Breaking The Page

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Breaking The Page

Peter Meyers
किताबें और पढ़ने के अनुभव को पूरी तरह से बदल दीजिए।

दो लफ्जों में 
ब्रेकिंग द पेज (Breaking The Page) में हम ईबुक्स और उनसे मिलने वाली सुविधाओं के बारे में जानेंगे। यह किताब बताती है कि ईबुक्स के क्या फायदे होते हैं और किस तरह से उनकी मदद से हम लोगों के पढ़ने के अनुभव को बेहतर बना सकते हैं। साथ ही यह किताब हमें ईबुक्स की कमियों के बारे में भी बताती है जिसपर काम कर के हम उसे और बेहतर बना सकते हैं।

यह किसके लिए है
-वे जो किताबें पढ़ना पसंद करते हैं।
-वे जो एक लेखक हैं।
-वे जो एक पब्लिशर हैं।

लेखक के बारे में 
पीटर मेयर्स (Peter Meyers) एक लेखक हैं जो न्यूयॉर्क टाइम्स, वाल स्ट्रीट जर्नल और वायर्ड जैसी मशहूर मैगज़ीन्स के लिए आर्टिकल लिख चुके हैं। वे डिजिटल लर्निंग इंटेरैक्टिव नाम की एक कंपनी के फाउंडर हैं जो कि ईबुक्स और मल्टीमीडिया टेक्स्टबुक पब्लिश करने का काम करती है।ईबुक्स की मदद से हम कुछ खास किस्म की किताबें अच्छे से पढ़ सकते हैं।
दुनिया में जिस तरह से ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण बढ़ रहा है, उसके हिसाब से बहुत जल्दी ही हम सभी का घर से बाहर निकलना मुश्किल होने वाला है। 

ऐसे में सरकार पेड़ लगाने की और लोगों को कागज़ का इस्तेमाल कम करने की सलाह दे रही है। 
ईबुक्स एक ऐसा ज़रिया है जिसकी मदद से हम किताबों की जानकारी भी पा सकते हैं और हमें किताबों को खरीदने की जरूरत भी नहीं पड़ती है। यह पर्यावरण को बचाने की तरफ एक कदम हो सकता है।

लेकिन ईबुक का सिर्फ यही फायदा नहीं है। यह किताब हमें बताती है कि किस तरह से ईबुक्स की मदद से हम रीडर्स को पढ़ाई का एक बेहतर अनुभव दे सकते हैं। यह किताब हमें बताती है कि ईबुक्स में कौन से बदलाव कर के हम उसे पहले से बेहतर बना सकते हैं, जिससे रीडर्स को उसे पढ़ने में आसानी हो। 

अगर आप ने कभी एक ईबुक और एक किताब पढ़ी है, तो आप यह जरूर मानेंगे कि फिजिकल किताब से कुछ पढ़ना ईबुक्स से कुछ पढ़ने के मुकाबले बहुत ज्यादा मजेदार होता है। स्क्रीन पर लम्बे समय तक देखते रहना बहुत से लोगों को अच्छा नहीं लगता और यही वजह है कि ईबुक्स कभी किताबों की जगह नहीं ले पाएंगी।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ईबुक्स जल्द ही खत्म होने वाली हैं। इनके सालों के बाद यह साफ हो गया है कि ईबुक्स के कुछ अपने फायदे हैं। जहाँ एक किताब को हमारे घर तक आने में कुछ दिन लग सकते हैं, वहीं ईबुक्स को हम कुछ मिनटों में डाउनलोड कर सकते हैं। किताबों में कुछ खोजना मुश्किल हो सकता है, लेकिन ईबुक्स में हम अपने काम की चीज़ को आसानी से खोज सकते हैं।

ईबुक्स हमें आसानी से मिल जाती हैं। उनके खर्चे कम होते हैं, उनपर फायदे ज्यादा कमाए जा सकते है और उन्हें ग्राहकों तक पहुंचाने में भी आसानी होती है। सिर्फ यही नहीं, ईबुक्स में हम अपने हिसाब से फोटो, वीडियो या आडियो का इस्तेमाल कर के उसे बेहतर बना सकते हैं। किताबों में यह कर पाना नामुमकिन है।

