Eat That Frog

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Eat That Frog

Brian Tracy
काम टालने की आदात से छुटकारा पाने और कम समय में ज्यादा से ज्यादा काम करने की क्षमता को बढ़ाने के तरीके

दो लफ़्ज़ों में 
ईट देट फ्रॉग (Eat That Frog) अपनी काम को टालते रहने वाली अदातों से छुटकारा पाने और खुद को और अधिक प्रोडक्टिव बनाने के लिए एक बेहतरीन किताब है. ये एक स्वाभाविक बात है की हर व्यक्ति काम से बचना चाहता है, इसलिए ये जरुरी है की हम सब काम को मैनेज कर क्रमबद्ध तरीके से करें ताकी हमें इसका बोझ ना महसूस हो और काम भी ख़तम हो जाये.

ये किसके लिए है
- हर वो व्यक्ति जिसे काम को टालने की आदत यानी प्रोक्रासटीनेशन (procrastination हो.
- वो व्यक्ति जो बहुत सारे काम के बोझ तले दबें हैं और उनसे निजात पाना चाहते हैं.
- जो अपने सपनों और लक्ष्यों को पाना चाहते हैं.

लेखक के बारे में
ब्रायन ट्रेसी (Brian Tracy) लगभग 50 बेस्ट सेलिंग किताबों के लेखक हैं और साथ ही साथ वो एक बेहतरीन पब्लिक स्पीकर भी हैं जो हर साल लगभग 250,000 लोगों को कांफ्रेंस और मीटिंग्स में संबोधित करते हैं.

ये सबक आप को क्यूँ पढ़ना चाहिए?
आपने अपनी रोज़ मर्रा की ज़िन्दगी में अक्सर खुद के मुँह से इनमें से कोई न कोई वाक्य सुने ही होंगे कि 

'इतना काम है इस प्रोजेक्ट में, ये सब कैसे ख़तम होगा' 

'ये सब इतने कम वक़्त में मुझसे नहीं होगा'

'मेहमानों के आने से पहले ये टेबल कैसे जमेगा'

चाहे हम ऑफिस में हों या घर पर, हर दिन हमारे लिए एक नया कामों का भंडार तैयार होता है, लेकिन उसे करने के लिए समय तो सिमित ही है इसलिए हम कई चीज़ों को उतने अच्छे से नहीं कर पाते हैं जैसा की हम उसे करना चाहते हैं, इसके कारण हमारे अन्दर झुंझलाहट और निराशा आ जाती है. आपके साथ भी ऐसा रोज़ होता होगा? है ना? 

लेकिन ये सब मैनेज करना सीखने के लिए आपको पूरी ज़िन्दगी नहीं लगेगी, ना ही कोई स्पेशल प्रोसीजर बस इन लेसंस को पढ़िए या सुनिए और अपने बॉस खुद बन कर एक डीसिप्लिंड तरीके से अपने कामों को सही समय पर ख़तम करना सीखिए.

इससे आप ये भी जानोगे

- अपनी प्रोडक्टिविटी को 25% तक बढाने का एक तरीका

- किस काम को पहले करना चाहिए उसे समझने का तरीका

- कैसे आपका कुक आपको प्रोडक्टिविटी के लेसंस सीखा सकता है और इस मामले में आपका रोल मॉडल बन सकता है.

 

हर सफल प्रोजेक्ट के पीछे एक बेहतरीन प्लानिंग होती है
आईये हम शुरू से इस बात को इस उदहारण के जरिये समझते हैं, मान लीजिये कि आपके ऊपर कामो का पहाड़ है और आप किसी मीटिंग में जाते जाते ये सोच रहे है की इतना सबकुछ आप कैसे ख़तम करेंगे. तो ऐसे में सबसे पहली चीज़ है अपने गोल को अपने माइंड में क्लियर करना क्यूंकि ये प्रोडक्टिव होने का सबसे पहला कदम है. 

तो इन गोल्स को अपने दिमाग की जगह किसी नोटबुक या कहीं और लिख कर रखना ज्यादा अच्छा है ताकी आपका दिमाग उसी में ना उलझा रहे. लेखक कहते हैं कि जो भी व्यक्ति अपने गोल्स को लिख कर काम करता है वो बाकियों से 5-10% ज्यादा जल्दी और प्रोडक्टिव तरीके से अपना काम ख़तम कर लेते हैं, लेकिन लिखने के इतने फायेदे होने के बावजूद भी केवल 3% लोग ही इस तरीके को अपनी रोज़ मर्रा की ज़िन्दगी में इस्तेमाल करते हैं.

