Dangerously Sleepy

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Dangerously Sleepy

Alan Derickson
ज्यादा काम करने वाले अमेरिकी और जागते रहने का रिवाज़।

दो लफ्जों में 
डेंजरसली स्लीपि (Dangerously Sleepy) में हम देखेंगे कि सोने और काम करने को लेकर कामयाब लोगों का क्या कहना है। यह किताब हमें बताती है कि किस तरह से बहुत से कामयाब लोग हमेशा से ही सोने के खिलाफ रहे हैं। साथ ही यह किताब हमें बताती है कि कम सोने से कि तरह से कुछ लोग बहुत बड़ी गलतियां कर देते हैं जिसके नतीजे दूसरों को भुगतने पड़ते हैं।

यह किसके लिए है 
-वे जो कम सोने में यकीन करते हैं। 
-वे जो कम सोने के नुकसान के बारे में जानना चाहते हैं।
-वे जो यह जानना चाहते हैं कि कामयाब लोगों का सोने के बारे में क्या कहना है।

लेखक के बारे में 
एलन डेरिक्सन ( Alan Derickson ) अमेरिका के एक लेखक और पेनिसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर हैं। वे कर्मचारियों और मजदूरों के इतिहास के जानकार हैं। वे कर्मचारियों और मजदूरों के हो रहे शोषण के खिलाफ लिखते हैं। वे अपनी किताब ब्लैक लंग के लिए जाने जाते हैं।

यह किताब आपको क्यों पढ़नी चाहिए
आज के वक्त में एक आम व्यक्ति 8 घंटे काम करता है। आज कोई भी हमसे ज्यादा काम नहीं करवा सकता। कुछ कामयाब लोग कहते हैं कि हमें सोना कम कर देना चाहिए और ज्यादा से ज्यादा काम करना चाहिए और वे यह बात हमेशा से कहते आए हैं। लेकिन क्या आपने सोचा है कि अगर समाज के कुछ लोग जैसे डाक्टर, अगर सोना कम कर दें तो उसके नतीजे क्या हो सकते हैं?

यह किताब हमें बताती है कि इतिहास के कुछ सबसे कामयाब लोगों का सोने के बारे में क्या कहना है। यह किताब हमें बताती है कि थामस अल्वा एडिसन और डोनाल्ड ट्रंप जैसे लोग कम सोने को अपनी कामयाबी का राज़ क्यों बताते हैं। साथ ही,यह किताब बताती है कि किस तरह से कर्मचारियों के काम के समय को कम करने के लिए कुछ जरूरी कदम उठाए गए। 

 

-थामस अल्वा एडिसन का सोने के बारे में क्या कहना था।

-डोनाल्ड ट्रंप की कामयाबी का राज क्या है।

-कर्मचारियों के काम करने के समय को कम करने के लिए कौन कौन से कदम उठाए गए।

बेंजामिन फ्रैंक्लिन पहले ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने सोने से संबंधित गलत सलाह को लोगों में फैलाना शुरू किया।
अपने शुरुआती दिनों में बेंजामिन फ्रैंक्लिन ने ही रात में जल्दी सोने की और सुबह जल्दी उठने की सलाह लोगों को दी थी। वे खुद हर रोज नियम से रात को 10 बजे सोने चले जाते थे और सुबह 5 बजे उठ जाते थे। एक नेता बनने से पहले वे एक लेखक और एक इंवेंटर हुआ करते थे जिन्होंने 1735 में अपने एक आर्टिकल में लोगों को सुबह देर से उठने के नुकसान के बारे में बताया था। उन्होंने लोगों को बताया था कि अगर वे देर से उठेंगे तो चाहे वे कितनी भी कोशिश कर लें, वे अपने हर दिन के काम को पूरा नहीं कर पाएंगे।

शुरुआत में सब कुछ अच्छा चल रहा था। लेकिन जैसे जैसे उनकी उम्र बीतती गई, वे लोगों को कम सोने की सलाह देने लगे। उन्होंने खुद सोना कम कर दिया। 1740 के दशक में उन्होंने अपने पेन नेम पूअर रिचर्ड के नाम से लोगों को कम सोने की सलाह देनी शुरू कर दी।