किताबों को पढ़ने में आसान बनाने के लिए हम सिर्फ उसके पैराग्राफ बढ़ा सकते हैं या उसमें कहीं कहीं पर इमेज लगा सकते हैं। लेकिन यह कर पाना मुश्किल होता है। ईबुक्स में अगर हम इमेज ना लगाएँ, तो मुश्किल हो जाती है, क्योंकि बहुत से लोग स्क्रीन पर सिर्फ टेक्स्ट को लम्बे समय तक नहीं पढ़ पाते। इमेज के होने से उनकी आँखों को राहत मिलती है।

इस तरह हालांकि ईबुक्स कभी किताबों की जगह नहीं ले पाएंगे, लेकिन उनके कुछ अपने फायदे हैं जो हमें किताबों से नहीं मिल सकते।

ईबुक्स को बेहतर बनाने के लिए हम कुछ तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
बहुत से ईबुक्स फिजिकल किताबों के जैसे ही होते हैं। उनमें भी उन्हीं की तरह इंडेक्स होता है और उन्हीं की तरह टेक्स्ट होता है। बहुत से लोग जब ईबुक्स को खोलते हैं और यह देखते हैं कि वो बिल्कुल किताब की तरह लिखी गई है, तो उन्हें यह बिल्कुल अच्छा नहीं लगता।

एग्ज़ाम्पल के लिए जब पब्लिशर्स किसी किताब का ईबुक वर्ज़न बनाते हैं, तो वे उसी किताब के कवर को स्कैन कर के उसे ईबुक का कवर बना देते हैं। इससे रीडर को किताब का नाम पढ़ने में समस्या होती है। पब्लिशर्स को ईबुक वर्ज़न बनाते वक्त उसके कवर को अलग से डिजाइन करना चाहिए।

फिर बहुत से ईबुक्स में कॉपीराइट की जानकारी भी छपी होती है। कॉपीराइट की जानकारी जब ईबुक की शुरुआत में ही लिखी होती है, तो रीडर को कंटेंट तक पहुंचने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इसलिए इस जानकारी को ईबुक की पीछे दीजिए।

साथ ही जब आप ईबुक्स में इंडेक्स डालें, तो उसे एक हाइपरटेक्स की तरह बनाएँ ताकि रीडर उसपर क्लिक कर के तो वो उस चैप्टर पर चला जाए। इससे रीडर को स्क्रोल कम करना पड़ता है और वो अपने काम की जानकारी को आसानी से पा जाता है।

इसके बाद जो दूसरी समस्या एक रीडर को ईबुक्स पढ़ने में आती है वो यह कि वो पता नहीं लगा पाता कि उसने कौन कौन सी किताबें पढ़ी हैं। जब आप बहुत सी किताबें पढ़ते हैं, तो आप अक्सर यह भूल जाते हैं कि आप ने क्या पढ़ा है। अगर ऐसे में हर ईबुक हमें एक प्रिंट या मैग्नेट दे तो हमारी यह समस्या सुलझ सकती है।

हम चाहें तो बहुत से तरीकों से ईबुक्स को बेहतर बना सकते हैं, लेकिन क्योंकि ऐसा करने में कुछ पैसे खर्च हो सकते हैं और फायदे कम हो सकते हैं, अमेज़ान जैसी कंपनियां बदलाव करने की कोशिश नहीं कर रही हैं। 

ईबुक्स की मदद से हम रीडर्स को एक बेहतर अनुभव दे सकते हैं। जब आप एक किताब पढ़ते हैं, तो आपको उसे पूरा पढ़ना होता है। अगर उसमें कहीं पर आपका मन लगना बंद हो जाता है, तो आप उसे छोड़कर आगे नहीं बढ़ सकते। लेकिन ईबुक्स की मदद से आप बहुत से काम कर सकते हैं।