अपने गोल को क्लियर करने के बाद उसे पूरा करने के लिए जो भी काम आपको करने हैं उसे स्टेप बाय स्टेप लिख कर रखें और टाइम के हिसाब से उनकी प्लानिंग भी लिखें. हमेशा इस लिस्ट को चेक करते रहे और जो जो काम आप ख़तम करते जाएँ उन्हें निशान लगा दें ताकी जब भी आप उनको देखें तो आप खुद पर गर्व करें और अपनी सफलता से प्रेरित होकर बाकि बचे कामों को और जल्दी से ख़तम करें. ऐसा करने से आप अपनी प्रोडक्टिविटी को 25% तक बढ़ा सकते हैं क्यूंकि आपको अपने अगले कदम के बारे में सोच कर अपना टाइम नहीं वेस्ट करना पड़ेगा.

लेखक कहते हैं अगर आपको और अच्छे से अपना काम ख़तम करना है तो 80/20 रूल या परेटो प्रिंसिपल (Pareto Principle) का इस्तेमाल करना चाहिए इस प्रिंसिपल के अनुसार आप अपने हर काम को 10 छोटे कामों में बाट लें और इन 10 कामों में से 2 ऐसे काम हों जो बाकि 8 से ज्यादा जरुरी हैं. ऐसा इसलिए क्यूंकि अक्सर लोग आसान दिखने वाले कामों को पहले खत्म कर लेते हैं और जो ज्यादा जरुरी और कठिन काम होते हैं उन्हें टालते जाते हैं जिससे की बाद में उन्हें स्ट्रेस का सामना करना पड़ता हैं. तो इस मेथड से आप दोनो तरह के काम निपटा सकते हैं और अपनको काम का स्ट्रेस भी नहीं महसूस होगा. 

 

अपनी प्रायोरिटीज को चुनें और उनपर फोकस करें.
अब जब आपको ये पता चल गया है की आपको करना क्या है तो अपने हर काम को आप बेहतर तरीके से कर सकते हैं, मगर कैसे? इसका जवाब देते हुए लेखक ने कहा है कि अपने कार्यों को अरेंज करते समय हर एक्शन से पहले सोचें इसका क्या नतीजा होगा और इसे करने के बाद आप अपने फाइनल गोल के और कितने करीब पहुंचेंगे. लेखक कहते हैं की हार्वर्ड स्कूल में हुई एक रिसर्च में देखा गया है की जो लोग अपने हर एक्शन का नतीजा पहले से ही सोच के चलते हैं और अपने दीर्घकालीन लक्ष्य यानी लॉन्ग-टर्म गोल्स पर फोकस रखते हैं वो अपने हर प्रोजेक्ट को बेहतर तरीके से पूरा करते हैं.

लेखक ने अपने कामों को ABCDE फॉर्मेट में अर्रेंज करने की सलाह दी है, मतलब जो सबसे जरुरी और प्रायोरिटी वाले काम है उन्हें A लिस्ट में डालें जबकि जो कम कोई खास जरुरी नहीं हैं और आप उन्हें समय की कमी होने पर स्किप कर सकते हैं ऐसे कामों को लिस्ट E में डालें. उदहारण के तौर पर लिस्ट E में ऐसे काम आएंगे जैसे आपको अपने फेवरिट प्रोग्राम का बिहाइंड द सीन देखना हो, जबकि A लिस्ट का काम हो सकता है अपने रिज्यूम को अपडेट कर किसी नयी जॉब के लिए अप्लाई करना.

जब आप अपनी टू-डू लिस्ट को रिव्यु कर रहे होंगे तब A लिस्ट के काम जो की सबसे कठिन और जरुरी हैं वो आपके लिए किसी मेंढक के जैसे हैं तो लेखक कहते हैं इन मेंढकों को पहले खाएं मतलब इन्हें पहले करें. अपने A लिस्ट के कामों को पहले करना और तब तक न रुकना जब तक वो पुरे ना हो जायें यही सफलता की कुंजी है.

तो इसलिए अपने काम पर तब तक पूरा फोकस रखें जब तक वो ख़तम न हो जाये क्यूंकि अगर आपने रिज्यूम लिखने के बीच में फेसबुक चेक कर लिया तो जहाँ 1 घंटे में काम होना था वहां 2 घंटे लगेंगे और आपको उसे करने में और दिक्कत आएगी.