उन्होंने कहा कि लोग सोकर अपना समय और अपनी जिन्दगी बरबाद कर रहे हैं। वे लोगों से कहने लगे कि जब वे मर जाएंगे तो सोएंगे। उन्होंने कहा कि जब वे मर जाएंगे तो उन्हें सोने के लिए बहुत समय मिलेगा। लेकिन वे लोगों को यह बताना भूल गए कि अगर वे नहीं सोएंगे तो वे समय से पहले मर जाएंगे।

बेंजामिन फ्रैंक्लिन जॅान कैल्विन नाम के एक व्यक्ति की बहुत इज्जत करते थे। कैल्विन पहले विद्रोही थे जो कि अपने ना सोने को लिए जाने जाते थे। उनकी मौत 55 साल की उम्र में हो गई थी। फ्रैंक्लिन ने उनकी कम उम्र में मौत हो जाने पर कहा कि वे असल में बाकी लोगों स ज्यादा जिन्दा रहे क्योंकि उन्होंने अपनी जिन्दगी सोने में नहीं बिताई। उन्होंने अपना पूरा समय काम करने में बिताया जिनसे वे एक आम व्यक्ति से ज्यादा समय तक जिन्दा रहे।

इस तरह से लोगों को एक महान व्यक्ति से यह सलाह मिली कि सोना बुरी बात है और हमें कम सोकर ज्यादा काम करना चाहिए।

थामस अल्वा एडिसन ने भी अपने काम के जरिए लोगों को कम सोने की सलाह दी।
सिर्फ बेंजामिन फ्रैंक्लिन ही नहीं बल्कि कुछ दूसरे महान लोग भी सोने के खिलाफ थे। थामस अल्वा एडिसन ने जब बल्ब का आविष्कार किया, तो इससे वे रात में ज्यादा काम करने के आइडिया को लोगों के बीच लेकर आए। उनकी वजह से बहुत से लोग आज कम सोने पर यकीन करते हैं। 

एडिसन ने जब बल्ब का आविष्कार किया, तो उन्होंने लोगों को रात में भी काम करने का मौका दिया। वे अपने कर्मचारियों को भी कम से कम सोने के लिए कहते थे। यहाँ तक कि वे उसी कर्मचारी को काम पर रखते थे जो कि लम्बे समय तक जाग कर काम कर सके। इसी मेहनत के चलते वे अमेरिका में हर जगह बिजली पहुंचा पाए थे। 

क्योंकि एडिसन बहुत कामयाब थे, अखबारों में उनकी कही गई बातें अक्सर छपा करती थी। वे सिर्फ 2 से 3 घंटे आराम किया करते थे। इस तरह से लोग उनसे प्रेरणा लेकर अपने सोने को कम करने लगे। एडिसन का कहना था कि हम सोकर अपना समय बरबाद करते हैं।

1885 में साराह बोल्टन नाम की एक कवित्री और एक्टिविस्ट ने एक आर्टिकल निकाला जिसका नाम था - हाउ सक्सेस इज़ वान। इसमें उन्होंने एडिसन के बारे में लिखा था कि एक बार वे लगातार 60 घंटे तक काम करते रहे थे। यह उनका खुद का रिकार्ड था। उन दिनों वे एक दिन में लगभग 18 घंटे काम किया करते थे।

चार्ल्स लिंडबर्ग ने 33 घंटे बिना सोए प्लेन उड़ाकर एक नया रिकॉर्ड बनाया।
अब तक हमने देखा कि किस तरह से कुछ लोग सोना कम कर के काम करने की बात करते हैं। लेकिन कुछ ऐसे भी लोग थे जो कि ना सोकर कुछ एडवेंचर का काम करने की कोशिश करते थे। इनमें से एक थे चार्ल्स लिंडबर्ग, जिन्होंने फैसला किया कि वे एटलांटिक ओशियन को अकेले प्लेन से पार करेंगे।