हम किताबों को तीन तरह से पढ़ते हैं 

स्किम रीडिंग - जब हम किसी खास जानकारी की तलाश कर रहे होते हैं और हम पूरी किताब पढ़ने के बजाय सिर्फ उसके पन्ने पलट कर अपने काम की जानकारी खोजते हैं, तो उसे स्किम रीडिंग कहा जाता है।

ग्राक रीडिंग - जब हम किताब को पूरा पढ़ कर उसमें लिखी गई बातों को समझने की कोशिश करते हैं तो उसे ग्राक रीडिंग कहा जाता है।

मास्टरिंग - जब हम किताब को अच्छे से समझने की कोशिश करते हैं और उसमें लिखी गई बातों की गहराई में जाते हैं, तो उसे मास्टरिंग कहा जाता है। 

ईबुक्स की मदद से हम यह तीनों काम कर सकते हैं। हम रीडर्स को ईबुक की शुरुआत में एक इंडेक्स दे सकते हैं जिसमें हर चैप्टर के बारे में थोड़ी सी जानकारी दी होगी। इसकी मदद से रीडर अपने काम की जानकारी को आसानी से खोज सकता है। अगर उसे किसी टॉपिक के बारे में ज्यादा जानना होगा, तो वो उस चैप्टर पर क्लिक कर के पूरा चैप्टर पढ़ सकता है। 

इसके अलावा ईबुक्स की मदद से हम इमेज, जीआईएफ और वीडियो का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन हमें इन्हें सही से लगाना होगा, ताकि रीडर्स को इससे परेशानी ना हो। बहुत बार हम टेक्स्ट से ज्यादा वीडियो या इमेज का इस्तेमाल कर देते हैं या फिर बहुत कम वीडियो या इमेज का इस्तेमाल करते हैं। हमें उनका इस्तेमाल कुछ इस तरह से करना चाहिए कि वे ना तो ज्यादा मात्रा में हों और ना ही कम।

जब हम अपने ईबुक में कुछ बोरिंग टापिक को समझा रहे होते हैं, तो ऐसे में वीडियो का इस्तेमाल करने से हम रीडर को अच्छे से उस टॉपिक को समझा सकते हैं। लेकिन वीडियो और इमेज का इस्तेमाल हमें सोच समझ कर करना चाहिए। अगर हम धर्म या राजनीति से संबंधित किसी बात को समझा रहे हैं, तो वहाँ पर हमें कार्टून का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि बहुत से लोग इससे नाराज़ हो जाते हैं।

हमें ईबुक की लाइब्रेरी को कुछ इस तरह से आर्गनइज़ करना चाहिए जिससे रीडर को उसके काम की जानकारी आसानी से मिल सके।
जब सारी चीजें एक में ही मिक्स हो जाती हैं, तो उसमें से कुछ भी खोज पाना मुश्किल हो जाता है। इसलिए हमें रीडर्स को एक डैशबोर्ड देना चाहिए जिसमें वे अपने ईबुक्स को कैटेगरी के हिसाब से रख सकें। इससे जब उन्हें सेहत से संबंधित ईबुक्स की जरूरत होगी तो वे सेहत के सेक्शन में जाकर अपने काम की किताब को आसानी से खोज सकते हैं।

इसके अलावा हम एक ईबुक में टापिक के हिसाब से सारे चैप्टर्स को रख सकते हैं। अगर किसी रीडर को सिर्फ एक खास जानकारी की जरूरत है, तो उसे पूरी किताब पढ़ने की जरूरत पड़ती है। लेकिन अगर हम टापिक के हिसाब से सारे कंटेंट को लिख देंगे, तो रीडर को जिस भी टापिक पर जानकारी चाहिए वो सीधा उसी टापिक पर जा सकता है। इससे उसका समय बचेगा और उसे पूरी किताब पढ़ने की जरूरत भी नहीं होगी।

एग्ज़ाम्पल के लिए अगर रीडर को सिर्फ यह जानना है कि एक अच्छा प्रेसेंटेशन कैसे तैयार करते हैं, तो उसे इस टॉपिक के बारे में जानकारी आसानी से मिल जानी चाहिए। प्रेसेंटेशन तैयार करने वाली किताबों में अक्सर बहुत सारे रिसर्च, केस स्टडी, एग्ज़ाम्पल और कहानियाँ बताई जाती हैं। लेकिन रीडर के पास अगर यह सब पढ़ने का समय ना हो, तो उसके पास एक जरिया होना चाहिए जिससे वो सीधा किताब के उस सेक्शन को खोज सके जिसमें प्रेसेंटेशन तैयार करने के बारे में बताया गया है।