 

सफलता का रास्ता अपनी अन्दर की प्रतिभाओं और संभावनाओं की खोज से होकर निकलता है.
प्रोडक्टिव होने का मतलब बस प्लानिंग करना ही नही है बल्कि ये तो एक निरंतर चलने वाली प्रोसेस है जिसमें आप रोज़ कुछ नया सीखते हैं और इस बात की खोज करते हैं की आप अपने कामों को अधिक से अधिक बेहतरी से कैसे कर सकते हैं.

कुछ नया सीखने और अपने आपको एक्स्प्लोर करने के लिए आपको वैसा माहौल और एक सेल्फ स्पेस चाहिए जहाँ की आप एकांत में खुद से ही बात कर सकें और अपने अन्दर झांक सकें.

तो अगली सुबह जब आप अपने ऑफिस डेस्क पर पहुंचें तो सबसे पहले उसे साफ़ करें, क्यूंकि साफ़ जगह पर काम करने का मजा ही कुछ और है. फिर अगला स्टेप होगा की आप ये चेक करें की आपके इस्तेमाल में आने वाली सभी चीज़ें, इम्पोर्टेन्ट फाइल्स और डाक्यूमेंट्स आपकी डेस्क पर आपकी पहुँच में हों क्यूंकि अगर आपको खाना बनाना है तो पहले सामग्री तो तैयार होनी चाहिए ना. तीसरा जरुरी स्टेप है अपने क्षमता और स्किल्स को पहचानना क्यूंकि हर इंसान अपने आप में अलग होता है तो आप अपनी स्किल्स को पहचान कर उसके अनुसार अपने गोल्स और प्रोजेक्ट्स डीसाइड कर सकते हैं. क्यूंकि आपकी स्पेशल स्किल्स ही आपको दूसरों से अलग बनाती है जैसे की कोई व्यक्ति कंप्यूटर प्रोग्रामिंग में अच्छा होता हैं किसी को बहुत सी फॉरेन लैंग्वेज आती है, तो किसी को कुछ और . लेखक कहते हैं की अपनी स्किल्स को पहचानने के लिए आप खुद से ये सवाल पूछें की वो कौनसा काम है जो आप बहुत ही आसानी से कर लेते हैं और जो की दूसरों के लिए कठिन होता है और ऐसी कौनसी स्किल है जिसने आपको अभी तक जीवन में बहुत कुछ हासिल करने में मदद की है. एक बार आपको इन सवालों के जवाब मिल गए तो आप खुद के पोटेंशियल को और अच्छे से समझ सकते हैं.

अंत में लेखक कहते हैं की आखरी जरुरी बात ये है की अपने स्किल्स पर आप हमेशा काम करते रहें और उसे अधिक से अधिक निखारते रहें ताकी आप उसपे अपनी पकड़ को खो ना दें. अपनी स्किल्स को इमप्रूव करने से आप और अधिक प्रोडक्टिव हो जाएँगे.

 

सकारात्मक सोच और डिसिप्लिन के साथ आप और बेहतर परफॉर्म कर सकते हैं.
बिना ट्रेनिंग और डिसिप्लिन के आप जीवन में सफलता जैसी कोई चीज़ हासिल नहीं कर सकते, सुनने में ये किसी फिल्म का डायलाग जरुर लगता है लेकिन ये जीवन का एक बहुत बड़ा और जरुरी सच है.

ये बात कभी न भूलें की आपका शरीर आपकी सफलता का इंजन है, और किसी भी मशीन को अच्छे से चलाने के लिए उसकी प्रॉपर मेंटेनेंस जरुरी है. इसलिए अपना अच्छे से ख्याल रखें क्यूंकि जब आप शारीरिक और मानसिक तौर से स्वस्थ रहेंगे तो आप अपना काम और अच्छे से कर पाएंगे. इसलिए लेखक कहते हैं की अपने आपको बिना मतलब न थकाएं, क्यूंकि एक इंसान की काम करने की क्षमता 8 घंटे के लगातर काम के बाद अपने आप कम हो जाती है, ठीक वैसे ही जैसे की कोई मशीन लगातर काम करने के बाद गर्म हो जाती है. इसलिए जब आपने पर्याप्त आराम लिया होता है तो आपकी कार्यक्षमता अपने आप बढ़ जाती है. तो 8 घंटे की नींद लें सेहत से भरा खाना खाएं और स्ट्रेस फ्री रह कर अपने गोल को अचीव करने में जुट जाएँ.