लिंडबर्ग न्यूयॉर्क से पैरिस तक प्लेन से उड़ने की बात कर रहे थे जो कि 3,600 मील दूर है। उनसे पहले किसी ने भी इतनी लम्बी उड़ान भरने की कोशिश नहीं की थी। इसमें वे प्लेन में अकेले बैठकर लगातार 33 घंटे तक उड़ान भरने वाले थे और वे अपने साथ मदद के लिए कोई भी सामान नहीं ले जा रहे थे। इसका मतलब अगर गलती से भी उन्होंने झपकी ली तो उनका प्लेन सीधा क्रैश कर जाएगा।

खबरों में यह बात बहुत तेजी से फैल गई। 20 मई, 1927 की सुबह को उन्होंने उड़ान भरी। खबरों का कहना था कि वे उड़ान भरने से पहले भी सिर्फ 2 या 3 घंटे सो पाए थे। 

लेकिन लिंडबर्ग ने यह कारनामा कर दिखाया। 21 मई की शाम को वे पैरिस में सुरक्षित उतर गए थे। वे अपने सफर से थके हुए थे, लेकिन उसे छिपाने लिए उन्होंने कहा कि उन्हें इस सफर में कोई भी परेशानी नहीं हुई। अपने ना सोने के रिकॉर्ड को लेकर लिंडबर्ग आज भी फेमस हैं।

1980 के दशक में बहुत से कामयाब बिजनेसमैन और लेखकों ने कम सोने की फिलासफी को बढ़ावा दिया।
1980 के दशक में टेक्नोलॉजी बहुत तेजी से विकास कर रही थी और बहुत सी कंपनियां उभर कर सामने आ रही थी। ऐसे में लोगों को ज्यादा समय तक काम करने की जरूरत पड़ने लगी। इस ट्रेंड को बढ़ावा देने के लिए बहुत से लेखक और न्यूज़ पेपर्स ने कम सोने के फायदों के बारे में बताना शुरू किया। 

बहुत से साइकोलाजिस्ट भी कम सोने के फायदों के बारे में बताने लगे। बहुत से न्यूज़ पेपर्स इस ट्रेंड को बढ़ाने के लिए उस रीसर्च पर ध्यान देने लगे जो कम सोने के फायदों के बारे में बताते हैं।1979 में एवरेट मैटलिन ने अपनी किताब स्लीप लेस, लिव मोर में 8 घंटे से कम सोने के फायदे के बारे में बताया। उन्होंने इसे साबित करने के लिए बहुत सी स्टडीज़ के बारे में बताया।

इसके बाद 1981 में अर्नेस्ट हार्टमैन नाम के साइकोलाजिस्ट ने अपनी स्टडीज़ के बारे में बताया जिससे उन्होंने यह साबित किया कि एक व्यक्ति को 6 घंटे ज्यादा सोने की जरूरत नहीं है। उनका कहना था कि कम सोने वालों के अंदर ज्यादा एनर्जी होती है, वे ज्यादा काबिल और ज्यादा कामयाब होते हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह से वजन कम करने के लिए हमें अपने डाइट को बदलने की जरूरत होती है, उसी तरह से हमें कामयाब होने के लिए अपने सोने की आदतों को बदलना होगा।

1980 के दशक में बहुत से बिजनेसमैन भी अपने कम सोने की आदतों की वजह से काफी खबरों में आने लगे। इनमें से एक थे वालमार्ट के फाउंडर सैम वाल्टन। वे हर शनिवार की सुबह 7 बजे अपनी स्टाफ मीटिंग को शुरू करते थे और रात को 2 बजे उठते थे। इस बीच में वे अपने हर स्टोर के सेल्स को देखा करते थे।

उनकी इस आदत के बारे में टाम पीटर्स ने अपनी किताब इन सर्च आफ एक्सेलेंस में बताया है। वाल्टन रात को 2 बजे अपने कर्मचारियों को चौंकाने के लिए उनके लिए डोनट्स लेकर जाते थे। उनका हर दिन सुबह 6 बजे से शुरू होता था और रात को 12 बजे तक चलता था। उनका कहना था कि एक व्यक्ति को एक हफ्ते में 90 घंटे से ज्यादा काम करना चाहिए। बहुत से लोग उनकी इस सलाह को अपनाने भी लगे।