इसके अलावा हमें रीडर को यह भी बताना चाहिए कि एक ईबुक के अंदर किस तरह की जानकारी दी गई है, ताकि ईबुक खरीदने से पहले उसे पता हो कि इसके अंदर क्या है। अक्सर ईबुक्स के पेज पर सिर्फ यह लिखा होता है कि वो किताब रीडर की जिन्दगी किस तरह से बदल सकती है। उसमें कुछ पुराने रीडर्स के रिव्यू लिखे होते हैं और कुछ रेटिंग दी होती है। लेकिन इन सभी का इस्तेमाल ईबुक्स को बेचने के लिए किया जाता है। हमें रीडर को यह बताना चाहिए कि ईबुक के अंदर उसे किस तरह की जानकारी मिलेगी, ताकि वो अपने पैसों को सोच समझकर खर्च करे।

हमें ईबुक्स को कुछ इस तरह से डिजाइन करना चाहिए जिससे रीडर्स उसमें से नोट्स ले सकें। जब बात ईबुक्स को शेयर करने की आती है, तो यह काम करना मुश्किल हो जाता है। एक्साम्पल के लिए किन्डल को ले लीजिए जिसमें आप ईबुक के कंटेंट को फेसबुक या ट्विटर पर शेयर कर सकते हैं। लेकिन जब हम अपनी ईबुक को शेयर करते हैं, तो उसका सिर्फ एक हिस्सा ही शेयर हो पाता है। इससे कुछ लोगों को यह समझ में आता है कि वो कंटेंट क्या है, जबकि कुछ लोगों को यह बकवास लगता है।

इसलिए हमें ईबुक के कंटेंट को दूसरों के साथ शेयर करने की सुविधा देने के बजाय रीडर को यह सुविधा देनी चाहिए कि वो अपने कंटेंट को खुद के साथ ही शेयर कर सके।

जब हम एक किताब पढ़ते हैं, तो हम उसमें से जरूरी चीजों को एक पेंसिल से अंडरलाइन कर लेते हैं या फिर एक पोस्ट-इट नोट बना लेते हैं। ईबुक्स के साथ भी यह किया जा सकता है। ईबुक्स में अगर हम लोगों को यह सुविधा दे दें कि वे अपने लिए नोट्स बना सकें, कुछ जरूरी लाइन्स को एक दूसरे के साथ लिंक कर सकें, तो लोग जरूरी बातों को एक जगह पर रख पाएंगे।

ईबुक्स को शेयर कर सकने की सुविधा पर अभी हमें काम करना होगा। हमें लोगों को यह सुविधा देनी होगी कि वे जिन लाइनों को शेयर करना चाहें, सिर्फ वही लाइनें शेयर हों। इससे एक ईबुक की जानकारी बहुत से लोगों तक पहुंच पाएगी और लोग अपने काम के ईबुक्स तक जल्दी पहुंच पाएंगे।

कुल मिलाकर
ईबुक्स कभी किताबों की जगह तो नहीं ले सकते, क्योंकि किताबों के कुछ अपने फायदे होते हैं। लेकिन ईबुक्स कुछ मायनों में किताबें से आगे हैं। इसमें हम इमेज और वीडियो का इस्तेमाल कर सकते हैं जो कि किताबों में संभव नहीं है। साथ ही ईबुक्स में हम स्किम रीडिंग आसानी से कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर हम अपनी ईबुक की लाइब्रेरी को अपनी सुविधा के हिसाब से आर्गनाइज़ भी कर सकते हैं। साथ ही ईबुक्स खरीदने, शेयर करने और मैनेज करने में आसान होते हैं। इस तरह से वे किताबों से बेहतर तो नहीं हैं, लेकिन उससे कम भी नहीं हैं।


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