और एक और जरुरी बात ये है की आप खुद ही अपने सपोटर बनें और अपने आपको सदा मोटीवेट करते रहे क्यूंकि हमारे 95% इमोशन इसी बात पे डिपेंड करते हैं की हम खुद के बारे में क्या सोचते हैं. इसलिए हमेशा पॉजिटिव रहे और हर सिचुएशन में कुछ न कुछ अच्छा ढूंढे. पॉजिटिव सोच आपको और अधिक कॉंफिडेंट और क्रिएटिव बनाती है. तो अगली बार जब भी आपको कोई चैलेंजिंग टास्क मिले तो खुद को ये याद दिलायें की आपके अन्दर इसको करने के स्किल्स हैं और आप ये कर सकते हैं. फिर कठिन से कठिन काम भी आपके लिए आसान हो जाएगा.

सेल्फ-डिसिप्लिन का दूसरा पहलु है क्रिएटिव प्रोक्रेस्टीनेशन (creative procrastination) को खुद से दूर रखना है, जिसका मतलब है की जान बुझ कर गैर जरुरी कामों को पहले करना. ज्यादातर व्यक्ति ऐसा इसलिए करते क्यूंकि कठिन कामों को करने से उन्हें डर लगता हैं इसलिए वो गैर जरुरी काम को पहले कर के जरुरी को टालते जाते हैं. इसके पिवरीत जो व्यक्ति समझदारी से अपना काम करते हैं वो जरुरी काम सबसे पहले करते है.

 

जो चीज़ आपको अपने काम में सफल होने से रोक रही है उससे मुँह मोड़ने की बजाय उस उसे पहचाने और उसका सामना करें.
सफलता की प्लानिंग करना उसे पाने से कहीं ज्यादा आसान है, क्यूंकि जब आप सफलता की राह पर निकलते हैं तब आपको पता चलता है की इसमें तो बहुत सी ऐसी रुकावटें थी तो आपने सोची भी नहीं थी. तो ऐसे में आप इन रुकावटों का सामना कैसे करें?

इन बाधाओं से निजात पाने के लिए सबसे पहले आप ये जानने की कोशिश करें कि वो कौनसी चीज़ है जो आपको अपने लक्ष्य तक पहुंचने से रोक रही है वो कुछ भी हो सकता है कोई इंसान, रिसोर्सेज की कमी, आपकी खुद के अन्दर कोई कमी और भी बहुत कुछ. पर ज्यादातर ऐसा होता है की हम अपने अन्दर की कमी का सामना न कर के बाहरी दुनिया को ही सारी परेशानियों का जिम्मेदार ठहराते हैं. जब भी हम किसी फेलियर का सामना करते हैं तो हम दूसरों को दोष देने का आसान रास्ता चुन लेते हैं. 

इसलिए अपने अन्दर के लिमिटिंग फैक्टर्स को नज़रंदाज़ ना करें हो सकता है की शुरुयात में आपके पास स्किल्स और एक्सपीरियंस की कमी हो इसलिए आप सफल नहीं हो पा रहे हों तो इस बात को स्वीकार करें. अपने अन्दर की कमियों को स्वीकार कर आप उन पर बेहतर तरीके से काम कर सकते हैं क्यूंकि बाहरी लिमिटेशन की बजाये हमारे अन्दर की लिमिटेशन का हमारी असफलता में ज्यादा हाथ होता है.

हो सकता है आपको किसी पॉइंट पर लगे की आपके अन्दर ऐसा बहुत कुछ है जिसे सुधर की जरुरत है तो एक-एक कर के उनपर काम करें. पहले अपनी एक कमी को दूर करें फिर अगली पर सुधार करना शुरू करें. ठीक वैसे ही जैसे आप फिटनेस ट्रेनिंग में धीरे धीरे कर के अपना स्टैमिना बढाते हुए एक्सरसाइजेज का लेवल भी बढाते जाते हैं इसी तरह ज़िदगी में भी धेरे धीरे अपनी सभी लिमिटेशन्स को दूर करते हुए आप अपना गोल अचीव कर सकते हैं.