डोनाल्ड ट्रंप और कुछ दूसरे स्पोर्ट लीडर्स ने 21वीं सदी के लोगों को कम सोने की सलाह दी।
अमेरिका के प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप प्रेसिडेंट बनने से पहले एक रीअल एस्टेट इंवेस्टर थे जो कि अपने काम में बहुत कामयाब थे। वे अपनी खुद की इमेज को हमेशा बनाए रखने की कोशिश करते थे। 1980 के दशक में वे कामयाब व्यक्ति की तरह उभर कर सामने आए और उन्होंने अपनी हर किताब में कम सोकर ज्यादा काम करने के लिए कहा है।

अपनी पहली बेस्ट सेलिंग किताब ट्रंप : द आर्ट ऑफ द डील में ट्रंप ने कहा कि उनकी कामयाबी का राज़ है ज्यादा से ज्यादा काम करना और कम से कम सोना। उन्होंने कहा कि अगर आप अपने काम्पटीटर से दो घंटा पहले उठेंगे और रात में उसके बाद सोने जाएंगे तो आप कामयाब हो जाएंगे।

इसके बाद उन्होंने 2004 में एक और किताब लिखी जिसका नाम था ट्रंप : थिंक लाइक अ बिलियनेयर। उसमें उन्होंने बताया कि वे सिर्फ 4 घंटे सोते हैं और उन्होंने लोगों से भी कि कहा कि वे भी कम से कम सोएँ। सिर्फ वे ही नहीं, बल्कि बहुत से स्पोर्ट्स लीडर्स भी कम सोने की सलाह लोगों को देते हैं। 

जार्ज हैलास अपने ना सोने की पर्सनैलिटी के लिए जाने जाते थे। 60 सालों तक वे हर दिन 16 घंटे काम किया करते थे। 1983 में उनकी मौत हो गई। उनसे प्रभावित होकर उनके असिस्टेंट जार्ज ऐलन ने उनकी तरह काम करना शुरू कर दिया। वे अपने आफिस में ही सो जाया करते थे ताकि उन्हें हर रोज आने जाने में समय ना बरबाद करना पड़े।

काम के समय को सीमित करने के लिए बहुत से कोर्ट केस किए गए लेकिन उनका कुछ खास फायदा नहीं हुआ।
अब आप सोच रहे होंगे कि क्या हर कोई कम सोने और ज्यादा काम करने की सलाह को मान ले रहा था? क्या कोई इसका विरोध नहीं कर रहा था? 

बहुत से लोग थे जो काम के समय को सीमित करने के लिए कोर्ट में केस कर रहे थे। इनमें से एक केस काम नाम था लोचनर वर्सेस न्यूयॉर्क। इस केस में बेकर्स के काम की दशा को सुधारने की माँग की गई थी। वे अंधेरी ठंडी जगहों में काम करते थे जहां पर सूरज की रोशनी ना के बराबर पहुँचती थी। बहुत से लोगों की सेहत इससे खराब हो रही थी। इसपर न्यूयॉर्क ने एक बिल पास किया जिसमें यह नियम लागू हुआ कि कोई भी व्यक्ति अपने कर्मचारियों से एक दिन में 10 घंटे और हफ्ते में 60 घंटे से ज्यादा काम नहीं करवा सकता। लेकिन कर्मचारियों को मिली यह राहत भी बहुत कम समय तक रही।

जान लोचनर नाम के व्यक्ति को इस नियम से बहुत परेशानी होने लगी। उसने कोर्ट में फिर से एक केस किया। दूसरी बार कोर्ट ने लोचनर के पक्ष में अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि एक कर्मचारी कितना काम करेगा यह उसके और उसके एम्प्लायर के बीच काम मामला है।

