिए। ज्यादा समय गँवाना आपके लिए बिल्कुल सही नहीं होगा क्योंकि छोटी समस्या भी समय के साथ बहुत बड़ी हो सकती है
एग्ज़ाम्पल के लिए टेस्ला को ले लीजिए। 2015 में कंपनी ने देखा कि उसके सीटबेल्ट के साथ कुछ समस्याएं हैं, जिस वजह से लोगों की सुरक्षा को खतरा था। यह समस्या को देखते ही उसने तुरंत सारी गाड़ियों को इकट्ठा किया और उनके सीटबेल्ट सुधारे। अगर वे इसमें देर करते तो उनके कुछ ग्राहकों की जान जा सकती थी और इसके साथ ही उनकी कंपनी पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती थी। लेकिन जल्दी से काम करने की वजह से यह समस्या टल गई।
कुल मिलाकर
अपने स्टार्ट अप के लिए फंड इकट्ठा करते वक्त सिर्फ इंवेस्टर्स को मत खोजिए, बल्कि सही इंवेस्टर्स को खोजिए। सही लोग आपको पैसे के साथ साथ अच्छी सलाह भी देंगे जिससे आपको काम करने में मदद मिलेगी। मुश्किल वक्त में अपने दिमाग को ठंडा रखिए, अपनी रफ्तार को कम कीजिए और फिर कहीं जाकर समस्या को समझने की और समाधान खोजने की कोशिश कीजिए। एक बार समाधान मिल जाए, तो बिना देरी के उसका इस्तेमाल कर समस्या को खत्म कीजिए।
महान बनने की कोशिश कीजिए।
बहुत से लोग खुद को पिछले साल की पर्फार्मेंस से तौलते रहते हैं। वे यह सोचते हैं कि पिछले साल से बेहतर होना या फिर अपनी प्रतियोगिता से बेहतर होना ही काफी है। लेकिन ऐसा कर के आप औसत बनने की कोशिश कर रहे हैं। आपको महानता हासिल करने की कोशिश करनी चाहिए। आप क्या बन सकते हैं, आपको अपनी तुलना उस व्यक्ति से करनी चाहिए। बड़ा टार्गट लेकर उसे आधा पूरा कर के भी आप छोटा टार्गेट लेकर उसे पूरा करने से ज्यादा हासिल करेंगे।