लेखक ने अपने हर काम को बेहतर एफिशिएंसी से करने के लिए एक ट्रिक बताई है कि इमेजिन करें कि आपको कल ही एक सरप्राइज वेकेशन पर जाना है, तो आपको अपनी सारी तैयारियाँ आज और अभी ही करनी होगी वैसे ही आप अपने हर अर्जेंट काम को उसी सरप्राइज वेकेशन की तरह देखें और उसे बिना टाले आज और अभी ख़तम करें. अगर आप इस आदत को अपनी ज़िन्दगी में शुमार कर लेते हैं तो आप उन 2% लोगों में आ जायेंगे जिन्हें काम करने के लिए किसी सुपरविजन की जरुरत नहीं पड़ती, उन लोगों को हम लीडर्स कहते हैं.

 

अपने समय पर खुद ही कण्ट्रोल करना सीखें
सफलता पाने के लिए आखरी सबसे जरुरी बात है टाइम मैनेजमेंट, क्यूंकि जब आपके पास बहुत सारे इम्पोर्टेन्ट काम हों तो टाइम मैनेजमेंट की कला ही आपको इन्हें समय पर पूरा करने में सफलता दिला सकती है.

आप हर काम को छोटे छोटे टुकड़ों में नहीं बाँट सकते कई बार ऐसे जरुरी काम भी होते हैं जिन्हें आपको एक ही बार में पुरे ध्यान से ख़तम करना पड़ता है. जैसे की एक सेल्समेन को ही लें, कि उसे ऑफिस के काम के साथ साथ क्लाइंट्स को कॉल करके उनका फीडबैक लेना और नए ऑर्डर्स की लिस्ट बनाना ये सब एक साथ करना पड़ता है और सारे काम उसके लिए एक जैसा महत्व रखते हैं.

इसलिए ये जरूरी है की आप अपना टाइम टेबल खुद बनाएं अपने सारे जरुरी अपॉइंटमेंट्स और कामों का समय आप खुद तय करें, ताकि आपके पुरे दिन का मैप आपके आँखों के सामने तैयार हो.

अपने पुरे दिन को स्लॉट्स में बाँट लें जैसे की 6-9, 9-12, 12-3 और सुबह का टाइम उन कामों के लिए रखें जो आप खुद कर सकते हैं जैसे अपने ई-मेल्स पढ़ना अपना कोई डॉक्यूमेंट बनाना और जिन कामों में आपको अपने सबओर्डीनेट्स की हेल्प चाहिए उसे ऑफिस के लिए छोड़ दें.

प्लानिंग बहुत जरुरी है लेकिन इसका ये मतलब नहीं की आप अपना आधा दिन बस प्लानिंग में ही बर्बाद कर दें, मोटे मोटे तौर पर चीज़ें प्लान करें और फिर खुद को काम के फ्लो के साथ चलने दें. जब भी आप एक फ्लो के साथ काम करते हैं आपका दिमाग खुद ब खुद ही आपको आगे बढ़ते रहने के लिए आइडियाज और मोटिवेशन देता रहता है. इसलिए फ्लो में काम करने से आपकी एफिशिएंसी बढ़ जाती है.

इसलिए फ्लो में रहकर काम करें और हर जरुरी काम को पहले ख़तम करें जब आप पुरे डेडीकेशन से सही रस्ते पर लगातार चलते रहेंगे तो खुद ही आप अपनी लिमिट्स और सभी बाधाओं को पार कर अपने गोल को अचीव कर लेंगे.

 

कुल मिला कर
अपने अन्दर के प्रोक्रासटीनेशन (procrastination) मतलब हर काम को टालने की अदात को हराने के लिए सबसे पहले आप ये पहचाने की आप कौन हैं, क्या चाहते हैं, आपकी ताकत क्या है और आपकी कमजोरियाँ क्या हैं. इन सब पहलुओं को ध्यान में रख कर अपने हर जरुरी काम को सबसे पहले ख़तम करें क्यूंकि एक बार अपने इन्हें पूरा कर लिया तो आगे का रास्ता खुद ही आसान हो जाएगा.

हमेशा अपने कामों को टू-डू लिस्ट में अरेंज कर के रखें क्यूंकि जो लोग लिस्ट के अनुसार काम करते हैं वो बाकियों के मुकाबले ज्यादा बेहतर तरीके से काम कर सकते हैं. ये लिस्ट ना सिर्फ आपको सही ट्रैक पर रखती है बल्कि जब आप दिन के अंत में इसकी ओर देखते हैं तो आपको संतुष्टि भी महसूस होती है.

 


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