इसके बाद 1908 में ओरेगन की महिलाओं ने सुप्रीम कोर्ट में फिर से केस किया। उनका मकसद था महिलाओं के काम करने के समय को कम करवाना। इस बार उनकी वकील थी लुइस ब्रांडेइस, जो कि बाद में खुद सुप्रीम कोर्ट की जज बनी। 

लुइस ने कहा कि ज्यादा काम करने की वजह से महिलाओं के बच्चे पैदा करने की काबिलियत पर असर पड़ रहा है। आज यह तर्क बिल्कुल बेबुनियाद लगता है, लेकिन उस समय के लोगों ने इस बात पर यकीन किया। इस तरह से महिलाओं के काम करने के समय को कम कर दिया गया।

समय के साथ अस्पताल के कर्मचारियों के काम के समय को कम करने के लिए कदम उठाए गए।
डाक्टर्स वो होते हैं जिनका होश में होना बहुत जरूरी है। अगर वे अपने काम पर ध्यान नहीं दे पाएंगे, तो लोगों की जान जा सकती है। 1984 में कुछ ऐसा ही हुआ लिब्बि जियान के साथ, जो कि 18 साल की लड़की थी और उसमें फ्लू के लक्षण दिखाई दे रहे थे।

लिब्बि को अस्पताल में भरती करने के कुछ ही समय के बाद यह खबर आई कि वो मर गई है। उसके रिपोर्ट साफ नहीं थे लेकिन उसकी मौत डाक्टर की लापरवाही से हुई थी। उसे गलती से ट्रांक्विलाइज़र दे दिया गया था जो कि एंटी-डिप्रेसैंटसे रिएक्ट कर गया और उसकी मौत की वजह बन गया।

उसे जिस डाक्टर की निगरानी में रखा गया था वो एक हफ्ते में 100 घंटे से ज्यादा काम कर रहा था और हफ्ते में 3 बार रात में ड्यूटी कर रहा था। लिब्बि की हालत खराब हो रही थी और डाक्टर दूसरे मरीज़ों को देखने में व्यस्त था। उसी बीच उसने नर्स से कहा कि वे उसे ट्रांक्विलाइज़र दे दे। इसके कुछ देर के बाद उसकी मौत हो गई। 

लिब्बि के पिता ने अस्पताल पर केस कर दिया। लेकिन इससे उस डाक्टर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई, बल्कि कोर्ट ने फैसला किया कि डाक्टरों के काम करने के समय को कम कर दिया जाए। 

इसके एक साल के बाद फिजीशियन बर्टरैंड बेल ने एक कमेटी बैठाई और यह फैसला सुनाया कि अस्पताल में काम करने वाला कोई भी कर्मचारी एक हफ्ते में 80 घंटे से ज्यादा काम नहीं कर सकता और एक बार में 24 घंटे से ज्यादा काम नहीं कर सकता। 

इसके बाद से हालात पहले से बेहतर हो गए, लेकिन आज भी बहुत से लोग कम सोकर ज्यादा काम कर रहे हैं जिससे उनके काम पर असर पड़ रहा है।

कुल मिलाकर
बेंजामिन फ्रैंक्लिन से लेकर डोनाल्ड ट्रंप तक, बहुत से कामयाब लोग कम सोने और ज्यादा काम करने की सलाह लोगों को देते आए हैं। उनका मानना है कि सोना समय की बरबादी है। बहुत से रीसर्चर्स ने अपने रीसर्च की मदद से इस बात को साबित करने की कोशिश भी की। लेकिन कम सोने के नुकसान कम सोने के फायदों से बहुत ज्यादा हैं। इसलिए हमें अपनी जरूरत के हिसाब से नींद लेना चाहिए।

 

अपने लिए सोने का एक प्लान बनाइए।

अगर आप एक दिन में 6 घंटे से कम सोते हैं तो इसका आपकी सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए अपने व्यस्त दिन में से कम से कम 6 घंटे निकाल कर उसे सोने को दे दीजिए। आराम कर लेने के बाद आप अपने काम को ज्यादा अच्छे से कर पाएंगे।


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